मोहन भागवत न्यूयॉर्क पहुंचे, मैडिसन स्क्वायर में कार्यक्रम: RSS के 100 साल पूरे होने पर तीन देशों का दौरा; अमेरिका, कनाडा और ब्रिटेन जाएंगे

ALN NEWS DESK
एएलएन न्यूज डेस्क
अपडेटेड : Aug 25, 2026, 10:54 PM IST
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RSS चीफ मोहन भागवत ने न्यूयॉर्क में भारतीय समुदाय का स्वागत किया। यह उनके 17 दिन के तीन देशों के दौरे का पहला चरण है।

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के प्रमुख मोहन भागवत मंगलवार को न्यूयॉर्क पहुंचे। यह उनकी 17 दिन की यात्रा का पहला चरण है, जिसमें वे अमेरिका, कनाडा और ब्रिटेन का दौरा करेंगे। न्यूयॉर्क के जॉन एफ. कैनेडी अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे पर उनकी आगवानी भारतीय महिलाओं ने तिलक लगाकर की, जो भारतीय संस्कृति और परंपरा का प्रतीक है। यह दौरा RSS के शताब्दी वर्ष के अवसर पर आयोजित ग्लोबल आउटरीच कार्यक्रम का हिस्सा है, जिसमें संघ के 100 साल पूरे होने के उपलक्ष्य में विभिन्न कार्यक्रमों का आयोजन किया जा रहा है।

भागवत के इस दौरे का उद्देश्य भारतीय मूल के लोगों और स्थानीय संगठनों के साथ संवाद स्थापित करना है। वे 29 अगस्त को न्यूयॉर्क के प्रतिष्ठित मैडिसन स्क्वायर गार्डन में ‘यूनिवर्सल वननेस’ कार्यक्रम में भाग लेंगे। इस कार्यक्रम का आयोजन अमेरिकन हिंदूज फॉर एंगेजमेंट एंड डायलॉग (AHEAD) फोरम द्वारा किया जा रहा है, जिसमें भागवत का संबोधन भी शामिल होगा।

मैडिसन स्क्वायर गार्डन में आयोजित होने वाले ‘यूनिवर्सल वननेस सेलिब्रेशन’ कार्यक्रम का उद्देश्य रक्षाबंधन के अवसर पर एकता, नागरिक जिम्मेदारी और वैश्विक सद्भाव का संदेश फैलाना है। आयोजकों के अनुसार, इस कार्यक्रम में सांस्कृतिक प्रस्तुतियों का आयोजन भी किया जाएगा, जिसमें विभिन्न धर्मों और समुदायों के लोग शामिल होंगे। यह कार्यक्रम न केवल भारतीय समुदाय के लिए महत्वपूर्ण है, बल्कि यह अमेरिका में भारतीय संस्कृति के प्रति सम्मान और स्वीकृति का प्रतीक भी है।

हालांकि, भागवत के कार्यक्रम को लेकर न्यूयॉर्क के मेयर जोहरान ममदानी ने विरोध जताया है। ममदानी ने कहा कि वे RSS की इस रैली का समर्थन नहीं करते और यह स्पष्ट किया कि न्यूयॉर्क एक बहुलवादी और धर्मनिरपेक्ष शहर है, जहां हर व्यक्ति के लिए जगह है। उन्होंने कहा कि किसी को भी बाहर रखने वाली विचारधारा का वे विरोध करते हैं। ममदानी का यह बयान इस बात का संकेत है कि न्यूयॉर्क में विभिन्न समुदायों के बीच सहिष्णुता और समरसता को बनाए रखने के लिए एक संवेदनशील दृष्टिकोण अपनाया जा रहा है।

