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CWG 2026: तेजस्विन शंकर ने डेकाथलॉन में कांस्य पदक जीतकर रचा इतिहास

ALN NEWS DESK
एएलएन न्यूज डेस्क
अपडेटेड : Aug 1, 2026, 05:38 AM IST
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तेजस्विन शंकर ने कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 के डेकाथलॉन में कांस्य पदक जीतकर भारत का नाम रोशन किया। वह इस स्पर्धा में पदक जीतने वाले पहले भारतीय बने।

तेजस्विन शंकर ने कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 के डेकाथलॉन में कांस्य पदक जीतकर इतिहास रच दिया। वह इस स्पर्धा में पदक जीतने वाले पहले भारतीय बन गए। 10 अलग-अलग इवेंट्स में लगातार दो दिन तक प्रदर्शन के बाद कुल अंकों के आधार पर विजेता तय होता है।

भारत के स्टार एथलीट तेजस्विन शंकर ने कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 में इतिहास रच दिया। उन्होंने पुरुषों की डेकाथलॉन स्पर्धा में 7976 अंक हासिल कर कांस्य पदक अपने नाम किया और इस स्पर्धा में पदक जीतने वाले पहले भारतीय खिलाड़ी बन गए। इससे पहले किसी भी भारतीय पुरुष एथलीट ने राष्ट्रमंडल खेलों के डेकाथलॉन में पोडियम तक पहुंचने का कारनामा नहीं किया था।

स्वर्ण पदक ग्रेनाडा के लिंडन विक्टर ने 8096 अंकों के साथ जीता, जबकि कनाडा के अनुभवी एथलीट डेमियन वार्नर 8036 अंकों के साथ दूसरे स्थान पर रहे। तेजस्विन दोनों दिग्गज खिलाड़ियों के पीछे तीसरे स्थान पर रहे और भारत के लिए ऐतिहासिक कांस्य पदक सुनिश्चित किया।

तेजस्विन ने कई इवेंट्स में किया शानदार प्रदर्शन

तेजस्विन की शुरुआत 100 मीटर में सातवें स्थान से हुई, लेकिन लंबी कूद में दूसरे स्थान पर पहुंचकर उन्होंने वापसी की। हाई जंप में उन्होंने 2.15 मीटर की छलांग लगाकर पहला स्थान हासिल किया और कुल अंक तालिका में दूसरे स्थान पर पहुंच गए।

दूसरे दिन भी उन्होंने 110 मीटर बाधा दौड़ और डिस्कस थ्रो में दूसरे स्थान का प्रदर्शन किया। हालांकि पोल वॉल्ट और भाला फेंक में अपेक्षित अंक नहीं मिल सके, जिससे वे तीसरे स्थान पर खिसक गए। अंत में 1500 मीटर दौड़ पूरी करने के बाद उनका कुल स्कोर 7976 अंक रहा और उन्होंने कांस्य पदक अपने नाम कर लिया।

क्या है डेकाथलॉन?

डेकाथलॉन ट्रैक एंड फील्ड की सबसे कठिन स्पर्धाओं में से एक मानी जाती है। इसमें खिलाड़ियों को दो दिनों के दौरान कुल 10 अलग-अलग इवेंट्स में हिस्सा लेना होता है। यह प्रतियोगिता किसी एक इवेंट की नहीं, बल्कि खिलाड़ी की संपूर्ण एथलेटिक क्षमता की परीक्षा होती है।

डेकाथलॉन में शामिल इवेंट्स में 100 मीटर, लंबी कूद, शॉटपुट, हाई जंप, 400 मीटर, 110 मीटर बाधा दौड़, डिस्कस, पोल वॉल्ट, भाला फेंक और 1500 मीटर दौड़ शामिल हैं। हर इवेंट का अपने-अपने मानक होते हैं, और खिलाड़ी को अपनी सर्वश्रेष्ठ क्षमता का प्रदर्शन करना होता है।

कैसे मिलते हैं अंक?

डेकाथलॉन में प्रत्येक इवेंट में प्रदर्शन के आधार पर अंक दिए जाते हैं। समय आधारित स्पर्धाओं (जैसे 100 मीटर, 400 मीटर और 1500 मीटर) में कम समय लेने पर अधिक अंक मिलते हैं, जबकि फील्ड इवेंट्स (जैसे लंबी कूद, हाई जंप, शॉटपुट, डिस्कस, भाला फेंक और पोल वॉल्ट) में बेहतर दूरी या ऊंचाई हासिल करने पर ज्यादा अंक दिए जाते हैं। हर इवेंट के लिए विश्व एथलेटिक्स की तय अंक तालिका (स्कोरिंग फॉर्मूला) लागू होती है। 10ों स्पर्धाओं के अंक जोड़कर अंतिम स्कोर तैयार किया जाता है और सबसे अधिक अंक हासिल करने वाला खिलाड़ी विजेता बनता है।

भारत के लिए क्यों खास है यह पदक?

