केन्या में इस्कॉन की रथ यात्रा में भारतीय उच्चायोग की भागीदारी पर विवाद गहराया, सुदर्शन पटनायक ने विदेश मंत्री से हस्तक्षेप की मांग की।
लखनऊ, भारत 12 जुल॰ 2026 ALN: केन्या में इस्कॉन द्वारा आयोजित रथ यात्रा में भारतीय उच्चायोग के अधिकारियों की भागीदारी पर ओडिशा में विवाद गहरा गया है। रेत कलाकार सुदर्शन पटनायक ने विदेश मंत्री एस जयशंकर से हस्तक्षेप की मांग की है, जबकि पुरी मंदिर प्रबंध समिति भी केंद्र सरकार से संपर्क करेगी।
केन्या में इस्कॉन की तरफ से आयोजित रथ यात्रा में भारतीय उच्चायोग के अधिकारियों के शामिल होने पर ओडिशा में भगवान जगन्नाथ के भक्तों के बीच भारी नाराजगी है। इस गैर-पारंपरिक समय पर आयोजित रथ यात्रा को लेकर भक्तों ने विरोध जताया है। पद्मश्री पुरस्कार विजेता और प्रसिद्ध रेत कलाकार सुदर्शन पटनायक ने विदेश मंत्री एस जयशंकर से इस मामले में हस्तक्षेप करने का अनुरोध किया है। उन्होंने विदेश मंत्री से अपील की है कि वे भारतीय राजदूतों और राजनयिकों को केवल उन्हीं रथ यात्रा कार्यक्रमों में शामिल होने की सलाह दें, जो पुरी के श्री जगन्नाथ मंदिर की तिथियों और रीति-रिवाजों के अनुसार आयोजित होते हैं।
श्री जगन्नाथ मंदिर प्रबंध समिति के पूर्व सदस्य सुदर्शन पटनायक ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'एक्स' पर एक पोस्ट में आरोप लगाया कि इस तरह बिना तय समय के रथ यात्रा का आयोजन करने से दुनिया भर के करोड़ों जगन्नाथ भक्तों की धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंची है। उन्होंने केन्या में भारतीय उच्चायोग के अधिकारियों की भागीदारी पर गहरी चिंता व्यक्त की। खबरों के अनुसार, इन अधिकारियों ने रथ यात्रा के दौरान रथ खींचा था और इस कार्यक्रम की तस्वीरें मिशन के आधिकारिक सोशल मीडिया खातों पर भी साझा की थीं। पटनायक ने विदेश मंत्री को टैग करते हुए लिखा कि भारतीय दूतावासों को ऐसे कार्यक्रमों से जुड़ने से पहले पुरी मंदिर की पारंपरिक रीतियों का ध्यान रखना चाहिए।
इस बीच, पुरी के गजपति महाराज दिव्यसिंह देव ने बताया कि श्री जगन्नाथ मंदिर प्रबंध समिति इस मामले में केंद्र सरकार से हस्तक्षेप की मांग करेगी। उन्होंने बताया कि इस्कॉन ने विदेशों में मंदिर की परंपरा के अनुसार तय तिथियों पर रथ यात्रा आयोजित करने के अनुरोध को खारिज कर दिया है। गजपति महाराज ने चार जुलाई को इस्कॉन के नए अध्यक्ष को पत्र लिखा था, जिसका जवाब उन्हें सात जुलाई को मिला। इस जवाब में इस्कॉन ने स्पष्ट किया कि वह भारत से बाहर अपनी तय की गई तिथियों पर ही रथ यात्रा का आयोजन जारी रखेगा।
गजपति महाराज दिव्यसिंह देव ने कहा कि मंदिर प्रबंध समिति ने अब ओडिशा सरकार से चर्चा करने के बाद इस मामले को केंद्र सरकार के सामने उठाने का फैसला किया है। उन्होंने बताया कि राज्य सरकार के साथ विचार-विमर्श करके इस विषय को केंद्र के संज्ञान में लाया जाएगा। इसके लिए पुरी मंदिर का एक प्रतिनिधिमंडल रथ यात्रा उत्सव के समाप्त होने के बाद दिल्ली का दौरा करेगा और केंद्र सरकार से इस मामले में हस्तक्षेप करने का औपचारिक अनुरोध करेगा।
