भारत ने एजबेस्टन में इंग्लैंड को पहले वनडे में छह विकेट से हराया। अक्षर पटेल ने गेंदबाजी और बल्लेबाजी दोनों में बेहतरीन प्रदर्शन किया।
नई दिल्ली, भारत 15 जुल॰ 2026 ALN: इंग्लैंड के ख़िलाफ़ एजबेस्टन में तीन मैचों की सिरीज़ के पहले मुक़ाबले में भारत ने छह विकेट से जीत दर्ज की है।
इंग्लैंड ने टी-20 सिरीज़ में मेहमान टीम को 4-0 से हराकर शानदार प्रदर्शन किया था, लेकिन यह एक अलग भारतीय टीम थी, जिसे विराट कोहली, रोहित शर्मा, जसप्रीत बुमराह और शुभमन गिल जैसे दिग्गज खिलाड़ियों की वापसी से मज़बूत होने की संभावना बढ़ी।
259 रन के मामूली लक्ष्य का पीछा करते हुए गिल ने सबसे अहम योगदान दिया। लेकिन जब भारत लक्ष्य से 99 रन दूर था तब उसके चार विकेट गिर चुके थे और गिल रिटायर्ड हर्ट हो चुके थे।
लेकिन अक्षर पटेल और वॉशिंगटन सुंदर पर इसका कोई असर नहीं पड़ा। अक्षर ने आक्रामक बल्लेबाज़ की भूमिका निभाई, जबकि सुंदर ने एक छोर संभाले रखा। भारत ने 28 गेंद शेष रहते जीत दर्ज कर ली।
अक्षर ने ना केवल 52 गेंद पर 57 रन बनाए बल्कि चार विकेट भी झटके। इंग्लैंड शायद 290 रन तक पहुंच सकता था, लेकिन अक्षर पटेल ने डॉसन को डीप स्क्वायर लेग पर पुल शॉट खेलने के लिए मजबूर किया, जहाँ उनका कैच हो गया। इसके बाद बाएं हाथ के स्पिनर अक्षर ने निचले क्रम के बल्लेबाज़ों को जल्दी-जल्दी आउट कर पारी समेट दी।
अक्षर पटेल के बेहतरीन प्रदर्शन पर भारत के पूर्व क्रिकेटर इरफ़ान पठान ने एक्स पर लिखा है, ''यह जीत टीम इंडिया को बेहद संतुष्टि देगी, क्योंकि इसकी नींव दो ऑलराउंडरों की शानदार साझेदारी ने रखी, जिसकी टीम को लंबे समय से ज़रूरत थी। अक्षर पटेल ने लगभग बेदाग प्रदर्शन किया, जबकि वॉशिंगटन सुंदर पूरी पारी के दौरान पूरी तरह नियंत्रण में नज़र आए।''
इस मुक़ाबले से पहले अक्षर पटेल ने अपना पिछला वनडे पिछले साल सिडनी में खेला था। उस मैच में उन्होंने अच्छी गेंदबाज़ी की थी, लेकिन इसके बावजूद पहले रविंद्र जडेजा और बाद में हर्ष दुबे को तरजीह देते हुए उन्हें वनडे टीम से बाहर कर दिया गया।
ऐसे में टीम में जगह के लिए चल रही प्रतिस्पर्धा को देखते हुए यह मुक़ाबला अक्षर के लिए अहम था। एक छोटी सी प्रतिस्पर्धा वॉशिंगटन सुंदर के साथ भी थी।
तमिलनाडु के इस ऑलराउंडर को केएल राहुल से ऊपर बल्लेबाजी के लिए भेजा गया, ताकि शीर्ष पांच बल्लेबाज़ों में लगातार दाएं हाथ के बल्लेबाज़ों का क्रम टूट सके। गौर करने वाली बात यह है कि पिछले साल चैंपियंस ट्रॉफी में यही भूमिका अक्षर पटेल निभा रहे थे।
वनडे क्रिकेट में उतार-चढ़ाव भरे दौर के बाद अब यह कहना ग़लत नहीं होगा कि मंगलवार का यह हरफनमौला प्रदर्शन अक्षर को बाकी सभी फिंगर स्पिनरों से आगे ले गया है। खासकर तब, जब दक्षिण अफ्रीका में होने वाले विश्व कप में भारत के सिर्फ़ एक फिंगर स्पिनर के साथ उतरने की संभावना है।
अक्षर ने इंग्लैंड की पारी में सबसे अहम समय पर गेंदबाज़ी करते हुए शतकीय साझेदारी तोड़ी और फिर निचले क्रम को समेटकर जो रूट को आख़िरी ओवरों तक बल्लेबाज़ी करने का मौक़ा नहीं दिया।
