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राममंदिर ट्रस्ट के कोषाध्यक्ष ने चढ़ावे से 3 करोड़ की चोरी का आरोप लगाया

ALN NEWS DESK
एएलएन न्यूज डेस्क
अपडेटेड : Jul 14, 2026, 10:35 AM IST
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अयोध्या में राम मंदिर चढ़ावे चोरी के मामले में ट्रस्ट के कोषाध्यक्ष स्वामी गोविंददेव गिरि ने 3 करोड़ रुपये की चोरी की बात कही।

अयोध्या में राम मंदिर निर्माण के लिए चढ़ावे में हुई चोरी का मामला हाल ही में सुर्खियों में रहा है। श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के कोषाध्यक्ष स्वामी गोविंददेव गिरि ने आरोप लगाया है कि इस चोरी की मात्रा लगभग 3 करोड़ रुपये हो सकती है। हालांकि, उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि 14 करोड़ रुपये के सोने-चांदी के जेवर और नकदी चोरी होने की बात गलत है। यह मामला तब और गंभीर हो गया जब ट्रस्ट के अन्य सदस्यों के नाम भी विवाद में आ गए हैं।

स्वामी गोविंददेव गिरि ने पुणे में एक प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान अपने इस्तीफे की खबरों को खारिज किया। उन्होंने कहा कि उन्होंने कोई इस्तीफा नहीं दिया है और वह अपनी भूमिका में बने रहेंगे। यह बयान तब आया है जब ट्रस्ट में आंतरिक विवाद और असहमति की खबरें सामने आ रही हैं। ट्रस्ट के कार्यों और वित्तीय प्रबंधन के बारे में बढ़ती चिंताओं के बीच, यह महत्वपूर्ण है कि ट्रस्ट के प्रमुख सदस्य स्थिति को स्पष्ट करें।

चोरी के इस मामले ने न केवल ट्रस्ट के भीतर की स्थिति को तनावपूर्ण बना दिया है, बल्कि यह अयोध्या में राम मंदिर के निर्माण के लिए चढ़ावे के प्रबंधन पर भी सवाल उठाता है। राम मंदिर का निर्माण भारतीय समाज और राजनीति में एक महत्वपूर्ण विषय रहा है, और इस तरह की घटनाएं उस विश्वास को कमजोर कर सकती हैं जो श्रद्धालुओं ने ट्रस्ट और इसके सदस्यों में रखा है।

अयोध्या विकास प्राधिकरण (ADA) ने इस चोरी के मामले में एक महत्वपूर्ण कदम उठाया है। उन्होंने लवकुश मिश्रा के निर्माणाधीन मकान पर अंतिम नोटिस चस्पा कर दिया है। यह नोटिस पहले 3 जुलाई को जारी किया गया था, लेकिन लवकुश की पत्नी सुप्रिया मिश्रा ने इसका कोई जवाब नहीं दिया। अब प्राधिकरण ने 15 जुलाई तक का अंतिम अवसर दिया है, और चेतावनी दी है कि अगर जवाब नहीं मिला तो निर्माणाधीन मकान को सील कर दिया जाएगा। यह स्थिति अयोध्या में विकास और निर्माण कार्यों की पारदर्शिता को लेकर सवाल उठाती है।

पुलिस ने मामले में मुख्य आरोपियों रमाशंकर मिश्रा और रिटायर्ड बैंक कर्मी सुभाष श्रीवास्तव को 14 घंटे के लिए रिमांड पर लिया है। पुलिस ने कोर्ट से 7 दिन की रिमांड मांगी थी, ताकि उन्हें पूछताछ के लिए लाया जा सके। इस रिमांड के दौरान पुलिस दोनों आरोपियों से चोरी के संबंध में महत्वपूर्ण जानकारी प्राप्त करने की उम्मीद कर रही है। इससे पहले, पुलिस ने अन्य चार आरोपियों को रिमांड पर लेकर पूछताछ की थी।

श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट की वेबसाइट से पूर्व महासचिव चंपत राय और ट्रस्टी डॉ. अनिल मिश्र का नाम हटा दिया गया है। यह कदम ट्रस्ट के भीतर के विवादों को और बढ़ा सकता है, क्योंकि इससे यह संकेत मिलता है कि ट्रस्ट में कुछ गड़बड़ियां चल रही हैं। इससे पहले, दोनों की VIP पास आईडी भी ब्लॉक कर दी गई थी, जो ट्रस्ट के भीतर के प्रशासनिक मुद्दों को दर्शाता है। ट्रस्ट के अंतरिम महासचिव कृष्ण मोहन और ट्रस्टी महंत दिनेंद्र दास के नाम पर नई VIP पास आईडी जारी की गई है, जो नए प्रशासनिक ढांचे की ओर इशारा करती है।

