ईरान ने अमेरिकी हमलों के जवाब में कुवैत, क़तर और बहरीन में अमेरिकी सैन्य ठिकानों पर ड्रोन से हमला किया। अमेरिका ने ईरान के 170 ठिकानों को निशाना बनाया।
नई दिल्ली, भारत 9 जुल॰ 2026 ALN: ईरान की सेना का कहना है कि उसने ड्रोन के ज़रिए कुवैत, क़तर और बहरीन में अमेरिकी सैन्य ठिकानों को निशाना बनाया है।
कुवैत में मौजूद अमेरिकी पैट्रियट मिसाइल सिस्टम, क़तर में एक सैटेलाइट एंटीना आधारित वॉर्निंग सिस्टम और बहरीन में अमेरिकी फ़्यूल स्टोरेज फ़ैसिलिटीज़ को 'बड़ी संख्या में' हमलावर ड्रोन से निशाना बनाया गया। यह बयान ईरान के कई समाचार माध्यमों, जिनमें देश का सरकारी प्रसारक भी शामिल है, ने साझा किया है।
ईरानी सेना ने कहा कि उसने ये हमले अमेरिकी एयर स्ट्राइक के जवाब में किए गए। साथ ही ईरान ने माना है कि अमेरिकी हमलों में उसके तीन लोग मारे गए हैं।
इससे पहले, बहरीन, कुवैत और क़तर समेत कई खाड़ी देशों ने हमलों के बारे में अपने नागरिकों को अलर्ट किया है।
वहीं अमेरिकी सेना ने दावा किया था कि ईरान पर हमलों की लगातार दूसरी रात देश भर में लगभग 90 ठिकानों को निशाना बनाया। कुल मिलाकर अमेरिका ने दो रातों में ईरान के 170 ठिकानों को निशाना बनाने का दावा किया है।
अमेरिकी सेंटकॉम ने हमलों के वीडियो एक्स पर पोस्ट करते हुए लिखा, "इन हमलों का उद्देश्य होर्मुज़ स्ट्रेट में कमर्शियल जहाज़ों और निर्दोष नाविकों पर हमला करने की ईरान की क्षमता को और कमज़ोर करना था।"
निशाना बनाए गए ठिकानों में एयर डिफ़ेंस सिस्टम, तटीय निगरानी उपकरण, मिसाइल और ड्रोन स्टोरेज, नौसैनिक क्षमताएं और ईरान के तटवर्ती इलाक़ों में सैन्य लॉजिस्टिक्स ढांचा शामिल थे।
सेंट्रल कमांड ने कहा, "ये ताज़ा हमले ईरान में पिछली रात किए गए सफल आक्रामक हमलों के बाद किए गए हैं।"
वहीं इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (आईआरजीसी) ने कहा है कि कुवैत, बहरीन और क़तर के अमेरिका सैन्य ठिकानों पर किए गए उसके हमले अमेरिका को सीज़फ़ायर तोड़ने की सज़ा है और साथ ही अमेरिका को चेतावनी दी कि अगर उसके हमले जारी रहे तो, ईरान क्षेत्र में मौजूद अन्य अमेरिकी ठिकानों को भी निशाना बनाएगा।
हमले के चंद घंटों पहले ही अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान को 'भारी चोट पहुँचाने' की धमकी दी थी। ट्रंप ने कहा कि ये हमले "कल ईरान ने होर्मुज़ स्ट्रेट में जहाज़ों पर जो बमबारी की थी, उसके जवाब में किए गए हैं।"
उन्होंने चेतावनी दी कि 'अगर ऐसा फिर हुआ, तो इसका जवाब इससे भी कहीं अधिक कठोर होगा।'
ईरानी मीडिया के अनुसार, देश के दक्षिणी तटीय इलाक़ों में विस्फोटों की आवाज़ें सुनी गई हैं और फ़ारस की खाड़ी में ईरान के नियंत्रण वाले द्वीपों को निशाना बनाया गया है।
