मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री मोहन यादव ने कटनी में एक जनसभा में समान नागरिक संहिता (UCC) लाने की घोषणा की। उन्होंने कहा कि एक ही शादी करने वाला ही मध्यप्रदेश में रह पाएगा।
भोपाल, भारत 17 जुल॰ 2026 ALN: मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री मोहन यादव ने हाल ही में कटनी में एक महत्वपूर्ण घोषणा की, जिसमें उन्होंने कहा कि राज्य में वही व्यक्ति रह पाएगा जो एक ही शादी करेगा। यह टिप्पणी मध्यप्रदेश विधानसभा के मानसून सत्र के दौरान समान नागरिक संहिता (UCC) को लागू करने की योजना के संदर्भ में की गई। मुख्यमंत्री ने इस बात पर जोर दिया कि हिंदुओं और मुसलमानों के लिए अलग-अलग कानूनों की आवश्यकता नहीं होनी चाहिए और सभी नागरिकों के लिए एक समान कानून होना चाहिए।
मुख्यमंत्री ने यह भी कहा कि यदि राम एक शादी करेगा, तो रहीम को दो या चार शादियां करने का अधिकार नहीं होना चाहिए। उनका यह बयान समाज में समानता और एकता की आवश्यकता पर आधारित था, जिसमें उन्होंने मुस्लिम बहनों को भी अपनी बहनें बताया और उनके अधिकारों की रक्षा की बात की। यह बयान एक ऐसे समय में आया है जब भारत में विभिन्न धर्मों के बीच सामाजिक और कानूनी असमानताओं को दूर करने की आवश्यकता महसूस की जा रही है।
मुख्यमंत्री ने तीन तलाक के मुद्दे पर भी बात की और कहा कि अब यह प्रथा समाप्त हो चुकी है। उन्होंने स्पष्ट किया कि यदि कोई व्यक्ति 'तलाक, तलाक, तलाक' कहेगा, तो उसे जेल जाना पड़ेगा। यह बयान उस समय आया है जब भारत में तीन तलाक को लेकर कई कानूनी और सामाजिक बहसें चल रही हैं। तीन तलाक की प्रथा को समाप्त करने के लिए 2019 में एक कानून पारित किया गया था, जिसमें इसे अवैध घोषित कर दिया गया। यह कानून मुस्लिम महिलाओं के अधिकारों की रक्षा के लिए एक महत्वपूर्ण कदम माना गया था।
अगली कैबिनेट में मंजूरी, फिर विधानसभा में आएगा बिल
मुख्यमंत्री ने बताया कि अगले कैबिनेट बैठक में UCC के मसौदे को मंजूरी दी जाएगी। यह बैठक भोपाल के जगदीशपुर में होगी। इसके बाद, सरकार इस विधेयक को विधानसभा के आगामी मानसून सत्र में पेश करेगी। उन्होंने कहा कि इस कानून का उद्देश्य सभी नागरिकों के लिए समान व्यवस्था लागू करना और भेदभाव को समाप्त करना है। UCC का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि सभी नागरिकों को समान अधिकार और सुरक्षा मिले, चाहे वे किसी भी धर्म या समुदाय से संबंधित हों।
संविधान में यूनिफॉर्म सिविल कोड के बारे में क्या कहा गया है?
भारतीय संविधान के अनुच्छेद 44 के भाग- 4 में यूनिफॉर्म सिविल कोड का उल्लेख किया गया है। इसमें कहा गया है कि राज्य, देशभर में नागरिकों के लिए एक समान नागरिक संहिता लागू करने का प्रयास करेगा। यह अनुच्छेद संविधान के नीति-निदेशक तत्वों का हिस्सा है, जो सरकारों के लिए एक मार्गदर्शक के रूप में कार्य करता है। नीति निदेशक तत्वों के अंतर्गत उन सिद्धांतों और उद्देश्यों का उल्लेख होता है, जिन्हें सरकारों को प्राप्त करने के लिए कार्य करना होता है। UCC का लक्ष्य सभी नागरिकों को समान अधिकार और सुरक्षा प्रदान करना है, जिससे समाज में व्याप्त भेदभाव को समाप्त किया जा सके।
उत्तराखंड, गुजरात और असम में UCC लागू
वर्तमान में, भारत के तीन राज्यों उत्तराखंड, गुजरात और असम में UCC लागू है। उत्तराखंड ने इसे सबसे पहले 2024 में लागू किया था, इसके बाद गुजरात और असम ने भी इसे अपनाया। पश्चिम बंगाल और बिहार के नेताओं ने भी UCC लागू करने का वादा किया था। अब मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री मोहन यादव ने भी इसी मानसून सत्र में इसे लागू करने का ऐलान किया है, जो कि एक महत्वपूर्ण राजनीतिक कदम है।
