भारत का खनन क्षेत्र: इंडिया माइनिंग वीक 2026 का आयोजन

ALN NEWS DESK
एएलएन न्यूज डेस्क
अपडेटेड : Jul 16, 2026, 05:43 AM IST
6 min read
  • linkedin
  • twitter
  • facebook
  • instagram
  • whatsapp

इंडिया माइनिंग वीक 2026 में खनन क्षेत्र में नवाचार और टिकाऊ विकास को बढ़ावा मिलेगा। केंद्रीय मंत्री जी किशन रेड्डी ने कार्यक्रम में इसकी महत्ता बताई।

धनबाद से मनोहर की रिपोर्ट

धनबाद : देश के खनन क्षेत्र में इनोवेशन, आधुनिक तकनीक और सतत विकास (सस्टेनेबल डेवलपमेंट) को बढ़ावा देने के उद्देश्य से बुधवार को देश की राजधानी नई दिल्ली में 'इंडिया माइनिंग वीक 2026' के कर्टेन रेजर कार्यक्रम का गरिमापूर्ण आयोजन किया गया. इस विशेष समारोह को संबोधित करते हुए केंद्रीय कोयला एवं खान मंत्री जी किशन रेड्डी ने कहा कि भारत का खनन क्षेत्र इस वक्त तेजी से बदलाव के दौर से गुजर रहा है. सरकार अपनी पारदर्शी नीतियों, तकनीकी इनोवेशन, टिकाऊ खनन और निवेश अनुकूल वातावरण के जरिए भारतीय खनन क्षेत्र को वैश्विक पटल पर प्रतिस्पर्धी बनाने में जुटी है. उन्होंने भरोसा जताया कि आगामी इंडिया माइनिंग वीक देश-दुनिया के उद्योग जगत, नीति निर्माताओं और निवेशकों को एक मंच पर लाएगा, जिससे नई तकनीक और वैश्विक साझेदारी को बढ़ावा मिलेगा और 'विकसित भारत 2047' के लक्ष्य को हासिल करने में मदद मिलेगी.

100 से अधिक खनिज ब्लॉक परिचालन में

समारोह में विशिष्ट अतिथि के रूप में मौजूद कोयला राज्य मंत्री सतीश चंद्र दुबे ने देश के विकास में इस क्षेत्र के महत्व को रेखांकित किया. उन्होंने कहा कि खनन सिर्फ खनिज संपदा निकालने तक सीमित नहीं है, बल्कि यह राष्ट्र निर्माण और ऊर्जा सुरक्षा का मजबूत आधार है. एमएमडीआर (MMDR) अधिनियम में हुए ऐतिहासिक सुधारों की चर्चा करते हुए उन्होंने बताया कि अब तक 100 से अधिक नीलाम किए गए खनिज ब्लॉक परिचालन (ऑपरेशनल) में आ चुके हैं, जिनमें से अकेले 36 ब्लॉक इसी चालू वित्त वर्ष में शुरू किए गए हैं. इसके अलावा, सुरक्षा के लिहाज से बेहद महत्वपूर्ण 56 क्रिटिकल मिनरल ब्लॉकों की सफल नीलामी पूरी की जा चुकी है. उन्होंने यह भी जानकारी साझा की कि देश का कोयला उत्पादन लगातार दूसरे साल एक अरब टन से अधिक रहा है और विभाग कोल गैसीफिकेशन जैसी अत्याधुनिक तकनीकों को लगातार बढ़ावा दे रहा है.

भारत का खनन क्षेत्र देश की अर्थव्यवस्था में एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। खनिज संसाधनों का उपयोग न केवल औद्योगिक विकास के लिए आवश्यक है, बल्कि यह ऊर्जा सुरक्षा का भी एक महत्वपूर्ण पहलू है। जैसे-जैसे विश्व में ऊर्जा की मांग बढ़ रही है, भारत जैसे विकासशील देशों के लिए यह आवश्यक हो गया है कि वे अपने खनिज संसाधनों का कुशलता से उपयोग करें। इस संदर्भ में, खनन नीतियों में सुधार और आधुनिक तकनीकों का उपयोग आवश्यक है।

यशोभूमि कन्वेंशन सेंटर में 15 से 17 नवंबर तक सजेगा महामंच

इस कर्टेन रेजर कार्यक्रम में डिजिटल गवर्नेंस, पर्यावरण संरक्षण, सुरक्षा और टिकाऊ खनन जैसे बेहद संवेदनशील व तकनीकी विषयों पर भी गहन चर्चा हुई. इसी ऐतिहासिक अवसर पर क्रिटिकल एवं रणनीतिक खनिज ब्लॉकों की आठवीं ट्रेंच का भी आधिकारिक शुभारंभ किया गया. अधिकारियों ने उम्मीद जताई कि आगामी 15 से 17 नवंबर 2026 तक नई दिल्ली के विश्वस्तरीय 'यशोभूमि कन्वेंशन सेंटर' में आयोजित होने वाला मुख्य 'इंडिया माइनिंग वीक 2026' वैश्विक निवेश और अंतरराष्ट्रीय साझेदारी को नई ऊंचाइयों पर ले जाएगा. इस कर्टेन रेजर कार्यक्रम में कोयला सचिव विक्रम देव दत्त, खान सचिव पीयूष गोयल, अतिरिक्त सचिव रूपिंदर बरार सहित उद्योग जगत के कई शीर्ष अधिकारी और प्रतिनिधि उपस्थित रहे.

