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नीतीश कुमार को कौन कंट्रोल कर रहा है? सांसद रामप्रीत मंडल का बयान

ALN NEWS DESK
एएलएन न्यूज डेस्क
अपडेटेड : Jul 14, 2026, 05:18 AM IST
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JDU सांसद रामप्रीत मंडल ने नीतीश कुमार से मिलने में कठिनाई का जिक्र किया, जिससे यह सवाल उठता है कि क्या वह नजरबंद हैं या किसी के नियंत्रण में हैं।

‘मुझे नीतीश कुमार से मिलने नहीं ‎दिया जा रहा है। दो महीने से ‎उनसे मिलने की कोशिश में हूं। मैंने ‎मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी से समय ‎मांगा। उन्होंने 2 मिनट में समय दे‎ दिया। मैं उनसे मिला।'

JDU सांसद रामप्रीत मंडल ने यह बातें अपने लोगों के बीच बैठकी में कही। इसका वीडियो सामने आने के बाद एक बार फिर चर्चा शुरू हो गई है कि क्या नीतीश कुमार कुछ लोगों की गिरफ्त में हैं।

क्या वह नजरबंद हैं, उन्हें कोई दूसरा कंट्रोल कर रहा है। JDU को नीतीश नहीं तो कौन चला रहा है, जानेंगे, बूझे की नाहीं में…。

सवाल-1ः क्या नीतीश कुमार नजरबंद हैं?

जवाबः बिल्कुल नहीं। नजरबंदी एक कानूनी या प्रशासनिक प्रक्रिया है, जिसमें किसी व्यक्ति को सरकार या सुरक्षा एजेंसियां उसके घर में कैद कर लेती है और बाहरी दुनिया से उसका संपर्क काट दिया जाता है।

मुख्यमंत्री की कुर्सी छोड़ने के बाद भी नीतीश कुमार लगातार पार्टी के नेताओं, कार्यकर्ताओं से मिल रहे हैं। समय-समय पर पार्टी दफ्तर भी जा रहे हैं। कार्यक्रमों में हिस्सा ले रहे हैं। जैसे…

  • 13 जुलाई को नीतीश कुमार ने अपने सरकारी आवास 7, सर्कुलर रोड में कार्यकर्ताओं से मिले।
  • 12 जुलाई को बांकीपुर से भाजपा प्रत्याशी नीरज कुमार सिन्हा और भाजपा नेताओं से सरकारी आवास में मिले।
  • 12 जुलाई को वह पार्टी दफ्तर में गए और छोटी बैठक की। इसके बाद पटना के गर्दनीबाग स्थित बापू टावर में राष्ट्रपिता महात्मा गांधी पर आधारित एक दिवसीय प्रदर्शनी का उद्घाटन किया।

सवाल-2ः …तो फिर इसकी चर्चा कैसे शुरू हुई?

जवाबः विपक्षी दलों विशेषकर RJD अक्सर राजनीतिक बयानबाजी करती है कि नीतीश कुमार को 'बंधक' बना लिया गया है या वे कुछ चुनिंदा लोगों के नियंत्रण में हैं। ताजा चर्चा JDU सांसद के बयान के बाद शुरू हुई है। हाल की 3 घटनाओं को जानिए...

घटना-1ः JDU सांसद का सामने आया वीडियो

12 जुलाई को झंझारपुर से JDU सांसद रामप्रीत मंडल का एक वीडियो सोशल मीडिया पर सामने आया। जिसमें वह अपने लोगों के बीच बैठकी में यह कहते सुने गए कि मैं पिछले 2 महीने से नीतीश कुमार से मिलने का प्रयास कर रहा हूं, लेकिन मुझे मिलने नहीं दिया जा रहा है।’

