अमेरिका आज बंधुआ मजदूरी से तैयार उत्पादों पर अपनी अंतिम रिपोर्ट जारी करेगा, जिसमें भारत समेत 60 देशों का जिक्र है।
नई दिल्ली, भारत 23 जुल॰ 2026 ALN: अमेरिका ने भारत समेत अपने 60 प्रमुख व्यापारिक साझेदार देशों के खिलाफ चल रही सेक्शन 301 जांच पर अंतिम फैसला जारी करने की प्रक्रिया शुरू कर दी है। यह फैसला ऐसे समय आ रहा है जब सभी देशों पर लगाए गए 10 प्रतिशत अतिरिक्त अमेरिकी टैरिफ शुक्रवार को समाप्त होने वाले हैं। यह निर्णय वैश्विक व्यापार के लिए महत्वपूर्ण है और इसके कई दूरगामी प्रभाव हो सकते हैं, विशेष रूप से उन देशों के लिए जो अमेरिका के साथ मजबूत व्यापारिक संबंध रखते हैं।
अमेरिका भारत सहित अपने 60 व्यापारिक साझेदार देशों में बंधुआ मजदूरी से तैयार उत्पाद के संबंध में अंतिम कार्रवाई रिपोर्ट जारी करने जा रहा है। अमेरिका ने इन देशों के खिलाफ धारा 301 के तहत जांच की थी। यह कदम सभी देशों पर लगाए गए 10 फीसदी अतिरिक्त टैरिफ की समय-सीमा समाप्त होने से ठीक पहले उठाया जा रहा है। यह रिपोर्ट केवल व्यापारिक मुद्दों पर नहीं, बल्कि मानवाधिकारों और श्रमिकों के अधिकारों से संबंधित भी है। बंधुआ मजदूरी एक गंभीर समस्या है, जो कई विकासशील देशों में व्याप्त है, और अमेरिका का यह कदम इन मुद्दों को वैश्विक स्तर पर उजागर करने का प्रयास है।
अमेरिकी व्यापार प्रतिनिधि (यूएसटीआर) जैमीसन ग्रीर ने सीनेट वित्त समिति को यह जानकारी दी कि अमेरिका के शीर्ष 60 व्यापारिक साझेदारों की ओर से अपनी सीमाओं पर बंधुआ मजदूरी से तैयार सामानों के आयात पर रोक न लगाने या उसे प्रभावी ढंग से लागू न कर पाने की जांच की गई थी। पिछले महीने यूएसटीआर ने देशों के मौजूदा उपायों की कड़ाई के आधार पर 10 फीसदी और 12.5 फीसदी अतिरिक्त टैरिफ लगाने का प्रस्ताव दिया था। ग्रीर ने बताया कि यूएसटीआर को इस पर 1,600 से अधिक आपत्तियां-टिप्पणियां मिली हैं और 107 गवाहों के साथ दूसरे दौर की सुनवाई पूरी की जा चुकी है। यह प्रक्रिया यह दर्शाती है कि अमेरिका अपने व्यापारिक साझेदारों के साथ गंभीरता से मानवाधिकारों की रक्षा के लिए प्रतिबद्ध है।
भारत ने अमेरिका की इस जांच का विरोध किया है। भारत का कहना है कि इस तरह के मुद्दों पर एकतरफा कार्रवाई करने के बजाय इन्हें भारत-अमेरिका द्विपक्षीय व्यापार समझौते के तहत बातचीत से सुलझाया जाना चाहिए। भारत ने यह भी कहा है कि वह बंधुआ मजदूरी के मुद्दे को गंभीरता से लेता है, लेकिन इसे व्यापारिक संबंधों में एकतरफा दबाव बनाने के लिए उपयोग नहीं किया जाना चाहिए। दोनों देशों के बीच इस समझौते पर फिलहाल बातचीत चल रही है, और भारत चाहता है कि इस मुद्दे का समाधान आपसी सहमति से निकाला जाए।
