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बद्रीनाथ चढ़ावा विवाद- सस्पेंड निजी सचिव पर FIR:CM बोले- यह मां-बाप की हत्या जैसा महापाप; जांच के लिए हाई लेवल कमेटी बनी

ALN NEWS DESK
एएलएन न्यूज डेस्क
अपडेटेड : Jul 8, 2026, 11:21 AM IST
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बद्रीनाथ धाम के चढ़ावे में कथित हेरफेर के मामले में पहली बड़ी आपराधिक कार्रवाई हुई है। मुख्यमंत्री ने मामले की गंभीरता को देखते हुए उच्चस्तरीय समिति का गठन किया है।

बद्रीनाथ धाम के चढ़ावे में कथित हेरफेर मामले में पहली बड़ी आपराधिक कार्रवाई हुई है। मंदिर अधिकारी युद्धवीर पुष्पवान की तहरीर पर निलंबित निजी सचिव प्रमोद नौटियाल के खिलाफ बद्रीनाथ थाने में भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 306 और 316(5) के तहत एफआईआर दर्ज कर पुलिस ने जांच शुरू कर दी है।

मामला सामने आने के बाद मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने मामले की जांच के लिए हाई लेवल कमेटी गठित की। जिसे 15 दिनों के भीतर रिपोर्ट सौंपने के निर्देश दिए गए हैं। इस दौरान सीएम ने कहा- ये गौहत्या जैसा पाप है। जो लोग ऐसे पवित्र स्थानों पर इस प्रकार का कृत्य करते हैं, उनका अपराध वैसा ही है जैसे कोई अपने मां-बाप की हत्या कर दे। यह महापाप है। यह अक्षम्य अपराध है, इसे किसी भी हाल में बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।

इस बीच, चढ़ावा विवाद उजागर करने वाले काल भैरव सेना के अध्यक्ष संदीप खत्री को बुधवार को पुलिस ने देहरादून स्थित उनके कार्यालय में करीब ढाई घंटे तक नजरबंद रखा। खत्री मुख्यमंत्री को ज्ञापन देने जा रहे थे। इससे एक दिन पहले भी पुलिस उनके आवास पर तैनात रही थी।

जानिए क्या है पूरा मामला…

  1. CCTV फुटेज से शुरू हुआ विवाद: 2 जुलाई की CCTV फुटेज सामने आने के बाद चढ़ावे में गड़बड़ी के आरोप लगे। BKTC के अनुसार, सुबह करीब 9 बजे से 9:30 बजे के बीच चढ़ावा गणना केंद्र से मंदिर की राशि नियमों के विपरीत निकाले जाने के संकेत मिले। इसके बाद भैरव सेना ने 3 जुलाई को BKTC के सीईओ सोहन सिंह रांगड़ को लिखित शिकायत देकर जांच की मांग की।
  2. प्रथम दृष्टया अनियमितता के संकेत मिले: सोशल मीडिया पर मामला सामने आने के बाद BKTC ने आंतरिक जांच समिति गठित की। प्रारंभिक रिपोर्ट में प्रथम दृष्टा मंदिर की धनराशि अनधिकृत रूप से उठाए जाने के संकेत मिले थे। इसी आधार पर अध्यक्ष कार्यालय में तैनात प्रमोद नौटियाल को 7 जुलाई को निलंबित कर 48 घंटे का कारण बताओ नोटिस जारी किया गया।
  3. CCTV फुटेज के आधार पर कार्रवाई: प्रारंभिक जांच के बाद प्रमोद नौटियाल को निलंबित किया गया। समिति ने दावा किया कि CCTV फुटेज में वे चढ़ावा गणना के दौरान सामान्य प्रक्रिया से अलग कुछ सामान अपने मोबाइल के साथ रखते हुए दिखाई दिए। इसी आधार पर उनसे स्पष्टीकरण मांगा गया।
  4. 40 दिन की CCTV फुटेज खंगाली जाएगी: जांच अब सिर्फ 2 जुलाई की घटना तक सीमित नहीं रहेगी। बद्रीनाथ मंदिर परिसर के 32 CCTV कैमरों की करीब 40 दिन की रिकॉर्डिंग की जांच होगी, ताकि यह पता चल सके कि ऐसी घटना पहले भी हुई थी या नहीं।
  5. गणना व्यवस्था और रिकॉर्ड भी जांच के दायरे में: जांच टीम चढ़ावा गणना की पूरी व्यवस्था की समीक्षा करेगी। इसके अलावा पिछले 10-12 वर्षों में समिति को मिले 20-25 लैपटॉप के रिकॉर्ड और अन्य संपत्तियों की भी जांच होगी।

