• Home
  • Politics
  • Elections
  • 2029 तक 'एक देश, एक चुनाव' लागू करने की तैयारी

2029 से लागू हो सकता है वन नेशन वन इलेक्शन:संसदीय समिति के अध्यक्ष बोले- 99% लोग पक्ष में; राज्यों के विशेषज्ञों से सलाह ले रहे

ALN NEWS DESK
एएलएन न्यूज डेस्क
अपडेटेड : Jul 11, 2026, 02:54 AM IST
5 min read
  • linkedin
  • twitter
  • facebook
  • instagram
  • whatsapp

संसद की संयुक्त समिति (JPC) 2029 के लोकसभा चुनावों तक 'एक देश, एक चुनाव' लागू करने की कोशिश कर रही है। समिति के अध्यक्ष पी.पी. चौधरी के अनुसार, 99% नागरिक समाज और संगठनों ने इसका समर्थन किया है।

भारत की चुनावी प्रक्रिया में सुधार लाने के लिए ‘वन नेशन, वन इलेक्शन’ (एक देश, एक चुनाव) की योजना पर विचार किया जा रहा है। यह योजना संसद की संयुक्त समिति (Joint Parliamentary Committee - JPC) द्वारा सक्रिय रूप से आगे बढ़ाई जा रही है। इस योजना का उद्देश्य लोकसभा, विधानसभा और स्थानीय निकायों के चुनावों को एक साथ आयोजित करना है। JPC के अध्यक्ष पी.पी. चौधरी ने बताया कि इस मुद्दे पर चर्चा करने वाले लगभग 99% नागरिक समाज और संगठनों ने इस प्रस्ताव का समर्थन किया है। यदि यह योजना सफल होती है, तो यह भारत के चुनावी तंत्र को सरल और प्रभावी बनाने का एक महत्वपूर्ण कदम होगा।

‘वन नेशन, वन इलेक्शन’ का विचार भारत में चुनावी प्रक्रिया को सुव्यवस्थित करने के लिए एक महत्वपूर्ण पहल है। वर्तमान में, भारत में चुनाव अलग-अलग समय पर होते हैं, जिससे राजनीतिक अस्थिरता और चुनावी खर्च बढ़ता है। जब चुनाव अलग-अलग समय पर होते हैं, तो राजनीतिक दलों को बार-बार चुनावी अभियानों में संलग्न होना पड़ता है, जिससे संसाधनों की बर्बादी होती है और राजनीतिक ध्यान भी बंट जाता है। इस प्रस्ताव के तहत, सभी चुनाव एक ही समय पर आयोजित किए जाएंगे, जिससे चुनावी प्रक्रिया को अधिक व्यवस्थित और प्रभावी बनाया जा सकेगा।

समिति ने विभिन्न राज्यों के विशेषज्ञों से भी सलाह ली है, जिसमें गोवा के मुख्यमंत्री और अन्य कैबिनेट मंत्रियों का योगदान शामिल है। यह सलाह ली जा रही है ताकि विभिन्न राज्यों की विशिष्ट आवश्यकताओं और चिंताओं को ध्यान में रखा जा सके। यह सुनिश्चित करना महत्वपूर्ण है कि सभी राज्यों की आवाज़ सुनी जाए और उनके विशेष मुद्दों को ध्यान में रखा जाए।

राज्यों के कार्यकाल का क्या होगा?

इस प्रस्ताव के अंतर्गत, जिन राज्यों का कार्यकाल 2029 के बाद भी बचा होगा, उनके लिए संविधान में संशोधन किया जाएगा। इससे उन राज्यों के कार्यकाल को समय से पहले समाप्त करके 2029 के चुनावी चक्र के साथ जोड़ा जाएगा। यह एक संवैधानिक प्रक्रिया है, जिसे लागू करने के लिए संसद में दो-तिहाई बहुमत और आधे राज्यों की सहमति की आवश्यकता होगी। यह प्रक्रिया सुनिश्चित करेगी कि सभी राज्यों को समान अवसर मिले और चुनावी चक्र में कोई भी राज्य पीछे न रहे।

हालांकि, यह प्रक्रिया संवैधानिक चुनौतियों का सामना भी कर सकती है। ‘वन नेशन, वन इलेक्शन’ के कार्यान्वयन में कई कानूनी चुनौतियाँ आ सकती हैं। इसमें संविधान के कई अनुच्छेदों में संशोधन करना होगा, जैसे अनुच्छेद 83, 172 और 356। इस प्रक्रिया में राजनीतिक सहमति और कानूनी प्रावधानों की आवश्यकता होगी।

मध्यावधि चुनावों का प्रावधान

यदि किसी राज्य का कार्यकाल 2029 से पहले खत्म हो रहा है, तो वहां राष्ट्रपति शासन लागू किया जा सकता है या फिर केवल 2029 तक के लिए चुनाव कराए जा सकते हैं। यह सुनिश्चित करेगा कि चुनावी चक्र में व्यवधान न आए। इस प्रकार, यह प्रस्ताव उन राज्यों के लिए एक समाधान प्रदान करेगा, जिनका कार्यकाल समय से पहले खत्म हो रहा है।

