हरियाली तीज 2026 कब है और इसकी शुरुआत कैसे हुई? जानिए माता पार्वती द्वारा किए गए पहले हरियाली तीज व्रत की पौराणिक कथा, महत्व और इस व्रत से मिलने वाले शुभ फलों के बारे में।
रायपुर, भारत 18 जुल॰ 2026 ALN: हरियाली तीज 2026: सावन का महीना भगवान शिव और माता पार्वती की भक्ति के लिए विशेष माना जाता है। इसी पावन महीने में हरियाली तीज का पर्व मनाया जाता है, जो सुहागिन महिलाओं के लिए बेहद महत्वपूर्ण होता है। मान्यता है कि इस दिन व्रत और पूजा करने से अखंड सौभाग्य, सुखी वैवाहिक जीवन और मनचाहा वरदान प्राप्त होता है। लेकिन क्या आप जानते हैं कि हरियाली तीज की शुरुआत कैसे हुई थी और सबसे पहले यह व्रत किसने रखा था? आइए जानते हैं इस पावन पर्व से जुड़ी रोचक पौराणिक कथा।
हरियाली तीज 2026: माता पार्वती ने रखा था पहला हरियाली तीज व्रत
पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, हरियाली तीज का पहला व्रत माता पार्वती ने रखा था। कहा जाता है कि देवी पार्वती भगवान शिव को पति के रूप में प्राप्त करना चाहती थीं। इसके लिए उन्होंने कई जन्मों तक कठिन तपस्या की और अटूट श्रद्धा के साथ भगवान शिव का ध्यान किया।
धार्मिक कथाओं के अनुसार, माता पार्वती ने 107 जन्मों तक कठोर तप किया। उनकी अटूट भक्ति और समर्पण से प्रसन्न होकर भगवान शिव ने 108वें जन्म में उन्हें अपनी अर्धांगिनी के रूप में स्वीकार कर लिया। यह कथा न केवल माता पार्वती की भक्ति को दर्शाती है, बल्कि यह भी बताती है कि सच्ची प्रेम और समर्पण से किसी भी कठिनाई को पार किया जा सकता है। इस कथा के माध्यम से यह संदेश भी मिलता है कि प्रेम और भक्ति की शक्ति कितनी महान होती है।
सावन की तृतीया तिथि से जुड़ा है हरियाली तीज का महत्व
मान्यता है कि सावन माह के शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि के दिन भगवान शिव ने माता पार्वती की तपस्या स्वीकार की थी। इसी कारण हर वर्ष इस तिथि को हरियाली तीज का पर्व मनाया जाता है। यह दिन शिव और पार्वती के दिव्य मिलन का प्रतीक माना जाता है। इस दिन को लेकर कहा जाता है कि जब माता पार्वती ने भगवान शिव को प्रसन्न किया, तो उन्होंने उन्हें यह वचन दिया कि वे हर साल इस दिन उनकी पूजा करने वाले भक्तों की इच्छाओं को अवश्य पूरा करेंगे। यह वचन भक्तों के लिए आशा और विश्वास का स्रोत बन गया है।
हरियाली तीज व्रत का धार्मिक महत्व
हरियाली तीज का व्रत सुहागिन महिलाओं के लिए विशेष महत्व रखता है। मान्यता है कि इस दिन व्रत रखने और शिव-पार्वती की पूजा करने से पति की लंबी आयु, दांपत्य जीवन में सुख-समृद्धि और अखंड सौभाग्य का आशीर्वाद प्राप्त होता है। यह व्रत न केवल दांपत्य जीवन को सुदृढ़ बनाता है, बल्कि यह महिलाओं को अपने पति और परिवार के प्रति अपनी जिम्मेदारियों को समझने और निभाने के लिए प्रेरित करता है।
वहीं अविवाहित कन्याएं भी अच्छे और योग्य जीवनसाथी की कामना से यह व्रत रखती हैं। माना जाता है कि माता पार्वती की कृपा से उनकी मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं। हरियाली तीज का पर्व न केवल भक्ति का पर्व है, बल्कि यह महिलाओं के लिए एक महत्वपूर्ण सामाजिक अवसर भी है, जहां वे एकत्र होकर एक-दूसरे के साथ अपने अनुभव साझा करती हैं और एक-दूसरे को आशीर्वाद देती हैं।
कब है हरियाली तीज 2026?