  • रामप्रीत मंडल वीडियो में आगे यह कहते हुए सुने गए- ‘‎नीतीश जी ने मुझे दो बार टिकट‎ दिया। लेकिन उनको हमारी बात भी‎ तो सुननी चाहिए। आज हम‎ तकलीफ में हैं। भटके हुए हैं।‎ पिछड़ा, अतिपिछड़ा भटका हुआ है।
  • ‎हमारी बात तो उनको सुननी ही‎ चाहिए। लेकिन मिलने ही नहीं दे‎ रहे। कभी कहते है कि बीमार हैं।‎ कभी ये, तो कभी वो बात कहते हैं। ‎मैं जानता हूं कि अब मुझे चुनाव ‎लड़ने के लिए टिकट नहीं मिलेगा।‎ लेकिन सही बात तो मैं कहूंगा।‎’
  • वीडियो सामने आने के बाद रामप्रीत मंडल ने सोशल मीडिया पर वीडियो जारी कर सफाई दी। उन्होंने कहा, ‘यूट्यूबर ने तोड़-मरोड़कर तथ्यों से परे और भ्रामक वीडियो जारी किया है। जिसकी मैं कड़ी शब्दों में निंदा करता हूं। मैं पिछले कुछ दिनों से बीमार था और कल ही अस्पताल से इलाज कराकर वापस लौटा हूं। ऐसी स्थिति में मेरे बारे में भ्रामक एवं निराधार बातें फैलाना न केवल दुर्भाग्यपूर्ण है, बल्कि जनमानस को भ्रमित करने का एक प्रयास भी है।'

JDU सांसद रामप्रीत मंडल ने सफाई देते हुए कहा है- मैं JDU परिवार के राष्ट्रीय अध्यक्ष नीतीश कुमार, राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष संजय झा तथा बिहार प्रदेश अध्यक्ष उमेश सिंह कुशवाहा के नेतृत्व एवं मार्गदर्शन में संगठन की विचारधारा, जनसेवा और विकास के संकल्प के साथ पूरी निष्ठा से कार्य करता रहूंगा।'

घटना-2ः नीतीश के आसपास घेराबंदी है

पूर्व सांसद आनंद मोहन ने हाल में एक इंटरव्यू में कहा- ‘नीतीश कुमार अचेता अवस्था में हैं। उनको मुखौटा बनाकर चंडाल चौकड़ी अपना आर्थिक साम्राज्य खड़ा कर रही है। चंडाल चौकड़ी ने नीतीश कुमार को जेड प्लस सिक्योरिटी दिलाकर उनके आसपास घेराबंदी कर दी है।

वह उसके जरिए जो चाहते हैं करते हैं। नीतीश कुमार के आसपास का घेरा तय करता है कि वह किससे मिलेंगे और किससे नहीं मिलेंगे। किस नेता की बात उनक तक पहुंचानी है, किसकी बात नहीं पहुंचानी है। यह सब कुछ लोग तय करते हैं।’

घटना-3ः RCP को हंगामे के बाद मिली एंट्री

27 जून की सुबह पूर्व केंद्रीय मंत्री और नीतीश कुमार के साथी रह चुके RCP सिंह उनसे मिलने पहुंचे। अंदर जाने से रोक दिया गया। कार्यकर्ताओं ने नीतीश कुमार के आवास के बाहर JDU नेता संजय गांधी और ललन सराफ के खिलाफ नारेबाजी की।

कार्यकर्ताओं का कहना था कि संजय गांधी और ललन सराफ ही नीतीश कुमार से मिलने नहीं दे रहे हैं। 20 मिनट तक चले शोरगुल के बाद RCP सिंह को अंदर बुलाया गया। थोड़ी देर कार्यकर्ताओं के साथ ही मिले और फिर निकल गए।

बता दें, RCP सिंह बीते 6 महीने से लगातार JDU में एंट्री करने के प्रयासरत हैं। उनकी बात नीतीश कुमार से नहीं हो पा रही है। अंत में बात नहीं बनते देख RCP सिंह अपने समर्थकों और मीडिया को बुलाकर सीधे नीतीश कुमार से मिलने पहुंचे थे।

27 जून की सुबह RCP सिंह नीतीश कुमार से मिलने पहुंचे थे। पहले उनको इंतजार कराया गया। बाद में बवाल बढ़ा तो अंदर एंट्री दी गई।

सवाल-3ः तो क्या नीतीश कुमार तय नहीं करते किससे मिलना है, किससे नहीं?

