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कॉकरोच पार्टी फाउंडर दीपके ने पुलिस के पैर पकड़े:जंतर-मंतर पर टेंट लगाने की इजाजत मांगी, कहा- हड़ताली छात्रों को बारिश से बचाना है

ALN NEWS DESK
एएलएन न्यूज डेस्क
अपडेटेड : Jul 9, 2026, 05:04 PM IST
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नीट पेपर लीक के खिलाफ कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) का 20 दिन से जंतर-मंतर पर विरोध प्रदर्शन जारी है। फाउंडर अभिजीत दीपके ने पुलिस से टेंट लगाने की अनुमति मांगी ताकि भूख हड़ताल पर बैठे छात्रों को बारिश से बचाया जा सके।

कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के फाउंडर अभिजीत दीपके ने हाल ही में दिल्ली के जंतर-मंतर पर एक महत्वपूर्ण घटना में पुलिस अधिकारियों के पैर पकड़ते हुए नजर आए। यह घटना उस समय हुई जब CJP के सदस्य नीट पेपर लीक के खिलाफ 20 दिनों से अधिक समय से विरोध प्रदर्शन कर रहे थे। दीपके ने पुलिस से टेंट लगाने की अनुमति मांगी, ताकि हड़ताली छात्रों को बारिश से बचाया जा सके। इस घटना ने न केवल मीडिया का ध्यान आकर्षित किया, बल्कि यह भी दिखाया कि प्रदर्शन कर रहे छात्रों की स्थिति कितनी गंभीर है।

दीपके ने इस घटना का एक वीडियो साझा किया, जिसमें वह पुलिस अधिकारियों से अनुरोध करते हुए दिखाई दे रहे हैं। उन्होंने अपने सोशल मीडिया पर लिखा, "भूख हड़ताल पर बैठे स्टूडेंट्स बारिश में भीग रहे हैं। मैंने पुलिस अधिकारियों से जंतर-मंतर पर टेंट लगाने की परमिशन मांगी है।" इससे यह स्पष्ट होता है कि प्रदर्शन के दौरान छात्रों की सुरक्षा और स्वास्थ्य को लेकर चिंता जताई जा रही है। इस प्रकार की घटनाएँ न केवल प्रदर्शनकारियों के लिए, बल्कि सामाजिक न्याय के लिए भी महत्वपूर्ण हैं, क्योंकि यह दर्शाती हैं कि कैसे सरकार और पुलिस के बीच संवाद की कमी हो सकती है।

इसके अलावा, दीपके ने एक अन्य वीडियो में आरोप लगाया कि पुलिस ने छात्रों के साथ बदसलूकी की। उन्होंने कहा कि महिला छात्रों को पुरुष पुलिसवालों द्वारा धक्का दिया गया। यह घटना न केवल छात्रों के लिए, बल्कि पूरे प्रदर्शन के लिए एक चुनौती बन गई है, क्योंकि पुलिस की इस प्रकार की कार्रवाई से प्रदर्शनकारियों का मनोबल प्रभावित होता है। यह स्थिति इस बात का संकेत है कि जब छात्र अपनी आवाज उठाते हैं, तो उन्हें न केवल अपनी बात कहने का अधिकार है, बल्कि उन्हें सुरक्षा और सम्मान भी मिलना चाहिए।

जंतर-मंतर पर चल रहे इस प्रदर्शन में कई अन्य सामाजिक कार्यकर्ता और छात्र नेता भी शामिल हैं। इनमें से एक प्रमुख नाम सोनम वांगचुक का है, जो खुद 28 जून से भूख हड़ताल पर हैं। वांगचुक ने शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग की है। हाल ही में उनकी तबीयत खराब हो गई थी, जिससे उनके स्वास्थ्य पर गंभीर प्रभाव पड़ा है। डॉक्टरों के अनुसार, 11 दिनों में उनका वजन 7 किलो से अधिक कम हो गया है। यह घटनाक्रम इस बात को दर्शाता है कि छात्रों के हड़ताल करने का निर्णय न केवल उनके मानसिक स्वास्थ्य पर, बल्कि शारीरिक स्वास्थ्य पर भी गंभीर प्रभाव डाल रहा है।

प्रदर्शन के दौरान, एक और छात्र नेता ऋषिकेश की तबीयत बिगड़ गई, जिससे उन्हें अस्पताल में भर्ती कराना पड़ा। यह स्थिति इस बात का संकेत है कि छात्रों के हड़ताल करने के निर्णय ने उनके स्वास्थ्य पर गंभीर प्रभाव डाला है। इन घटनाओं ने यह स्पष्ट कर दिया है कि छात्र समुदाय में इस मुद्दे को लेकर गहरी चिंता है। छात्रों का यह आंदोलन एक सामाजिक परिवर्तन का प्रतीक बनता जा रहा है, जिसमें युवा अपनी आवाज को उठाने के लिए तैयार हैं।

कॉकरोच जनता पार्टी का गठन उस समय हुआ जब चीफ जस्टिस सूर्यकांत ने बेरोजगार युवाओं को "कॉकरोच" की संज्ञा दी थी। इस टिप्पणी ने अभिजीत दीपके को प्रेरित किया और उन्होंने 16 मई को CJP की स्थापना की। इस पार्टी ने तुरंत ही सोशल मीडिया पर एक बड़ा अभियान शुरू किया, जिसमें उन्होंने शिक्षा मंत्री के इस्तीफे की मांग की। इस ऑनलाइन अभियान को 8 लाख से अधिक लोगों का समर्थन मिला, जो इस मुद्दे की गंभीरता को दर्शाता है। यह आंदोलन न केवल छात्रों के लिए, बल्कि समग्र सामाजिक न्याय के लिए भी महत्वपूर्ण है।

