सोनम वांगचुक के बाद अब जंतर-मंतर पर भूख हड़ताल कर रहे अन्य प्रदर्शनकारी

ALN NEWS DESK
एएलएन न्यूज डेस्क
अपडेटेड : Jul 18, 2026, 05:29 PM IST
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दिल्ली पुलिस द्वारा सोनम वांगचुक को अस्पताल ले जाने के बाद, कॉकरोच जनता पार्टी के अभिजीत दीपके ने अनशन शुरू किया। जंतर-मंतर पर अन्य प्रदर्शनकारी भी भूख हड़ताल पर हैं।

दिल्ली पुलिस की ओर से सोनम वांगचुक को अस्पताल ले जाए जाने के बाद कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) के संस्थापक अभिजीत दीपके ने अनशन शुरू कर दिया है।

दिल्ली पुलिस पर्यावरण कार्यकर्ता सोनम वांगचुक को शनिवार तड़के धरनास्थल से उठाकर सफ़दरजंग अस्पताल ले गई थी। यह घटना उस समय हुई जब सोनम वांगचुक अपनी मांगों को लेकर जंतर-मंतर पर अनशन पर बैठे थे, जो कि 28 जून से चल रहा था। शनिवार को उनकी भूख हड़ताल 21वें दिन में प्रवेश कर चुकी थी। वांगचुक, जो एक प्रसिद्ध इंजीनियर और शिक्षा सुधारक हैं, ने अपने अनशन के दौरान कई मुद्दों को उठाया है, जिसमें शिक्षा प्रणाली में सुधार और परीक्षा के पेपर लीक से संबंधित समस्याएं शामिल हैं।

सोनम वांगचुक ने सफ़दरजंग अस्पताल में भी ड्रिप या मुंह के ज़रिए कोई भी तरल पदार्थ या दवा लेने से मना कर दिया है। यह उनकी दृढ़ता को दर्शाता है, क्योंकि वे अपनी मांगों के प्रति अपनी प्रतिबद्धता को बनाए रखने के लिए अपनी सेहत को भी खतरे में डाल रहे हैं।

वहीं, सीजेपी ने आधिकारिक एक्स हैंडल पर लिखा, "अभिजीत दीपके अनिश्चितकालीन अनशन पर बैठ गए हैं। 20 जुलाई को होने वाला 'चलो संसद' मार्च तय कार्यक्रम के अनुसार जारी रहेगा।" यह मार्च सीजेपी द्वारा आयोजित किया जा रहा है, जिसका उद्देश्य शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग को तेज करना है।

अभिजीत दीपके ने भी एक्स पोस्ट के ज़रिए इसकी पुष्टि की है। उन्होंने कहा है कि जब तक उनकी मांगें पूरी नहीं होती, तब तक वे अपने अनशन को जारी रखेंगे। दूसरी ओर, सोनम वांगचुक की पत्नी गीतांजलि जे अंगमो ने कहा है कि बिना सहमति के उनके (वांगचुक) मुंह या नसों के ज़रिए कुछ भी नहीं दिया जाए। यह उनके स्वास्थ्य के प्रति चिंता को दर्शाता है और यह भी कि परिवार इस आंदोलन के प्रति कितना संवेदनशील है।

डीसीपी नई दिल्ली ने इस मामले पर जानकारी देते हुए एक्स पर बताया कि दिल्ली हाई कोर्ट के आदेश और डॉक्टरों की सलाह के बाद सोनम वांगचुक की बिगड़ती तबीयत को देखते हुए उन्हें इलाज के लिए अस्पताल ले जाया गया है। यह एक महत्वपूर्ण कदम है, जो दर्शाता है कि स्वास्थ्य संबंधी मुद्दों को प्राथमिकता दी जा रही है।

सीजेपी और सोनम वांगचुक की मांग

कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) ने दावा किया है कि सोनम वांगचुक को पुलिस जबरन उठाकर ले गई और छात्रों पर लाठीचार्ज भी किया। यह आरोप गंभीर है और यह दर्शाता है कि प्रदर्शनकारियों के प्रति पुलिस की कार्रवाई कितनी सख्त हो सकती है। सोनम वांगचुक को प्रदर्शन स्थल से ले जाते हुए कुछ तस्वीरें भी सामने आई हैं। तस्वीरों में देखा जा सकता है कि अभिजीत दीपके को कई लोग मिलकर जंतर-मंतर से उठाकर ले जा रहे हैं।