भागवत के अमेरिका दौरे से पहले, अमेरिकी अंतरराष्ट्रीय धार्मिक स्वतंत्रता आयोग (USCIRF) ने RSS पर बैन लगाने की मांग की थी। आयोग ने 19 अगस्त को अमेरिकी सरकार से अपील की कि RSS नेताओं को उच्च स्तर की राजनयिक सुविधाएं न दी जाएं और उनसे आधिकारिक मुलाकात न की जाए। यह मांग भारत में धार्मिक स्वतंत्रता के मुद्दे पर उठाए गए सवालों के संदर्भ में आई है। भारत ने USCIRF की इस मांग पर आपत्ति जताते हुए इसे ‘पक्षपाती संस्था’ करार दिया है। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने कहा कि USCIRF लंबे समय से भारत के खिलाफ भड़काऊ बयान दे रहा है, इसलिए उनकी बातों को गंभीरता से नहीं लिया जाना चाहिए।

इससे पहले, मार्च में USCIRF ने अपनी वार्षिक रिपोर्ट में भारत में धार्मिक स्वतंत्रता की स्थिति पर चिंता जताई थी। रिपोर्ट में RSS और रॉ (RAW) जैसे संगठनों पर बैन लगाने की सिफारिश की गई थी। भारत सरकार ने इस रिपोर्ट को ‘विकृत और चुनिंदा’ बताते हुए खारिज कर दिया था। सरकार का कहना था कि रिपोर्ट में ऐसे स्रोतों का इस्तेमाल किया गया है जिनकी विश्वसनीयता पर सवाल उठते हैं और यह भारत की स्थिति की एकतरफा तस्वीर पेश करती है।

मोहन भागवत का यह दौरा कोई पहला नहीं है। इससे पहले, सितंबर 2018 में भी भागवत अमेरिका गए थे, जहां उन्होंने शिकागो में आयोजित दूसरे वर्ल्ड हिंदू कांग्रेस में भाग लिया था। इस कार्यक्रम में 60 देशों से लगभग 2,500 प्रतिनिधियों ने भाग लिया था। भागवत ने इस कांग्रेस के उद्घाटन सत्र में मुख्य भाषण दिया था। हालांकि, 2018 के दौरे में भागवत की किसी अमेरिकी राजनयिक से मुलाकात या उन्हें किसी औपचारिक सम्मान दिए जाने का कोई उल्लेख नहीं मिलता। उनका यह दौरा मुख्य रूप से वर्ल्ड हिंदू कांग्रेस और उससे जुड़े कार्यक्रमों पर केंद्रित था।

भागवत का यह हालिया दौरा कई दृष्टिकोण से महत्वपूर्ण है। यह न केवल RSS के शताब्दी वर्ष का उत्सव है, बल्कि यह भारतीय समुदाय के लिए एक मंच भी प्रदान करता है, जहां वे अपनी संस्कृति और परंपराओं को साझा कर सकते हैं। साथ ही, यह अमेरिका में भारतीयों की बढ़ती संख्या और उनकी सामाजिक, राजनीतिक और आर्थिक स्थिति को भी रेखांकित करता है। भागवत का दौरा ऐसे समय में हो रहा है जब भारत और अमेरिका के बीच संबंधों में मजबूती आई है, और यह दोनों देशों के बीच सांस्कृतिक संवाद को बढ़ावा देने का एक अवसर है।

इस दौरे के दौरान भागवत के द्वारा किए गए विचार-विमर्श और उनके द्वारा दिए गए संबोधनों का प्रभाव न केवल भारतीय समुदाय पर पड़ेगा, बल्कि यह अमेरिका में भारतीय संस्कृति की स्वीकृति और सम्मान के लिए भी महत्वपूर्ण होगा। इसके अलावा, यह कार्यक्रम विभिन्न समुदायों के बीच संवाद और सहयोग को बढ़ावा देने का भी एक साधन बन सकता है।

भागवत का यह दौरा एक ऐसे समय में हो रहा है जब दुनिया भर में धार्मिक और सांस्कृतिक मुद्दों पर बहस चल रही है। ऐसे में, भागवत का अमेरिका में होना और भारतीय संस्कृति के महत्व को उजागर करना एक सकारात्मक कदम माना जा सकता है। यह न केवल RSS के लिए, बल्कि भारतीय समुदाय के लिए भी एक महत्वपूर्ण अवसर है, जिससे वे अपनी आवाज को वैश्विक मंच पर प्रस्तुत कर सकें।

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