इस बीच, अयोध्या में राजनीतिक गतिविधियां भी तेज हो गई हैं। समाजवादी पार्टी (सपा) के खिलाफ कई जिलों में पोस्टर लगाए गए हैं, जिनमें मुलायम सिंह यादव और अखिलेश यादव की तस्वीरों के साथ लिखा गया है, 'दिल में बाबर, मुंह में राम।' यह राजनीतिक बयानबाजी अयोध्या में चल रहे धार्मिक और राजनीतिक संघर्षों को और बढ़ा सकती है। मंगलवार सुबह सपा कार्यकर्ताओं ने इन होर्डिंग्स को फाड़ दिया, जो इस मुद्दे पर सपा के प्रति बढ़ते विरोध को दर्शाता है।

पुलिस ने चढ़ावा चोरी के मामले में आरोपी रामशंकर यादव उर्फ टिन्नू और सुभाष श्रीवास्तव को रिमांड पर लेने के लिए मंगलवार को कोर्ट में अर्जी दाखिल करने की योजना बनाई है। सूत्रों के अनुसार, पुलिस दोनों की 7 दिन की रिमांड मांग सकती है। यदि पुलिस को रिमांड मिलती है, तो इससे उन्हें आरोपियों से गहन पूछताछ करने और मामले की गहराई में जाने का अवसर मिलेगा। इससे पहले भी, पुलिस ने अन्य आरोपियों को रिमांड पर लेकर पूछताछ की थी, जो इस मामले में महत्वपूर्ण जानकारी प्रदान कर सकते हैं।

इस चोरी के मामले का प्रभाव केवल अयोध्या में ही नहीं, बल्कि पूरे देश में धार्मिक और सांस्कृतिक मुद्दों पर भी पड़ सकता है। राम मंदिर का निर्माण एक महत्वपूर्ण धार्मिक प्रतीक है और इससे जुड़े विवादों का राजनीतिक और सामाजिक स्तर पर व्यापक असर हो सकता है। ट्रस्ट की वित्तीय पारदर्शिता और प्रशासनिक कार्यप्रणाली पर सवाल उठने के कारण, यह मामला न केवल धार्मिक विश्वासों को प्रभावित कर सकता है, बल्कि राजनीतिक दलों के बीच की प्रतिस्पर्धा को भी बढ़ा सकता है।

अयोध्या में राम मंदिर का निर्माण एक लंबे समय से चल रहा मुद्दा है, और यह भारतीय राजनीति और समाज में गहरे धागों से बंधा हुआ है। राम मंदिर के निर्माण की प्रक्रिया को लेकर विभिन्न राजनीतिक दलों के बीच मतभेद और संघर्ष रहे हैं। इस संदर्भ में, चोरी का यह मामला न केवल ट्रस्ट की छवि को प्रभावित करेगा, बल्कि यह उन राजनीतिक दलों के लिए भी एक अवसर हो सकता है जो इस मुद्दे को अपने फायदे के लिए भुनाना चाहते हैं।

इस मामले के विकास पर नजर रखना महत्वपूर्ण है, क्योंकि यह न केवल अयोध्या में बल्कि पूरे देश में धार्मिक और राजनीतिक परिदृश्य को प्रभावित कर सकता है। राम मंदिर ट्रस्ट की गतिविधियों और प्रशासनिक निर्णयों का ध्यान रखना आवश्यक होगा, ताकि चढ़ावे की चोरी जैसे मामलों की पुनरावृत्ति न हो सके। ट्रस्ट को अपनी वित्तीय पारदर्शिता और प्रशासनिक कार्यप्रणाली में सुधार करने की आवश्यकता है, ताकि श्रद्धालुओं का विश्वास बना रहे।

इस मामले की जांच और उसके परिणामों पर ध्यान देना आवश्यक है, ताकि भविष्य में इस प्रकार की घटनाओं को रोका जा सके और ट्रस्ट की कार्यप्रणाली में सुधार किया जा सके। इसके अलावा, यह भी देखना होगा कि राजनीतिक दल इस मामले को कैसे उठाते हैं और इसे अपने हित में कैसे उपयोग करते हैं। इस प्रकार, अयोध्या में राम मंदिर निर्माण का यह मामला न केवल धार्मिक दृष्टिकोण से महत्वपूर्ण है, बल्कि यह राजनीतिक और सामाजिक दृष्टिकोण से भी गहन प्रभाव डालने वाला है।

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