मध्य प्रदेश के दतिया उपचुनाव में नरोत्तम मिश्रा का टिकट काटने में सीएम मोहन यादव का हाथ है या फिर मोहन यादव विरोधियों का। हाईवे जाम, लाठीचार्ज के बाद पार्टी की किरकरी हो रही है। मिश्रा ने समर्थकों से शांति की अपील की है।
नई दिल्ली, भारत 11 जुल॰ 2026 ALN: मध्य प्रदेश की दतिया विधानसभा सीट पर होने वाले उपचुनाव के लिए भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) द्वारा आशुतोष तिवारी को उम्मीदवार घोषित किए जाने के बाद से पूरे क्षेत्र में राजनीतिक उबाल आ गया है। इस फैसले से नाराज पूर्व गृहमंत्री नरोत्तम मिश्रा के समर्थकों ने करीब 12 घंटे तक राष्ट्रीय राजमार्ग (NH-44) को जाम रखा, जिसके बाद पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच हिंसक झड़प हुई। यह घटना न केवल दतिया बल्कि पूरे मध्य प्रदेश की राजनीति में एक महत्वपूर्ण मोड़ साबित हो सकती है। इस बवाल के बीच राजनीतिक गलियारों में इस बात की सबसे ज्यादा चर्चा है कि आखिर दतिया के 'डॉन' कहे जाने वाले नरोत्तम मिश्रा का टिकट क्यों काटा गया। जबकि उन्हें अमित शाह का नज़दीकी आदमी माना जाता है। नरोत्तम मिश्रा कभी सीएम पद के भी दावेदार थे।
पार्टी सूत्रों के अनुसार, नरोत्तम मिश्रा को पूरा भरोसा था कि पार्टी इस उपचुनाव में उन्हीं पर दांव लगाएगी, जिसके लिए उन्होंने नामांकन फॉर्म तक खरीद लिया था। लेकिन ऐन वक्त पर उनका नाम कटने के पीछे निम्नलिखित रणनीतिक कारण रहे:
टिकट न मिलने पर बीजेपी नेता नरोत्तम मिश्रा ने कहा, "यह पार्टी का फ़ैसला है। मैं सभी पार्टी कार्यकर्ताओं से अपील करता हूं - खासकर सोशल मीडिया पर कार्यकर्ताओं को पेट्रोल या केरोसिन डालते हुए वीडियो देखने के बाद कि वे ऐसी हरकतें न करें। अपनी बात पार्टी के मंच पर सही तरीके से रखनी चाहिए। उन्हें इस तरह से नहीं बताना चाहिए।" इस बयान से यह स्पष्ट होता है कि वे पार्टी अनुशासन का पालन करने की अपील कर रहे हैं, भले ही वे व्यक्तिगत रूप से निराश हों।
मध्य प्रदेश के वरिष्ठ मंत्री और बीजेपी के राष्ट्रीय महासचिव कैलाश विजयवर्गीय ने दतिया की घटना पर कहा, "पार्टी के अंदर लोकतंत्र है और BJP कार्यकर्ता बहुत अनुशासित हैं। एक बार जब हम उनसे बैठकर बात करेंगे, तो सब साथ आ जाएंगे। मैं अभी कह सकता हूं कि आशुतोष तिवारी भारी अंतर से जीतेंगे।" नरोत्तम मिश्रा के समर्थकों की नाराज़गी से जुड़े सवालों का जवाब देते हुए मंत्री कैलाश विजयवर्गीय ने कहा, "हम इसे संभाल लेंगे। यह हमारे लिए बहुत छोटी बात है। पार्टी सोच-समझकर फ़ैसले लेती है और इसीलिए हम बड़े अंतर से जीतेंगे। नरोत्तम जी भी पार्टी के लिए काम करेंगे। मैं यह बात आज ही कह रहा हूं। वह पार्टी के अच्छे और सीनियर कार्यकर्ता हैं। कई लोग चुनाव लड़ने की तैयारी करते हैं। विधानसभा की 230 सीटें हैं और लगभग 2,000 लोग टिकट की उम्मीद कर सकते हैं। लेकिन हर किसी को टिकट नहीं दिया जा सकता।" इस बयान से यह संकेत मिलता है कि पार्टी के भीतर एक बड़ा चुनावी गणित चल रहा है, जिसमें विभिन्न कारकों को ध्यान में रखा जा रहा है।
जैसे ही शुक्रवार को भाजपा केंद्रीय नेतृत्व ने आशुतोष तिवारी के नाम पर मुहर लगाई, दतिया की सड़कों पर नरोत्तम मिश्रा के समर्थकों का गुस्सा फूट पड़ा।
नरोत्तम मिश्रा का टिकट कटने का असर भाजपा के स्थानीय संगठन पर बहुत गहरा पड़ा है। दतिया भाजपा के जिला अध्यक्ष समेत कई स्थानीय पार्षदों और मंडल स्तर के पदाधिकारियों ने पार्टी से सामूहिक इस्तीफा दे दिया है। समर्थकों ने साफ चेतावनी दी है कि वे "नरोत्तम दादा" के बिना किसी अन्य उम्मीदवार के लिए काम नहीं करेंगे और जरूरत पड़ने पर पूरी तरह से भाजपा छोड़ देंगे। यह स्थिति पार्टी के लिए एक बड़ी चुनौती बन गई है, क्योंकि स्थानीय कार्यकर्ताओं का समर्थन चुनावी सफलता के लिए आवश्यक है।
इस साल अप्रैल में दिल्ली की एक अदालत ने कांग्रेस विधायक राजेंद्र भारती को धोखाधड़ी के एक पुराने मामले में 3 साल की सजा सुनाई, जिसके कारण नियमों के तहत उनकी विधानसभा सदस्यता रद्द हो गई और यह सीट खाली हो गई। हालांकि, बाद में भारती को जमानत मिल गई, लेकिन सीट खाली होने के कारण चुनाव आयोग ने यहां उपचुनाव कराने का फैसला किया है। यह उपचुनाव न केवल दतिया के लिए बल्कि मध्य प्रदेश की राजनीति के लिए भी महत्वपूर्ण है, क्योंकि यह आगामी विधानसभा चुनावों की दिशा निर्धारित कर सकता है।
चुनाव आयोग के मुताबिक दतिया विधानसभा उपचुनाव के लिए मतदान 30 जुलाई को होगा और वोटों की गिनती 3 अगस्त को की जाएगी। फिलहाल पूरे दतिया क्षेत्र में तनाव को देखते हुए भारी पुलिस बल तैनात किया गया है और संगठन स्तर पर डैमेज कंट्रोल (नाराजगी दूर करने) की कोशिशें जारी हैं। इस उपचुनाव को लेकर राजनीतिक गतिविधियां तेज हो गई हैं, और सभी पार्टियां अपने-अपने तरीके से मतदाताओं को रिझाने की कोशिश कर रही हैं।
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