यह जांच ट्रंप प्रशासन के दौरान शुरू की गई थी, जब फरवरी 2026 में अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट ने पिछले साल लगाए गए पारस्परिक शुल्क को अवैध करार दिया था। इसके बाद प्रशासन ने सभी देशों पर 10 प्रतिशत अतिरिक्त टैरिफ लगा दिया था, जिसकी अवधि शुक्रवार को खत्म हो रही है। ट्रंप प्रशासन की यह नीति अमेरिका के व्यापारिक साझेदार देशों पर दबाव बनाने के लिए टैरिफ का उपयोग करने की रणनीति का हिस्सा थी। इसका उद्देश्य था कि ये देश अपने बाजारों को अमेरिकी कंपनियों के लिए खोलें और नियमों का बेहतर पालन करें।
अमेरिका, भारत का दूसरा सबसे बड़ा व्यापारिक साझेदार और भारतीय निर्यात का सबसे बड़ा बाजार है। वाणिज्य मंत्रालय के आंकड़ों के अनुसार, 2025 में दोनों देशों के बीच वस्तु व्यापार लगभग 141 अरब डॉलर का रहा। इसमें भारत का निर्यात 87.3 अरब डॉलर था। यह आंकड़ा दर्शाता है कि भारत और अमेरिका के बीच व्यापारिक संबंध कितने महत्वपूर्ण हैं, और यह भी कि दोनों देशों के लिए एक मजबूत और स्थायी व्यापारिक संबंध बनाए रखना कितना आवश्यक है।
सीनेट की सुनवाई के दौरान सीनेटर जॉन बरासो ने भारत में अमेरिकी सोडा ऐश (Soda Ash) उत्पादकों को बाजार तक उचित पहुंच मिलने का मुद्दा उठाया। इस पर ग्रीर ने कहा कि उनकी भारत के व्यापार मंत्रालय के अधिकारियों से अच्छी बातचीत होती है और वह अगली बैठक में यह मुद्दा उठाएंगे। सोडा ऐश एक महत्वपूर्ण औद्योगिक रसायन है जिसका उपयोग कई उद्योगों में किया जाता है, और इस पर चर्चा यह दर्शाती है कि अमेरिका अपने व्यापारिक हितों की रक्षा के लिए सक्रिय है।
भारत ने 16 मार्च 2026 को दुनिया के कई देशों से आने वाले सोडा ऐश के आयात पर एंटी-डंपिंग जांच शुरू की थी। इसका उद्देश्य यह पता लगाना है कि सस्ते आयात से घरेलू उद्योग को नुकसान पहुंच रहा है या भविष्य में नुकसान की आशंका है। यह कदम भारत के घरेलू उद्योग की रक्षा के लिए उठाया गया है और यह दर्शाता है कि भारत अपने व्यापारिक हितों की रक्षा के लिए गंभीर है। एंटी-डंपिंग जांच से यह सुनिश्चित करने में मदद मिलेगी कि भारतीय उद्योग प्रतिस्पर्धा में बने रहें और उन्हें विदेशी उत्पादों से नुकसान न हो।
ट्रंप प्रशासन व्यापारिक साझेदार देशों पर दबाव बनाने के लिए टैरिफ का इस्तेमाल कर रहा है, ताकि वे अपने बाजार अमेरिकी कंपनियों के लिए खोलें, नियमों का बेहतर पालन करें और अमेरिका में मैन्युफैक्चरिंग को फिर से मजबूत बनाया जा सके। यह नीति न केवल अमेरिका की आर्थिक स्थिति को मजबूत करने का प्रयास है, बल्कि यह वैश्विक व्यापार में अमेरिका की भूमिका को भी पुनः स्थापित करने का एक तरीका है। अमेरिका का यह कदम वैश्विक व्यापार में नए समीकरणों को जन्म दे सकता है और अन्य देशों को भी अपने व्यापारिक नीतियों पर पुनर्विचार करने के लिए मजबूर कर सकता है।
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