ग्लासगो कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 की शुरुआत, भारत की पदक उम्मीदें एथलेटिक्स और वेटलिफ्टिंग पर टिकी

ALN NEWS DESK
एएलएन न्यूज डेस्क
अपडेटेड : Jul 23, 2026, 12:01 PM IST
7 min read
  • linkedin
  • twitter
  • facebook
  • instagram
  • whatsapp

ग्लासगो में कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 का आगाज, भारत के 125 एथलीटों की चुनौती। कुश्ती और बैडमिंटन के बिना पदक की उम्मीदें कम।

ग्लासगो, स्कॉटलैंड के ग्लासगो शहर में आज से कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 का आधिकारिक आगाज हो गया है, जो 2 अगस्त तक चलेंगे। इस बार कम बजट और सीमित खेलों के बावजूद 74 देशों के तीन हजार से अधिक एथलीट हिस्सा ले रहे हैं, जिसमें भारत के 125 खिलाड़ी भी अपनी चुनौती पेश कर रहे हैं।

कॉमनवेल्थ गेम्स, जिसे आमतौर पर कॉमनवेल्थ गेम्स के नाम से जाना जाता है, एक बहु-खेल आयोजन है जिसमें कॉमनवेल्थ देशों के एथलीट प्रतिस्पर्धा करते हैं। ये खेल हर चार साल में आयोजित किए जाते हैं और यह खेलों का एक महत्वपूर्ण मंच है, जिसमें विभिन्न खेलों की स्पर्धाएं होती हैं। इस बार के खेलों का आयोजन ग्लासगो में हो रहा है, जो पहले भी 2014 में कॉमनवेल्थ गेम्स की मेज़बानी कर चुका है।

प्रमुख खेलों के हटने से भारत की बढ़ी मुश्किलें

इस संस्करण में कुश्ती, बैडमिंटन, टेबल टेनिस और शूटिंग जैसे खेलों को शामिल नहीं किए जाने के कारण भारत की पदक उम्मीदों को बड़ा झटका लगा है। बर्मिंघम खेलों में इन चार स्पर्धाओं से अकेले 25 पदक आए थे, जिससे इस बार शीर्ष-5 में बने रहना भारतीय दल के लिए कड़ी परीक्षा बन गया है।

भारत ने पिछले कॉमनवेल्थ गेम्स में शानदार प्रदर्शन किया था, और बर्मिंघम में भारत ने कुल 81 पदक जीते थे, जिनमें से 22 स्वर्ण, 16 रजत और 53 कांस्य पदक शामिल थे। इस बार, खेलों की संख्या में कमी और प्रमुख खेलों के हटने से भारतीय दल को अपने प्रदर्शन को बनाए रखने में कठिनाई का सामना करना पड़ सकता है।

भारत के एथलीटों ने पिछले कुछ वर्षों में अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपनी पहचान बनाई है, विशेष रूप से एथलेटिक्स और वेटलिफ्टिंग में। इन खेलों में भारत की ऐतिहासिक उपलब्धियों ने देश को वैश्विक मंच पर एक मजबूत प्रतिस्पर्धी बना दिया है। लेकिन इस बार, कुश्ती और बैडमिंटन जैसे खेलों के बिना, भारत को अपने पदक tally को बढ़ाने में कठिनाई हो सकती है।

नीरज चोपड़ा और मीराबाई चानू से पदक की आस

कम हुए खेलों के बीच भारत की पदक की उम्मीदें मुख्य रूप से दो बार के ओलंपिक मेडलिस्ट नीरज चोपड़ा, स्टार वेटलिफ्टर मीराबाई चानू और मुक्केबाज लवलीना बोरगोहेन पर टिकी हैं। चोपड़ा ने टोक्यो ओलंपिक 2020 में स्वर्ण पदक जीता था और उनकी उपलब्धि ने भारत में एथलेटिक्स के प्रति एक नई ऊर्जा का संचार किया है। चोपड़ा की तकनीक और प्रदर्शन को देखते हुए, उनके पदक जीतने की संभावनाएं काफी मजबूत हैं।

वहीं, मीराबाई चानू ने भी ओलंपिक में भारत का नाम रोशन किया है। उन्होंने टोक्यो में रजत पदक जीता था और उनकी वेटलिफ्टिंग में विशेषज्ञता ने उन्हें एक प्रमुख खिलाड़ी बना दिया है। चानू की मेहनत और समर्पण ने उन्हें इस खेल में एक नई ऊँचाई पर पहुँचाया है।

इसके अलावा, मुक्केबाज लवलीना बोरगोहेन पर भी सभी की नजरें होंगी। उन्होंने पिछले ओलंपिक में कांस्य पदक जीता था और उनकी तकनीकी क्षमता और मानसिक मजबूती ने उन्हें एक उत्कृष्ट मुक्केबाज बना दिया है।

भारत के एथलेटिक्स, बॉक्सिंग और लॉन बॉल्स की मजबूत टीमें भी इस बार की प्रतियोगिता में भाग ले रही हैं। इन खेलों में भारत की टीमों ने पिछले वर्षों में कई पुरस्कार जीते हैं, और इस बार भी उनकी उम्मीदें ऊँची हैं।

खेलों की तैयारी और भारतीय दल की रणनीति

ग्लासगो कॉमनवेल्थ गेम्स के लिए भारतीय दल ने पिछले कुछ महीनों में कड़ी मेहनत की है। एथलीटों को विशेष प्रशिक्षण कार्यक्रमों के तहत तैयार किया गया है, जिसमें उनकी शारीरिक और मानसिक क्षमता को बढ़ाने के लिए विभिन्न तकनीकों का उपयोग किया गया है।

