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जल शक्ति मंत्रालय का राष्ट्रीय सम्मेलन, जल संसाधनों पर चर्चा

ALN NEWS DESK
एएलएन न्यूज डेस्क
अपडेटेड : Jul 12, 2026, 05:28 PM IST
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जल शक्ति मंत्रालय सोमवार को राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों के जल संसाधन सचिवों का सम्मेलन आयोजित करेगा, जिसमें जल प्रबंधन और सुधारों पर चर्चा होगी।

नयी दिल्ली, 12 जुलाई - जल शक्ति मंत्रालय ने सोमवार को यहां राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों के जल संसाधन विभागों के वरिष्ठतम सचिवों का राष्ट्रीय सम्मेलन आयोजित किया। इस सम्मेलन की अध्यक्षता जल शक्ति मंत्री सी. आर. पाटिल ने की, जिसमें मंत्रालय में राज्य मंत्री राज भूषण चौधरी और जल संसाधन, नदी विकास एवं गंगा संरक्षण विभाग के सचिव वी. एल. कांथा राव शाहिद प्रमुख अधिकारियों के रूप में शामिल हुए। यह सम्मेलन जल संसाधनों के प्रबंधन और संरक्षण के लिए एक महत्वपूर्ण कदम है, जिसमें विभिन्न राज्यों के प्रतिनिधियों ने भाग लिया।

जल संसाधनों का प्रबंधन एक जटिल और बहुआयामी प्रक्रिया है, जिसमें जल की उपलब्धता, गुणवत्ता, और वितरण के साथ-साथ जल के उपयोग के विभिन्न पहलुओं पर ध्यान देना आवश्यक है। भारत में जल संकट एक गंभीर समस्या है, जिसमें जल की कमी, प्रदूषण और जलवायु परिवर्तन के प्रभाव शामिल हैं। ऐसे में जल शक्ति मंत्रालय का यह सम्मेलन जल संसाधनों के समुचित प्रबंधन के लिए एक मंच प्रदान करता है, जहां विभिन्न राज्यों के अधिकारी अपने अनुभव साझा कर सकते हैं और एक-दूसरे से सीख सकते हैं।

आधिकारिक सूचना के अनुसार, सम्मेलन का उद्देश्य जल संसाधन क्षेत्र में केंद्र और राज्यों के बीच समन्वय को मजबूत करना और जल शक्ति मंत्रालय की प्रमुख राष्ट्रीय योजनाओं की प्रगति की समीक्षा करना है। इसमें सभी राज्यों एवं केंद्रशासित प्रदेशों के जल संसाधन विभागों के वरिष्ठ अधिकारियों के अलावा केंद्रीय जल आयोग, राष्ट्रीय बांध सुरक्षा प्राधिकरण और राष्ट्रीय जल मिशन सहित मंत्रालय के विभिन्न संगठनों के प्रतिनिधि भाग लेंगे। यह साझेदारी जल संसाधनों के प्रबंधन में सुधार लाने के लिए आवश्यक है, जिससे सभी स्तरों पर प्रभावी निर्णय लेने की प्रक्रिया को बढ़ावा मिलेगा।

बैठक में कमांड क्षेत्र विकास एवं जल प्रबंधन योजना के आधुनिकीकरण, ‘कैच द रेन’ अभियान, सिंचाई एवं बाढ़ प्रबंधन परियोजनाओं के संशोधित मूल्यांकन दिशा-निर्देश, बांधों के जलाशयों के संचालन, राज्य जल सुधार ढांचे, बांध सुरक्षा अधिनियम-2021 के तहत व्यापक सुरक्षा मूल्यांकन, सिंचाई गणना की प्रगति तथा मॉडल राज्य जल पुरस्कार की रूपरेखा सहित आठ प्रमुख विषयों पर चर्चा होगी। इन विषयों पर चर्चा से यह स्पष्ट होगा कि विभिन्न राज्यों में जल संसाधनों के प्रबंधन में क्या चुनौतियाँ हैं और उन्हें कैसे हल किया जा सकता है।

‘कैच द रेन’ अभियान, जो वर्षा जल संचयन को बढ़ावा देने के लिए शुरू किया गया है, जल संकट के समाधान में एक महत्वपूर्ण पहल है। इस अभियान के अंतर्गत वर्षा के पानी को इकट्ठा करने के लिए विभिन्न तकनीकों और उपायों को अपनाया जा रहा है। यह न केवल जल की उपलब्धता को बढ़ाता है, बल्कि भूजल स्तर को भी बनाए रखने में मदद करता है। भारत में, जहां मानसून की बारिश असमान हो सकती है, वर्षा जल संचयन तकनीकों का उपयोग महत्वपूर्ण हो जाता है। इस अभियान के माध्यम से, सरकार स्थानीय समुदायों को वर्षा जल संचयन के महत्व के प्रति जागरूक कर रही है, ताकि वे अपने जल संसाधनों का बेहतर उपयोग कर सकें।

