ट्रंप ने हॉर्मुज पर 20% शुल्क योजना एक दिन बाद ही रद्द की, अब खाड़ी देशों से करेंगे निवेश समझौते

ALN NEWS DESK
एएलएन न्यूज डेस्क
अपडेटेड : Jul 15, 2026, 07:06 AM IST
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हॉर्मुज से गुजरने वाले माल पर 20% शुल्क लगाने की घोषणा के 24 घंटे में ही डोनाल्ड ट्रंप ने यूटर्न ले लिया है। उन्होंने कहा है कि खाड़ी देशों के नेताओं के साथ बातचीत के बाद उन्होंने प्रस्तावित शिपिंग शुल्क को बदलने का फ़ैसला किया है।

डोनाल्ड ट्रंप ने हाल ही में हॉर्मुज स्ट्रेट से गुजरने वाले कार्गो जहाजों पर 20 प्रतिशत शुल्क लगाने की अपनी योजना को एक दिन बाद ही वापस ले लिया है। यह निर्णय अमेरिकी राष्ट्रपति की ओर से खाड़ी देशों के साथ बड़े व्यापार और निवेश समझौतों की दिशा में एक नया कदम है, जिससे अमेरिका को आर्थिक लाभ मिलने की उम्मीद है। ट्रंप ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ट्रुथ सोशल पर लिखा कि खाड़ी देशों के नेताओं के साथ सकारात्मक बातचीत के बाद उन्होंने यह फ़ैसला किया है।

एक दिन पहले क्या कहा था?

सोमवार को, ट्रंप ने एक बयान में कहा था कि अमेरिका हॉर्मुज जलडमरूमध्य का 'गार्जियन' यानी संरक्षक बनेगा। उन्होंने स्पष्ट किया कि सुरक्षा के बदले सभी कार्गो जहाजों से 20 प्रतिशत शुल्क लिया जाएगा। उनका यह बयान उस समय आया जब ईरान के साथ अमेरिका के रिश्ते पहले से ही तनावपूर्ण थे। ट्रंप ने कहा था कि अमेरिका इस रणनीतिक समुद्री मार्ग की सुरक्षा करेगा और इसके लिए शुल्क वसूला जाएगा। ईरान ने इस प्रस्ताव पर तीखी प्रतिक्रिया दी थी। ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अरागची ने टिप्पणी की थी कि 20 प्रतिशत शुल्क बहुत अधिक है और ईरान इसे सस्ते में कर देगा। इसके अलावा, ईरान की सेना ने स्पष्ट किया था कि वह हॉर्मुज जलडमरूमध्य पर किसी भी अमेरिकी नियंत्रण को स्वीकार नहीं करेगी और चेतावनी दी थी कि बिना ईरान की अनुमति के अमेरिकी हस्तक्षेप का कड़ा जवाब दिया जाएगा।

अब क्यों बदला फ़ैसला?

ट्रंप ने मंगलवार को अपने रुख में बदलाव करते हुए कहा कि शुल्क लगाने के बजाय खाड़ी देशों से बड़े पैमाने पर निवेश की दिशा में कदम उठाए जाएंगे। उन्होंने कहा कि मध्य पूर्व के नेताओं के साथ उनकी बातचीत सफल रही है, जिसके परिणामस्वरूप उन्होंने 20 प्रतिशत शुल्क की योजना को वापस लेने का निर्णय लिया। यह बदलाव इस बात का संकेत हो सकता है कि ट्रंप प्रशासन खाड़ी देशों के साथ संबंधों को मजबूत करने और आर्थिक सहयोग बढ़ाने के लिए प्रतिबद्ध है।

ईरानी जहाजों पर नाकाबंदी जारी रहेगी

हालाँकि ट्रंप ने 20 प्रतिशत शुल्क की योजना को वापस ले लिया है, लेकिन उन्होंने स्पष्ट किया कि ईरान से जुड़े जहाजों पर पूर्ण नाकाबंदी जारी रहेगी। उनका कहना था कि ईरानी बंदरगाहों से आने-जाने वाले जहाजों या ईरानी माल ढोने वाले जहाजों को रोकने की नीति में कोई बदलाव नहीं किया गया है। ट्रंप ने कहा कि यह 'ईरानी नाकाबंदी' केवल ईरान के जहाजों और उसके ग्राहकों पर लागू होगी, जबकि अन्य देशों के जहाजों को जलडमरूमध्य से आने-जाने की पूरी अनुमति होगी। उन्होंने यह भी कहा कि अमेरिका को 'हॉर्मुज का संरक्षक' कहा जाएगा और इस कार्य में अमेरिकी सेना की भूमिका की सराहना की।

