भाजपा का एनसीपी के दोनों गुटों को विलय का प्रस्ताव, केंद्रीय कैबिनेट में दो पद का ऑफर

ALN NEWS DESK
एएलएन न्यूज डेस्क
अपडेटेड : Jul 17, 2026, 09:05 PM IST
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भाजपा ने महाराष्ट्र में एनसीपी के दोनों गुटों को विलय करने का प्रस्ताव दिया है। इसके तहत केंद्रीय कैबिनेट में दो पद देने की पेशकश भी की गई है।

महाराष्ट्र में एनसीपी के दो गुट (सुनेत्रा पवार गुट और शरद पवार गुट) आपस में विलय कर सकते हैं। उन्हें साथ आने का ऑफर NDA की तरफ से मिला है।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, केंद्र सरकार संसद में इस बार महिला आरक्षण विधेयक और परिसीमन विधेयक से जुड़े संविधान संशोधन विधेयक लाने वाली है।

इसीलिए एनडीए के पार्टी नेतृत्व ने सुझाव दिया है कि नेशनलिस्ट कांग्रेस पार्टी (NCP) के दोनों गुट आपस में फिर से मिल जाएं और एनडीए की सहयोगी पार्टी बन जाएं।

सूत्रों के मुताबिक, भाजपा ने NCP के दोनों गुटों के बीच सत्ता का संतुलन बनाने के लिए केंद्रीय कैबिनेट में दो पद देने का भी ऑफर दिया है।

हाल ही में NCP के प्रफुल्ल पटेल और सुनील तटकरे की मुंबई में CM देवेंद्र फडणवीस के घर पर मुलाकात हुई थी।

शरद गुट और सुनेत्रा गुट के एक साथ आने में 5 चैलेंज…

  • एनसीपी के भीतर ही मतभेद: पार्टी के वरिष्ठ नेताओं में सत्ता बंटवारे को लेकर एक राय नहीं है।
  • राष्ट्रीय अध्यक्ष पद की मांग: सुनेत्रा के बड़े बेटे और सांसद पार्थ पवार चाहते हैं कि विलय के बाद सुनेत्रा पवार एनसीपी की राष्ट्रीय अध्यक्ष बनें और महाराष्ट्र का वित्त विभाग उन्हें मिले।
  • सीनियर लीडर्स की आपत्ति: सुनील तटकरे, प्रफुल्ल पटेल और छगन भुजबल का कहना है कि सत्ता और पदों का बंटवारा सभी नेताओं को ध्यान में रखकर होना चाहिए।
  • अड़े रहे तो मुश्किल: यदि सुनेत्रा गुट राष्ट्रीय अध्यक्ष, वित्त मंत्रालय और अहम कैबिनेट विभाग पर अड़ा रहता है, तो समझौता मुश्किल हो सकता है।
  • शरद गुट की सहमति पर सवाल: एनसीपी (शरद पवार) के इन सभी मांगों को स्वीकार करने की संभावना कम मानी जा रही है।

मुंबई में 8 जुलाई को शरद पवार और महाराष्ट्र के डिप्टी सीएम एकनाथ शिंदे की मुलाकात हुई थी।

उधर शरद गुट की भाजपा-कांग्रेस दोनों से बातचीत

उधर महाराष्ट्र में NCP (शरद गुट) पार्टी कांग्रेस और भाजपा के नेतृत्व वाले एनडीए दोनों से बातचीत को तैयार है। सूत्रों के मुताबिक, NCP (SP) के 8 लोकसभा सांसद और 10 विधायक पार्टी के भविष्य को लेकर दो धड़ों में बंटे हुए हैं।

दावा है कि कुछ सांसद और विधायक NDA में शामिल होने के पक्ष में हैं, जबकि कुछ कांग्रेस के साथ विलय चाहते हैं। शरद पवार कांग्रेस में विलय के लिए तभी तैयार होंगे, जब सुप्रिया सुले को पार्टी में बड़ी जिम्मेदारी मिले। इसमें महाराष्ट्र कांग्रेस अध्यक्ष पद पर पवार समर्थक, सुप्रिया सुले को कांग्रेस का उपाध्यक्ष बनाने और कांग्रेस वर्किंग कमेटी (CWC) में पर्याप्त प्रतिनिधित्व जैसी मांगें शामिल बताई गई हैं।