जवाबः सूत्रों की मानें तो नीतीश कुमार अब पहले की तरह नहीं रह गए हैं। बीमारी संबंधित दिक्कतें हैं। नीतीश कुमार के करीबी नेताओं का एक ग्रुप है, जो सब चीजें तय करता है। वह किससे मिलेंगे, किससे नहीं। हालांकि, नीतीश कुमार अपने मन से भी बहुत सारे कार्य करते हैं।

  • पॉलिटिकल एनालिस्ट संजय सिंह कहते हैं, ‘नीतीश कुमार जब तक पूरी तरह फीट थे, वह जो चाहते थे करते थे। अभी ऐसी स्थिति नहीं है। उनके आवास में पहले भी सबकी सीधी एंट्री नहीं थी, अब भी नहीं हैं। हालांकि, अब यह फर्क है कि पहले नीतीश कुमार तय करते थे कि कौन आएगा, कौन नहीं। अब उनके आसपास के कुछ लोग तय करते हैं।’
  • संजय सिंह कहते हैं, ‘इस वक्त दो लोग सबसे पावरफुल हैं-राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष संजय झा और केंद्रीय मंत्री ललन सिंह। उनके बिना इजाजत के कोई नीतीश कुमार से नहीं मिल सकता।’
  • संजय सिंह कहते हैं, ‘नीतीश कुमार के साथ साये की तरह JDU MLC संजय गांधी, ललन सराफ रहते हैं। वह भी तय करते हैं कि उनको किससे मिलना है और किनसे नहीं।’

सवाल-4ः फिर JDU को चला कौन रहा है?

जवाबः सीधा जवाब है-पार्टी तो नीतीश कुमार ही चला रहे हैं। वह राष्ट्रीय अध्यक्ष हैं। हालांकि, हाल में हुई 2 बड़ी घटनाओं ने संकेत दिया है कि पार्टी अब कोई और चला रहा है।

1. थोड़ी सी बहस हुई, बाहर कर दिए गए छोटू सिंह

8 जुलाई को बिहार JDU की प्रदेश कार्यकारिणी की लिस्ट आई। जिसमें अरविंद कुमार सिंह उर्फ छोटू सिंह को प्रदेश महासचिव पद से हटा दिया गया। इससे नाराज छोटू सिंह 10 जुलाई को पार्टी के राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष संजय झा के आवास पर पहुंचे।

उन्होंने अपनी नाराजगी व्यक्त की। कहा- बोलिएगा तो हमलोग पार्टी छोड़कर चले जाएंगे। इस पर संजय झा ने कहा-माहौल मत बनाइए। जाइए।

  • इस घटना का वीडियो सामने आया। इसके बाद 10 जुलाई की शाम में ही JDU ने छोटू सिंह को 6 साल के लिए पार्टी से निकाल दिया। अनुशासनहीनता का आरोप लगा।
  • JDU के इस फैसले के बाद सम्राट सरकार ने 11 जुलाई की रात को छोटू सिंह को बिहार राज्य नागरिक परिषद के महासचिव पद से भी हटा दिया। नीतीश कुमार ने छोटू सिंह को 23 जून 2025 को राज्य नागरिक परिषद का महासचिव मनोनीत किया था।

नीतीश कुमार लगातार JDU कार्यकर्ताओं से मिल रहे हैं। कार्यक्रम में शामिल हो रहे हैं। तस्वीर-10 जुलाई की NDA नेताओं की बैठक के दौरान की है।

2. संगठन में कई पुराने नेता किनारे किए गए

8 जुलाई को JDU ने बिहार प्रदेश कमेटी की घोषणा की। जिसमें 12 उपाध्यक्ष, 38 महासचिव व 74 सचिव बनाए। पिछली कमेटी में पदाधिकारी रहे कई नेताओं को बिल्कुल किनारे कर दिया गया। कुछ का डिमोशन हुआ।

  • लोकप्रकाश सिंह, अंजनी सिंह तथा अरविंद कुमार सिंह उर्फ छोटू सिंह महासचिव थे। नई कमेटी में इन्हें जगह नहीं मिली। भूमिपाल कई जिलों के प्रभारी थे। नई कमेटी में नहीं हैं। ओमप्रकाश सिंह सेतु महासचिव थे। किंतु इस बार उन्हें सचिव बनाया गया।
  • बताया जा रहा है कि इस बार कमेटी में संजय झा के भरोसेमंदों को ज्यादा जगह दी गई है। कई ऐसे नेता जो खुद को नीतीश कुमार का पुराना सिपहसालार बताते थे, उन्हें मुख्य कार्यकारी पदों (जैसे महासचिव या प्रवक्ता) से हटाकर प्रदेश उपाध्यक्ष जैसे बड़े लेकिन कम प्रभाव वाले पदों पर 'एडजस्ट' किया गया।

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