भारत के विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने आसियान महासचिव डॉ. काओ किम हॉर्न से मुलाकात की, जिसमें 2026-2030 की कार्ययोजना और सहयोग के विभिन्न क्षेत्रों पर चर्चा की गई।
नई दिल्ली, भारत 23 जुल॰ 2026 ALN: भारत के विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने बुधवार को फिलीपींस की राजधानी मनीला में आयोजित 59वीं आसियान (ASEAN) विदेश मंत्रियों की बैठक के इतर आसियान के महासचिव डॉ. काओ किम हॉर्न से मुलाकात की। इस दौरान दोनों पक्षों ने भारत-आसियान व्यापक रणनीतिक साझेदारी को और मजबूत बनाने की अपनी प्रतिबद्धता दोहराई। साथ ही वर्ष 2026-2030 के भारत-आसियान कार्ययोजना के तहत भविष्य में सहयोग बढ़ाने के रोडमैप पर भी विस्तार से चर्चा की।
आसियान, जो कि 1967 में स्थापित हुआ था, दक्षिण-पूर्व एशिया के 10 देशों का एक क्षेत्रीय संगठन है, जिसका मुख्य उद्देश्य क्षेत्र में आर्थिक, राजनीतिक और सामाजिक सहयोग को बढ़ावा देना है। इस संगठन के सदस्य देशों में ब्रुनेई, कंबोडिया, इंडोनेशिया, लाओस, मलेशिया, म्यांमार, फिलीपींस, सिंगापुर, थाईलैंड, वियतनाम और तिमोर-लेस्ते शामिल हैं। आसियान का गठन ऐसे समय में हुआ था जब क्षेत्र में राजनीतिक अस्थिरता और आर्थिक चुनौतियाँ थीं, और इसका उद्देश्य सदस्य देशों के बीच सहयोग को बढ़ावा देना और एक स्थिर और समृद्ध क्षेत्र का निर्माण करना था।
जयशंकर ने बैठक के दौरान समुद्री सहयोग, व्यापार, सुरक्षा, डिजिटल तकनीक, AI, हरित विकास और कनेक्टिविटी जैसे क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने की प्रतिबद्धता जताई। उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर बैठक की जानकारी साझा करते हुए महासचिव का आभार व्यक्त किया। यह बैठक ऐसे समय में हुई है जब भारत और आसियान के बीच संबंधों को और मजबूत बनाने की आवश्यकता महसूस की जा रही है, खासकर वैश्विक स्तर पर बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव और आर्थिक चुनौतियों के मद्देनजर।
भारत और आसियान के बीच संबंधों को बढ़ावा देने के लिए कई पहल की गई हैं, जिनमें व्यापार और निवेश के क्षेत्रों में सहयोग, सांस्कृतिक आदान-प्रदान और सुरक्षा सहयोग शामिल है। जयशंकर ने यह भी कहा कि इन क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने से न केवल दोनों पक्षों के लिए लाभ होगा, बल्कि यह क्षेत्रीय स्थिरता और विकास को भी बढ़ावा देगा।
जयशंकर ने कहा कि आज के समय में ऊर्जा, खाद्य और स्वास्थ्य सुरक्षा को हल्के में नहीं लिया जा सकता। उन्होंने कहा कि बदलते वैश्विक हालात में ये सभी क्षेत्र पहले से कहीं अधिक महत्वपूर्ण हो गए हैं। यह बयान इस बात को दर्शाता है कि वैश्विक स्तर पर सुरक्षा और विकास के मुद्दों पर ध्यान देने की आवश्यकता है, खासकर महामारी के बाद की स्थिति में।
जयशंकर ने यह भी कहा कि इन मुद्दों पर सहयोग बढ़ाने से न केवल भारत और आसियान के देशों के बीच संबंध मजबूत होंगे, बल्कि यह वैश्विक स्तर पर भी सकारात्मक प्रभाव डालेगा। उन्होंने यह भी उल्लेख किया कि जलवायु परिवर्तन और पर्यावरणीय चुनौतियों का सामना करने के लिए भी सामूहिक प्रयासों की आवश्यकता है।
आसियान सचिवालय ने भी बैठक के बाद जारी बयान में कहा कि महासचिव ने भारत-आसियान संबंधों को मजबूत बनाने में सहयोग के लिए जयशंकर का धन्यवाद किया। यह बयान इस बात का संकेत है कि आसियान भारत के साथ अपने संबंधों को और मजबूत करने के लिए प्रतिबद्ध है, और यह संगठन के भविष्य के विकास के लिए महत्वपूर्ण है।