समिति की ओर से जारी नोटिस में कहा गया है कि 2 जुलाई 2026 की CCTV फुटेज में प्रमोद नौटियाल थाली भेंट गणना के दौरान सामान्य प्रक्रिया से अलग कुछ सामान अपने मोबाइल के साथ रखते हुए दिखाई दिए। पूरी घटना कैमरे में रिकॉर्ड होने का दावा करते हुए उनसे 48 घंटे के भीतर स्पष्टीकरण मांगा गया कि उन्होंने अपने पास क्या रखा था।

पुलिस अधिकारियों का कहना है कि मामले से जुड़े दस्तावेज, ड्यूटी रिकॉर्ड और अन्य साक्ष्यों की जांच की जा रही है। जांच पूरी होने के बाद ही किसी भी स्तर पर जिम्मेदारी तय की जाएगी।

20-25 लैपटॉप का भी नहीं मिला रिकॉर्ड: जांच के दौरान एक और मामला सामने आया है। सूत्रों के मुताबिक पिछले 10 से 12 वर्षों में BKTC को मिले करीब 20 से 25 लैपटॉप का कोई रिकॉर्ड समिति के पास उपलब्ध नहीं है। ये लैपटॉप मंदिर समिति के कार्यालय में इस्तेमाल के लिए SBI, PNB और कैनरा बैंक ने दिए थे। स्टॉक रजिस्टर में भी इन लैपटॉप का उल्लेख नहीं मिला है। आशंका है कि समिति से जुड़े कुछ लोग इन्हें अपने साथ ले गए।

BKTC का कहना है कि लैपटॉप के रिकॉर्ड और स्टॉक रजिस्टर की भी जांच कराई जाएगी। यदि किसी स्तर पर अनियमितता सामने आती है तो संबंधित लोगों के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।

हाई लेवल कमेटी 15 दिन में सौंपेगी रिपोर्ट: चढ़ावा विवाद सामने आने के बाद मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने विस्तृत जांच के निर्देश दिए। इसके तहत शासन ने तीन सदस्यीय उच्चस्तरीय समिति का गठन किया है। गढ़वाल मंडल आयुक्त आनंद स्वरूप को समिति का अध्यक्ष बनाया गया है, जबकि पूर्व जिलाधिकारी चमोली एवं राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन (NHM) के प्रबंध निदेशक संदीप तिवारी और चिकित्सा एवं स्वास्थ्य विभाग के वित्त निदेशक जगत सिंह चौहान को सदस्य नामित किया गया है।

समिति को पूरे प्रकरण की जांच कर 15 दिनों के भीतर अपनी रिपोर्ट शासन को सौंपनी होगी। सरकार ने कहा है कि धार्मिक संस्थानों में पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करते हुए दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।

जांच के केंद्र में ये बड़े सवाल: एफआईआर दर्ज होने के बाद जांच कई महत्वपूर्ण बिंदुओं पर केंद्रित हो गई है। सबसे बड़ा सवाल यह है कि अध्यक्ष कार्यालय में तैनात कर्मचारी प्रमोद नौटियाल को चढ़ावा गणना और प्रोटोकॉल जैसी संवेदनशील जिम्मेदारियां किसके आदेश पर सौंपी गईं।

जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने का प्रयास करेंगी कि चढ़ावे की निगरानी और गणना की निर्धारित प्रक्रिया का पालन किया गया था या नहीं। यदि प्रक्रिया में कहीं चूक हुई है तो उसकी जिम्मेदारी किस स्तर पर तय होगी।

जानिए कौन हैं प्रमोद नौटियाल? प्रमोद नौटियाल लंबे समय से बद्रीनाथ-केदारनाथ मंदिर समिति से जुड़े रहे हैं। वे बीकेटीसी अध्यक्ष कार्यालय में निजी सचिव की जिम्मेदारी निभा रहे थे। समिति के अनुसार उन्हें चढ़ावे की व्यवस्था और प्रोटोकॉल से जुड़े कार्यों में भी लगाया गया था।

मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक नौटियाल वर्ष 2014 में इंटरनेट कोऑर्डिनेटर के रूप में समिति से जुड़े थे। बाद में उन्हें निजी सहायक बनाया गया। आगे चलकर नियमों में बदलाव के बाद उन्हें उच्च जिम्मेदारियों तक पहुंचने का अवसर मिला।

हालांकि बीकेटीसी अध्यक्ष हेमंत द्विवेदी का कहना है कि नौटियाल उनके निजी सचिव नहीं थे, बल्कि समिति के कर्मचारी के रूप में कार्यरत थे।

BKTC अध्यक्ष बोले- CCTV सुरक्षित कर उसी दिन जांच बिठाई: बद्रीनाथ-केदारनाथ मंदिर समिति (बीकेटीसी) के अध्यक्ष हेमंत द्विवेदी ने कहा कि बद्रीनाथ धाम के चढ़ावे में कथित अनियमितता के आरोप सामने आते ही समिति ने तत्काल कार्रवाई शुरू कर दी थी। मुख्य कार्याधिकारी (CEO) को गणना कक्ष से जुड़े सभी कर्मचारियों, अधिकारियों, सीसीटीवी फुटेज और अन्य साक्ष्यों को सुरक्षित रखने के निर्देश दिए गए। उसी दिन शाम को वरिष्ठ अधिकारियों की जांच समिति भी गठित कर दी गई।

उन्होंने बताया कि जांच दल के बद्रीनाथ पहुंचने पर प्रथम दृष्टा कुछ संदेह सामने आया। इसके बाद संबंधित कर्मचारी को तत्काल निलंबित कर दिया गया और देर रात उसके खिलाफ बद्रीनाथ थाने में एफआईआर दर्ज कराई गई।

द्विवेदी ने कहा कि मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने भी मामले की निष्पक्ष और समयबद्ध जांच के लिए गढ़वाल आयुक्त की अध्यक्षता में उच्चस्तरीय समिति गठित की है। उन्होंने भरोसा दिलाया कि जांच रिपोर्ट जल्द सामने आएगी और यदि कोई दोषी पाया गया तो उसे किसी भी कीमत पर बख्शा नहीं जाएगा।

पहले भी विवादों में रही बीकेटीसी: बदरीनाथ-केदारनाथ मंदिर समिति (BKTC) का नाम इससे पहले भी कई विवादों में सामने आ चुका है। वित्तीय अनियमितताओं से जुड़े कुछ मामलों की जांच जिला पुलिस से लेकर पुलिस महानिरीक्षक (आईजी) स्तर तक पहुंची थी, लेकिन अब तक उन मामलों में कोई स्पष्ट कार्रवाई या अंतिम निष्कर्ष सार्वजनिक नहीं किया गया।

वर्ष 2023 में बदरीनाथ धाम में श्रद्धालुओं से ऑनलाइन दान लेने के लिए लगाए गए क्यूआर कोड को लेकर भी सवाल उठे थे। उस समय यह चर्चा रही कि क्यूआर कोड के माध्यम से प्राप्त दान राशि किस खाते में जमा हुई और उसका उपयोग किस उद्देश्य के लिए किया गया। हालांकि इस मामले में भी स्थिति पूरी तरह स्पष्ट नहीं हो सकी।

