JSSC CGL घोटाला: अभय तिवारी की रिमांड बढ़ी, पत्नी-भाई जेल में

ALN NEWS DESK
एएलएन न्यूज डेस्क
अपडेटेड : Aug 26, 2026, 11:41 AM IST
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JSSC CGL पेपर लीक मामले में TDPL मार्केटिंग मैनेजर अभय तिवारी की रिमांड 3 दिन बढ़ी। पत्नी-भाई न्यायिक हिरासत में भेजे गए। 60 से अधिक संदिग्धों से पूछताछ जारी।

JSSC CGL Scam: टीडीपीएल के मार्केटिंग मैनेजर अभय तिवारी से पूछताछ के लिए सीआईडी ने उसकी रिमांड अवधि तीन दिन और बढ़ा दी है। वहीं, उसकी पत्नी सुषमा कुमारी और भाई अक्षय तिवारी से पूछताछ पूरी करने के बाद दोनों को न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया। यह मामला झारखंड कर्मचारी चयन आयोग (JSSC) द्वारा आयोजित संयुक्त स्नातक स्तरीय परीक्षा (CGL) में हुए पेपर लीक से संबंधित है, जो कि राज्य में एक बड़े घोटाले के रूप में उभरा है।

60 से अधिक संदिग्धों से हो चुकी है पूछताछ

जेएसएससी सीजीएल पेपर लीक मामले की जांच के लिए एसटीएफ के आईजी अनूप बिरथरे की अध्यक्षता में गठित एसआईटी लगातार आरोपियों और संदिग्धों से पूछताछ कर रही है। अब तक 60 से अधिक संदिग्धों के बयान दर्ज किये जा चुके हैं। इस घोटाले की जड़ें गहरी हैं, और इसमें कई लोग शामिल हो सकते हैं। इसी क्रम में अभय तिवारी से भी लगातार पूछताछ की जा रही है। पूछताछ के दौरान अभय तिवारी ने पूर्व में बताया था कि 12-12 लाख रुपए देकर पेपर लीक कराया गया था। उसने यह भी बताया था कि बोकारो में अभ्यर्थियों को प्रश्न और उत्तर रटवाये गए थे और वह खुद भी इस प्रक्रिया में सफल हुआ था।

इस प्रकार की जानकारी से यह स्पष्ट होता है कि परीक्षा में पारदर्शिता और निष्पक्षता को गंभीर खतरा है। पेपर लीक की घटनाएँ न केवल परीक्षार्थियों के भविष्य को प्रभावित करती हैं, बल्कि यह सरकारी संस्थानों की विश्वसनीयता पर भी सवाल उठाती हैं। इस घोटाले के कारण कई छात्रों का भविष्य अधर में लटक गया है, और इससे समाज में एक नकारात्मक संदेश गया है।

वेबेल के मालिक की तलाश

मामले में जेएसएससी सीजीएल परीक्षा के संचालन की जिम्मेदारी संभालने वाली एजेंसी वेबेल पर पेपर लीक कराने का आरोप है। सीआईडी को एजेंसी के मालिक मिथिलेश सिंह की तलाश है। जांच एजेंसी उससे पूछताछ करना चाहती है। मिथिलेश सिंह की गिरफ्तारी या पूछताछ से इस मामले में कई महत्वपूर्ण जानकारियाँ सामने आ सकती हैं, जो कि पूरे घोटाले के पीछे के नेटवर्क को उजागर कर सकती हैं।

वेबेल जैसी एजेंसियों की भूमिका पर भी सवाल उठने लगे हैं, जो इस प्रकार की परीक्षाओं का संचालन करती हैं। यदि वे सही तरीके से कार्य नहीं कर रही हैं, तो यह केवल एक घोटाले का कारण नहीं बनता, बल्कि यह अन्य परीक्षाओं के संचालन में भी समस्याएँ पैदा कर सकता है।

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पूर्व JPSC अध्यक्ष समेत 5 की जमानत पर 2 सितंबर को सुनवाई