ईरानी संसद के स्पीकर मोहम्मद बग़र ग़ालिबाफ़ ने इन हमलों पर प्रतिक्रिया देते हुए एक्स पर लिखा, "अमेरिका ने अब तक यह नहीं सीखा है कि धमकाने और अपने वादे तोड़ने की क़ीमत अब चुकानी पड़ती है। मैं साफ़ शब्दों में कहता हूं- अगर आप हमला करेंगे, तो जवाबी हमला भी झेलेंगे। बेकार की छटपटाहट मत दिखाइए, वरना आप और गहरे संकट में फंस जाएंगे। होर्मुज़ स्ट्रेट केवल ईरानी व्यवस्था के तहत ही खुलेगा, अमेरिकी धमकियों के दम पर नहीं।"
अमेरिकी सेंट्रल कमांड का कहना था कि ईरान ने होर्मुज़ स्ट्रेट से गुज़र रहे तीन कमर्शियल जहाज़ों को निशाना बनाया था और उसी के जवाब में अमेरिका ने उस पर अटैक किया है।
वहीं, ईरान ने कहा कि उसने अमेरिकी हमलों के जवाब में बुधवार तड़के बहरीन और कुवैत स्थित अमेरिकी सैन्य ठिकानों पर जवाबी हमले किए।
ट्रंप की पहले की टिप्पणियों पर प्रतिक्रिया देते हुए ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराग़ची ने कहा, "हम अभद्रता का जवाब अभद्रता से नहीं देते, बल्कि कार्रवाई से देते हैं निडर होकर और पूरे साहस के साथ।"
ईरान के तटीय इलाक़ों के अन्य हिस्सों, जिनमें कोनारक और चाबहार शहर भी शामिल हैं, से भी कई विस्फोटों की आवाज़ें सुने जाने की ख़बर है।
ईरानी सरकारी टीवी ने बताया कि बंदर अब्बास में आठ विस्फोट हुए, जबकि दक्षिणी ईरान के सीरिक और जास्क बंदरगाहों पर दो-दो मिसाइलें गिरीं।
इसमें यह भी कहा गया कि अबू मूसा द्वीप पर दो प्रोजेक्टाइल गिरे। इस द्वीप के स्वामित्व को लेकर ईरान और संयुक्त अरब अमीरात के बीच लंबे समय से विवाद चला आ रहा है।
ईरानी सरकारी मीडिया की रिपोर्टों के मुताबिक, बंदर अब्बास में एयर डिफ़ेंस सिस्टम सक्रिय कर दिए गए हैं।
अमेरिकी हमलों से हुए नुकसान की सीमा अभी स्पष्ट नहीं है, लेकिन ईरानी मीडिया ने चाबहार में बिजली कटौती और बुशेहर में इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (आईआरजीसी) के एक बैरक में आग लगने की ख़बर दी है।
ईरानी स्टूडेंट्स न्यूज़ एजेंसी के अनुसार, चाबहार में कटी हुई तीन बिजली लाइनों में से दो को तेज़ी से बहाल कर दिया गया है, जबकि तीसरी लाइन भी जल्द चालू हो जाएगी।
बुधवार शाम एयर फ़ोर्स वन में पत्रकारों से बातचीत के दौरान अमेरिकी राष्ट्रपति ने कहा कि ईरान ने "कुछ देर पहले" संपर्क किया था और वह "बेहद शिद्दत से" समझौता करना चाहता है।
ट्रंप ने आगे कहा, "मुझे नहीं पता कि वे समझौता करने के लायक हैं या नहीं। मुझे नहीं पता कि वे समझौते का पालन करेंगे भी या नहीं, यही सबसे बड़ी समस्या है।"
इससे पहले तुर्की में नेटो शिखर सम्मेलन में यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोदिमिर ज़ेलेंस्की के साथ पत्रकारों से बातचीत के दौरान अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान पर पूछे गए सवाल का जवाब देते हुए कहा, "हमने मंगलवार रात उन पर बहुत ज़ोरदार हमला किया, बहुत ज़ोरदार।"
उन्होंने कहा कि अमेरिका "संभवतः आज रात फिर उन पर ज़ोरदार हमला करेगा।"
ट्रंप ने कहा, "मैंने उन्हें पहले ही थोड़ी चेतावनी दे दी थी। हम आज रात फिर उन पर ज़ोरदार हमला करने वाले हैं।"
