उत्तराखंड की मतदाता सूची में 19.04 लाख विसंगतियां पाई गई हैं, जिनमें दो लाख मतदाताओं के माता-पिता नाबालिग और 92 हजार के दादा जवान हैं।
देहरादून, भारत 15 जुल॰ 2026 ALN: उत्तराखंड में हाल ही में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) के पहले चरण के दौरान चौंकाने वाली विसंगतियां सामने आई हैं, जिनमें 19.04 लाख मतदाताओं की जानकारी में गड़बड़ियां पाई गई हैं। इस पुनरीक्षण में दो लाख मतदाताओं के माता-पिता नाबालिग पाए गए हैं, जबकि 92 हजार मतदाताओं के दादा या दादी की उम्र उनके पोते-पोतियों की उम्र से बहुत कम है। यह स्थिति उत्तराखंड के चुनावी प्रणाली में गंभीर खामियों को उजागर करती है, जो लोकतंत्र की बुनियाद को प्रभावित कर सकती है।
मतदाता सूची में जिन विसंगतियों का खुलासा हुआ है, उनमें से सबसे गंभीर यह है कि उत्तराखंड में दो लाख ऐसे मतदाता हैं जिनके माता-पिता की उम्र नाबालिग है। यह तथ्य चुनाव आयोग के एसआईआर के पहले चरण के बाद सामने आया है, जो कि एक गंभीर चिंता का विषय है। ऊधमसिंह नगर जिले के रुद्रपुर विधानसभा क्षेत्र में 89 प्रतिशत मतदाताओं की जानकारी में विसंगतियां पाई गई हैं। इसके अलावा, 42,808 मतदाता ऐसे हैं जिनका कोई पता नहीं चल पाया है, जो चुनावी प्रक्रिया में उनकी भागीदारी को प्रभावित कर सकता है।
1,99,121 मतदाताओं के माता-पिता नाबालिग
विशेष गहन पुनरीक्षण में 1,99,121 मामलों का पता चला है, जिनमें माता-पिता की आयु के बीच महज 15 वर्ष या उससे कम का अंतर है। यह स्थिति कई विधानसभा क्षेत्रों में देखी गई है, जैसे कि अल्मोड़ा की सल्ट विधानसभा में 14,001 मतदाताओं में से 3,938 (28 प्रतिशत) मामले ऐसे हैं। देहरादून की चकराता विधानसभा में 4,062 मतदाता और हरिद्वार की खानपुर विधानसभा में 5,359 मतदाता ऐसे चिह्नित हुए हैं। यह स्थिति न केवल चुनावी प्रक्रिया को प्रभावित करती है, बल्कि समाज में परिवार के ढांचे और पारिवारिक जिम्मेदारियों पर भी सवाल खड़े करती है।
92,114 मतदाताओं के दादा जवान
इसके अलावा, 92,114 मतदाता ऐसे हैं जिनके दादा-दादी या नाना-नानी की उम्र और उनके बीच का अंतर 40 वर्ष से कम है। बागेश्वर जिले की बागेश्वर और कपकोट विधानसभा में सर्वाधिक 11-11 प्रतिशत मतदाता इस श्रेणी में आते हैं। यह तथ्य यह दर्शाता है कि परिवारों में उम्र का अंतर कम होना, विशेष रूप से ग्रामीण क्षेत्रों में, एक सामान्य प्रवृत्ति बनती जा रही है। यह स्थिति न केवल परिवारों के भीतर संबंधों को प्रभावित करती है, बल्कि यह समाज के सामाजिक और आर्थिक ढांचे पर भी गहरा प्रभाव डाल सकती है।
प्रदेशभर में 5,26,228 ऐसे मतदाता हैं, जिनको चुनाव आयोग मैप ही नहीं कर पाया है। इनमें ऊधमसिंह नगर की रुद्रपुर विधानसभा में सर्वाधिक 42,808 मतदाता शामिल हैं। यह स्थिति निर्वाचन प्रक्रिया में पारदर्शिता की कमी को दर्शाती है। यदि नोटिस जारी होने के बाद भी इनका अता-पता न चला तो इनका वोट कट जाएगा, जो लोकतंत्र के मूल सिद्धांतों के खिलाफ है। यह स्थिति चुनावी प्रक्रिया में भागीदारी को गंभीरता से प्रभावित कर सकती है और यह सुनिश्चित करना आवश्यक है कि सभी योग्य मतदाता अपनी आवाज उठा सकें।
| जिला | कुल मतदाता | गड़बड़ी वाले मतदाता | प्रतिशत |
| देहरादून | 11,90,805 | 3,95,868 | 33 |
| हरिद्वार | 12,46,219 | 3,90,312 | 31 |
| यूएस नगर | 11,55,672 | 3,36,164 | 29 |
| नैनीताल | 6,93,325 | 1,88,054 | 27 |
| पौड़ी | 5,03,468 | 1,05,945 | 21 |
| टिहरी | 4,63,628 | 1,04,402 | 23 |
इन तथ्यों ने उत्तराखंड की चुनावी प्रक्रिया पर सवाल उठाए हैं और चुनाव आयोग को इन विसंगतियों को सुधारने की आवश्यकता है। यह न केवल लोकतांत्रिक प्रक्रिया के लिए आवश्यक है, बल्कि समाज में विश्वास और पारदर्शिता को भी बनाए रखने के लिए जरूरी है। चुनाव आयोग को इस मामले में गंभीरता से कदम उठाने की आवश्यकता है ताकि मतदाता अपनी आवाज उठा सकें और लोकतंत्र की नींव को मजबूती प्रदान कर सकें।
इस संदर्भ में, यह समझना आवश्यक है कि चुनावी प्रक्रिया का एक महत्वपूर्ण हिस्सा मतदाता सूची की सटीकता और पारदर्शिता है। यदि मतदाता सूची में इस तरह की विसंगतियां बनी रहती हैं, तो यह न केवल चुनावी परिणामों को प्रभावित कर सकती हैं, बल्कि यह लोकतंत्र की बुनियाद को भी कमजोर कर सकती हैं। इसलिए, चुनाव आयोग को इस मुद्दे पर ध्यान केंद्रित करने की आवश्यकता है ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि सभी मतदाता स्वतंत्र और निष्पक्ष तरीके से अपने मताधिकार का प्रयोग कर सकें।
To learn more about the latest developments in Crime & Law, stay updated with our exclusive reports and analyses on AiLensNews.