राहुल गांधी के नेतृत्व में कांग्रेस सांसदों ने पीएम आवास के बाहर धरना दिया, शिक्षा मंत्री के इस्तीफे की मांग की। केंद्रीय मंत्री जितेंद्र सिंह ने धरना स्थल पर पहुंचकर बातचीत की।
नई दिल्ली, भारत 21 जुल॰ 2026 ALN: शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफ़े की मांग को लेकर कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) का विरोध प्रदर्शन जंतर-मंतर पर जारी है.
वहीं कांग्रेस के सांसदों ने राहुल गांधी के नेतृत्व में प्रधानमंत्री आवास 7 लोक कल्याण मार्ग के बाहर धरना प्रदर्शन शुरू किया है. कांग्रेस सांसदों की मांग है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान इस्तीफ़ा दें.
अब से थोड़ी देर पहले पीएम आवास के पास धरना दे रहे राहुल गांधी और अन्य कांग्रेस नेताओं से मिलने केंद्रीय मंत्री जितेंद्र सिंह पहुँचे हैं.
धरना स्थल से सामने आ रही तस्वीरों में जितेंद्र सिंह को राहुल गांधी से बात करते देखा जा सकता है.
वहीं सोमवार को संसद चलो मार्च के दौरान सीजेपी प्रदर्शनकारियों पर लाठीचार्ज किया गया था जिसमें कई युवा घायल हुए थे.
इस बीच मंगलवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पहली बार नीट पेपर लीक मामले को लेकर एक बयान दिया.
हालांकि पीएम मोदी का ये बयान सीधे नहीं आया बल्कि केंद्रीय संसदीय कार्यमंत्री किरेन रिजिजू के ज़रिए सामने आया.
लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने सोशल मीडिया एक्स पर पोस्ट कर कांग्रेस सांसदों के पीएम आवास के बाहर धरना प्रदर्शन की जानकारी दी.
उन्होंने एक्स पर लिखा, "कल युवा स्टूडेंट्स के साथ हुई क्रूरता को लेकर पीएम मोदी से जवाब मांगने के लिए हमने उनके घर तक मार्च किया है."
"सरकार कोई जवाबदेही नहीं लेना चाहती या संसद में इस पर बहस नहीं चाहती. भारत के युवाओं का भविष्य बर्बाद करने के लिए प्रधानमंत्री और गृह मंत्री को इस्तीफ़ा दे देना चाहिए."
कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे भी धरना स्थल पर पार्टी सांसदों के साथ हैं.
उन्होंने एक्स पर लिखा, "कांग्रेस पार्टी छात्रों के हक और उनकी जायज़ मांगों के साथ है. हम प्रधानमंत्री निवास के बाहर धरने पर बैठे हैं."
"इस बुज़दिल तानाशाह सरकार को लाठीचार्ज और बल प्रयोग पर जवाब देना होगा. मोदी-शाह हमारे युवाओं के गुनहगार हैं, उनको इस्तीफ़ा देना पड़ेगा."
इस दौरान पुलिस ने पंजाब कांग्रेस के नेता चरणजीत सिंह चन्नी और सुखजिंदर सिंह रंधावा को हिरासत में लिया.
चन्नी ने मीडिया से कहा, "ये बीजेपी का आतंकवाद है. ये छात्रों को सुन नहीं रहे हैं."
मॉनसून सत्र के दूसरे दिन एनडीए सांसदों के 'मंगल मिलन' में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पेपर लीक के मुद्दे पर सरकार का पक्ष रखा.
बैठक के बाद केंद्रीय संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने मीडिया को प्रधानमंत्री के संबोधन की जानकारी दी.
किरेन रिजिजू ने कहा, "नीट परीक्षा के बारे में प्रधानमंत्री ने कहा है कि जब इसकी ख़बर आई तो सरकार ने तुरंत कार्रवाई की और 12 लोगों को गिरफ़्तार करके जेल भेजा गया है."
रिजिजू ने बताया, "इसके अलावा, पीएम मोदी ने कहा कि छात्रों के भविष्य को प्राथमिकता देते हुए, बिना किसी देरी के दोबारा नीट परीक्षा कराई गई और सफलतापूर्वक इसे कराया गया. इसके नतीजे घोषित करने में देरी नहीं हुई. उन्होंने पेपर लीक जैसी घटनाओं को रोकने के लिए उठाए जा रहे कड़े कदमों के बारे में भी बताया."
"पीएम मोदी ने अपील की है कि जो पेपर लीक मामले में लिप्त हैं, उनको सख़्त से सख़्त कैसे दी जाए इसके लिए टॉप क्लास के वकील साथ दें, ताकि पेपर लीक जैसे पाप के लिए सख़्त सज़ा मिले. आगे पेपर लीक न हो इसको लेकर जो सख़्त क़दम उठाए गए हैं, उसके बारे में भी पीएम मोदी ने जानकारी दी है."
