हिंदू धर्म छोड़कर इस्लाम धर्म अपनाया, हाईकोर्ट ने धर्म परिवर्तन करने वाली दो सगी बहनों को किया तलब

ALN NEWS DESK
एएलएन न्यूज डेस्क
अपडेटेड : Aug 1, 2026, 05:34 AM IST
6 min read
  • linkedin
  • twitter
  • facebook
  • instagram
  • whatsapp

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने धर्म परिवर्तन कर अपनी पसंद से विवाह करने की इच्छुक दो बालिग महिलाओं की बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिका पर सुनवाई करते हुए राज्य सरकार और संबंधित अधिकारियों को दोनों महिलाओं को छह अगस्त को अदालत में पेश करने का निर्देश दिया है।

Allahabad Highcourt: इलाहाबाद हाईकोर्ट ने धर्म परिवर्तन कर अपनी पसंद से विवाह करने की इच्छुक दो बालिग महिलाओं की बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिका पर सुनवाई करते हुए राज्य सरकार और संबंधित अधिकारियों को दोनों महिलाओं को छह अगस्त को अदालत में पेश करने का निर्देश दिया है। याचिका में कहा गया कि दिव्या भाटिया उर्फ जोया दिया भाटिया (20 वर्ष) और अंशु भाटिया उर्फ अमीना अंशु भाटिया (35 वर्ष) ने अपनी स्वतंत्र इच्छा से हिंदू धर्म छोड़कर इस्लाम धर्म अपनाया है तथा वे अपनी पसंद के व्यक्तियों से विवाह करना चाहती हैं।

उनका आरोप है कि उनके पिता अनिल कुमार भाटिया ने उनकी स्वतंत्र पसंद का विरोध करते हुए झूठी एफआईआर दर्ज कराई और पुलिस की मिलीभगत से उन्हें अवैध रूप से बंधक बनाकर रखा गया है। याचिकाकर्ता की ओर से यह भी तर्क दिया गया कि धर्म परिवर्तन पूरी तरह स्वैच्छिक था और इसमें किसी प्रकार के बल, प्रलोभन, धोखाधड़ी या दबाव का कोई तत्व नहीं है। इसलिए प्रथम दृष्टा उत्तर प्रदेश विधि विरुद्ध धर्म संपरिवर्तन प्रतिषेध अधिनियम, 2021 के प्रावधान लागू नहीं होते।

कानूनी रूप से फैसले लेने में सक्षम हैं दोनों महिलाएं

न्यायमूर्ति संदीप जैन ने कहा कि प्रथम दृष्टा दोनों महिलाएं बालिग हैं और अपने धर्म, विवाह, निवास तथा जीवन से जुड़े निर्णय स्वयं लेने के लिए कानूनी रूप से सक्षम हैं। यदि यह पाया जाता है कि उन्होंने अपनी स्वतंत्र इच्छा से धर्म परिवर्तन किया है और विवाह का निर्णय लिया है, तो उनके व्यक्तिगत निर्णयों में किसी भी प्रकार का हस्तक्षेप संविधान द्वारा प्रदत्त गरिमा, निजता, व्यक्तिगत स्वतंत्रता और स्वायत्त निर्णय के अधिकार का उल्लंघन होगा। अदालत ने कहा कि हेबियस कॉर्पस याचिका में सबसे पहले यह सुनिश्चित करना आवश्यक है कि दोनों महिलाएं अपनी स्वतंत्र इच्छा से रह रही हैं या उन्हें अवैध रूप से रोका गया है। इसी उद्देश्य से अदालत ने दोनों को छह अगस्त को पेश करने का आदेश दिया है। साथ ही चेतावनी दी कि यदि उन्हें अदालत में पेश नहीं किया गया तो संबंधित पुलिस अधिकारियों को व्यक्तिगत शपथपत्र दाखिल कर गैर-अनुपालन का कारण बताना होगा।

धर्म परिवर्तन का मुद्दा भारत में एक संवेदनशील विषय रहा है, जहाँ विभिन्न धार्मिक समुदायों के बीच मतभेद और संघर्ष होते रहते हैं। कई बार, धर्म परिवर्तन को लेकर परिवारों और समाज में तनाव उत्पन्न होता है, खासकर जब यह किसी व्यक्ति की स्वतंत्र पसंद के खिलाफ होता है। इस मामले में, दोनों बहनों ने अपनी इच्छानुसार धर्म परिवर्तन किया और विवाह करने की इच्छा व्यक्त की, जो कि उनके लिए एक महत्वपूर्ण व्यक्तिगत निर्णय है।

भारत में, संविधान ने सभी नागरिकों को अपने धर्म का चुनाव करने और उसे अपनाने का अधिकार दिया है। यह अधिकार व्यक्तिगत स्वतंत्रता का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है, जो हर व्यक्ति को अपने जीवन के महत्वपूर्ण निर्णय लेने की अनुमति देता है। हालांकि, कुछ राज्यों में धर्म परिवर्तन को लेकर कानून बनाए गए हैं, जिनका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि धर्म परिवर्तन के पीछे कोई धोखाधड़ी या बलात्कारी तत्व न हो। उत्तर प्रदेश विधि विरुद्ध धर्म संपरिवर्तन प्रतिषेध अधिनियम, 2021 इसी तरह का एक कानून है, जो धर्म परिवर्तन के मामलों में सख्ती से लागू होता है।

