भाजयुमो ने जेपीएससी भर्ती में पारदर्शिता की मांग को लेकर पलामू में मशाल जुलूस निकाला। रांची में महाघेराव की तैयारी की जा रही है।
रांची, भारत 21 जुल॰ 2026 ALN: पलामू से चंद्रशेखर सिंह की रिपोर्ट
Palamu BJYM Protest: झारखंड लोक सेवा आयोग (जेपीएससी) के अंतर्गत आयोजित भर्ती परीक्षाओं में पारदर्शिता और जवाबदेही की मांग को लेकर भारतीय जनता युवा मोर्चा (भाजयुमो) ने हाल ही में अपनी गतिविधियों को तेज कर दिया है। इस आंदोलन का उद्देश्य केवल एक संस्था या व्यक्ति के खिलाफ नहीं है, बल्कि यह झारखंड के लाखों युवाओं के भविष्य और उनके अधिकारों की रक्षा के लिए किया जा रहा है। 22 जुलाई को रांची स्थित जेपीएससी कार्यालय के प्रस्तावित लोकतांत्रिक घेराव से पहले, 18 जुलाई को पलामू में मशाल जुलूस निकालकर जनजागरण अभियान चलाया गया। इस जुलूस में बड़ी संख्या में युवा कार्यकर्ताओं ने भाग लिया और भर्ती प्रक्रिया को निष्पक्ष एवं पारदर्शी बनाने की मांग उठाई। भाजयुमो नेताओं ने युवाओं से रांची पहुंचकर लोकतांत्रिक तरीके से अपनी आवाज बुलंद करने की अपील की है।
मशाल जुलूस के दौरान भाजयुमो पलामू जिलाध्यक्ष डॉ विपुल गुप्ता ने कहा कि झारखंड के युवाओं के भविष्य के साथ किसी भी प्रकार का अन्याय स्वीकार नहीं किया जाएगा। उन्होंने यह भी कहा कि सरकारी भर्ती प्रक्रिया पूरी तरह निष्पक्ष, पारदर्शी और जवाबदेह होनी चाहिए, ताकि अभ्यर्थियों का जेपीएससी जैसी संवैधानिक संस्था पर विश्वास बना रहे। उनका मानना है कि मेहनत करने वाले युवाओं को उनकी योग्यता के आधार पर अवसर मिलना चाहिए। यदि भर्ती प्रक्रिया पर सवाल उठते हैं, तो यह पूरे चयन तंत्र की विश्वसनीयता को प्रभावित करता है।
भाजपा पलामू जिलाध्यक्ष डॉ. अमित तिवारी ने कहा कि यह आंदोलन किसी राजनीतिक लाभ के लिए नहीं, बल्कि राज्य के लाखों युवाओं के हितों की रक्षा के लिए किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि आयोग की कार्यप्रणाली पूरी तरह पारदर्शी होनी चाहिए, ताकि किसी भी अभ्यर्थी के मन में चयन प्रक्रिया को लेकर संदेह न रहे। उन्होंने युवाओं से 22 जुलाई को रांची में आयोजित लोकतांत्रिक घेराव में अधिक से अधिक संख्या में शामिल होकर अपनी आवाज बुलंद करने की अपील की। उनका कहना था कि लोकतांत्रिक तरीके से अपनी बात रखना प्रत्येक नागरिक का अधिकार है।
भाजयुमो के प्रदेश मंत्री विश्वजीत पाठक ने कहा कि यदि चयन प्रक्रिया पूरी तरह निष्पक्ष है, तो मुख्य परीक्षा की स्कैन की गई उत्तरपुस्तिकाएं सभी अभ्यर्थियों को उपलब्ध कराई जानी चाहिए। इसके साथ ही मूल्यांकन, मॉडरेशन और मेरिट सूची तैयार करने की पूरी प्रक्रिया भी सार्वजनिक की जानी चाहिए। उन्होंने कहा कि इससे अभ्यर्थियों के मन में किसी भी प्रकार के संदेह की गुंजाइश समाप्त होगी और आयोग की विश्वसनीयता भी मजबूत होगी। पाठक ने यह भी आरोप लगाया कि कई मामलों में अभ्यर्थियों को सूचना का अधिकार (आरटीआई) और न्यायालय का सहारा लेना पड़ता है, जो व्यवस्था में सुधार की आवश्यकता को दर्शाता है।