वर्ष 2020 में बीकेटीसी में कथित अवैध नियुक्ति का मामला भी सामने आया था। विवाद बढ़ने पर तत्कालीन अध्यक्ष स्वर्गीय मोहन प्रसाद थपलियाल को नियुक्ति निरस्त करनी पड़ी थी। अब मंदिर में चढ़ावे की गणना के दौरान कथित हेराफेरी का मामला सामने आने के बाद एक बार फिर समिति की कार्यप्रणाली सवालों के घेरे में आ गई है।

विपक्ष ने उठाए सवाल: मामले को लेकर राजनीतिक बयानबाजी भी तेज हो गई है। उत्तराखंड कांग्रेस के वरिष्ठ उपाध्यक्ष धीरेंद्र प्रताप ने बद्रीनाथ में कथित चढ़ावा गड़बड़ी और अन्य प्रशासनिक अनियमितताओं के लिए बीकेटीसी नेतृत्व को जिम्मेदार ठहराते हुए नैतिक आधार पर समिति अध्यक्ष के इस्तीफे की मांग की है।

वहीं, बद्रीनाथ विधायक लखपत बुटोला ने देहरादून में प्रेस वार्ता कर पूरे मामले की जांच तीन वर्तमान (सीटिंग) न्यायाधीशों की समिति से कराने की मांग उठाई। उनका कहना है कि इतनी गंभीर घटना की निष्पक्ष और पारदर्शी जांच स्वतंत्र समिति से ही संभव है।

कांग्रेस का आरोप है कि मामले में वास्तविक जिम्मेदार लोगों को बचाने की कोशिश की जा रही है। पार्टी ने राज्यभर में मंदिरों की पारदर्शिता और जवाबदेही की मांग को लेकर विरोध कार्यक्रम भी आयोजित किए।

मायावती ने SIT जांच की मांग की: बहुजन समाज पार्टी प्रमुख मायावती ने भी मामले पर प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने बद्रीनाथ और अन्य धार्मिक स्थलों से जुड़े विवादों की निष्पक्ष जांच के लिए विशेष जांच दल (SIT) गठित करने की मांग की।

मायावती ने कहा कि धार्मिक संस्थानों के शीर्ष प्रबंधन की भूमिका की भी जांच होनी चाहिए ताकि यह स्पष्ट हो सके कि कथित गड़बड़ियां व्यक्तिगत स्तर की थीं या प्रशासनिक लापरवाही का परिणाम थीं।

भैरव सेना ने SIT जांच की मांग दोहराई: भैरव सेना ने विभागीय जांच पर सवाल उठाते हुए सुप्रीम कोर्ट के सेवानिवृत्त न्यायाधीश की निगरानी में SIT से जांच कराने और घटना वाले दिन की CCTV फुटेज सार्वजनिक करने की मांग की है।

धर्मस्व विभाग ने भी मामले का संज्ञान लेते हुए BKTC से चढ़ावे की गणना, निगरानी व्यवस्था और सुरक्षा प्रबंधन से जुड़ी विस्तृत रिपोर्ट तलब की है।

एफआईआर दर्ज होने और उच्चस्तरीय जांच शुरू होने के बाद अब पूरे मामले की जिम्मेदारी तय होने पर नजर रहेगी। पुलिस जांच और 15 दिन में आने वाली समिति की रिपोर्ट से यह स्पष्ट होने की उम्मीद है कि कथित अनियमितता कैसे हुई, निगरानी व्यवस्था में कहां चूक हुई और इसके लिए कौन जिम्मेदार है। बद्रीनाथ धाम देश के सबसे महत्वपूर्ण तीर्थस्थलों में शामिल है। ऐसे में श्रद्धालुओं के चढ़ावे से जुड़े किसी भी विवाद पर सरकार, प्रशासन और मंदिर समिति की जवाबदेही स्वाभाविक रूप से बढ़ जाती है। आने वाले दिनों में पुलिस जांच और उच्चस्तरीय समिति की रिपोर्ट इस पूरे प्रकरण की दिशा तय करेगी।

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