दिल्ली के LG का आरोप, जेल में जानबूझकर कम कैलोरी ले रहे केजरीवाल

ALN NEWS DESK
एएलएन न्यूज डेस्क
अपडेटेड : Jul 20, 2024, 12:44 PM IST
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दिल्ली के उपराज्यपाल वी के सक्सेना ने आरोप लगाया है कि मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल तिहाड़ जेल में जानबूझकर कम कैलोरी ले रहे हैं।

नयी दिल्ली, 20 जुलाई (भाषा)

दिल्ली के उपराज्यपाल (एलजी) वी के सक्सेना ने हाल ही में आरोप लगाया है कि न्यायिक हिरासत के तहत तिहाड़ जेल में बंद मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल जानबूझकर उन्हें दी जा रही भोजन की चिकित्सकीय खुराक और दवाएं नहीं ले रहे हैं। यह आरोप ऐसे समय में लगाया गया है जब केजरीवाल, जो कि दिल्ली के मुख्यमंत्री हैं, को तिहाड़ जेल में रखा गया है, और उनकी स्वास्थ्य स्थिति पर लगातार ध्यान केंद्रित किया जा रहा है।

उपराज्यपाल ने मुख्य सचिव नरेश कुमार को लिखे पत्र में केजरीवाल के स्वास्थ्य की स्थिति के बारे में जेल अधीक्षक की रिपोर्ट का हवाला देते हुए आरोप लगाया कि मुख्यमंत्री द्वारा "जानबूझकर कम कैलोरी लिए जाने" के कई उदाहरण हैं, जबकि उन्हें घर का बना खाना पर्याप्त मात्रा में उपलब्ध कराया जा रहा है। यह मामला न केवल केजरीवाल के स्वास्थ्य के लिए गंभीर है, बल्कि यह राजनीतिक विवाद का भी केंद्र बन गया है।

आम आदमी पार्टी (आप) की सरकार ने इस आरोप पर तत्काल कोई प्रतिक्रिया नहीं दी है। उपराज्यपाल कार्यालय ने कहा कि सक्सेना ने जेल प्राधिकारियों को सुझाव दिया है कि वे मुख्यमंत्री को निर्धारित आहार के अलावा दवा और इंसुलिन की तय खुराक लेने की सलाह दे सकते हैं, क्योंकि केजरीवाल ‘टाइप-2' मधुमेह से पीड़ित हैं। यह जानना महत्वपूर्ण है कि टाइप-2 मधुमेह एक ऐसी स्थिति है जिसमें शरीर इंसुलिन का सही तरीके से उपयोग नहीं कर पाता, जिससे रक्त शर्करा का स्तर बढ़ जाता है।

आम आदमी पार्टी ने भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) और उसकी अगुवाई वाली केंद्र सरकार पर जेल में बंद केजरीवाल के स्वास्थ्य को स्थायी नुकसान पहुंचाने की "साजिश" रचने का आरोप लगाया है। पार्टी का कहना है कि केजरीवाल का वजन कम हो गया है और उनके रक्त शर्करा स्तर में गिरावट आई है। यह आरोप राजनीति में गहरे ध्रुवीकरण का संकेत देता है, जहां एक पार्टी दूसरे पार्टी पर गंभीर आरोप लगाकर अपनी स्थिति को मजबूत करने का प्रयास कर रही है।

पार्टी ने यह भी दावा किया कि केजरीवाल कोमा में भी जा सकते हैं और उनके मस्तिष्क को भी क्षति हो सकती है, क्योंकि उनका रक्त शर्करा स्तर एक रात में पांच बार 50 मिलीग्राम/डीएल तक गिर गया था। यह स्थिति अत्यंत चिंताजनक है, क्योंकि अत्यधिक कम रक्त शर्करा (हाइपोग्लाइसीमिया) गंभीर स्वास्थ्य समस्याओं का कारण बन सकता है।