सोनम वांगचुक कॉकरोच जनता पार्टी की मांग के समर्थन में जंतर-मंतर पर प्रदर्शन में शामिल हुए थे और वहीं उन्होंने भूख हड़ताल शुरू कर दी थी। सीजेपी की मांग है कि परीक्षा के पेपर लीक मामले समेत शिक्षा व्यवस्था से जुड़ी अन्य 'कई गड़बड़ियों' के लिए ज़िम्मेदारी तय की जाए। इसके लिए उन्होंने शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग की।

सीजेपी ने यह भी कहा कि अगर धर्मेंद्र प्रधान इस्तीफा नहीं देते हैं तो पीएम मोदी को उन्हें पद से हटा देना चाहिए। यह मांग राजनीतिक स्तर पर एक बड़ा मुद्दा बन सकता है, क्योंकि इससे सरकार की शिक्षा नीति और प्रशासनिक कार्यप्रणाली पर सवाल उठ सकते हैं।

सीजेपी के इन प्रदर्शनों और सोनम वांगचुक की मांग को कई लोगों ने समर्थन दिया और वे जंतर-मंतर पर भी पहुंचे। इनमें कई छात्र संगठनों के सदस्य भी शामिल हैं। इन्हीं में से कुछ लोगों ने सोनम वांगचुक के साथ ही भूख हड़ताल भी शुरू कर दी। यह एकजुटता इस बात का संकेत है कि युवा वर्ग शिक्षा के मुद्दों को लेकर कितनी चिंतित है।

प्रदर्शनकारियों की योजना थी कि वे 20 जुलाई को संसद की ओर मार्च करेंगे। यह मार्च न केवल उनकी मांगों को उठाने का एक तरीका होगा, बल्कि यह एक राजनीतिक संकेत भी होगा कि युवा वर्ग अपनी आवाज उठाने के लिए तैयार है।

इस बीच सोनम वांगचुक ने शुक्रवार देर रात सोशल मीडिया पर एक वीडियो संदेश जारी कर अपनी स्वास्थ्य स्थिति और आंदोलन को लेकर बात की। वांगचुक ने कहा, "20 जुलाई को मेरे साथ संसद की ओर मार्च कीजिए। हमारी असली ताक़त आपकी संख्या है। मैं अकेला, भूखा और एक साधारण इंसान हूं। ताक़त आप लोगों की है। हम सिर्फ़ छात्रों के लिए जवाबदेही की मांग कर रहे हैं।" यह संदेश उनके आंदोलन की गंभीरता को दर्शाता है और यह भी कि वे अपनी स्थिति को लेकर कितने चिंतित हैं।

भूख हड़ताल पर कौन-कौन हैं

बीबीसी संवाददाता शुभ राणा के मुताबिक़ सोनम वांगचुक के साथ ही जंतर-मंतर पर छात्र संगठन एआईएसए के तीन सदस्य भी 28 जून से भूख हड़ताल पर बैठे हैं। ये लोग भी उन्हीं मांगों के समर्थन में हैं, जिनकी मांग सीजेपी ने की है।

नेहा:

भूख हड़ताल पर बैठी नेता ने शुभ राणा से कहा, "सोनम वांगचुक इस आंदोलन का बहुत बड़ा हिस्सा हैं, जब आप उनको उठा देते हैं तो प्रोटेस्ट नहीं हो पाएगा। हमने अपना काम कर दिया। बहुत सारे युवा जंतर-मंतर पर प्रदर्शन कर रहे हैं।" नेहा ने आगे कहा, "सोनम सर को जिस तरह से उठाया गया है, अब हम यहां से एक इंच भी नहीं हटेंगे। दिल्ली हाई कोर्ट के आदेश में छात्रों का ज़िक्र नहीं है। इसलिए अगर वो हमें उठाकर ले जाएंगे तो यह ग़ैरक़ानूनी होगा।"

27 साल की नेहा उत्तराखंड की रहने वाली है। वो जेएनयू से थिएटर एंड परफार्मिंग स्टडीज़ में पीएचडी कर रही है। वो साल 2018 से एआईएसए से जुड़ी हुई हैं। यह दर्शाता है कि युवा वर्ग शिक्षा के मुद्दों पर कितना सक्रिय और जागरूक है।

मनीष:

भूख हड़ताल पर बैठे एक अन्य छात्र मनीष उत्तर प्रदेश के आज़मगढ़ के रहने वाले हैं। वो एआईएसए के उत्तर प्रदेश अध्यक्ष हैं। पिछले 10 साल से एआईएसए से जुड़े हैं। फ़िलहाल इलाहाबाद यूनिवर्सिटी से पॉलिटिकल साइंस से पीएचडी कर रहे हैं। मनीष कुमार ने बीबीसी से बातचीत में कहा, "हम लोगों के भूख हड़ताल का आज 21वां दिन है। 20 जुलाई को जो हमारा संसद मार्च है हम उसे करेंगे। जब तक यह सरकार ज़िम्मेदारी लेने के लिए तैयार नहीं होती है, जब तक धर्मेंद्र प्रधान को हटाती नहीं है, तब तक हमारी लड़ाई जारी रहेगी।"