ट्रंप ने कहा कि अमेरिका इस समय ईरान पर सबसे उच्च स्तर के हमले नहीं कर रहा है। उन्होंने चेतावनी दी कि भविष्य में होने वाले हमलों में ईरान के अहम बुनियादी ढांचे, जैसे पुलों और समुद्री पानी को मीठा बनाने वाले संयंत्रों (डिसैलिनेशन प्लांट), को निशाना बनाया जा सकता है।
राष्ट्रपति ने यह भी कहा कि अमेरिका ईरान के तट से दूर स्थित उसके प्रमुख तेल निर्यात टर्मिनल खार्ग द्वीप पर क़ब्ज़ा कर सकता है। उन्होंने दावा किया कि तेहरान इसके ख़िलाफ़ "कुछ भी नहीं" कर पाएगा।
उन्होंने दोहराया कि "आज रात बड़ा हमला हो सकता है।" इसके बाद अमेरिकी रक्षा मंत्री पीट हेगसेथ ने चेतावनी दी कि अगर ऐसा हमला होता है, तो वह ईरान के और अंदरूनी इलाक़ों को निशाना बनाएगा।
नेटो शिखर सम्मेलन के दौरान पत्रकारों से बातचीत करते हुए ट्रंप ने कहा था कि अब ईरान के साथ उनका हिसाब ख़त्म हो चुका है।
उन्होंने ये भी कहा था कि वार्ताकार ईरान से बात करके अपना वक़्त बर्बाद कर रहे हैं।
ट्रंप ने कहा कि वह ईरान से ख़ुश नहीं हैं और उन्होंने अमेरिका का यह रुख़ दोहराया कि तेहरान को परमाणु हथियार हासिल करने की अनुमति नहीं दी जा सकती।
उन्होंने आगे कहा, "मेरी पूरी बात सत्ता परिवर्तन को लेकर नहीं है।" ट्रंप ने कहा कि अमेरिका ने ईरान के परमाणु कार्यक्रम को ख़त्म कराने की दिशा में काफ़ी प्रगति की है।
ट्रंप ने कहा कि ईरान अब मध्य पूर्व का धौंस जमाने वाला देश नहीं रहा। उन्होंने आज पहले कही गई अपनी टिप्पणी दोहराते हुए ईरान के नेतृत्व को सनकी बताया।
ऐसा लगता है कि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के रुख़ में कुछ बदलाव आया है।
कई हफ्तों तक यह आशावाद बना हुआ था कि बीच-बीच में लड़ाई छिड़ने के बावजूद बातचीत आगे बढ़ रही है और आख़िरकार सफल होगी।
लेकिन अब ऐसा लगता है कि ट्रंप इस निष्कर्ष पर पहुंच गए हैं कि यह संघर्ष एक निर्णायक मोड़ पर पहुंच सकता है।
अब वह आशावाद काफ़ी कम हो गया है और ट्रंप ने लंबे समय तक फिर से हमले शुरू होने की आशंका से इनकार नहीं किया है, जिसकी शुरुआत आज रात से भी हो सकती है।
यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोदिमिर ज़ेलेंस्की के साथ बैठक के दौरान पत्रकारों से बात करते हुए ट्रंप ने कहा, "देखते हैं आगे क्या होता है। मैं उनसे ख़ुश नहीं हूँ।"
अगर बातचीत पूरी तरह विफल हो जाती है और युद्धविराम ख़त्म हो जाता है, तो घरेलू राजनीति में ट्रंप के लिए स्थिति मुश्किल हो सकती है। उनकी अपनी रिपब्लिकन पार्टी के कुछ नेता शुरुआत से ही इस युद्ध को लेकर असहज रहे हैं।
कुछ नेताओं ने खुलकर सवाल उठाया कि युद्धविराम बढ़ाने वाले 14 सूत्रीय समझौते से अमेरिका को आख़िर मिला क्या और क्या तेहरान पर यह भरोसा किया जा सकता है कि वह होर्मुज़ स्ट्रेट को फिर से खुला रखेगा।
अगर फिर से लड़ाई शुरू होती है, तो कैपिटल हिल में मौजूद कुछ सांसदों की नज़र में यह साबित होगा कि उनकी आशंकाएं सही थीं।
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