इंडिया माइनिंग वीक का आयोजन खनन उद्योग में नवाचार और प्रौद्योगिकी के विकास के लिए एक महत्वपूर्ण मंच प्रदान करेगा। यह न केवल भारतीय खनन क्षेत्र के लिए, बल्कि वैश्विक स्तर पर भी खनन उद्योग के लिए एक महत्वपूर्ण घटना होगी। इस प्रकार के आयोजन से न केवल निवेशकों के लिए अवसर पैदा होते हैं, बल्कि यह नीति निर्माताओं और उद्योग के बीच संवाद को भी बढ़ावा देता है।

नवाचार और सतत खनन के संकल्प के साथ आगे बढ़ रहा बीसीसीएल

कार्यक्रम में विशेष रूप से शामिल हुए भारत कोकिंग कोल लिमिटेड (BCCL) के सीएमडी मनोज कुमार अग्रवाल ने जिम्मेदार और पर्यावरण अनुकूल खनन के प्रति अपनी कंपनी की अटूट प्रतिबद्धता को दोहराया. उन्होंने कहा कि बीसीसीएल अत्याधुनिक तकनीकों के उपयोग, उत्पादन क्षमता में वृद्धि और पर्यावरण के अनुकूल खनन को सर्वोच्च प्राथमिकता दे रही है. कंपनी देश के औद्योगिक और ऊर्जा विकास में अपनी महत्वपूर्ण भागीदारी निभाते हुए जिम्मेदार खनन और सतत विकास के मार्ग पर निरंतर आगे बढ़ने के लिए पूरी तरह संकल्पित है.

बीसीसीएल जैसे संगठनों का प्रयास न केवल खनन की प्रक्रिया को अधिक कुशल बनाना है, बल्कि यह पर्यावरणीय प्रभाव को भी कम करना है। इस दिशा में, कंपनियों को नई तकनीकों का उपयोग करना होगा, जैसे कि खनन के दौरान उत्पन्न होने वाले कचरे को पुनः चक्रित करना और ऊर्जा की खपत को कम करना। इसके अलावा, खनन क्षेत्रों में स्थानीय समुदायों के साथ सहयोग करना भी आवश्यक है, ताकि उनके अधिकारों और जीवन स्तर को सुरक्षित रखा जा सके।

इस कार्यक्रम में चर्चा किए गए विषयों से यह स्पष्ट होता है कि भारत का खनन क्षेत्र न केवल आर्थिक विकास के लिए आवश्यक है, बल्कि यह पर्यावरणीय स्थिरता और सामाजिक जिम्मेदारी को भी ध्यान में रखता है। ऐसे कार्यक्रम और चर्चाएँ न केवल उद्योग के लिए, बल्कि समाज के लिए भी महत्वपूर्ण हैं, क्योंकि ये एक स्थायी भविष्य की दिशा में कदम बढ़ाने का एक साधन हैं.

भारत में खनन उद्योग का इतिहास काफी पुराना है, और यह क्षेत्र देश की अर्थव्यवस्था में एक महत्वपूर्ण स्थान रखता है। भारत में खनिज संसाधनों की प्रचुरता है, जिसमें कोयला, लौह अयस्क, बोक्साइट, जस्ता, तांबा, और अन्य खनिज शामिल हैं। इन खनिजों का उपयोग न केवल घरेलू उद्योगों में किया जाता है, बल्कि यह निर्यात के लिए भी महत्वपूर्ण है। भारत के खनन क्षेत्र में सुधारों की आवश्यकता लंबे समय से महसूस की जा रही है, और सरकार ने इस दिशा में कई कदम उठाए हैं।

इंडिया माइनिंग वीक जैसे कार्यक्रमों का आयोजन इस दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। यह न केवल उद्योग के लिए एक मंच प्रदान करता है, बल्कि यह नीति निर्माताओं, शोधकर्ताओं और उद्योग विशेषज्ञों के बीच संवाद को भी बढ़ावा देता है। इससे न केवल खनन क्षेत्र के विकास में मदद मिलेगी, बल्कि यह पर्यावरण संरक्षण और सामाजिक जिम्मेदारी को भी सुनिश्चित करेगा।

इस प्रकार, इंडिया माइनिंग वीक 2026 का आयोजन भारतीय खनन क्षेत्र के लिए एक मील का पत्थर साबित हो सकता है, जो न केवल वर्तमान चुनौतियों का समाधान करेगा, बल्कि भविष्य में भी एक स्थायी और प्रतिस्पर्धी खनन क्षेत्र के निर्माण में मदद करेगा. यह कार्यक्रम खनन उद्योग के लिए एक नई दिशा को इंगित करेगा, जिसमें नवाचार, तकनीकी विकास, और सतत खनन को प्राथमिकता दी जाएगी, जिससे भारत का खनन क्षेत्र वैश्विक मानकों के साथ कदम से कदम मिलाकर चल सकेगा.

Get More Updates

To learn more about the latest developments in General News, stay updated with our exclusive reports and analyses on AiLensNews.

Related News