ईरान पर फिर निशाना

ट्रंप ने अपने बयान में ईरान के नेतृत्व पर भी हमला बोला। उन्होंने कहा कि ईरान को कभी भी परमाणु हथियार नहीं बनाने दिया जाएगा। ट्रंप ने आरोप लगाया कि ईरानी सरकार ने अपने ही नागरिकों पर अत्याचार किए हैं और देश को विनाश की ओर धकेला है। यह बयान ईरान के साथ अमेरिका के रिश्तों में मौजूदा तनाव को और बढ़ा सकता है।

हॉर्मुज क्यों है इतना अहम?

हॉर्मुज स्ट्रेट दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण समुद्री व्यापार मार्गों में से एक है। यह फारस की खाड़ी को ओमान की खाड़ी से जोड़ता है और यहां से दुनिया के करीब 20 प्रतिशत कच्चे तेल और तरलीकृत प्राकृतिक गैस (एलएनजी) की ढुलाई होती है। इस मार्ग में किसी भी तरह की रुकावट का सीधा असर वैश्विक तेल कीमतों और अंतरराष्ट्रीय व्यापार पर पड़ता है। इसलिए, हॉर्मुज जलडमरूमध्य की सुरक्षा और वहां की स्थिति अंतरराष्ट्रीय बाजारों के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है।

हालांकि ट्रंप द्वारा शुल्क लगाने का प्रस्ताव वापस ले लिया गया है, लेकिन अमेरिका और ईरान के बीच तनाव अभी भी कम नहीं हुआ है। हाल के दिनों में दोनों देशों के बीच सैन्य गतिविधियाँ बढ़ी हैं और हॉर्मुज स्ट्रेट की सुरक्षा को लेकर दोनों पक्ष आमने-सामने बने हुए हैं। ट्रंप का यह निर्णय खाड़ी देशों के साथ आर्थिक सहयोग बढ़ाने की दिशा में एक सकारात्मक कदम हो सकता है, लेकिन ईरान के साथ चल रहे तनाव को देखते हुए यह स्थिति और भी जटिल हो सकती है।

इस बीच, अमेरिकी प्रशासन को यह सुनिश्चित करना होगा कि हॉर्मुज जलडमरूमध्य में किसी भी प्रकार की सुरक्षा की कमी न हो और साथ ही ईरान के साथ बातचीत में भी संतुलन बना रहे। यह स्थिति वैश्विक ऊर्जा बाजारों में स्थिरता बनाए रखने और अंतरराष्ट्रीय व्यापार को सुचारु रूप से चलाने के लिए आवश्यक है।

भविष्य की संभावनाएँ

ट्रंप द्वारा खाड़ी देशों के साथ निवेश समझौतों की दिशा में कदम उठाने के बाद, यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि इन समझौतों का वास्तविक प्रभाव क्या होता है। यदि ये समझौते सफल होते हैं, तो इससे अमेरिका की आर्थिक स्थिति को मजबूती मिल सकती है और खाड़ी देशों के साथ सहयोग बढ़ सकता है। हालांकि, यह भी ध्यान रखना जरूरी है कि ईरान के साथ तनावपूर्ण संबंध और क्षेत्र में बढ़ती सैन्य गतिविधियाँ इस प्रक्रिया को प्रभावित कर सकती हैं।

अंतरराष्ट्रीय स्तर पर, हॉर्मुज जलडमरूमध्य की सुरक्षा को लेकर अमेरिका की भूमिका पर भी सवाल उठ सकते हैं। क्या अमेरिका अपने सैन्य संसाधनों का उपयोग कर ईरान के खिलाफ कार्रवाई करेगा, या फिर वह बातचीत के माध्यम से स्थिति को नियंत्रित करने की कोशिश करेगा? इन सवालों का उत्तर आने वाले समय में स्पष्ट होगा।

अंततः, ट्रंप का यह निर्णय खाड़ी देशों के साथ व्यापारिक सहयोग को बढ़ावा देने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम हो सकता है, लेकिन इसके साथ ही ईरान के प्रति अमेरिकी नीति में निरंतरता और स्पष्टता की आवश्यकता है। यह न केवल अमेरिका के लिए, बल्कि वैश्विक ऊर्जा सुरक्षा और अंतरराष्ट्रीय व्यापार के लिए भी महत्वपूर्ण है।

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