उपराज्यपाल द्वारा मुख्य सचिव को लिखे गए पत्र के अनुसार, आहार निगरानी चार्ट से पता चलता है कि छह जून से 13 जुलाई के बीच मुख्यमंत्री ने दिन में तीन बार आहार के लिए निर्धारित पूरी खुराक का सेवन नहीं किया। यह जानकारी यह इंगित करती है कि केजरीवाल का स्वास्थ्य उनकी आहार संबंधी आदतों से प्रभावित हो रहा है। पत्र में कहा गया है, "रिपोर्ट में वजन में कमी (आत्मसमर्पण की तिथि दो जून, 2024 को वजन 63.5 किलोग्राम था लेकिन अब 61.5 किलोग्राम रह गया है) का भी संकेत मिलता है। प्रथम दृष्टया, इसका कारण कम कैलोरी सेवन प्रतीत होता है।"

इसमें कहा गया है कि ऐसा प्रतीत होता है कि 18 जून को उन्हें इंसुलिन नहीं दिया गया था या जेल प्राधिकारियों ने रिपोर्ट में इसका उल्लेख नहीं किया था। यह स्थिति यह दर्शाती है कि जेल में स्वास्थ्य देखभाल प्रणाली में कुछ कमी हो सकती है, जो कि एक गंभीर चिंता का विषय है। उपराज्यपाल कार्यालय ने कहा कि अधिकतर दिनों में ‘ग्लूकोमीटर’ जांच की रीडिंग और लगातार ग्लूकोज निगरानी तंत्र (सीजीएमएस) की रीडिंग के बीच भी काफी अंतर हैं।

उन्होंने कहा कि दोपहर के भोजन से पहले केजरीवाल की ‘ग्लूकोमीटर रीडिंग’ 104 एमजीएल थी, जबकि 19 जून को दोपहर साढ़े 12 बजे दोपहर के भोजन से पहले ‘सीजीएमएस रीडिंग’ 82 एमजीएल थी। यह अंतर यह दर्शाता है कि केजरीवाल की रक्त शर्करा की स्थिति पर नजर रखने में कोई समस्या हो सकती है। उन्होंने कहा, "ग्लूकोमीटर जांच रीडिंग और सीजीएमएस रीडिंग के बीच स्पष्ट अंतर को सक्षम चिकित्सा अधिकारियों द्वारा सत्यापित किए जाने की आवश्यकता है।"

उपराज्यपाल कार्यालय के अनुसार, मुख्यमंत्री ने छह जुलाई को तीनों समय निर्धारित आहार नहीं लिया और उन्हें नाश्ते से पहले पांच यूनिट इंसुलिन, दोपहर के भोजन से पहले चार यूनिट और रात के खाने से पहले दो यूनिट इंसुलिन दी गईं। यह जानकारी यह संकेत देती है कि केजरीवाल का आहार और दवा का सेवन उनकी स्वास्थ्य स्थिति के अनुरूप नहीं हो रहा है। जेल रिपोर्ट का हवाला देते हुए कहा गया कि सात जुलाई को फिर से निर्धारित खुराक नहीं ली गई और उस दिन नाश्ते से पहले पांच यूनिट और दोपहर के भोजन से पहले चार यूनिट इंसुलिन दी गईं तथा "मुख्यमंत्री ने रात के खाने से पहले इंसुलिन लेने ने इनकार कर दिया।"

दिल्ली के उपराज्यपाल वी के सक्सेना ने इस मामले में गंभीर चिंता व्यक्त की है और कहा है कि केजरीवाल के स्वास्थ्य की स्थिति पर ध्यान देने की आवश्यकता है। यह मामला केवल एक व्यक्ति के स्वास्थ्य का मामला नहीं है, बल्कि यह राजनीतिक और सामाजिक दृष्टिकोण से भी महत्वपूर्ण है। यह स्थिति यह दर्शाती है कि कैसे राजनीतिक प्रतिद्वंद्विता स्वास्थ्य देखभाल में बाधा डाल सकती है और यह सवाल उठाती है कि क्या जेलों में स्वास्थ्य देखभाल की व्यवस्था पर्याप्त है।