दीपके ने बताया कि CJP के इंस्टाग्राम पर 10 जून तक 2.27 करोड़ फॉलोअर्स थे, जो कि एक महत्वपूर्ण संख्या है। हालांकि, हाल के दिनों में इस संख्या में गिरावट आई है, फिर भी यह संख्या भाजपा और कांग्रेस के फॉलोअर्स से अधिक है। यह दर्शाता है कि CJP ने अपनी पहचान बनाने में सफलता प्राप्त की है। सोशल मीडिया पर छात्रों की सक्रियता इस बात का प्रमाण है कि युवा पीढ़ी अपने अधिकारों के लिए सजग और जागरूक है।

अभिजीत दीपके की पृष्ठभूमि भी दिलचस्प है। वे महाराष्ट्र के संभाजी नगर से हैं और पुणे से पत्रकारिता की पढ़ाई की है। वर्तमान में, वे अमेरिका की बॉस्टन यूनिवर्सिटी में पब्लिक रिलेशंस में मास्टर्स की पढ़ाई कर रहे हैं। इससे यह स्पष्ट होता है कि दीपके एक सक्षम डिजिटल मीडिया स्ट्रैटजिस्ट हैं, जिन्होंने पहले आम आदमी पार्टी (AAP) के लिए भी काम किया है। उनकी पृष्ठभूमि और अनुभव से यह भी स्पष्ट होता है कि वे एक प्रभावशाली नेता के रूप में उभर रहे हैं, जो छात्रों की समस्याओं को उठाने के लिए तत्पर हैं।

इस आंदोलन के पीछे की मुख्य वजह नीट पेपर लीक की घटनाएं हैं, जो कि छात्रों के भविष्य को प्रभावित कर रही हैं। यह मुद्दा न केवल छात्रों के लिए, बल्कि पूरे देश के लिए चिंता का विषय बन गया है। नीट परीक्षा, जो कि देश की सबसे बड़ी मेडिकल प्रवेश परीक्षा है, में हो रही अनियमितताओं के कारण छात्रों का भविष्य खतरे में है। यह समस्या केवल एक परीक्षा की नहीं है, बल्कि यह शिक्षा प्रणाली की विश्वसनीयता और पारदर्शिता पर भी सवाल उठाती है।

हाल ही में, NEET-UG परीक्षा के संबंध में कुछ महत्वपूर्ण बदलावों की घोषणा की गई है। 2027 में NEET परीक्षा को छह दिन तक चलाने का निर्णय लिया गया है, और यह पूरी तरह से कंप्यूटर आधारित परीक्षण (CBT) मोड में आयोजित की जाएगी। इसके लिए देश भर में 1,000 से अधिक परीक्षा केंद्र बनाए जाएंगे। यह बदलाव नीट पेपर लीक विवाद के बाद किए जा रहे हैं, जिससे यह स्पष्ट होता है कि सरकार इस मुद्दे को गंभीरता से ले रही है। यह बदलाव छात्रों के लिए एक सकारात्मक कदम हो सकता है, लेकिन यह भी आवश्यक है कि इन परिवर्तनों को प्रभावी ढंग से लागू किया जाए।

इस प्रकार, जंतर-मंतर पर चल रहा यह प्रदर्शन केवल एक आंदोलन नहीं है, बल्कि यह छात्रों की आवाज़ है, जो अपनी शिक्षा और भविष्य के लिए लड़ रहे हैं। अभिजीत दीपके और उनके साथी छात्रों की कोशिशें यह दर्शाती हैं कि वे अपनी समस्याओं को लेकर गंभीर हैं और उन्हें सुलझाने के लिए प्रयासरत हैं। इस आंदोलन का असर न केवल शिक्षा प्रणाली पर पड़ेगा, बल्कि यह समाज में युवाओं की सक्रियता को भी उजागर करेगा।

इस समय, जब देश में शिक्षा को लेकर कई चुनौतियां हैं, ऐसे में छात्रों के इस प्रकार के आंदोलनों का होना आवश्यक है। यह न केवल उनकी समस्याओं को उजागर करता है, बल्कि यह भी दर्शाता है कि युवा पीढ़ी अपने अधिकारों के लिए खड़ी हो रही है। छात्रों का यह आंदोलन एक नई चेतना का प्रतीक है, जो यह दर्शाता है कि वे अब चुप नहीं रहेंगे।

इस प्रकार, CJP का यह आंदोलन और अभिजीत दीपके की कोशिशें यह दर्शाती हैं कि शिक्षा और रोजगार के मुद्दों पर युवाओं की आवाज़ को अनसुना नहीं किया जा सकता। यह समय है कि सरकार और समाज दोनों को इस दिशा में गंभीरता से विचार करना चाहिए। यदि सरकार इस मुद्दे को नजरअंदाज करती है, तो यह न केवल छात्रों के भविष्य को प्रभावित करेगा, बल्कि यह समाज में असंतोष और अस्थिरता को भी बढ़ा सकता है। इसलिए, यह आवश्यक है कि सभी पक्ष इस मुद्दे पर एक साथ मिलकर काम करें और एक समाधान की दिशा में बढ़ें।

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