हिमाचल कांग्रेस ने राम मंदिर चढ़ावा चोरी मामले में सभी जिलों में प्रदर्शन किया, भजन-कीर्तन कर भाजपा को सद्बुद्धि देने की प्रार्थना की।
नई दिल्ली, भारत 14 जुल॰ 2026 ALN: हिमाचल प्रदेश में राम मंदिर चढ़ावा चोरी मामले ने हाल ही में राजनीतिक हलकों में हलचल मचा दी है। कांग्रेस पार्टी ने इस मामले को लेकर आज सभी जिला मुख्यालयों पर शांतिपूर्वक प्रदर्शन किया। यह मामला तब सुर्खियों में आया जब यह आरोप लगाया गया कि राम मंदिर के लिए एकत्रित चंदे में गड़बड़ी हुई है। चंदा, जो कि श्रद्धालुओं द्वारा भगवान राम के मंदिर के निर्माण के लिए दिया गया था, उसकी चोरी के आरोपों ने न केवल स्थानीय बल्कि राष्ट्रीय स्तर पर भी चर्चाएँ शुरू कर दी हैं। इस संदर्भ में, कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने राम मंदिर जाकर भजन-कीर्तन किया और भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के नेताओं के लिए सद्बुद्धि की प्रार्थना की।
शिमला में, कांग्रेस ने राजीव भवन से लोअर बाजार होते हुए राम मंदिर तक एक आक्रोश रैली निकाली। इस दौरान कार्यकर्ताओं ने केंद्र की भाजपा सरकार के खिलाफ नारेबाजी की। कांग्रेस के कार्यकर्ता 'चंदा चोर हो बर्बाद, चंदा चोर नहीं चलेंगे, इन संघियों का देखो धंधा, राम नाम पर खा गए चंदा' जैसे नारे लगाते हुए अपनी नाराजगी व्यक्त कर रहे थे। यह प्रदर्शन न केवल भाजपा के खिलाफ एक राजनीतिक बयान था, बल्कि यह धार्मिक भावनाओं के मुद्दे को भी उठाने का प्रयास था।
इस मामले का राजनीतिक महत्व तब और बढ़ गया जब पूर्व प्रदेश अध्यक्ष और ठियोग से विधायक कुलदीप राठौर ने इस मामले में केंद्र सरकार की भूमिका पर सवाल उठाते हुए कहा कि सरकार दोषियों को बचाने का प्रयास कर रही है। उन्होंने मांग की कि इस प्रकरण की जांच सुप्रीम कोर्ट के सिटिंग जज द्वारा कराई जाए। राठौर ने कहा कि राम मंदिर चढ़ावा चोरी के आरोपों से देश की अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बदनामी हुई है। उन्होंने भाजपा पर आरोप लगाया कि वह राम मंदिर के नाम पर राजनीति कर रही है और करोड़ों हिंदुओं की भावनाओं से खिलवाड़ कर रही है।
धर्मशाला में भी कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने केंद्र सरकार के खिलाफ नारेबाजी की। कांगड़ा जिले के धर्मशाला में कांग्रेस कार्यकर्ता हाथों में तख्तियां लिए धर्मशाला पोस्ट ऑफिस चौराहे पर एकत्रित हुए। यहां से कार्यकर्ताओं ने केंद्र सरकार की नीतियों के खिलाफ नारेबाजी करते हुए कचहरी अड्डा स्थित हनुमान मंदिर तक रैली निकाली। इस दौरान सामूहिक रूप से हनुमान चालीसा का पाठ कर अपना विरोध दर्ज कराया। यह प्रदर्शन न केवल राजनीतिक विरोध का प्रतीक था, बल्कि यह धार्मिक एकता और सामूहिकता का भी एक उदाहरण था।
राज्यसभा सांसद और जिला अध्यक्ष अनुराग शर्मा ने कहा कि राम मंदिर में कथित चंदा गड़बड़ी का मामला देश-दुनिया के करोड़ों श्रद्धालुओं की गहरी आस्था से जुड़ा है। उन्होंने भगवान के नाम पर एकत्र किए गए धन में पारदर्शिता और पूरे घोटाले की निष्पक्ष व उच्च स्तरीय जांच की मांग की ताकि सच जनता के सामने आ सके। यह मांग इस बात का संकेत है कि कांग्रेस पार्टी इस मुद्दे को गंभीरता से ले रही है और इसे एक राजनीतिक मुद्दे के रूप में भुनाने की कोशिश कर रही है।