इस कानून के तहत, यदि किसी व्यक्ति का धर्म परिवर्तन किया जाता है, तो यह सुनिश्चित करना आवश्यक है कि यह पूरी तरह से स्वैच्छिक हो। अगर किसी व्यक्ति ने धर्म परिवर्तन के लिए दबाव या प्रलोभन का सामना किया है, तो यह कानून लागू होता है। इस मामले में, याचिकाकर्ताओं ने अदालत में यह स्पष्ट किया है कि उनका धर्म परिवर्तन स्वैच्छिक था और इसमें कोई भी बाहरी दबाव नहीं था।

अदालत ने इस मामले में सुनवाई करते हुए यह सुनिश्चित किया कि दोनों महिलाएं अपनी स्वतंत्र इच्छा से रह रही हैं या नहीं। यदि अदालत को यह पता चलता है कि उन्हें अवैध रूप से रोका गया है, तो यह उनके अधिकारों का उल्लंघन होगा। इसके अलावा, अदालत ने यह भी कहा कि यदि यह पाया जाता है कि दोनों महिलाएं अपने निर्णय में स्वतंत्र हैं, तो उनके व्यक्तिगत अधिकारों का सम्मान किया जाएगा।

इस मामले के परिणामों के व्यापक सामाजिक और कानूनी प्रभाव हो सकते हैं। यदि अदालत ने यह निर्णय दिया कि दोनों महिलाएं स्वतंत्र रूप से अपने धर्म और विवाह का चयन कर सकती हैं, तो यह एक महत्वपूर्ण मिसाल स्थापित करेगा। यह न केवल उनके अधिकारों की पुष्टि करेगा, बल्कि अन्य लोगों के लिए भी प्रेरणा का स्रोत बनेगा जो अपने धर्म या विवाह के संबंध में समान चुनौतियों का सामना कर रहे हैं।

हालांकि, इस मामले में एक और महत्वपूर्ण पहलू यह है कि यह परिवारों के बीच तनाव को भी बढ़ा सकता है। जब किसी व्यक्ति का धर्म परिवर्तन होता है, तो यह उनके परिवार के सदस्यों के लिए एक चुनौती बन सकता है, खासकर जब परिवार में धार्मिक या सांस्कृतिक मतभेद होते हैं। ऐसे मामलों में, परिवारों को अपने सदस्यों के निर्णयों का सम्मान करना और उनके अधिकारों को स्वीकार करना आवश्यक होता है।

अंत में, यह मामला न केवल व्यक्तिगत स्वतंत्रता और अधिकारों का प्रश्न है, बल्कि यह समाज में धर्म, विवाह और व्यक्तिगत निर्णयों के बारे में व्यापक चर्चा को भी जन्म देता है। यह भारतीय समाज में धर्म परिवर्तन के मुद्दे पर एक महत्वपूर्ण बहस को प्रेरित कर सकता है, जो कि विभिन्न दृष्टिकोणों और विचारों को सामने लाने का अवसर प्रदान करेगा।

धर्म परिवर्तन का यह मामला भारतीय समाज में कई जटिलताओं को उजागर करता है। भारत एक विविधता भरा देश है, जहाँ विभिन्न धर्मों, संस्कृतियों और परंपराओं का मिश्रण है। ऐसे में, जब भी कोई व्यक्ति अपने धर्म को बदलने का निर्णय लेता है, तो यह केवल व्यक्तिगत स्तर पर नहीं, बल्कि सामाजिक स्तर पर भी गहरा प्रभाव डालता है।

भले ही संविधान ने धर्म की स्वतंत्रता का अधिकार सुनिश्चित किया हो, लेकिन व्यावहारिक रूप से, परिवार और समाज के दबाव कई बार इस अधिकार को सीमित कर सकते हैं। ऐसे में, यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि अदालत इस मामले में क्या निर्णय देती है और इसके बाद समाज में क्या प्रतिक्रिया होती है।

धर्म परिवर्तन के मामलों में अक्सर यह देखा गया है कि परिवार के सदस्य, विशेषकर माता-पिता, इस निर्णय को स्वीकार नहीं कर पाते हैं। ऐसे मामलों में, परिवारों के बीच मतभेद और संघर्ष उत्पन्न हो सकते हैं, जो कभी-कभी हिंसा का रूप भी ले लेते हैं। इसलिए, जब भी कोई व्यक्ति अपने धर्म को बदलने का निर्णय लेता है, तो उसे न केवल अपने अधिकारों का ध्यान रखना चाहिए, बल्कि अपने परिवार के सदस्यों के भावनात्मक पहलुओं को भी समझने की आवश्यकता होती है।

इस मामले में, यदि अदालत ने यह निर्णय दिया कि दोनों महिलाएं स्वतंत्र रूप से अपने धर्म और विवाह का चयन कर सकती हैं, तो यह न केवल उनके लिए, बल्कि अन्य लोगों के लिए भी एक महत्वपूर्ण मिसाल स्थापित करेगा। इससे यह संदेश जाएगा कि व्यक्तिगत स्वतंत्रता और अधिकारों का सम्मान किया जाना चाहिए, चाहे वह किसी भी धर्म या संस्कृति से संबंधित हो।

इस प्रकार, यह मामला न केवल कानूनी दृष्टिकोण से महत्वपूर्ण है, बल्कि यह सामाजिक और सांस्कृतिक संदर्भ में भी एक महत्वपूर्ण चर्चा को जन्म देगा। भारत में धर्म परिवर्तन के मुद्दे पर चल रही बहस को और भी गहरा करने के लिए यह एक महत्वपूर्ण अवसर प्रदान करता है।

Get More Updates

To learn more about the latest developments in Crime & Law, stay updated with our exclusive reports and analyses on AiLensNews.

Related News