सरकार का सुरक्षित रास्ता

केंद्र सरकार इस योजना के लिए एक सुरक्षित रास्ता तलाश रही है। JPC 'टू-फेज ट्रांजिशन मॉडल' पर विचार कर रही है, जिसके अनुसार पूरे देश को एक साथ चुनावी चक्र में लाने के बजाय दो चरणों में बढ़ने का विकल्प सबसे व्यावहारिक माना जा रहा है। पहले चरण में 2029 के लोकसभा चुनाव के साथ लगभग 20 राज्यों के विधानसभा चुनाव कराने का प्रस्ताव है, जबकि दूसरे चरण में 2034 में पूरे देश को साझा चुनावी चक्र में लाने का लक्ष्य है। यह चरणबद्ध दृष्टिकोण न केवल कार्यान्वयन को सरल बनाएगा, बल्कि विभिन्न राज्यों की चिंताओं को भी ध्यान में रखेगा।

संविधान में गुंजाइश

लॉ कमीशन के पूर्व सदस्य और मोहनलाल सुखाड़िया यूनिवर्सिटी के लॉ कॉलेज के डीन आनंद पालीवाल ने कहा कि ‘एक देश-एक चुनाव’ को चरणबद्ध तरीके से लागू करने के लिए संवैधानिक विकल्प मौजूद हैं। भारत में पहले भी विशेष परिस्थितियों में लोकसभा और विधानसभाओं के कार्यकाल में बदलाव किए गए हैं। हालाँकि, किसी भी व्यापक बदलाव के लिए संसद द्वारा आवश्यक कानूनी प्रावधान और राजनीतिक सहमति जरूरी होगी।

पैनल का गठन

‘एक राष्ट्र-एक चुनाव’ पर विचार करने के लिए पूर्व राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद की अध्यक्षता में 2 सितंबर 2023 को एक पैनल का गठन किया गया था। इस पैनल ने हितधारकों और विशेषज्ञों के साथ चर्चा के बाद 191 दिनों के शोध के बाद 14 मार्च को राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू को अपनी रिपोर्ट सौंपी थी। इस रिपोर्ट में विभिन्न पहलुओं का विश्लेषण किया गया है और सुझाव दिए गए हैं कि कैसे इस योजना को प्रभावी ढंग से लागू किया जा सकता है।

अतीत में चुनावी चक्र

भारत में 1952 से 1967 तक लोकसभा और अधिकांश विधानसभा चुनाव एक साथ हुए थे। लेकिन 1967 के बाद कई राज्यों में सरकारें गिरने लगीं, जिससे चुनावी चक्र में अस्थिरता आई। 1968-69 में कई विधानसभाएं भंग हुईं और 1970 में लोकसभा भी कार्यकाल पूरा होने से पहले भंग हो गई। इसके बाद से चुनाव अलग-अलग समय पर होने लगे। इस अस्थिरता ने चुनावी प्रक्रिया को जटिल बना दिया।

वर्तमान स्थिति

संयुक्त संसदीय समिति (JPC) की अवधि 2026 के मानसून सत्र तक बढ़ाई जा चुकी है। इस समयावधि के भीतर, 2029 से चुनावी चक्र एक करने की प्रक्रिया शुरू हो सकती है। यह एक महत्वपूर्ण कदम है, जो न केवल चुनावी प्रक्रिया को सरल बनाएगा, बल्कि राजनीतिक स्थिरता को भी बढ़ावा देगा।

राजनीतिक दलों से परामर्श

JPC की टीम ने विभिन्न राज्यों का दौरा कर राजनीतिक दलों और अधिकारियों से परामर्श शुरू कर दिया है। हाल ही में, प्रियंका गांधी, संबित पात्रा और बांसुरी स्वराज समेत समिति के 39 सदस्य गुजरात पहुंचे हैं। यह दौरा विभिन्न राजनीतिक विचारों और चिंताओं को समझने के लिए किया जा रहा है। इस प्रकार, ‘वन नेशन, वन इलेक्शन’ का प्रस्ताव भारत की राजनीतिक और चुनावी प्रणाली में एक महत्वपूर्ण परिवर्तन ला सकता है। इसके सफल कार्यान्वयन के लिए संवैधानिक, कानूनी और राजनीतिक सहमति की आवश्यकता होगी। यदि यह योजना लागू होती है, तो यह न केवल चुनावी प्रक्रिया को सरल बनाएगी, बल्कि देश में राजनीतिक स्थिरता को भी बढ़ावा देगी।

Get More Updates

To learn more about the latest developments in Elections, stay updated with our exclusive reports and analyses on AiLensNews.

Related News