हालांकि टीम प्रबंधन को उनकी बल्लेबाज़ी शायद इससे भी ज़्यादा पसंद आई होगी। लक्ष्य का पीछा करते हुए जब भारत लगातार विकेट गंवाकर मुश्किल में था, तब अक्षर ने वॉशिंगटन सुंदर के साथ मिलकर पारी संभाली।
दोनों ने पांचवें विकेट के लिए 100 से ज़्यादा रन जोड़े। इस साझेदारी में अक्षर ने आक्रामक भूमिका निभाई और भारत को जीत की मंजिल तक पहुंचाने में अहम योगदान दिया।
चार विकेट, नाबाद अर्धशतक और प्लेयर ऑफ द मैच का पुरस्कार। किसी ऑलराउंडर के लिए इससे बेहतर प्रदर्शन की कल्पना करना मुश्किल है।
कप्तान गिल 80 रन बनाकर सहज बल्लेबाज़ी कर रहे थे, लेकिन चोट के कारण उन्हें रिटायर्ड हर्ट होना पड़ा। हालांकि बाद में उन्होंने स्पष्ट किया कि यह सिर्फ़ ऐंठन थी और उन्हें उम्मीद है कि वह गुरुवार को कार्डिफ में होने वाले दूसरे मैच के लिए फिट रहेंगे।
भारत का स्कोर 149 रन पर दो विकेट था, लेकिन जल्द ही वह 160 रन पर चार विकेट हो गया और इंग्लैंड के पास वापसी का मौक़ा था। हालांकि गेंदबाज़ी में 62 रन देकर चार विकेट लेने वाले अक्षर पटेल ने नाबाद 57 रन और वॉशिंगटन सुंदर ने नाबाद 52 रन बनाकर भारत को आसानी से जीत दिला दी।
एक समय लग रहा था कि मुक़ाबला दोपहर तक भी नहीं खिंचेगा, लेकिन जो रूट और लियाम डॉसन के बीच 111 रन की साझेदारी ने इंग्लैंड को संभाला।
डॉसन के 68 रन अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट के किसी भी फॉर्मैट में इंग्लैंड के लिए उनका सर्वोच्च स्कोर था, जबकि रूट ने अपने चिर-परिचित अंदाज़ में शानदार बल्लेबाज़ी करते हुए नाबाद 76 रन बनाए।
इंग्लैंड ने अपने आख़िरी चार विकेट 30 रन पर गंवा दिए और रूट दूसरे छोर पर नाबाद रह गए। भारत को ऐसा लक्ष्य मिला, जो कभी भी पर्याप्त नहीं लग रहा था।
इंग्लैंड टी20 क्रिकेट में विश्व की नंबर वन टीम बन गई है। इसके बावजूद, वनडे टीम की यह एक जानी-पहचानी हार थी। इसने स्पष्ट कर दिया कि 19 महीने बाद विश्व कप की दावेदार बनने के लिए इंग्लैंड को अभी कितना काम करना है।
विश्व कप के लिए स्वत: क्वालिफिकेशन का सवाल भी बना हुआ है। इंग्लैंड विश्व रैंकिंग में आठवें स्थान पर है और उसे शीर्ष नौ में बने रहना होगा। हालांकि दसवें स्थान पर मौजूद वेस्ट इंडीज की मौजूदा फॉर्म को देखते हुए लगता है कि मैकुलम की टीम क्वालिफाइंग टूर्नामेंट खेले बिना जगह बना लेगी।
जनवरी में श्रीलंका में मिली जीत को शामिल करने के बावजूद, यह इंग्लैंड की पिछले 20 वनडे मैचों में 14वीं हार थी।
इस मुकाबले में पिच से तेज़ गेंदबाज़ों को कुछ मदद मिल रही थी, लेकिन इंग्लैंड की टीम में एक विशेषज्ञ तेज़ गेंदबाज़ की कमी नज़र आई। उसके ऑलराउंडर भी भारतीय ऑलराउंडरों के मुक़ाबले प्रभावी नहीं रहे।
अंत तक मुक़ाबला मेहमान टीम के लिए आसान जीत में बदल गया, जिससे बर्मिंघम में मौजूद शोरगुल करने वाले भारत के फ़ैंस बेहद ख़ुश नज़र आए।
