नर्मदा के उद्गम स्थल अमरकंटक मंदिर में दान के सोने-चांदी का कोई रिकॉर्ड नहीं है। ट्रस्ट का दावा है कि यह पुलिस स्टेशन में जमा होते हैं, लेकिन टीआई ने इनकार किया।
नई दिल्ली, भारत 15 जुल॰ 2026 ALN: मां नर्मदा के उद्गम स्थल अमरकंटक का मंदिर धार्मिक आस्था का एक प्रमुख केंद्र है, जो न केवल स्थानीय भक्तों के लिए बल्कि देशभर के श्रद्धालुओं के लिए महत्वपूर्ण है। यह स्थान नर्मदा नदी के उद्गम स्थल के रूप में प्रसिद्ध है और यहां प्रतिवर्ष हजारों की संख्या में श्रद्धालु आते हैं। यहां का वातावरण, प्राकृतिक सौंदर्य और धार्मिक महत्व भक्तों को आकर्षित करता है। अमरकंटक का मंदिर न केवल धार्मिक दृष्टि से महत्वपूर्ण है, बल्कि यह सांस्कृतिक और ऐतिहासिक दृष्टि से भी एक महत्वपूर्ण स्थल है।
हाल ही में, इस मंदिर में दान और चढ़ावे के प्रबंधन में गंभीर अनियमितताओं के आरोप सामने आए हैं, जिससे प्रशासन की कार्यप्रणाली पर सवाल उठने लगे हैं। आरोप है कि मुख्य उद्गम मंदिर को दान में मिले सोने-चांदी का कोई रिकॉर्ड उपलब्ध नहीं है। यह स्थिति तब उत्पन्न हुई है जब ट्रस्ट के खिलाफ कई गंभीर आरोप सामने आए हैं, जिसमें दान की गिनती, जेवरातों के संरक्षण और अन्य प्रक्रियाओं के स्पष्ट नियमों का अभाव शामिल है। श्री नर्मदा मंदिर उद्गम ट्रस्ट का गठन साल 2001 में हुआ था, और इसका उद्देश्य मंदिर के संचालन, निर्माण, दानपेटियों की राशि और सोने-चांदी के प्रबंधन की जिम्मेदारी लेना था। हालांकि, हालिया खुलासों के बाद ट्रस्ट की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं।
सोने-चांदी का पूरा रिकॉर्ड उपलब्ध नहीं
ट्रस्ट 10 दानपेटियां संचालित करता है, जिनमें मुख्य मंदिर, कार्तिक स्वामी, राम मंदिर, ग्यारह रुद्र मंदिर, उद्गम स्थल, विष्णु मंदिर और माई की बगिया की दानपेटियां शामिल हैं। मंदिर प्रबंधन के अनुसार, ट्रस्ट के खाते में लगभग 1.41 करोड़ रुपये जमा हैं। हालांकि, साल 2001 से अब तक दान में मिले सोने-चांदी का पूरा रिकॉर्ड उपलब्ध नहीं है। गणेश पाठक, जो 2021 से व्यवस्था संभाल रहे हैं, का कहना है कि उनके कार्यभार संभालने के बाद सूची तैयार की गई, लेकिन पुराने रजिस्टरों की प्रविष्टियां स्पष्ट नहीं हैं। इसके परिणामस्वरूप, मंदिर के कुल जेवरातों की संख्या और विवरण स्पष्ट नहीं हो पा रहा है।
राम मंदिर चोरी प्रकरण के बाद, समिति ने नए जेवरातों की फोटो सहित रिकॉर्डिंग शुरू की, लेकिन पुराने रिकॉर्ड अब भी अधूरे हैं। यह स्थिति न केवल ट्रस्ट की पारदर्शिता पर सवाल उठाती है, बल्कि भक्तों के विश्वास को भी प्रभावित कर सकती है। मंदिर के प्रति श्रद्धा रखने वाले भक्तों का मानना है कि दान का सही प्रबंधन होना चाहिए, ताकि उनकी आस्था और विश्वास कायम रह सके।
बैंक लॉकर के बजाय थाने में रखे जाते हैं जेवरात
आमतौर पर, मंदिरों के कीमती जेवरात बैंक लॉकर में सुरक्षित रखे जाते हैं, लेकिन अमरकंटक मंदिर के जेवरात थाने में जमा किए जाते हैं। यह व्यवस्था कब और किस आधार पर शुरू हुई, इसकी जानकारी ट्रस्ट के कोषाध्यक्ष और सीएमओ चैन सिंह परस्ते को नहीं है। उन्होंने माना कि सोने-चांदी के कुल रिकॉर्ड की स्पष्ट जानकारी उनके पास नहीं है। इसके अलावा, जेवरात कब और किसकी मौजूदगी में थाने भेजे जाते हैं, इसकी प्रक्रिया भी रिकॉर्ड में नहीं है। यह स्थिति न केवल प्रशासनिक लापरवाही को दर्शाती है, बल्कि इससे सुरक्षा के मुद्दे भी उठते हैं।
सामान्यतः, मंदिरों में दान किए गए जेवरातों को सुरक्षित रखने के लिए विशेष प्रबंध किए जाते हैं। लेकिन अमरकंटक मंदिर में जेवरातों को थाने में रखने की प्रक्रिया ने भक्तों में चिंता उत्पन्न कर दी है। भक्तों का मानना है कि इस प्रकार की व्यवस्था से जेवरातों की सुरक्षा पर खतरा मंडरा सकता है।
नगर परिषद के पास ट्रस्ट का बायलॉज उपलब्ध नहीं
