कटनी में निलंबित सीएसपी नेहा पच्चीसिया के खिलाफ एफआईआर दर्ज होने के बाद उनके कार्यालय को सील कर दिया गया, जो प्रदेश में पहला मामला है।
रायपुर, भारत 27 अग॰ 2026 ALN: नईदुनिया प्रतिनिधि, कटनी। कटनी में पुलिस महकमे के इतिहास में एक ऐसा घटनाक्रम सामने आया है, जिसने पूरे प्रदेश का ध्यान खींच लिया है। गंभीर आरोपों में घिरीं निलंबित सीएसपी नेहा पच्चीसिया के खिलाफ एफआईआर दर्ज होने के बाद पुलिस ने उनके कार्यालय पर ही ताला नहीं, बल्कि बाकायदा सील लगा दी। यह प्रदेश में पुलिस अधिकारी के कार्यालय को सील करने का पहला मामला माना जा रहा है।
इस घटना ने न केवल कटनी बल्कि पूरे मध्य प्रदेश में पुलिस महकमे की कार्यप्रणाली और भ्रष्टाचार के मुद्दे पर गंभीर सवाल उठाए हैं। जब एक पुलिस अधिकारी के कार्यालय को सील किया जाता है, तो यह संकेत करता है कि मामला कितना गंभीर है। कटनी के इस घटनाक्रम ने न केवल स्थानीय जनता के बीच बल्कि राजनीतिक गलियारों में भी हलचल मचा दी है।
छह दिन से सील कार्यालय अब एसआइटी की जांच के केंद्र में है। बुधवार को आईजी जबलपुर की जांच के लिए एएसपी अंजना तिवारी की अगुवाई में गठित एसआईटी के सील खोलकर दस्तावेजों और रिकॉर्ड की पड़ताल करने की संभावना थी, लेकिन देर शाम तक टीम नहीं पहुंची। यह देरी ऐसे समय में हुई है जब मामले की गंभीरता को देखते हुए तात्कालिक कार्रवाई की आवश्यकता थी। पूरे मामले में एक सवाल भी उठ रहा है।
सीएसपी सहित अन्य आरोपितों के खिलाफ दर्ज एफआईआर करने के बाद अभी तक उनमें से किसी की भी गिरफ्तारी एसआईटी या कुठला पुलिस नहीं कर पाई है, जबकि मामले को एक सप्ताह का समय बीत गया है। यह देरी पुलिस की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़ा करती है। क्या पुलिस वास्तव में जांच में गंभीर है या फिर किसी प्रकार का दबाव है जो कार्रवाई में बाधा डाल रहा है? ऐसे सवाल स्थानीय जनता के बीच चर्चा का विषय बने हुए हैं।
कटनी के बहुचर्चित जमीन सौदे से जुड़े मामले में अभी तक एएसपी स्तर के तीन अधिकारी जांच से जुड़ चुके हैं। कुठला थाना क्षेत्र में रमेश लोधी व उसके बेटे को हत्या के मामले से बचाने करोड़ों की जमीन को सस्ते में अपने करीबी को दिलाने, डिफाल्ट बेल दिलाने में सहयोग करने सहित भ्रष्टाचार के आरोप निलंबित सीएसपी सहित उनके सहयोगी क्षितिज राज व मारूफ अहमद हनफी पर हैं। यह संदर्भ केवल एक जमीन सौदे का नहीं है बल्कि यह स्थानीय पुलिस और राजनीतिक संरचना के बीच के जटिल रिश्तों को भी उजागर करता है।
मामले की गंभीरता को देखते हुए आइजी प्रमोद वर्मा ने जांच जबलपुर स्थानांतरित करते हुए एएसपी अनु बेनीवाल को जांच सौंपी थी। बेनीवाल की जांच रिपोर्ट के आधार पर कुठला थाने में तत्कालीन सीएसपी नेहा पच्चीसिया, उनके करीबी क्षितिज राज बारापात्रे और कांग्रेस नेता मारूफ अहमद हनफी के खिलाफ एफआईआर दर्ज की गई। यह दर्शाता है कि उच्च स्तर पर भी मामले की गंभीरता को समझा गया है और प्रभावी कार्रवाई की गई है।
विवेचना के दौरान सामने आए तथ्यों और बयानों के आधार पर पुलिस ने मामले में भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की धाराएं बढ़ाई हैं। अब मामले की जांच एएसपी अंजना तिवारी को सौंपी गई है और उनकी निगरानी में आठ सदस्यीय एसआइटी गठित की गई है, जो पूरे मामले की जांच कर रही है। यह एसआईटी न केवल स्थानीय स्तर पर बल्कि राष्ट्रीय स्तर पर भी इस मामले की गंभीरता को उजागर करने का कार्य कर रही है।
मामले की जांच को लेकर गठित की गई एसआइटी एक करोड़ से अधिक की जमीन को महज 18 लाख रूपये में खरीदने, हत्या के आरोपितों को जमानत का लाभ दिलाने सहित रिश्वत मामले की जांच कर रही है। टीम का फोकस इस बात पर है कि कथित जमीन सौदे में किसकी भूमिका क्या रही है। यह जांच स्थानीय प्रशासन और पुलिस की पारदर्शिता पर भी सवाल उठाती है।
टीम रकम का लेन-देन, जमीन के नामांतरण रिकॉर्ड, रजिस्ट्री, भुगतान से जुड़े दस्तावेज, सीसीटीवी फुटेज, इलेक्ट्रानिक रिकॉर्ड और आरोपों से जुड़े लोगों के बयानों का मिलान कर रही है। इसके लिए टीम ने जेल में बंद हत्या के आरोपितों से न्यायालय की अनुमति लेकर पूछताछ भी की है और उनके बयान दर्ज किए हैं। यह प्रक्रिया न्यायिक प्रणाली की गंभीरता को दर्शाती है और यह सुनिश्चित करने का प्रयास करती है कि किसी भी प्रकार की अनियमितता को उजागर किया जा सके।
निलंबित सीएसपी पच्चीसिया ने अब न्यायालय की शरण ली है। अपने अधिवक्ता के माध्यम से जिला न्यायालय में स्वयं के साथ करीबी क्षितिज को अग्रिम जमानत का आवेदन दिया है। जिसमें मंगलवार को तीन घंटे से अधिक समय तक विशेष न्यायालय में जमानत याचिका पर सुनवाई के साथ बहस चली, लेकिन बहस पूरी नहीं हो सकी। अब न्यायालय में मामले की अगली सुनवाई के लिए 29 अगस्त का समय दिया है। यह स्थिति यह दर्शाती है कि मामले में कानूनी पेचिदगियाँ बढ़ सकती हैं, जिससे जांच की प्रक्रिया प्रभावित हो सकती है।
हत्या के मामले में जेल में बंद जिन आरोपितों को लाभ दिलाने के साथ जमीन का सौदा किया गया था। उनमें आकाश लोधी, उसका पिता रमेश लोधी व जीजा सतीश पटेल शामिल है। तीनों के अधिवक्ता ने न्यायालय में सुरक्षा को लेकर तीनों को कटनी जिला जेल से स्थानांतरित करते हुए प्रदेश की किसी अन्य जेल में शिफ्ट कराने का आवेदन दिया था। जिसको न्यायालय ने मंजूर करते हुए जेल प्रबंधन को निर्देश दिए हैं। यह कदम यह संकेत करता है कि न्यायालय सुरक्षा को लेकर गंभीर है और यह सुनिश्चित करना चाहता है कि आरोपितों को उचित सुरक्षा मिले।
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