द्रिक पंचांग के अनुसार, हरियाली तीज 15 अगस्त 2026 को मनाई जाएगी। इस दिन देशभर में महिलाएं व्रत रखेंगी, पारंपरिक श्रृंगार करेंगी और भगवान शिव तथा माता पार्वती की पूजा-अर्चना कर सुखी वैवाहिक जीवन की कामना करेंगी। इस दिन विशेष रूप से महिलाएं हरे रंग के कपड़े पहनती हैं, जो हरियाली और समृद्धि का प्रतीक है। हरे रंग का चयन इस पर्व की प्रकृतिक सुंदरता और जीवन के प्रति सकारात्मक दृष्टिकोण को दर्शाता है।
हरियाली तीज की तैयारी और उत्सव
हरियाली तीज की तैयारी आमतौर पर एक सप्ताह पहले से शुरू होती है। महिलाएं इस दिन के लिए विशेष पूजा सामग्री इकट्ठा करती हैं, जिसमें फल, मिठाई, फूल और अन्य पूजा सामग्री शामिल होती है। इस दिन महिलाएं अपने घरों को सजाने के लिए रंग-बिरंगे फूलों का उपयोग करती हैं और अपने परिवार के सदस्यों के साथ मिलकर पूजा की तैयारी करती हैं। यह न केवल एक धार्मिक अनुष्ठान है, बल्कि एक पारिवारिक आयोजन भी है, जिसमें सभी सदस्य एक साथ मिलकर उत्सव का आनंद लेते हैं।
हरियाली तीज के दिन महिलाएं सुबह जल्दी उठकर स्नान करती हैं और नए कपड़े पहनती हैं। इसके बाद वे पूजा स्थल को सजाती हैं और भगवान शिव और माता पार्वती की प्रतिमाओं को स्थापित करती हैं। पूजा के दौरान महिलाएं विशेष मंत्रों का जाप करती हैं और भगवान शिव से अपने पति की लंबी उम्र और सुखी दांपत्य जीवन के लिए प्रार्थना करती हैं। इस दिन का एक महत्वपूर्ण हिस्सा मेहंदी लगाना भी है, जो सौभाग्य और प्रेम का प्रतीक माना जाता है। मेहंदी लगाने के बाद महिलाएं पारंपरिक नृत्य करती हैं और एक-दूसरे के साथ मिलकर खुशियां मनाती हैं। यह दिन न केवल धार्मिक महत्व रखता है, बल्कि यह महिलाओं के लिए एक सामाजिक और सांस्कृतिक उत्सव का भी समय है।
हरियाली तीज का सांस्कृतिक महत्व
हरियाली तीज का पर्व भारतीय संस्कृति में न केवल धार्मिक दृष्टिकोण से महत्वपूर्ण है, बल्कि यह एक सामाजिक उत्सव के रूप में भी मनाया जाता है। इस दिन महिलाएं एकत्र होकर एक-दूसरे के साथ अपनी खुशियों का आदान-प्रदान करती हैं और एक-दूसरे को शुभकामनाएं देती हैं। यह पर्व महिलाओं के बीच एकता और सहयोग की भावना को बढ़ावा देता है।
हरियाली तीज के अवसर पर विभिन्न स्थानों पर मेलों और उत्सवों का आयोजन भी किया जाता है, जहां महिलाएं विभिन्न प्रकार की प्रतियोगिताओं में भाग लेती हैं। ये प्रतियोगिताएं न केवल मनोरंजन का साधन होती हैं, बल्कि महिलाओं के बीच एकजुटता और सामंजस्य को भी बढ़ावा देती हैं। इस प्रकार, हरियाली तीज का पर्व महिलाओं के लिए एक महत्वपूर्ण अवसर है, जहां वे अपनी संस्कृति और परंपराओं को जीवित रखने का प्रयास करती हैं।
हरियाली तीज का पर्व हर साल न केवल धार्मिक आस्था को प्रकट करता है, बल्कि यह भारतीय संस्कृति की विविधता और समृद्धि को भी दर्शाता है। इस दिन के माध्यम से महिलाएं अपने परिवार, समाज और संस्कृति के प्रति अपनी जिम्मेदारियों को समझती हैं और उन्हें निभाने का प्रयास करती हैं।
निष्कर्ष
हरियाली तीज का पर्व भारतीय समाज में महिलाओं के लिए एक महत्वपूर्ण अवसर है। यह पर्व न केवल माता पार्वती की भक्ति का प्रतीक है, बल्कि यह महिलाओं के लिए एक सामूहिक उत्सव का भी समय है। हरियाली तीज के माध्यम से महिलाएं एक-दूसरे के साथ मिलकर अपने सुख-दुख साझा करती हैं और एकजुटता का प्रदर्शन करती हैं। इस प्रकार, हरियाली तीज का पर्व भारतीय संस्कृति में एक महत्वपूर्ण स्थान रखता है और इसे हर वर्ष धूमधाम से मनाया जाता है। इसके साथ ही, यह पर्व न केवल धार्मिक आस्था को मजबूत करता है, बल्कि यह समाज में महिलाओं की भूमिका और उनके योगदान को भी उजागर करता है।
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