भाजयुमो नेताओं ने कहा कि पिछले कई वर्षों से जेपीएससी की विभिन्न भर्ती परीक्षाओं को लेकर लगातार विवाद सामने आते रहे हैं। उन्होंने विशेष रूप से 7वीं से 10वीं संयुक्त सिविल सेवा परीक्षा और 14वीं संयुक्त सिविल सेवा परीक्षा का उल्लेख करते हुए कहा कि इन परीक्षाओं में कई गंभीर सवाल उठे हैं। संगठन के अनुसार, 7वीं से 10वीं जेपीएससी परीक्षा में 54 ओएमआर शीट से जुड़ा विवाद सामने आया था, जिसके कारण न्यायालय के निर्देश के बाद आयोग को संशोधित प्रारंभिक परीक्षा परिणाम जारी करना पड़ा। वहीं, 14वीं संयुक्त सिविल सेवा परीक्षा में आयु सीमा को लेकर विवाद उत्पन्न हुआ, जिसके कारण आवेदन प्रक्रिया के दौरान बदलाव करना पड़ा। परीक्षा परिणाम जारी होने के बाद भी मूल्यांकन और चयन प्रक्रिया को लेकर कई अभ्यर्थियों ने आपत्तियां दर्ज कराई हैं। इनमें से कुछ मामले अभी भी न्यायालय में विचाराधीन हैं, जो इस बात का संकेत है कि भर्ती प्रक्रिया में सुधार की आवश्यकता है।
मशाल जुलूस में भाजयुमो और भाजपा के कई पदाधिकारी एवं कार्यकर्ता शामिल हुए। इस दौरान प्रदेश महामंत्री सिंह, भाजपा जिलाध्यक्ष डॉ. अमित तिवारी, विभाकर नारायण पांडे, शिव कुमार मिश्रा, भाजयुमो प्रदेश मंत्री विश्वजीत पाठक, आईटी सेल के आशीष भारद्वाज, जिला उपाध्यक्ष राजीव रंजन, शैलेश सिंह, सरवन गुप्ता, महिला मोर्चा की कोषाध्यक्ष लवली गुप्ता, छोटू सिन्हा, विवेक चौबे, रीना किशोर, संजय कुमार, दीप्ति नवल, किसान मोर्चा के प्रदेश समन्वयक जितेंद्र तिवारी, रूद्र सिंह, अंकित, ललिता सहाय, शुभम गुप्ता, छोटू सिंह, राहुल अग्रवाल, ओम प्रकाश दुबे, दीपक सिंह और चंद्रकांत सिंह सहित सैकड़ों युवा कार्यकर्ता उपस्थित रहे। यह जुलूस न केवल युवाओं की एकजुटता को दर्शाता है, बल्कि यह उनके अधिकारों के प्रति जागरूकता फैलाने का भी एक प्रयास है।
भाजयुमो नेताओं ने कहा कि रांची में होने वाला महाघेराव पूरी तरह लोकतांत्रिक और शांतिपूर्ण होगा। उनका उद्देश्य भर्ती प्रक्रिया में पारदर्शिता, जवाबदेही और निष्पक्षता सुनिश्चित कर राज्य के युवाओं का आयोग पर विश्वास बहाल करना है। उन्होंने उम्मीद जताई कि सरकार और आयोग युवाओं की मांगों पर गंभीरता से विचार करेंगे और भविष्य में ऐसी व्यवस्था विकसित करेंगे, जिससे भर्ती प्रक्रिया पूरी तरह पारदर्शी और विवादों से मुक्त हो सके। इस आंदोलन के पीछे की सोच यह भी है कि यदि युवा अपनी आवाज नहीं उठाएंगे, तो उनके अधिकारों का हनन होता रहेगा। इसलिए, यह आवश्यक है कि युवा वर्ग एकजुट होकर अपनी मांगों को लेकर आगे आए।