मौजूदा विश्व चैंपियन भारत ने टी20 सिरीज़ में बेहद ख़राब प्रदर्शन किया था, लेकिन इस वनडे टीम में मौजूद बड़े सितारों को देखते हुए सिरीज़ का चुनौतीपूर्ण होना तय था।
बुमराह के शुरुआती स्पेल ने एजबेस्टन में रोमांच की लहर पैदा कर दी, जबकि 37 वर्षीय कोहली, जो शायद इंग्लैंड में अपनी आख़िरी सिरीज़ खेल रहे हैं, कवर क्षेत्र में बेहद चुस्त और सक्रिय दिखे।
39 वर्षीय रोहित भी संभवतः इस देश में आख़िरी बार खेल रहे हैं। लक्ष्य का पीछा शुरू हुआ तो रोहित 11 रन बनाकर सैम करन की गेंद मिड-ऑन पर खेल बैठे। अगले ओवर में कोहली पांच रन बनाकर जोफ्रा आर्चर की गेंद पर साफ़ तौर पर एलबीडब्ल्यू आउट हो गए।
गिल इस मैदान पर सहज महसूस करते हैं। पिछले साल उन्होंने यहां एक टेस्ट मैच में 430 रन बनाए थे. श्रेयस अय्यर के साथ 101 रन की साझेदारी ने मुक़ाबला भारत की पकड़ में पहुंचा दिया। इस दौरान गिल ने कई खूबसूरत ड्राइव लगाए।
गिल ने जोश टंग की गेंद पर पुल शॉट से चौका लगाया ही था कि उन्हें ऐंठन होने लगी। वह मैदान से बाहर चले गए। इसके बाद अय्यर हैरी ब्रूक के सीधे थ्रो पर रन आउट हो गए और केएल राहुल टंग की गेंद को अपने विकेटों पर खेल बैठे।
यह तर्क किया जा सकता है कि लियाम डॉसन की मौजूदगी के कारण इंग्लैंड की प्लेइंग इलेवन में स्पिन गेंदबाज़ों की संख्या ज़रूरत से ज़्यादा हो गई।
अगर जेमी ओवरटन फिट होते, तो संभव है कि डॉसन को खेलने का मौक़ा नहीं मिलता। लेकिन उनकी अनुपस्थिति में डॉसन ने इंग्लैंड को बड़ी शर्मिंदगी से बचा लिया।
इंग्लैंड की शुरुआती बल्लेबाज़ी बेहद ख़राब रही। टीम 61 रन पर बिना किसी नुक़सान से 64 रन पर तीन विकेट और फिर 107 रन पर छह विकेट तक पहुंच गई।
बेन डकेट ने 43 रन बनाए, लेकिन नए ओपनर की भूमिका में जैकब बेथेल सहज नहीं दिखे। वहीं, इंग्लैंड के लिए 200 वनडे खेलने वाले दूसरे खिलाड़ी बने जोस बटलर सिर्फ पाँच रन ही बना सके।
जसप्रीत बुमराह का प्रदर्शन शानदार रहा। उनके आंकड़े भले ही एक विकेट पर 31 रन रहे हों, लेकिन उन्होंने इससे कहीं बेहतर गेंदबाज़ी की। उनका एकमात्र विकेट भी बेहद अहम था, जब हैरी ब्रूक स्लिप में कैच दे बैठे।
इंग्लैंड के नंबर आठ बल्लेबाज डॉसन 22वें ओवर में जो रूट का साथ देने आए और उन्होंने तुरंत पारी को स्थिरता दी। उन्होंने मज़बूत रक्षात्मक बल्लेबाज़ी की और कई मौकों पर रूट से ज़्यादा स्ट्राइक अपने पास रखी।
डॉसन ने 83 गेंदों का सामना किया, जो उनके पिछले नौ वनडे मैचों में खेली गई कुल गेंदों से भी ज़्यादा था।
रूट को सात रन पर जीवनदान मिला, जिसके बाद उन्होंने शानदार बल्लेबाज़ी की। 2025 की शुरुआत से इस फॉर्मैट में उनका औसत 70 का है।
आदिल राशिद, जोफ्रा आर्चर और जोश टंग अक्षर की सिर्फ़ छह गेंदों के भीतर आउट हो गए। रूट के पास दूसरे छोर पर कोई साथी नहीं बचा और इंग्लैंड की पूरी टीम ऑल आउट हो गई। पिछले 19 वनडे मैचों में यह 11वीं बार था जब इंग्लैंड की टीम पूरे 50 ओवर भी नहीं खेल सकी।
बीबीसी के लिए कलेक्टिव न्यूज़रूम की ओर से प्रकाशित.
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