दूसरी ओर, एक अन्य सूत्र का दावा है कि पार्टी का एक प्रभावशाली धड़ा भाजपा और NDA के साथ जाने का समर्थक है। बातचीत में सुप्रिया सुले के लिए केंद्रीय मंत्री पद और पवार समर्थकों के लिए दो मंत्री पद की चर्चा भी होने का दावा किया गया है। हालांकि, इस पर किसी पक्ष की ओर से आधिकारिक पुष्टि नहीं की गई है।

‘परिसीमन बिल’ के चलते भाजपा को संख्या बल की जरूरत

NCP के NDA में शामिल होने से मोदी सरकार संसद में दो तिहाई बहुमत के और करीब आ जाएगी, जो संविधान संशोधन विधेयक पास करने के लिए अहम है।

सरकार महिला आरक्षण कानून लागू करने और परिसीमन विधेयक के जरिए संसद और राज्य विधानसभाओं की संख्या बढ़ाने वाले संविधान संशोधन विधेयक पास कराने के लिए जरूरी संख्या जुटानी की कोशिश कर रही है। अप्रैल में राज्यसभा के विशेष सत्र में सरकार की यह कोशिशें नाकाम हो गई थीं।

इसके बाद से विपक्ष की चार पार्टियों के 37 लोकसभा और राज्यसभा सांसद सत्ता पक्ष में शामिल हो चुके हैं। अप्रैल के मुकाबले दोनों सदनों में सरकार का समर्थन बढ़ा है, लेकिन दो-तिहाई बहुमत से अब भी पीछे है…

लोकसभा: दो-तिहाई आंकड़े से 42 वोट पीछे

  • 2024 के लोकसभा चुनाव में बीजेपी 240 सीटों पर जीती थी। NDA में चंद्रबाबू नायडू की TDP के 16, नीतीश कुमार की पार्टी JDU के 12, शिवसेना (शिंदे गुट) के 7, LJP (राम विलास) के 5 और अन्य दलों के 13 सांसद भी शामिल थे। ये आंकड़ा बहुमत से 20 ज्यादा यानी 292 होता है।
  • 14 जून 2026 को TMC नेता काकोली घोष दस्तीदार समेत लोकसभा 20 सांसद NDA समर्थित नेशनलिस्ट सिटिजन पार्टी से जुड़ गए, जिससे लोकसभा में BJP का नंबर 292 से बढ़कर 312 हो गया।
  • जून में ही महाराष्ट्र में शिवसेना उद्धव गुट के 9 में से 6 सांसद भी NDA के सहयोगी दल शिवसेना (शिंदे गुट) में शामिल हो गए। इनके आने से लोकसभा में NDA का आंकड़ा 318 पहुंच गया है।
  • फिलहाल 3 लोकसभा सीटें खाली हैं- असम की नागांव, पश्चिम बंगाल की बसीरहाट और मेघालय की शिलॉन्ग। यानी बिल पर लोकसभा में वोटिंग हो, तो अधिकतम 540 सांसद होंगे। इस हिसाब से दो-तिहाई के 360 के आंकड़े से NDA अभी 42 वोट पीछे हैं।

राज्यसभा: दो-तिहाई बहुमत से 11 वोट पीछे

  • अप्रैल 2026 में पंजाब से AAP के 7 राज्यसभा सांसदों के बीजेपी जॉइन करने और जून में राज्यसभा चुनाव होने के बाद NDA के पास 149 सांसद हैं। इसमें से बीजेपी के 114 हैं। यानी 245 सीटों वाली राज्यसभा में NDA के पास सामान्य बहुमत से 27 सीटें ज्यादा हैं।
  • TMC के 3 राज्यसभा सांसद- सुखेंदु शेखर रे, सुष्मिता देव और प्रकाश चिक बरैक ने पार्टी छोड़कर 9 जुलाई को बीजेपी जॉइन की। 17 जुलाई को निर्विरोध राज्यसभा सांसद चुन लिए गए। इससे राज्यसभा में NDA का नंबर बढ़कर 152 हो गया।
  • 16 जुलाई को TMC की सांसद कोयल मलिक ने भी इस्तीफा दे दिया है। उनके बीजेपी में शामिल होने की अटकलें हैं।
  • राज्यसभा में दो-तिहाई बहुमत के लिए 163 का आंकड़ा चाहिए। यानी NDA इससे सिर्फ 11 वोट पीछे है।

भाजपा के शीर्ष रणनीतिकार सियासी तस्वीर बदलने के लिए ‘मिशन 360’ में जुटे हैं। 17 अप्रैल को महिला आरक्षण व परिसीमन से जुड़े बिल पर लोकसभा में झटका लगने के बाद ही भाजपा ने संसद में दो-तिहाई बहुमत जुटाने की रणनीति तेज कर दी थी।

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