सिंचाई और बाढ़ प्रबंधन परियोजनाओं के संशोधित मूल्यांकन दिशा-निर्देशों का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि इन परियोजनाओं को प्रभावी और पारदर्शी तरीके से लागू किया जाए। इसका सीधा प्रभाव कृषि उत्पादन और किसानों की आय पर पड़ेगा, जो कि देश की अर्थव्यवस्था के लिए महत्वपूर्ण है। भारत की अधिकांश जनसंख्या कृषि पर निर्भर है, और जल प्रबंधन में सुधार से न केवल कृषि उत्पादकता बढ़ेगी, बल्कि किसानों की आर्थिक स्थिति में भी सुधार होगा।

बांधों के जलाशयों के संचालन की चर्चा भी इस सम्मेलन का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है। भारत में बांधों की संख्या काफी अधिक है, और उनका सही संचालन जल संसाधनों के प्रबंधन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। जलाशयों का उचित प्रबंधन बाढ़ नियंत्रण, जल आपूर्ति, और ऊर्जा उत्पादन में सहायक होता है। बांध सुरक्षा अधिनियम-2021 के तहत व्यापक सुरक्षा मूल्यांकन से यह सुनिश्चित होगा कि बांध सुरक्षित हैं और उनके संचालन में कोई कमी नहीं है, जिससे बाढ़ और अन्य जल संकटों से निपटने में मदद मिलेगी।

राज्य जल सुधार ढांचे की चर्चा से यह स्पष्ट होगा कि राज्य स्तर पर जल संसाधनों के प्रबंधन में क्या सुधार किए जा सकते हैं। यह आवश्यक है कि राज्यों के पास मजबूत और प्रभावी जल प्रबंधन नीतियाँ हों, ताकि जल संकट से निपटने के लिए वे सक्षम हों। जल संकट के समाधान के लिए राज्य सरकारों को स्थानीय स्तर पर जल प्रबंधन की रणनीतियों को विकसित करने की आवश्यकता है, जिससे वे अपने विशिष्ट जल संसाधनों की स्थिति के अनुसार उपाय कर सकें।

मॉडल राज्य जल पुरस्कार की रूपरेखा भी इस सम्मेलन में प्रस्तुत की जाएगी, जो उन राज्यों को मान्यता प्रदान करेगा जो जल संसाधनों के प्रबंधन में उत्कृष्टता प्रदर्शित करते हैं। यह पुरस्कार अन्य राज्यों के लिए प्रेरणा का स्रोत बनेगा और जल संसाधनों के प्रबंधन में सुधार लाने के लिए प्रतिस्पर्धा को बढ़ावा देगा। पुरस्कार की प्रक्रिया में, राज्यों को उनकी जल प्रबंधन नीतियों, कार्यान्वयन, और परिणामों के आधार पर मूल्यांकन किया जाएगा।

मंत्रालय के अनुसार, सम्मेलन राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों को अपने अनुभव साझा करने, चुनौतियों पर चर्चा करने और जल क्षेत्र में सुधारों को गति देने के लिए समन्वित रणनीति तैयार करने का अवसर प्रदान करेगा। साथ ही, यह सतत जल संसाधन प्रबंधन, बांध सुरक्षा और जल संरक्षण में जनभागीदारी को बढ़ावा देने की दिशा में मंत्रालय के प्रयासों को आगे बढ़ाएगा। जनभागीदारी का मतलब है कि नागरिकों को जल संरक्षण के प्रयासों में शामिल किया जाए, ताकि वे अपने जल संसाधनों के प्रति जागरूक और जिम्मेदार बन सकें।

जल संकट के समाधान के लिए यह आवश्यक है कि सभी स्तरों पर समन्वय और सहयोग हो। जल शक्ति मंत्रालय का यह सम्मेलन इस दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है, जो न केवल जल संसाधनों के प्रबंधन में सुधार लाएगा, बल्कि देश के विकास में भी योगदान देगा। जल संसाधनों का सही प्रबंधन न केवल कृषि और उद्योग के लिए आवश्यक है, बल्कि यह मानव जीवन के लिए भी अत्यंत महत्वपूर्ण है। जल संकट के समाधान के लिए, सभी स्तरों पर एक समन्वित दृष्टिकोण की आवश्यकता है, जिसमें न केवल सरकारी प्रयास शामिल हैं, बल्कि व्यक्तिगत और सामुदायिक स्तर पर भी जल संरक्षण की पहल की जानी चाहिए।

भारत में जल संकट की समस्या केवल एक पर्यावरणीय मुद्दा नहीं है, बल्कि यह सामाजिक और आर्थिक मुद्दों से भी जुड़ी हुई है। जल की कमी से न केवल कृषि उत्पादन प्रभावित होता है, बल्कि यह स्वास्थ्य, शिक्षा और आर्थिक विकास को भी प्रभावित करता है। इसलिए, जल शक्ति मंत्रालय का यह सम्मेलन एक व्यापक दृष्टिकोण से जल संकट को समझने और हल करने का प्रयास है। जल संसाधनों का सही प्रबंधन न केवल वर्तमान पीढ़ी के लिए आवश्यक है, बल्कि आने वाली पीढ़ियों के लिए भी एक स्थायी भविष्य सुनिश्चित करने के लिए आवश्यक है।

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