तेजप्रताप यादव ने पवन सिंह को लफुआ कहा, शराब पीने का आरोप लगाया

ALN NEWS DESK
एएलएन न्यूज डेस्क
अपडेटेड : Aug 25, 2026, 11:58 AM IST
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तेजप्रताप यादव ने पवन सिंह पर तीखा हमला करते हुए उन्हें शराब पीने वाला और लफुआ बताया। यह बयान पटना में आयोजित भोजपुरी बवाल कार्यक्रम में दिया गया।

तेजप्रताप यादव, जो कि बिहार के प्रमुख राजनीतिक दल राष्ट्रीय जनता दल (राजद) के एक महत्वपूर्ण नेता और पूर्व मुख्यमंत्री लालू प्रसाद यादव के बड़े बेटे हैं, अक्सर अपने बयानों और अनूठे अंदाज के लिए चर्चा में रहते हैं। हाल ही में, तेजप्रताप यादव ने भारतीय जनता पार्टी के विधान पार्षद पवन सिंह पर तीखा जुबानी प्रहार करते हुए उन्हें ‘लफुआ’ करार दिया। इस प्रकरण ने राजनीतिक और सामाजिक हलकों में कई सवाल उठाए हैं।

यह घटना पटना में आयोजित भोजपुरी बवाल के ग्रैंड फिनाले के दौरान हुई, जिसमें तेजप्रताप यादव भी शामिल थे। भोजपुरी बवाल एक लोकप्रिय शो है, जो भोजपुरी सिनेमा के कलाकारों को एक मंच प्रदान करता है। इस शो में पवन सिंह भी मौजूद थे, जो भोजपुरी सिनेमा के एक प्रमुख अभिनेता और गायक माने जाते हैं। तेजप्रताप यादव ने इस अवसर पर पत्रकारों से बातचीत करते हुए पवन सिंह पर शराब पीने का आरोप लगाया।

तेजप्रताप यादव ने कहा, "कुछ कलाकार हैं जो शराब पीते हैं लेकिन शराब से दूर रहना चाहिए।" जब पत्रकारों ने उनसे पूछा कि कौन कलाकार शराब पीते हैं, तो उन्होंने बिना किसी हिचकिचाहट के पवन सिंह का नाम लिया। तेजप्रताप ने आरोप लगाया कि पवन सिंह शराब पीते हैं, भले ही वह अब विधान पार्षद बन चुके हैं। यह बयान बिहार में शराबबंदी के कानून की पृष्ठभूमि में महत्वपूर्ण है, जहां शराब पीना और बेचना दोनों ही अवैध है।

तेजप्रताप यादव ने पत्रकारों के सवाल पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा, "हां, तो आप उनका टेस्ट करवा लीजिए। टेस्ट होगा तो पकड़ाइए जाएंगे।" इस टिप्पणी ने बिहार की राजनीतिक स्थिति को और भी जटिल बना दिया है, क्योंकि यह संकेत करता है कि यदि पवन सिंह पर लगे आरोप सही हैं, तो यह न केवल उनके व्यक्तिगत जीवन पर प्रभाव डालेगा, बल्कि यह बिहार की सरकार की शराबबंदी नीति पर भी सवाल उठाएगा।

तेजप्रताप यादव ने आगे कहा कि पवन सिंह जैसे लोग सत्ता में हैं और जनता की समस्याओं की अनदेखी कर रहे हैं। उन्होंने कहा, "वो तो जांच विषय है। सत्ता में हैं, सत्ता भोग रहे हैं और जनता सड़क पर मर रही है।" इस बयान ने बिहार की राजनीतिक स्थिति को और भी पेचीदा बना दिया है, जहां कई लोग यह महसूस करते हैं कि राजनीतिक नेता अपने व्यक्तिगत लाभ के लिए जनता की समस्याओं को नजरअंदाज कर रहे हैं।

तेजप्रताप यादव का व्यक्तिगत जीवन और दृष्टिकोण

तेजप्रताप यादव ने इस कार्यक्रम में यह भी स्पष्ट किया कि वह खुद शराब नहीं पीते हैं। उन्होंने कहा कि वह भगवान कृष्ण के भक्त हैं और वृंदावन आते-जाते रहते हैं। तेजप्रताप ने यह भी बताया कि उन्होंने तुलसी की माला धारण की हुई है, जो उनके धार्मिक विश्वास को दर्शाता है।

जब पत्रकारों ने पूछा कि भोजपुरी बवाल में उनके पूर्व पीए मोतीलाल भी हैं, तो उन्होंने कहा कि मोतीलाल पहले शो का हिस्सा थे, लेकिन अब नहीं हैं। उन्होंने यह भी कहा कि पुलिस मोतीलाल की तलाश कर रही है, जो इस बात का संकेत हो सकता है कि मोतीलाल किसी विवाद में फंसे हुए हैं।

तेजप्रताप यादव का पवन सिंह के प्रति यह आक्रामक रुख कोई नई बात नहीं है। वह पहले भी कई बार पवन सिंह पर हमले बोल चुके हैं। कुछ समय पहले, तेजप्रताप ने कहा था कि पवन सिंह हमेशा किसी न किसी सहारे रहते हैं और कभी वह उनके पैरों में गिरते थे, जो यह दर्शाता है कि उनके और पवन सिंह के बीच पहले से ही तनाव है।

इस तरह के बयानों के पीछे की राजनीति को समझना महत्वपूर्ण है। बिहार में राजनीतिक प्रतिस्पर्धा काफी तीव्र है, और ऐसे बयानों का उद्देश्य न केवल व्यक्तिगत प्रतिकूलता को उजागर करना होता है, बल्कि यह भी कि किस प्रकार एक नेता अपने समर्थकों के बीच लोकप्रियता बनाए रखता है। तेजप्रताप यादव का यह बयान इस बात का संकेत है कि वह अपने राजनीतिक प्रतिद्वंद्वियों को निशाना बनाकर अपने समर्थकों के बीच अपनी स्थिति को मजबूत करने का प्रयास कर रहे हैं।

इस विवाद का एक और पहलू यह है कि यह बिहार की राजनीतिक संस्कृति में व्यक्तिगत हमलों और आरोपों की एक लंबी परंपरा को दर्शाता है। ऐसे बयानों का प्रभाव न केवल संबंधित व्यक्तियों पर पड़ता है, बल्कि यह आम जनता की धारणा को भी प्रभावित करता है। बिहार में राजनीतिक नेताओं के बीच की यह प्रतिस्पर्धा और व्यक्तिगत हमले, लोगों के बीच राजनीतिक जागरूकता को बढ़ाने का काम करते हैं, लेकिन इसके साथ ही यह राजनीति को और भी विभाजित करने का कारण भी बन सकते हैं।

इसके अलावा, यह भी देखने की बात होगी कि क्या पवन सिंह इस विवाद का जवाब देंगे या क्या वह इसे नजरअंदाज करेंगे। बिहार की राजनीति में इस तरह के विवाद अक्सर लंबे समय तक चलते हैं और इसके परिणाम दूरगामी हो सकते हैं। ऐसे में, यह देखना दिलचस्प होगा कि आने वाले दिनों में इस मुद्दे पर क्या प्रतिक्रियाएँ आती हैं और यह बिहार की राजनीतिक स्थिति को कैसे प्रभावित करती हैं।

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