भाजपा ने महाराष्ट्र में एनसीपी के दोनों गुटों को विलय करने का प्रस्ताव दिया है। इसके तहत केंद्रीय कैबिनेट में दो पद देने की पेशकश भी की गई है।
नई दिल्ली, भारत 17 जुल॰ 2026 ALN: महाराष्ट्र में एनसीपी के दो गुट (सुनेत्रा पवार गुट और शरद पवार गुट) आपस में विलय कर सकते हैं। उन्हें साथ आने का ऑफर NDA की तरफ से मिला है।
मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, केंद्र सरकार संसद में इस बार महिला आरक्षण विधेयक और परिसीमन विधेयक से जुड़े संविधान संशोधन विधेयक लाने वाली है।
इसीलिए एनडीए के पार्टी नेतृत्व ने सुझाव दिया है कि नेशनलिस्ट कांग्रेस पार्टी (NCP) के दोनों गुट आपस में फिर से मिल जाएं और एनडीए की सहयोगी पार्टी बन जाएं।
सूत्रों के मुताबिक, भाजपा ने NCP के दोनों गुटों के बीच सत्ता का संतुलन बनाने के लिए केंद्रीय कैबिनेट में दो पद देने का भी ऑफर दिया है।
हाल ही में NCP के प्रफुल्ल पटेल और सुनील तटकरे की मुंबई में CM देवेंद्र फडणवीस के घर पर मुलाकात हुई थी।
शरद गुट और सुनेत्रा गुट के एक साथ आने में 5 चैलेंज…
मुंबई में 8 जुलाई को शरद पवार और महाराष्ट्र के डिप्टी सीएम एकनाथ शिंदे की मुलाकात हुई थी।
उधर शरद गुट की भाजपा-कांग्रेस दोनों से बातचीत
उधर महाराष्ट्र में NCP (शरद गुट) पार्टी कांग्रेस और भाजपा के नेतृत्व वाले एनडीए दोनों से बातचीत को तैयार है। सूत्रों के मुताबिक, NCP (SP) के 8 लोकसभा सांसद और 10 विधायक पार्टी के भविष्य को लेकर दो धड़ों में बंटे हुए हैं।
दावा है कि कुछ सांसद और विधायक NDA में शामिल होने के पक्ष में हैं, जबकि कुछ कांग्रेस के साथ विलय चाहते हैं। शरद पवार कांग्रेस में विलय के लिए तभी तैयार होंगे, जब सुप्रिया सुले को पार्टी में बड़ी जिम्मेदारी मिले। इसमें महाराष्ट्र कांग्रेस अध्यक्ष पद पर पवार समर्थक, सुप्रिया सुले को कांग्रेस का उपाध्यक्ष बनाने और कांग्रेस वर्किंग कमेटी (CWC) में पर्याप्त प्रतिनिधित्व जैसी मांगें शामिल बताई गई हैं।
दूसरी ओर, एक अन्य सूत्र का दावा है कि पार्टी का एक प्रभावशाली धड़ा भाजपा और NDA के साथ जाने का समर्थक है। बातचीत में सुप्रिया सुले के लिए केंद्रीय मंत्री पद और पवार समर्थकों के लिए दो मंत्री पद की चर्चा भी होने का दावा किया गया है। हालांकि, इस पर किसी पक्ष की ओर से आधिकारिक पुष्टि नहीं की गई है।
‘परिसीमन बिल’ के चलते भाजपा को संख्या बल की जरूरत
NCP के NDA में शामिल होने से मोदी सरकार संसद में दो तिहाई बहुमत के और करीब आ जाएगी, जो संविधान संशोधन विधेयक पास करने के लिए अहम है।
सरकार महिला आरक्षण कानून लागू करने और परिसीमन विधेयक के जरिए संसद और राज्य विधानसभाओं की संख्या बढ़ाने वाले संविधान संशोधन विधेयक पास कराने के लिए जरूरी संख्या जुटानी की कोशिश कर रही है। अप्रैल में राज्यसभा के विशेष सत्र में सरकार की यह कोशिशें नाकाम हो गई थीं।
इसके बाद से विपक्ष की चार पार्टियों के 37 लोकसभा और राज्यसभा सांसद सत्ता पक्ष में शामिल हो चुके हैं। अप्रैल के मुकाबले दोनों सदनों में सरकार का समर्थन बढ़ा है, लेकिन दो-तिहाई बहुमत से अब भी पीछे है…
लोकसभा: दो-तिहाई आंकड़े से 42 वोट पीछे
राज्यसभा: दो-तिहाई बहुमत से 11 वोट पीछे
भाजपा के शीर्ष रणनीतिकार सियासी तस्वीर बदलने के लिए ‘मिशन 360’ में जुटे हैं। 17 अप्रैल को महिला आरक्षण व परिसीमन से जुड़े बिल पर लोकसभा में झटका लगने के बाद ही भाजपा ने संसद में दो-तिहाई बहुमत जुटाने की रणनीति तेज कर दी थी।
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