भारतीय खेल प्राधिकरण ने एथलीटों को उच्चतम स्तर की सुविधाएं प्रदान की हैं, जिसमें आधुनिक प्रशिक्षण उपकरण, पोषण विशेषज्ञों की सलाह और मनोवैज्ञानिक समर्थन शामिल हैं। एथलीटों को मानसिक रूप से तैयार करने के लिए भी विशेष ध्यान दिया गया है, ताकि वे प्रतियोगिता के दबाव को संभाल सकें।

भारतीय दल के मुख्य कोच और प्रबंधकों ने एथलीटों को यह सलाह दी है कि वे अपनी व्यक्तिगत सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन पर ध्यान केंद्रित करें और टीम के सामूहिक प्रयास को भी महत्व दें। इस बार की प्रतियोगिता में टीम भावना और एकजुटता को बढ़ावा देने पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है।

कॉमनवेल्थ गेम्स की ऐतिहासिक पृष्ठभूमि

कॉमनवेल्थ गेम्स की स्थापना 1930 में की गई थी और यह एक ऐसा मंच है जहां विभिन्न देशों के एथलीट प्रतिस्पर्धा करते हैं। यह खेलों का आयोजन हर चार साल में होता है और इसमें विभिन्न खेलों का समावेश होता है। खेलों का उद्देश्य न केवल प्रतिस्पर्धा को बढ़ावा देना है, बल्कि देशों के बीच सांस्कृतिक और सामाजिक संबंधों को भी मजबूत करना है।

ग्लासगो में आयोजित होने वाले इस संस्करण में, एथलीटों को विभिन्न खेलों में अपनी प्रतिभा दिखाने का मौका मिलेगा। हालांकि, खेलों की संख्या में कमी ने इस बार के आयोजन को चुनौतीपूर्ण बना दिया है।

कॉमनवेल्थ गेम्स का आयोजन न केवल एथलीटों के लिए बल्कि दर्शकों के लिए भी एक महत्वपूर्ण अवसर है। यह खेलों का उत्सव है, जहां विभिन्न देशों के लोग एक साथ आते हैं और खेलों के माध्यम से एकजुटता का प्रदर्शन करते हैं।

भविष्य की संभावनाएं

ग्लासगो कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 के दौरान भारत की पदक संभावनाएं निश्चित रूप से इस बार के खेलों की संरचना पर निर्भर करेंगी। हालांकि, भारतीय एथलीटों का समर्पण और उनकी मेहनत ने पहले ही उन्हें एक मजबूत स्थिति में पहुँचाया है।

भविष्य में, यदि भारत को अधिक खेलों में भाग लेने का अवसर मिलता है, तो भारतीय दल की संभावनाएं और भी बेहतर हो सकती हैं। भारतीय खेल प्राधिकरण और सरकार ने एथलीटों को समर्थन देने के लिए कई योजनाएं बनाई हैं, जिससे खेलों में भारत की स्थिति को और मजबूत किया जा सके।

इस बार के कॉमनवेल्थ गेम्स का आयोजन निश्चित रूप से भारतीय खेलों के भविष्य के लिए एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर साबित हो सकता है। एथलीटों की मेहनत और दृढ़ संकल्प से यह उम्मीद की जा रही है कि वे अपने देश का मान बढ़ाने में सफल होंगे।

कॉमनवेल्थ गेम्स का महत्व सिर्फ पदक जीतने तक सीमित नहीं है। यह खेलों के माध्यम से विभिन्न देशों के बीच दोस्ती और सहयोग को बढ़ावा देने का एक अवसर भी है। इस प्रकार, एथलीटों के लिए यह एक ऐसा मंच है जहां वे न केवल अपने देश का प्रतिनिधित्व करते हैं, बल्कि वैश्विक स्तर पर खेलों के प्रति अपने समर्पण को भी प्रदर्शित करते हैं।

ग्लासगो में आयोजित होने वाले इस संस्करण में, एथलीटों को विभिन्न खेलों में अपनी प्रतिभा दिखाने का मौका मिलेगा। खेलों की इस प्रतिस्पर्धा में भाग लेने वाले एथलीटों के लिए यह एक महत्वपूर्ण अवसर है, जहां वे अपने कौशल और क्षमताओं को प्रदर्शित कर सकते हैं।

भारत के लिए, यह गेम्स एक महत्वपूर्ण अवसर है, क्योंकि भारतीय एथलीटों ने पिछले वर्षों में कई बार अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपनी पहचान बनाई है। एथलीटों के प्रदर्शन और उनकी मेहनत ने भारत को खेलों की दुनिया में एक मजबूत पहचान दिलाई है।

हालांकि, इस बार खेलों की संख्या में कमी ने भारत की पदक संभावनाओं को प्रभावित किया है, फिर भी एथलीटों की मेहनत और समर्पण से यह उम्मीद की जा रही है कि वे अपने देश का मान बढ़ाने में सफल होंगे।

अंत में, ग्लासगो कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 न केवल एक खेल प्रतियोगिता है, बल्कि यह एक ऐसा मंच है जहां एथलीटों को अपनी प्रतिभा दिखाने का अवसर मिलता है। भारत के एथलीटों की मेहनत और उनकी समर्पण की कहानी इस बार के खेलों में भी देखने को मिलेगी।

Get More Updates

To learn more about the latest developments in Global Tournaments & Olympics, stay updated with our exclusive reports and analyses on AiLensNews.

Related News