प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष विनय कुमार ने कहा कि संघ और भाजपा ने 130 करोड़ हिंदुओं की धार्मिक आस्था को ठेस पहुंचाई है, जिसे कांग्रेस सहन नहीं करेगी। उन्होंने कहा कि पार्टी इस मुद्दे को तब तक उठाती रहेगी, जब तक कथित मामले के वास्तविक दोषियों के खिलाफ कार्रवाई नहीं होती और दानपात्र का पैसा वापस नहीं किया जाता। यह बयान यह दर्शाता है कि कांग्रेस पार्टी इस मामले को एक महत्वपूर्ण राजनीतिक मुद्दा मानती है और इसके खिलाफ अपने अभियान को जारी रखने का इरादा रखती है।
विनय कुमार ने राम मंदिर निर्माण के लिए अब तक प्राप्त दान और उसके खर्च का श्वेत पत्र जारी करने की भी मांग की। उनका कहना है कि इस कथित महाघोटाले के बाद भाजपा में खलबली मची हुई है और उसके नेता बयानबाजी कर अपनी सफाई देने में लगे हैं। यह मांग इस बात का संकेत है कि कांग्रेस पार्टी इस मामले में भाजपा की पारदर्शिता पर सवाल उठाने के लिए तैयार है।
शिमला ग्रामीण जिला कांग्रेस के अध्यक्ष हरिकृष्ण हिमराल ने बताया कि कांग्रेस ने भजन-कीर्तन कर भाजपा को सद्बुद्धि देने की प्रार्थना की। उन्होंने कहा कि कांग्रेस इस मामले को आगामी दिनों में जन जन तक पहुंचाएगी और लोगों को बताएगी कि बीजेपी ने किस प्रकार से राम नाम पर इकट्ठा चंदा चोरी किया है। यह रणनीति कांग्रेस की ओर से एक जन जागरूकता अभियान का हिस्सा है, जिसका उद्देश्य लोगों को इस मामले की गंभीरता से अवगत कराना है।
इस मामले में मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू ने अपनी कैबिनेट के साथ बीते बुधवार को शिमला के राम मंदिर में पूजा की थी। राज्य में कांग्रेस चढ़ावा चोरी मामले में खूब भुना रही है, और यह स्पष्ट है कि यह मामला अब राजनीतिक लड़ाई का हिस्सा बन चुका है। भाजपा और कांग्रेस दोनों ही इस मुद्दे को अपने-अपने तरीके से भुना रहे हैं।
कुल मिलाकर, राम मंदिर चढ़ावा चोरी मामले ने न केवल हिमाचल प्रदेश में बल्कि पूरे देश में एक बड़ा राजनीतिक विवाद खड़ा कर दिया है। यह मामला धार्मिक आस्था, राजनीति और आर्थिक पारदर्शिता के मुद्दों को एक साथ लाता है। कांग्रेस पार्टी इस मामले को लेकर सक्रियता दिखा रही है, जबकि भाजपा अपनी छवि को बचाने के लिए प्रयासरत है। आने वाले समय में इस मुद्दे पर और भी चर्चाएँ हो सकती हैं, और यह देखना दिलचस्प होगा कि इस मामले का राजनीतिक प्रभाव क्या होता है।
इस घटना के पीछे का संदर्भ भी महत्वपूर्ण है। राम मंदिर का निर्माण एक ऐसा विषय है जो भारतीय राजनीति में दशकों से विवाद का केंद्र रहा है। यह केवल एक धार्मिक स्थल नहीं है, बल्कि यह भारतीय सांस्कृतिक पहचान का प्रतीक भी है। भाजपा ने इस मुद्दे को अपनी राजनीतिक रणनीति में महत्वपूर्ण स्थान दिया है, और राम मंदिर का निर्माण उनके चुनावी घोषणापत्र में एक प्रमुख बिंदु रहा है। ऐसे में, चढ़ावा चोरी का मामला भाजपा के लिए एक बड़ा संकट बन सकता है, क्योंकि यह उनके समर्थकों के बीच विश्वास को कमजोर कर सकता है।
दूसरी ओर, कांग्रेस इस मामले को एक अवसर के रूप में देख रही है। पार्टी का प्रयास है कि वह भाजपा की छवि को धूमिल करते हुए अपने राजनीतिक लाभ के लिए इस मुद्दे का इस्तेमाल करे। यह स्थिति न केवल हिमाचल प्रदेश में बल्कि पूरे देश के राजनीतिक परिदृश्य को प्रभावित कर सकती है। धार्मिक भावनाओं को भुनाने की कोशिश करने वाले राजनीतिक दलों के लिए यह एक महत्वपूर्ण समय है, और इस मामले के संभावित परिणामों पर सभी की नजरें टिकी हुई हैं।
आने वाले समय में, यह देखना होगा कि क्या कांग्रेस अपनी मांगों को पूरा करवा पाती है और क्या भाजपा इस मामले में अपनी छवि को सुधारने में सफल होती है। राजनीतिक दृष्टिकोण से, यह मामला न केवल हिमाचल प्रदेश बल्कि पूरे देश की राजनीति में महत्वपूर्ण मोड़ ला सकता है।
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