UCC संविधान सभा में 1948 में पेश किया गया
UCC की अवधारणा का इतिहास काफी पुराना है। 1835 में, ब्रिटिश सरकार ने एक रिपोर्ट प्रस्तुत की थी, जिसमें आपराधिक साक्ष्य और अनुबंधों के संबंध में देशभर में एक समान कानून बनाने की आवश्यकता पर जोर दिया गया था। हालांकि, धर्म के आधार पर हिंदुओं और मुसलमानों के व्यक्तिगत कानूनों को अलग रखा गया, जिससे समान नागरिक संहिता की मांग उठी। 1941 में बीएन राव समिति का गठन किया गया था, जिसने हिंदुओं के लिए एक समान नागरिक संहिता बनाने की सिफारिश की थी। स्वतंत्रता के बाद, हिंदू संहिता विधेयक पहली बार 1948 में संविधान सभा में प्रस्तुत किया गया था, जिसका उद्देश्य हिंदू महिलाओं को बाल विवाह और सती प्रथा जैसी गलत प्रथाओं से मुक्त करना था।
MP यूसीसी की फाइनल रिपोर्ट समिति ने CM को सौंपी: आदिवासी दायरे से बाहर
मध्य प्रदेश में समान नागरिक संहिता (UCC) लागू करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाया गया है। राज्य सरकार की उच्च स्तरीय समिति ने हाल में मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव को UCC की फाइनल रिपोर्ट सौंप दी है। इस रिपोर्ट में अनुसूचित जनजातियों (ST) को UCC के दायरे से बाहर रखने और लिव-इन रिलेशनशिप का रजिस्ट्रेशन अनिवार्य करने की सिफारिश की गई है। यह सिफारिशें इस बात को दर्शाती हैं कि सरकार किस प्रकार से विभिन्न समुदायों के बीच संतुलन बनाने का प्रयास कर रही है।
यूसीसी के सपोर्ट में 71% मुस्लिम महिलाएं
मध्य प्रदेश में समान नागरिक संहिता लागू करने से पहले आम नागरिकों से सुझाव लिए गए हैं। इसमें मुस्लिम पुरुषों में केवल 38% ने UCC का समर्थन किया, जबकि 15 हजार मुस्लिम महिलाओं में से 10.5 हजार यानी 71% ने UCC के पक्ष में सुझाव दिया है। यह आंकड़ा यह दर्शाता है कि मुस्लिम महिलाएं इस कानून को लेकर सकारात्मक दृष्टिकोण रखती हैं और इसे अपने अधिकारों की सुरक्षा के लिए एक महत्वपूर्ण कदम मानती हैं।
इस प्रकार, मध्यप्रदेश में UCC के लागू होने से न केवल धार्मिक समानता को बढ़ावा मिलेगा, बल्कि यह विभिन्न समुदायों के बीच एकता और समरसता को भी बढ़ावा देगा। यह कानून यदि सफलतापूर्वक लागू होता है, तो यह अन्य राज्यों के लिए भी एक उदाहरण स्थापित कर सकता है। हालांकि, इसे लागू करने में आने वाली चुनौतियों और विवादों को भी ध्यान में रखना आवश्यक है। UCC का उद्देश्य समाज में व्याप्त भेदभाव को समाप्त करना और सभी नागरिकों को समान अधिकार प्रदान करना है, जिससे एक समृद्ध और समान समाज की दिशा में कदम बढ़ाया जा सके।
UCC की संभावनाओं और चुनौतियों पर चर्चा करते हुए, यह ध्यान में रखना महत्वपूर्ण है कि भारत एक विविधता से भरा देश है, जिसमें विभिन्न धर्मों, संस्कृतियों और परंपराओं का समावेश है। ऐसे में एक समान नागरिक संहिता का कार्यान्वयन न केवल कानूनी दृष्टिकोण से, बल्कि सामाजिक दृष्टिकोण से भी चुनौतीपूर्ण हो सकता है। इससे संबंधित विभिन्न समुदायों के दृष्टिकोण और चिंताओं को ध्यान में रखते हुए, एक संतुलित और प्रभावी कानून तैयार करना आवश्यक होगा।
अंत में, यह कहा जा सकता है कि UCC का उद्देश्य केवल कानूनी समानता नहीं है, बल्कि इसे समाज में समरसता और भाईचारे को बढ़ावा देने के लिए भी देखा जा सकता है। यदि सही तरीके से लागू किया जाए, तो यह कानून न केवल नागरिकों के अधिकारों की रक्षा करेगा, बल्कि एक मजबूत और एकजुट समाज की दिशा में भी एक महत्वपूर्ण कदम होगा।
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