उत्तराखंड सरकार ने पीआरडी जवानों के लिए एक नई व्यवस्था की घोषणा की है, जिसके तहत अस्पताल में भर्ती घायल और बीमार जवानों को मानदेय मिलेगा।
देहरादून, भारत 14 जुल॰ 2026 ALN: उत्तराखंड राज्य में प्रांतीय रक्षक दल (पीआरडी) के स्वयंसेवकों के लिए हाल ही में एक महत्वपूर्ण घोषणा की गई है। राज्य सरकार ने यह निर्णय लिया है कि ड्यूटी और प्रशिक्षण के दौरान अगर पीआरडी जवान बीमार या घायल होकर अस्पताल में भर्ती होते हैं, तो उन्हें उपचार की अवधि में भी मानदेय मिलेगा। यह कदम पीआरडी जवानों की आर्थिक सुरक्षा को सुनिश्चित करने के उद्देश्य से उठाया गया है।
राज्य में लगभग दस हजार पीआरडी जवान हैं, जो विभिन्न आपात स्थितियों में नागरिकों की सहायता के लिए तत्पर रहते हैं। युवा कल्याण एवं प्रांतीय रक्षक दल मंत्री रेखा आर्या ने इस व्यवस्था को पीआरडी स्वयंसेवकों के लिए एक बड़ी राहत बताया है। उनका कहना है कि यह कदम जवानों को मानसिक और आर्थिक रूप से मजबूत करेगा, जिससे वे अपने कर्तव्यों का पालन बेहतर तरीके से कर सकेंगे।
यह नई व्यवस्था मुख्यमंत्री की घोषणा के अनुरूप की गई है। मुख्यमंत्री ने अपने कार्यकाल में कई बार पीआरडी जवानों की सेवाओं की प्रशंसा की है और उनकी भलाई के लिए ठोस कदम उठाने की बात कही है। पीआरडी स्वयंसेवक विपरीत परिस्थितियों में भी विभिन्न विभागों में अपनी सेवाएं पूरी निष्ठा और समर्पण के साथ दे रहे हैं। ऐसे में यह निर्णय उनके प्रति सरकार की प्रतिबद्धता को दर्शाता है।
पिछले समय में, ड्यूटी के दौरान किसी दुर्घटना या बीमारी की स्थिति में अस्पताल में भर्ती होने पर पीआरडी जवानों का मानदेय कट जाता था। यह स्थिति उनके लिए आर्थिक दबाव का कारण बनती थी। लेकिन अब, इस नई व्यवस्था के तहत, अस्पताल में भर्ती रहने की अवधि को ऑन ड्यूटी माना जाएगा। इसका मतलब है कि उन्हें अधिकतम 180 दिन का मानदेय मिलेगा। यह परिवर्तन न केवल उनके आर्थिक सुरक्षा को बढ़ाएगा, बल्कि उनके मनोबल को भी ऊंचा करेगा।
सरकार ने इस संबंध में मानक संचालन प्रक्रिया (एसओपी) भी जारी की है, जिससे पूरे प्रदेश में इस व्यवस्था का पारदर्शी और एक समान क्रियान्वयन सुनिश्चित किया जा सके। यह प्रक्रिया स्पष्ट करती है कि पात्र पीआरडी स्वयंसेवकों को इस योजना का लाभ कैसे मिलेगा। यह कदम योजना के सुचारु और निष्पक्ष संचालन के लिए उठाया गया है, जिससे सभी जवानों को समान अवसर मिल सके।
राज्य सरकार पीआरडी जवानों के कल्याण के लिए लगातार ठोस निर्णय ले रही है। यह निर्णय न केवल उनके आर्थिक सुरक्षा को सुनिश्चित करता है, बल्कि उनके सामाजिक सुरक्षा के लिए भी महत्वपूर्ण है। भविष्य में भी स्वयंसेवकों के हितों की रक्षा और उनके कल्याण के लिए आवश्यक कदम उठाए जाते रहेंगे। यह पहल पीआरडी जवानों के मनोबल को बढ़ाने में सहायक होगी, जिससे वे अपने कार्यों को और अधिक प्रभावी ढंग से निभा सकें।
पीआरडी जवानों की भूमिका राज्य में आपातकालीन सेवाओं में अत्यंत महत्वपूर्ण है। वे प्राकृतिक आपदाओं, जैसे बाढ़, भूस्खलन और अन्य संकटों के समय में नागरिकों की सहायता के लिए तत्पर रहते हैं। ऐसे में उनकी भलाई और सुरक्षा सुनिश्चित करना सरकार की प्राथमिकता होनी चाहिए।
इस नई व्यवस्था का प्रभाव पीआरडी जवानों के परिवारों पर भी पड़ेगा। जब जवान आर्थिक रूप से सुरक्षित महसूस करेंगे, तो यह उनके परिवारों के लिए भी एक सकारात्मक वातावरण बनाने में मदद करेगा। इससे न केवल पीआरडी जवानों का मनोबल बढ़ेगा, बल्कि उनके परिवारों में भी सुरक्षा की भावना का विकास होगा।
इसके अलावा, यह निर्णय राज्य सरकार की ओर से एक सकारात्मक संकेत है कि वह अपने कर्मचारियों की भलाई के प्रति गंभीर है। यह न केवल पीआरडी जवानों के लिए, बल्कि अन्य सरकारी कर्मचारियों के लिए भी प्रेरणा का स्रोत बन सकता है।
राज्य सरकार के इस कदम से यह भी स्पष्ट होता है कि वह पीआरडी जवानों को एक सम्मानजनक स्थिति में देखना चाहती है। यह निर्णय उन जवानों के लिए एक नई उम्मीद लेकर आया है, जो अपने कर्तव्यों का पालन करते हुए कई बार कठिनाइयों का सामना करते हैं।
अंततः, यह व्यवस्था पीआरडी जवानों के प्रति सरकार की प्रतिबद्धता को दर्शाती है और यह सुनिश्चित करती है कि वे अपने कर्तव्यों का पालन करते समय आर्थिक सुरक्षा का अनुभव करें। यह कदम उत्तराखंड में पीआरडी की भूमिका को और अधिक मजबूत बनाने में सहायक होगा।
इस प्रकार, उत्तराखंड सरकार का यह निर्णय न केवल पीआरडी जवानों के लिए, बल्कि समाज के लिए भी एक सकारात्मक बदलाव का संकेत है। यह एक ऐसा कदम है जो न केवल वर्तमान में, बल्कि भविष्य में भी पीआरडी जवानों के कल्याण के लिए महत्वपूर्ण साबित होगा।
- रेखा आर्या, युवा कल्याण एवं प्रांतीय रक्षक दल
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