आमीन:

भूख हड़ताल पर बैठे एआईएसए से तीसरे सदस्य हैं आमीन। आमीन का कहना है, "हम यहां धर्मेंद्र प्रधान से इस्तीफे की मांग में बैठे हुए हैं, हम यहां सरकार की जवाबदेही तय करने के लिए बैठे हैं। हम यहां एनईपी (न्यू एजुकेशन पॉलिसी) पर सवाल खड़े करने के लिए बैठे हैं।" उन्होंने इसी हफ़्ते बीबीसी से बातचीत के दौरान आरोप लगाया था कि 'एनईपी' शिक्षा के निजीकरण का रास्ता खोलने वाला है।

बीबीसी संवाददाता शुभ राणा के मुताबिक़, एआईएसए भले ही सीजेपी के प्रदर्शन में शामिल है और उनके सदस्य भी भूख हड़ताल पर बैठे हैं, लेकिन एआईएसए का मंच और उनका टेंट सोनम वांगचुक के मंच और टेंट से अलग रखा गया है। यह दर्शाता है कि विभिन्न छात्र संगठनों के बीच एकजुटता के बावजूद, वे अपनी पहचान और लक्ष्यों को बनाए रखने के लिए प्रयासरत हैं।

दिल्ली हाई कोर्ट ने क्या कहा था?

डीसीपी नई दिल्ली ने इस मामले की जानकारी देते हुए एक्स पर लिखा, ''दिल्ली हाई कोर्ट के आदेश और विशेषज्ञ डॉक्टरों की सलाह के अनुसार, सोनम वांगचुक की बिगड़ती सेहत को देखते हुए उन्हें ज़रूरी मेडिकल देखभाल के लिए हॉस्पिटल ले जाया गया है.'' इससे पहले 16 जुलाई को दिल्ली हाई कोर्ट ने सरकार को सोनम वांगचुक की सेहत पर नज़र रखने के लिए निर्देश दिया था। यह पहली बार था, जब किसी अदालत ने इस प्रदर्शन में दख़ल दिया था।

अदालत के निर्देश का मतलब था कि अगर उनकी हालत ख़राब होती है तो उन्हें अस्पताल ले जाया जा सकता है। अदालत का यह आदेश 20 जुलाई को प्रस्तावित उस मार्च से कुछ दिन पहले आया था, जिसे सीजेपी ने भूख हड़ताल स्थल से संसद तक निकालने का आह्वान किया है।

सीजेपी के मुताबिक़ इस मार्च का मक़सद धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे और परीक्षा प्रणाली में सुधार की मांग को तेज़ करना था। यह एक महत्वपूर्ण राजनीतिक कदम हो सकता है, जो सरकार के प्रति छात्र समुदाय के असंतोष को उजागर करेगा।

दिल्ली हाई कोर्ट की दो जजों की बेंच ने एक याचिका पर सुनवाई करते हुए अधिकारियों से कहा कि वे डॉक्टरों की राय के आधार पर ज़रूरी क़दम उठाएं। इस याचिका में वांगचुक की हालत गंभीर होने से पहले उन्हें जबरन भोजन दिए जाने की मांग की गई थी। यह एक संवेदनशील मुद्दा है, क्योंकि जबरन भोजन देने की कार्रवाई मानवाधिकारों का उल्लंघन हो सकती है।

इस आंदोलन के पीछे की राजनीतिक और सामाजिक परिस्थितियों को देखते हुए, यह स्पष्ट है कि छात्र समुदाय अपनी आवाज उठाने के लिए तैयार है और वे अपनी मांगों के लिए संघर्ष करने में कोई कसर नहीं छोड़ेंगे। यह संघर्ष न केवल शिक्षा प्रणाली में सुधार के लिए है, बल्कि यह युवा पीढ़ी की राजनीतिक जागरूकता और सक्रियता का भी प्रतीक है।

इस प्रकार, यह आंदोलन न केवल एक व्यक्तिगत संघर्ष है, बल्कि यह एक व्यापक सामाजिक आंदोलन का हिस्सा है, जो शिक्षा के अधिकार और गुणवत्ता को सुनिश्चित करने के लिए लड़ा जा रहा है।

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