इस पूरे घटनाक्रम के पीछे एक बड़ा सवाल यह है कि क्या जेलों में बंद व्यक्तियों को उचित स्वास्थ्य देखभाल मिल रही है या नहीं। यह मुद्दा न केवल केजरीवाल के मामले में बल्कि अन्य कैदियों के लिए भी महत्वपूर्ण है। यह स्थिति यह दर्शाती है कि जेलों में स्वास्थ्य देखभाल की प्रणाली को सुधारने की आवश्यकता है, ताकि किसी भी कैदी की स्वास्थ्य स्थिति को गंभीरता से लिया जा सके।

दिल्ली की जेलों में स्वास्थ्य देखभाल की स्थिति पर चर्चा करते हुए, यह समझना आवश्यक है कि भारत की जेलों में कैदियों को स्वास्थ्य सेवाएं प्रदान करने की जिम्मेदारी राज्य सरकारों की होती है। तिहाड़ जेल, जो कि दिल्ली की सबसे बड़ी जेल है, में कैदियों के लिए स्वास्थ्य देखभाल की सुविधाएं सीमित हैं। जेल में स्वास्थ्य देखभाल की स्थिति अक्सर विवादों का विषय रही है, और यह आरोप लगाया गया है कि कई बार कैदियों को समय पर चिकित्सा सहायता नहीं मिल पाती।

इस मामले में एक महत्वपूर्ण पहलू यह है कि केजरीवाल जैसे उच्च प्रोफाइल कैदी को भी जेल में उचित स्वास्थ्य सेवाएं मिल रही हैं या नहीं। यह सवाल इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि यदि एक मुख्यमंत्री को इस तरह की समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है, तो अन्य आम कैदियों की स्थिति का अंदाजा लगाना कठिन नहीं है।

जेलों में स्वास्थ्य देखभाल की कमी केवल एक कानूनी मुद्दा नहीं है, बल्कि यह मानवाधिकारों का भी उल्लंघन है। कैदियों को स्वास्थ्य सेवाएं न मिलने से उनके जीवन पर गंभीर प्रभाव पड़ सकता है, और यह एक बड़ा सामाजिक मुद्दा बन सकता है। इस मामले में, यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि क्या दिल्ली सरकार और जेल प्रशासन इस मुद्दे को गंभीरता से लेते हैं और सुधारात्मक कदम उठाते हैं।

इसके अलावा, केजरीवाल के मामले ने राजनीतिक परिदृश्य में भी हलचल पैदा की है। आम आदमी पार्टी और भाजपा के बीच की प्रतिद्वंद्विता ने इस मुद्दे को और भी जटिल बना दिया है। आम आदमी पार्टी ने आरोप लगाया है कि भाजपा जानबूझकर केजरीवाल के स्वास्थ्य को नुकसान पहुंचाने की कोशिश कर रही है, जबकि भाजपा ने आम आदमी पार्टी के आरोपों को खारिज किया है। यह राजनीतिक लड़ाई केवल स्वास्थ्य देखभाल के मुद्दे तक सीमित नहीं है, बल्कि यह दोनों पार्टियों के बीच की गहरी दुश्मनी को भी उजागर करती है।

इस विवाद का एक और पहलू यह है कि यह जेलों में कैदियों के अधिकारों की रक्षा के लिए आवश्यक सुधारों को उजागर करता है। यदि एक व्यक्ति, जो कि एक राजनीतिक नेता है, इस तरह की समस्याओं का सामना कर रहा है, तो यह संकेत करता है कि जेलों में सुधार की आवश्यकता है।

अंततः, यह मामला केवल अरविंद केजरीवाल के स्वास्थ्य का नहीं है, बल्कि यह एक व्यापक सामाजिक और राजनीतिक मुद्दा है, जो जेलों में स्वास्थ्य देखभाल की स्थिति, मानवाधिकारों और राजनीतिक प्रतिद्वंद्विता के बीच की जटिलताओं को उजागर करता है। यह स्थिति यह दर्शाती है कि कैसे एक व्यक्ति का स्वास्थ्य एक बड़े राजनीतिक खेल का हिस्सा बन सकता है और यह सवाल उठाता है कि क्या हमारे न्यायिक और स्वास्थ्य देखभाल प्रणाली में सुधार की आवश्यकता है।

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