यह बैठक ऐसे समय में हुई जब फिलीपींस ने वर्ष 2026 के लिए आसियान की अध्यक्षता संभाल ली है। फिलीपींस की अध्यक्षता के दौरान, आसियान के सदस्य देशों के बीच सहयोग को बढ़ावा देने और क्षेत्रीय मुद्दों पर एकजुटता को बनाए रखने के लिए कई महत्वपूर्ण पहलों की योजना बनाई गई है। फिलीपींस की अध्यक्षता के दौरान, यह अपेक्षित है कि वह समुद्री सुरक्षा, आतंकवाद, और जलवायु परिवर्तन जैसे मुद्दों पर ध्यान केंद्रित करेगा, जो कि आसियान के लिए प्राथमिकता वाले क्षेत्र हैं।
आसियान वर्तमान में 11 सदस्य देशों का क्षेत्रीय संगठन है, जिसमें ब्रुनेई, कंबोडिया, इंडोनेशिया, लाओस, मलेशिया, म्यांमार, फिलीपींस, सिंगापुर, थाईलैंड, वियतनाम और तिमोर-लेस्ते शामिल हैं। यह संगठन न केवल आर्थिक और राजनीतिक सहयोग को बढ़ावा देता है, बल्कि सांस्कृतिक और सामाजिक आदान-प्रदान को भी प्रोत्साहित करता है।
आसियान का एक महत्वपूर्ण पहलू यह है कि यह सदस्य देशों के बीच विवादों को सुलझाने के लिए एक मंच प्रदान करता है, जिससे क्षेत्र में शांति और स्थिरता को बढ़ावा मिलता है। इसके अलावा, आसियान ने कई क्षेत्रीय और अंतरराष्ट्रीय मुद्दों पर एकजुटता दिखाई है, जैसे कि आतंकवाद, समुद्री सुरक्षा, और जलवायु परिवर्तन।
भारत के साथ आसियान के संबंधों को और मजबूत करने के लिए, दोनों पक्षों ने कई पहलें की हैं, जिनमें व्यापार और निवेश के क्षेत्र में सहयोग, सांस्कृतिक आदान-प्रदान, और सुरक्षा सहयोग शामिल हैं। भारत ने आसियान के साथ अपने संबंधों को प्राथमिकता दी है और इसे अपने "एक्ट ईस्ट" नीति का एक महत्वपूर्ण हिस्सा माना है।
इस प्रकार, जयशंकर और महासचिव डॉ. काओ किम हॉर्न के बीच यह मुलाकात न केवल द्विपक्षीय संबंधों को मजबूत करने के लिए महत्वपूर्ण है, बल्कि यह क्षेत्रीय और वैश्विक स्तर पर स्थिरता और विकास को बढ़ावा देने के लिए भी एक महत्वपूर्ण कदम है।
भारत और आसियान के बीच संबंधों को और मजबूत करने के लिए, पिछले कुछ वर्षों में कई महत्वपूर्ण घटनाएं हुई हैं। भारत ने आसियान के साथ अपनी व्यापारिक साझेदारी को बढ़ाने के लिए कई व्यापारिक समझौतों पर हस्ताक्षर किए हैं, जिनमें वस्तुओं और सेवाओं के व्यापार में सहूलियत प्रदान करने वाले समझौते शामिल हैं। इसके अलावा, भारत और आसियान ने सुरक्षा सहयोग को बढ़ावा देने के लिए भी कई पहलें की हैं, जैसे कि आतंकवाद और समुद्री सुरक्षा के मुद्दों पर संयुक्त अभ्यास।
आसियान के सदस्य देशों के साथ भारत के संबंधों को और मजबूत करने के लिए सांस्कृतिक आदान-प्रदान भी एक महत्वपूर्ण पहल है। विभिन्न सांस्कृतिक कार्यक्रमों और आयोजनों के माध्यम से, दोनों पक्षों के बीच आपसी समझ और सहयोग को बढ़ावा दिया गया है। यह सांस्कृतिक संबंध न केवल लोगों के बीच की दूरी को कम करते हैं, बल्कि यह व्यापारिक और राजनीतिक संबंधों को भी मजबूत करते हैं।
आसियान के साथ भारत के संबंधों की प्रगति को देखते हुए, यह स्पष्ट है कि दोनों पक्षों के बीच सहयोग का दायरा बढ़ रहा है। इस सहयोग का एक प्रमुख उद्देश्य क्षेत्रीय स्थिरता को बढ़ावा देना और वैश्विक स्तर पर आर्थिक विकास में योगदान देना है।
जयशंकर और महासचिव काओ किम हॉर्न के बीच हुई इस बैठक ने यह स्पष्ट कर दिया है कि भारत-आसियान संबंध न केवल क्षेत्रीय महत्व के हैं, बल्कि यह वैश्विक स्तर पर भी महत्वपूर्ण हैं। इस प्रकार, यह मुलाकात एक सकारात्मक संकेत है कि भारत और आसियान अपने संबंधों को और मजबूत करने के लिए प्रतिबद्ध हैं, जो कि भविष्य में क्षेत्रीय और वैश्विक स्थिरता को बढ़ावा देने के लिए आवश्यक है।
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