भाजयुमो का यह आंदोलन झारखंड में सरकारी नौकरियों के प्रति युवाओं की बढ़ती आकांक्षाओं और उनके अधिकारों की सुरक्षा के लिए एक महत्वपूर्ण कदम है। यह केवल भर्ती प्रक्रियाओं में पारदर्शिता की मांग नहीं करता, बल्कि यह युवा पीढ़ी को यह संदेश भी देता है कि वे अपने अधिकारों के लिए खड़े हों और अपनी आवाज उठाएं। इससे न केवल उनकी व्यक्तिगत सफलता का मार्ग प्रशस्त होगा, बल्कि यह राज्य के समग्र विकास में भी सहायक सिद्ध होगा।
झारखंड की युवा आबादी, जो कि राज्य की कुल जनसंख्या का एक बड़ा हिस्सा है, सरकारी नौकरी के प्रति अपनी आकांक्षाओं को लेकर हमेशा सक्रिय रही है। राज्य में बेरोजगारी की समस्या और सीमित रोजगार के अवसरों के चलते, युवा वर्ग सरकारी नौकरियों को एक स्थायी और सुरक्षित विकल्प मानता है। ऐसे में, जेपीएससी द्वारा आयोजित भर्ती परीक्षाओं की पारदर्शिता और निष्पक्षता की मांग करना स्वाभाविक है।
भाजयुमो का यह आंदोलन न केवल एक स्थानीय मुद्दा है, बल्कि यह पूरे देश में सरकारी भर्ती प्रक्रियाओं में पारदर्शिता की आवश्यकता को भी उजागर करता है। कई राज्यों में युवा वर्ग ने समान मुद्दों को लेकर आंदोलन किए हैं, जो यह दर्शाता है कि यह एक व्यापक समस्या है। ऐसे आंदोलनों ने सरकारों को यह सोचने पर मजबूर किया है कि वे भर्ती प्रक्रियाओं को अधिक पारदर्शी और जवाबदेह बनाने के लिए क्या कदम उठा सकते हैं।
भाजयुमो के इस आंदोलन का एक और महत्वपूर्ण पहलू यह है कि यह युवाओं को संगठित करने और उनके अधिकारों के प्रति जागरूक करने का कार्य कर रहा है। जब युवा वर्ग एकजुट होकर अपनी मांगों को लेकर आगे आता है, तो यह न केवल उनकी शक्ति को दर्शाता है, बल्कि यह राजनीतिक दलों और सरकारों को भी उनकी बात सुनने के लिए मजबूर करता है।
साथ ही, इस आंदोलन से यह संदेश भी जाता है कि केवल सरकारों और आयोगों को ही नहीं, बल्कि समाज के हर वर्ग को युवा वर्ग की आवाज सुननी चाहिए। यह आवश्यक है कि हम एक ऐसा वातावरण बनाएं, जहां युवा अपने विचारों और चिंताओं को खुलकर व्यक्त कर सकें। इससे न केवल उनकी व्यक्तिगत विकास की संभावनाएं बढ़ेंगी, बल्कि यह समाज के समग्र विकास में भी सहायक होगा।
भाजयुमो का यह आंदोलन झारखंड में एक नई चेतना का प्रतीक है। यह युवा पीढ़ी को यह प्रेरणा देता है कि वे अपने अधिकारों के लिए खड़े हों और किसी भी प्रकार के अन्याय के खिलाफ आवाज उठाएं। ऐसे आंदोलनों से ही समाज में सकारात्मक बदलाव संभव है।
इस प्रकार, पलामू में भाजयुमो का मशाल जुलूस और रांची में प्रस्तावित महाघेराव, झारखंड के युवाओं के लिए एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर साबित हो सकता है। यह न केवल उनकी आवाज को बुलंद करने का एक माध्यम है, बल्कि यह सरकारी भर्ती प्रक्रियाओं में सुधार की दिशा में एक ठोस कदम भी है।
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