भगवान जगन्नाथ की रथ यात्रा, जो हर साल पुरी में आयोजित की जाती है, हिंदू धर्म में एक महत्वपूर्ण धार्मिक उत्सव है। यह उत्सव भगवान जगन्नाथ, उनके भाई बलभद्र और बहन सुभद्र के रथ पर यात्रा करने का प्रतीक है। रथ यात्रा की तिथि और समय बहुत महत्वपूर्ण होते हैं, और इसे पुरी के श्री जगन्नाथ मंदिर की परंपराओं के अनुसार ही मनाया जाता है। इसीलिए, जब इस्कॉन जैसी संस्थाएं इस उत्सव को अपने तरीके से मनाने का प्रयास करती हैं, तो यह विवाद का कारण बन सकता है।
ओडिशा के भक्तों के बीच इस विवाद ने एक बड़ी बहस को जन्म दिया है। भक्तों का मानना है कि रथ यात्रा की परंपरा का पालन करना आवश्यक है, और किसी भी प्रकार का परिवर्तन या अनियमितता धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंचा सकती है। इसके अलावा, भक्तों का तर्क है कि जब भारतीय उच्चायोग के अधिकारी इस तरह के कार्यक्रमों में भाग लेते हैं, तो यह एक संदेश भेजता है कि वे इस धार्मिक परंपरा का सम्मान नहीं कर रहे हैं।
इस्कॉन, जिसे अंतरराष्ट्रीय कृष्णभावनामृत संघ के नाम से भी जाना जाता है, एक वैश्विक धार्मिक संगठन है जो कृष्ण भक्ति का प्रचार करता है। संगठन ने अपनी स्थापना के बाद से ही भगवान कृष्ण और उनके अवतारों की पूजा के लिए विभिन्न समारोहों का आयोजन किया है। इस्कॉन का रुख इस विवाद में स्पष्ट है; वे अपने निर्धारित कार्यक्रमों का पालन करना चाहते हैं और मानते हैं कि उनके रथ यात्रा के आयोजन का अपना महत्व है। इस्कॉन का कहना है कि वे धार्मिक परंपराओं का सम्मान करते हैं, लेकिन साथ ही वे अपनी गतिविधियों को भी स्वतंत्रता से संचालित करना चाहते हैं।
इस विवाद का समाधान कैसे होगा, यह देखना दिलचस्प होगा। यदि पुरी मंदिर प्रबंध समिति और इस्कॉन के बीच संवाद स्थापित होता है, तो यह संभव है कि एक समझौता किया जा सके। हालांकि, यदि विवाद जारी रहता है, तो यह भारतीय उच्चायोग के लिए भी एक चुनौती बन सकता है। विदेशों में भारतीय संस्कृति और धार्मिक परंपराओं का सम्मान करना एक महत्वपूर्ण मुद्दा है, और यदि इस तरह के विवाद बढ़ते हैं, तो इससे भारतीय समुदाय में तनाव बढ़ सकता है।
केन्या में इस्कॉन द्वारा आयोजित रथ यात्रा का विवाद न केवल ओडिशा के भक्तों के लिए महत्वपूर्ण है, बल्कि यह भारतीय संस्कृति और धार्मिक परंपराओं के लिए भी एक चुनौती प्रस्तुत करता है। इस मामले में आगे की कार्रवाई और संभावित समाधान का इंतजार रहेगा, और यह देखना होगा कि क्या भारतीय उच्चायोग इस विवाद को सुलझाने में कोई भूमिका निभा सकता है।
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