नगर परिषद के अनुसार, ट्रस्ट का बायलॉज उपलब्ध नहीं है। दान की गिनती, सोने-चांदी के संरक्षण और जवाबदेही से जुड़े नियमों का कोई लिखित दस्तावेज परिषद के पास नहीं है। सीएमओ चैन सिंह परस्ते ने पुष्टि की कि उनके पास ट्रस्ट का बायलॉज उपलब्ध नहीं है और पुरानी व्यवस्था के अनुसार काम हो रहा है। इस प्रकार की स्थिति से यह स्पष्ट होता है कि ट्रस्ट के संचालन में पारदर्शिता का अभाव है, जो न केवल भक्तों के लिए चिंता का विषय है, बल्कि स्थानीय प्रशासन के लिए भी एक चुनौती है।
पारदर्शिता की कमी से भक्तों का विश्वास डगमगा सकता है, जिससे दान की राशि में कमी आ सकती है। ऐसे में, ट्रस्ट को अपने संचालन में सुधार करने की आवश्यकता है ताकि भक्तों का विश्वास पुनः स्थापित किया जा सके।
गणना कक्ष में सीसीटीवी व्यवस्था पर सवाल
वर्तमान में, दानपेटियों की राशि की गिनती मंदिर परिसर के प्रसाद कक्ष में होती है, जिसका निर्माण लगभग सात साल पहले हुआ था। इससे पहले, गिनती अन्य स्थान पर होती थी। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, वर्षों तक दान की गिनती बिना सीसीटीवी निगरानी के होती रही। हाल में गणना कक्ष में एक सीसीटीवी कैमरा लगाया गया, लेकिन निरीक्षण के दौरान कैमरा बंद मिला। यह स्थिति सुरक्षा और पारदर्शिता के लिए एक गंभीर चिंता का विषय है।
सीसीटीवी कैमरा की अनुपस्थिति से यह सवाल उठता है कि क्या दान की प्रक्रिया में अनियमितताएं हो रही हैं। अगर दान की गिनती में पारदर्शिता नहीं है, तो भक्तों का विश्वास प्रभावित होगा। ऐसे में, ट्रस्ट को सीसीटीवी कैमरा की कार्यप्रणाली को सुनिश्चित करने की आवश्यकता है ताकि दान की प्रक्रिया में पारदर्शिता बनी रहे।
दानपेटी खोलने और हस्ताक्षर करने वालों में अंतर के आरोप
आरोप है कि दानपेटी खोलने के लिए बुलाए गए कुछ सदस्य गिनती के समय मौजूद नहीं रहते, जबकि बाद में रजिस्टर पर अन्य लोगों के हस्ताक्षर दर्ज किए जाते हैं। पुजारी दुर्गेश द्विवेदी का आरोप है कि रजिस्टर में हस्ताक्षर प्रक्रिया में अनियमितताएं हैं। उनके अनुसार, कई मामलों में फर्जी हस्ताक्षर या बाद में हस्ताक्षर कराए जाते हैं। इससे दान राशि की गिनती की पारदर्शिता पर सवाल उठते हैं। यह स्थिति न केवल ट्रस्ट की विश्वसनीयता को प्रभावित करती है, बल्कि भक्तों के विश्वास को भी हानि पहुंचा सकती है।
इस प्रकार की अनियमितताएं भक्तों के लिए चिंता का विषय बन गई हैं। भक्तों का मानना है कि दान की प्रक्रिया में पारदर्शिता होनी चाहिए, ताकि वे अपने दान को सुरक्षित महसूस कर सकें।
सरकारी रजिस्टर में कटिंग और व्हाइटनर के उपयोग पर सवाल
दान राशि और जेवरातों के रिकॉर्ड वाले रजिस्टर में कई स्थानों पर कटिंग और व्हाइटनर का उपयोग दिखाई देता है। कुछ प्रविष्टियों में पहले दर्ज आंकड़ों को मिटाकर नए आंकड़े लिखे गए हैं। इससे रिकॉर्ड की विश्वसनीयता पर सवाल उठते हैं। दस्तावेजों के अनुसार, जेवरातों के वजन और रिकॉर्ड में भी विसंगतियों के आरोप हैं। यह स्थिति न केवल प्रशासनिक लापरवाही को दर्शाती है, बल्कि यह भी संकेत करती है कि दान की प्रक्रिया में पारदर्शिता की कमी है।
इस प्रकार, अमरकंटक मंदिर के ट्रस्ट की कार्यप्रणाली पर उठ रहे सवाल न केवल स्थानीय भक्तों के लिए चिंता का विषय हैं, बल्कि यह एक व्यापक समस्या का संकेत भी देते हैं। अगर इन मुद्दों का समाधान नहीं किया गया, तो यह न केवल मंदिर की प्रतिष्ठा को प्रभावित करेगा, बल्कि भविष्य में दान की प्रक्रिया में भी कमी ला सकता है।
अमरकंटक मंदिर की स्थिति न केवल धार्मिक दृष्टि से महत्वपूर्ण है, बल्कि यह सामाजिक और आर्थिक दृष्टि से भी एक महत्वपूर्ण मुद्दा है। मंदिरों में दान की प्रक्रिया और उसकी पारदर्शिता, समाज में विश्वास और धार्मिक आस्था को बनाए रखने के लिए आवश्यक है।
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