डेकाथलॉन जैसी चुनौतीपूर्ण स्पर्धा में लगातार दो दिनों तक उच्च स्तर का प्रदर्शन करना आसान नहीं होता। तेजस्विन शंकर ने न केवल इस कठिन परीक्षा को सफलतापूर्वक पार किया, बल्कि भारत को इस इवेंट का पहला कॉमनवेल्थ गेम्स पदक भी दिलाया। यह उपलब्धि भारतीय एथलेटिक्स के इतिहास में एक नया अध्याय जोड़ती है और आने वाले वर्षों में बहु-इवेंट एथलीटों के लिए प्रेरणा बनेगी।

इस कांस्य पदक की जीत से भारत में एथलेटिक्स के प्रति बढ़ती रुचि और समर्थन का भी संकेत मिलता है। पिछले कुछ वर्षों में, भारत ने विभिन्न अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में एथलेटिक्स में अपनी उपस्थिति को मजबूत किया है, और यह पदक इस दिशा में एक और महत्वपूर्ण कदम है।

तेजस्विन की इस उपलब्धि से भारतीय एथलेटिक्स संघ और अन्य संबंधित संगठनों को भी प्रेरणा मिलेगी कि वे बहु-इवेंट एथलीटों के विकास के लिए और अधिक संसाधन और समर्थन प्रदान करें। यह पदक न केवल तेजस्विन के लिए, बल्कि सभी भारतीय एथलीटों के लिए एक प्रेरणा स्रोत बन गया है, जो अपने सपनों को पूरा करने के लिए कठिन परिश्रम कर रहे हैं।

अंतरराष्ट्रीय स्तर पर प्रतिस्पर्धा करने के लिए भारतीय एथलीटों को बेहतर प्रशिक्षण, सुविधाएं और मानसिक समर्थन की आवश्यकता होती है। तेजस्विन की सफलता इस बात का प्रमाण है कि यदि सही दिशा में प्रयास किए जाएं, तो भारतीय एथलीट भी विश्व स्तर पर उत्कृष्टता प्राप्त कर सकते हैं।

इस कांस्य पदक के साथ, तेजस्विन शंकर ने न केवल व्यक्तिगत उपलब्धि हासिल की है, बल्कि उन्होंने भारतीय एथलेटिक्स को भी एक नई पहचान दी है। यह पदक भविष्य में अन्य भारतीय खिलाड़ियों के लिए प्रेरणा का स्रोत बन सकता है, जो डेकाथलॉन या अन्य बहु-इवेंट स्पर्धाओं में भाग लेने की सोच रहे हैं।

इस प्रकार, तेजस्विन शंकर की कांस्य पदक जीतने की कहानी केवल एक व्यक्तिगत उपलब्धि नहीं है, बल्कि यह भारतीय एथलेटिक्स के विकास और भविष्य के लिए एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर है। यह उपलब्धि भारतीय खेलों की दुनिया में एक नई उम्मीद और आत्मविश्वास का संचार करती है, जो आने वाले वर्षों में और भी अधिक सफलताओं की ओर ले जा सकती है।

इस ऐतिहासिक जीत का महत्व केवल व्यक्तिगत या राष्ट्रीय स्तर पर ही नहीं है, बल्कि यह अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी भारतीय एथलेटिक्स की पहचान को मजबूत करता है। तेजस्विन की सफलता ने यह सिद्ध कर दिया है कि भारतीय एथलीट भी विश्व स्तर पर प्रतिस्पर्धा कर सकते हैं और उच्चतम स्तर पर प्रदर्शन कर सकते हैं।

भारत में एथलेटिक्स की परंपरा काफी पुरानी है, लेकिन पिछले कुछ वर्षों में यह खेल काफी विकसित हुआ है। सरकार और विभिन्न संगठनों द्वारा एथलेटिक्स के विकास के लिए कई योजनाएं और कार्यक्रम चलाए जा रहे हैं। तेजस्विन की सफलता इस दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है, जो अन्य युवा खिलाड़ियों को प्रेरित करेगा कि वे भी अपनी प्रतिभा को पहचानें और उसे विकसित करें।

इसके अलावा, तेजस्विन की इस सफलता से यह भी स्पष्ट होता है कि भारतीय एथलीटों को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर प्रतिस्पर्धा करने के लिए आवश्यक संसाधनों और सुविधाओं की आवश्यकता है। यदि सही दिशा में प्रयास किए जाएं और आवश्यक समर्थन प्रदान किया जाए, तो भारतीय एथलीट विश्व स्तर पर और भी अधिक सफलताएं प्राप्त कर सकते हैं।

तेजस्विन शंकर की कांस्य पदक जीतने की यात्रा यह दर्शाती है कि कठिन परिश्रम, समर्पण और निरंतरता के साथ किसी भी लक्ष्य को प्राप्त किया जा सकता है। यह कहानी युवा खिलाड़ियों के लिए एक प्रेरणा है कि वे अपने सपनों को पूरा करने के लिए कठिनाईयों का सामना करें और कभी हार न मानें।

अंततः, तेजस्विन शंकर का कांस्य पदक जीतना भारतीय एथलेटिक्स के लिए एक नया अध्याय है। यह न केवल उनकी व्यक्तिगत सफलता है, बल्कि यह भारतीय खेलों की दुनिया में एक नई उम्मीद और आत्मविश्वास का संचार करता है। आने वाले वर्षों में, यह उपलब्धि अन्य खिलाड़ियों के लिए प्रेरणा का स्रोत बनेगी और भारतीय एथलेटिक्स को नई ऊंचाइयों पर पहुंचाने में मदद करेगी।

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