इधर, 14वें जेपीएससी फर्जीवाड़ा मामले में पूर्व जेपीएससी अध्यक्ष एल खियांग्ते समेत पांच आरोपियों की जमानत याचिका पर मंगलवार को सुनवाई हुई। अपर न्याययुक्त योगेश कुमार की अदालत ने सुनवाई के बाद मामले की अगली सुनवाई के लिए 2 सितंबर की तारीख निर्धारित की है। सुनवाई के दौरान सीआईडी ने अदालत में केस डायरी भी प्रस्तुत की।

जमानत याचिका दाखिल करने वालों में पूर्व जेपीएससी अध्यक्ष एल खियांग्ते, अभय कुमार तिवारी, श्वेता गुप्ता, सुमन सौरव और उमेश कुमार शामिल हैं। गौरतलब है कि सीआईडी ने 10 अगस्त को एल खियांग्ते को गिरफ्तार किया था, जबकि अभय कुमार तिवारी को 22 जुलाई को गोड्डा से गिरफ्तार किया गया था। अभय ब्लैकलिस्टेड कंपनी टीडीपीएल का मार्केटिंग मैनेजर था। वहीं, श्वेता गुप्ता जेपीएससी में परीक्षा नियंत्रक के पद पर कार्यरत थीं।

इस मामले में जमानत याचिकाओं की सुनवाई से यह स्पष्ट होगा कि न्यायालय इस घोटाले को गंभीरता से ले रहा है या नहीं। जमानत मिलना आरोपियों के लिए एक राहत हो सकती है, लेकिन इससे यह भी संकेत मिलता है कि मामले में सबूतों की स्थिति क्या है।

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इस घोटाले की जांच और उसके परिणाम झारखंड में सरकारी परीक्षाओं की प्रक्रिया में सुधार की आवश्यकता की ओर भी इशारा करते हैं। यदि इस प्रकार की घटनाएँ जारी रहती हैं, तो यह न केवल छात्रों के लिए बल्कि पूरे समाज के लिए गंभीर परिणाम हो सकते हैं। शिक्षा प्रणाली की विश्वसनीयता को बनाए रखने के लिए, यह आवश्यक है कि सरकार और संबंधित एजेंसियाँ इस मुद्दे पर गंभीरता से ध्यान दें और ठोस कदम उठाएँ।

झारखंड में सरकारी नौकरी के लिए प्रतियोगी परीक्षाओं का आयोजन एक महत्वपूर्ण प्रक्रिया है, और यह युवाओं के लिए अवसर प्रदान करता है। लेकिन जब इस प्रक्रिया में भ्रष्टाचार और अनियमितताएँ शामिल होती हैं, तो यह न केवल उन युवाओं के भविष्य को प्रभावित करता है, बल्कि यह पूरे समाज की नैतिकता और विश्वास को भी कमजोर करता है।

इस घोटाले ने झारखंड के शिक्षा और रोजगार के क्षेत्र में बड़े सवाल उठाए हैं। यह स्पष्ट है कि यदि सरकारी संस्थाएँ और परीक्षा संचालक सही तरीके से कार्य नहीं कर रहे हैं, तो इससे न केवल एक घोटाले का निर्माण होता है, बल्कि यह सरकारी नीति और कार्यक्रमों की विश्वसनीयता को भी प्रभावित करता है।

इस मामले की गहन जांच और उचित कार्रवाई से यह उम्मीद की जा सकती है कि भविष्य में ऐसी घटनाएँ कम होंगी। इसके लिए एक मजबूत और पारदर्शी परीक्षा प्रणाली की आवश्यकता है, जो कि सभी उम्मीदवारों के लिए समान अवसर प्रदान करे।

अंततः, झारखंड में इस घोटाले के परिणामस्वरूप शिक्षा प्रणाली में सुधार की आवश्यकता को रेखांकित किया गया है। यह सुनिश्चित करना आवश्यक है कि सभी प्रतियोगी परीक्षाएँ निष्पक्ष, पारदर्शी और भ्रष्टाचार मुक्त हों, ताकि युवा पीढ़ी को एक बेहतर भविष्य दिया जा सके।

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