"पीएम मोदी ने ये भी कहा कि पेपर लीक सिर्फ़ केंद्र सरकार का मामला नहीं है बल्कि पूरे देश के अलग-अलग राज्यों को पेपर लीक मामले में लिप्त लोगों को सज़ा देने के लिए एकजुट होना चाहिए."
पीएम मोदी का यह बयान ऐसे समय आया है, जब कॉकरोच जनता पार्टी पेपर लीक के मुद्दे को लेकर प्रदर्शन कर रही है.
इस धरने का मुख्य कारण पिछले दिनों नीट परीक्षा में हुए पेपर लीक का मामला है, जिसने छात्रों के भविष्य को प्रभावित किया है. इस मुद्दे ने पूरे देश में छात्रों के बीच गुस्से और चिंता का माहौल पैदा कर दिया है. कांग्रेस पार्टी, जो खुद को छात्रों की आवाज़ मानती है, इस मुद्दे पर सरकार की जवाबदेही तय करने के लिए सक्रिय रूप से सामने आई है. राहुल गांधी और अन्य कांग्रेस नेता इस धरने के माध्यम से यह संदेश देना चाहते हैं कि सरकार को छात्रों की परेशानियों को गंभीरता से लेना चाहिए और उनकी मांगों का सम्मान करना चाहिए.
कांग्रेस द्वारा उठाए गए इस मुद्दे ने सरकार के लिए एक चुनौती उत्पन्न की है, क्योंकि छात्रों और उनके परिवारों की भावनाएं इस मामले में गहराई से जुड़ी हुई हैं. यदि सरकार इस मुद्दे पर संतोषजनक उत्तर नहीं देती है, तो यह न केवल राजनीतिक दुष्प्रभाव पैदा कर सकता है, बल्कि आने वाले चुनावों में भी इसका असर पड़ सकता है.
इस धरने का एक और महत्वपूर्ण पहलू यह है कि यह छात्रों के अधिकारों और उनके भविष्य के प्रति सरकार की जिम्मेदारी को उजागर करता है. जब छात्रों को शिक्षा और परीक्षा के मामले में इस तरह की समस्याओं का सामना करना पड़ता है, तो यह उनके मानसिक स्वास्थ्य और भविष्य पर नकारात्मक प्रभाव डाल सकता है. ऐसे में सरकार को चाहिए कि वह इस मुद्दे को गंभीरता से ले और छात्रों के हित में ठोस कदम उठाए.
कांग्रेस पार्टी का यह धरना और प्रदर्शन न केवल नीट परीक्षा के पेपर लीक के मामले को उजागर करता है, बल्कि यह छात्रों की आवाज़ को भी मजबूती से उठाने का एक माध्यम बन गया है. छात्रों की समस्याओं को नजरअंदाज करना किसी भी सरकार के लिए उचित नहीं है, और इस धरने के माध्यम से कांग्रेस पार्टी इस बात को स्पष्ट करना चाहती है कि वह छात्रों के साथ खड़ी है.
इस प्रकार, यह धरना कांग्रेस पार्टी के लिए एक महत्वपूर्ण राजनीतिक अवसर है, जिससे वह अपनी स्थिति को मजबूत कर सकती है और छात्रों के मुद्दों पर अपनी प्रतिबद्धता को दर्शा सकती है. साथ ही, यह सरकार के लिए भी एक चेतावनी है कि उसे छात्रों के भविष्य के प्रति अपनी जिम्मेदारियों को समझना होगा और उन्हें पूरा करना होगा.
कुल मिलाकर, यह धरना एक महत्वपूर्ण राजनीतिक घटना है, जो न केवल वर्तमान समय में छात्रों की समस्याओं को उजागर करता है, बल्कि भविष्य में भी शिक्षा के क्षेत्र में सुधार की आवश्यकता को रेखांकित करता है.
इस धरने के परिणामस्वरूप, यह स्पष्ट हो गया है कि शिक्षा के मुद्दे पर राजनीतिक दलों के बीच की प्रतिस्पर्धा और तर्क-वितर्क केवल छात्रों के भविष्य के लिए ही नहीं, बल्कि देश की सामाजिक और आर्थिक स्थिरता के लिए भी महत्वपूर्ण है. शिक्षा के क्षेत्र में सुधार की दिशा में उठाए गए कदम न केवल छात्रों के लिए बल्कि देश के विकास के लिए भी आवश्यक हैं.
अंत में, यह धरना उन सभी के लिए एक अनुस्मारक है जो शिक्षा के महत्व को समझते हैं और चाहते हैं कि सरकार इस क्षेत्र में सुधार के लिए ठोस कदम उठाए. यह छात्रों की आवाज़ को सुनने और उनकी समस्याओं को हल करने की आवश्यकता को भी उजागर करता है, ताकि भविष्य में इस तरह की समस्याओं का सामना न करना पड़े.
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