विधायक जयराम महतो का थानेदार से गाली-गलौज का ऑडियो वायरल; FIR दर्ज

ALN NEWS DESK
एएलएन न्यूज डेस्क
अपडेटेड : Aug 25, 2026, 11:37 AM IST
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डुमरी विधायक जयराम महतो का बरवाअड्डा थाना प्रभारी से कथित गाली-गलौज का ऑडियो वायरल हुआ है, जिसके बाद थाना प्रभारी ने उनके खिलाफ FIR दर्ज कराई है।

हाल ही में, झारखंड के डुमरी विधायक जयराम महतो का एक ऑडियो क्लिप सोशल मीडिया पर वायरल हुआ है, जिसमें वह बरवाअड्डा थाना प्रभारी रवि कुमार के साथ कथित रूप से गाली-गलौज करते हुए सुनाई दे रहे हैं। यह ऑडियो कथित तौर पर एक व्हाट्सएप कॉल की रिकॉर्डिंग है, जिसे किसी अन्य मोबाइल फोन से रिकॉर्ड किया गया है। हालांकि, इस ऑडियो की वास्तविकता की पुष्टि किसी भी समाचार स्रोत द्वारा नहीं की गई है।

इस मामले के बाद, थाना प्रभारी रवि कुमार ने बरवाअड्डा थाने में विधायक जयराम महतो के खिलाफ एक प्राथमिकी (FIR) दर्ज कराई है। यह ध्यान देने योग्य है कि विधायक के खिलाफ पहले से ही एक मामला दर्ज है, जिसमें 50 अज्ञात लोगों को आरोपी बनाया गया है। नई FIR में विधायक को भी शामिल किया गया है।

धनबाद पुलिस में सख्त नाराजगी

इस घटना से धनबाद पुलिस में सख्त नाराजगी का माहौल है। धनबाद पुलिस एसोसिएशन ने थाना प्रभारी रवि कुमार के समर्थन में आवाज उठाई है। एसोसिएशन ने स्पष्ट किया है कि जब तक इस मामले में उचित कार्रवाई नहीं होती, तब तक धनबाद में पुलिस कार्य नहीं करेगी। एसोसिएशन का कहना है कि जनप्रतिनिधियों को सुरक्षा के लिए उनकी आवश्यकता होती है, लेकिन जब वे गलत कामों के लिए पुलिस का समर्थन नहीं करते, तो उन्हें गालियों का सामना करना पड़ता है। यह स्थिति पुलिस और राजनीतिक प्रतिनिधियों के बीच बढ़ते तनाव को दर्शाती है।

समर्थक की गिरफ्तारी को लेकर फोन करने का आरोप

थाना प्रभारी रवि कुमार ने अपनी शिकायत में बताया है कि 22 अगस्त की रात लगभग 8:09 बजे, जब वह थाने में अपने कर्तव्यों का पालन कर रहे थे, तभी विधायक जयराम महतो का एक व्हाट्सएप कॉल आया। इस कॉल के दौरान, विधायक ने अपने एक समर्थक की गिरफ्तारी को लेकर नाराजगी व्यक्त की और थाना प्रभारी को गाली देने लगे। आरोप है कि विधायक ने वर्दी उतरवाने और सरकार बदलने के बाद देख लेने की धमकी भी दी। यह स्थिति दर्शाती है कि इस मामले में राजनीतिक दबाव और पुलिस की स्वतंत्रता के बीच संघर्ष हो रहा है।

विधायक समेत 10 नामजद, 50 अज्ञात पर केस

रवि कुमार द्वारा दर्ज की गई FIR में विधायक जयराम महतो के अलावा अन्य 10 व्यक्तियों को भी नामजद किया गया है। इनमें सुशील मंडल, दिलीप चौधरी, राजकुमार मंडल, जीतेंद्र हजारी, अजय दास, गोलक कुमार महतो, रंजीत कुमार साव, राजेश महतो, महेंद्र साव और त्रिपुरी पांडेय शामिल हैं। इसके साथ ही, 50 अज्ञात लोगों को भी आरोपी बनाया गया है। यह मामला पुलिस के लिए एक चुनौती बन गया है, क्योंकि इसे राजनीतिक और सामाजिक दोनों ही दृष्टिकोण से संवेदनशील माना जा रहा है।

फर्जी प्रमाण पत्र से शुरू हुआ विवाद

इस विवाद की जड़ बड़ापिछरी पंचायत की मुखिया यशोदा देवी के फर्जी प्रमाण पत्र तैयार करने के आरोप में जेएलकेएम नेता गणेश दास की गिरफ्तारी से शुरू हुई। इस गिरफ्तारी के बाद, बरवाअड्डा थाने में पुलिस और विधायक के समर्थकों के बीच विवाद और झड़प की स्थिति उत्पन्न हुई। इस घटना ने स्थानीय राजनीति में एक नई हलचल पैदा कर दी है।

घटना के बाद, विधायक जयराम महतो और मुखिया के पक्ष से अलग-अलग शिकायतें दर्ज की गईं। मुखिया के बेटे प्रदीप कुमार रजक की शिकायत पर भी प्राथमिकी दर्ज की गई है, जो इस पूरे मामले को और जटिल बनाती है।

विधायक पर मारपीट और जातिसूचक टिप्पणी का आरोप

प्रदीप कुमार रजक ने आरोप लगाया है कि 21 अगस्त की रात वह अपने पिता से मिलने बरवाअड्डा थाना पहुंचे थे, जहां विधायक जयराम महतो ने उनके साथ जातिसूचक शब्दों का उपयोग किया और कथित तौर पर उनका गला दबाने का प्रयास किया। प्रदीप ने विधायक के समर्थकों पर भी मारपीट करने का आरोप लगाया है। यह घटना न केवल व्यक्तिगत संघर्ष को दर्शाती है, बल्कि यह जाति आधारित भेदभाव और सामाजिक असमानता के मुद्दों को भी उजागर करती है।

जयराम महतो ने आरोपों को बताया साजिश

विधायक जयराम महतो ने अपने ऊपर लगाए गए सभी आरोपों को साजिश करार दिया है। उनका कहना है कि वह जेएलकेएम नेता गणेश दास के साथ पुलिस की कथित बर्बरता की जानकारी लेने थाने पहुंचे थे। विधायक ने दावा किया कि थाने में उन्हें घेरकर जान से मारने का प्रयास किया गया। उन्होंने पूरे मामले की निष्पक्ष और उच्चस्तरीय जांच की मांग की है। विधायक का कहना है कि थाने में लगे सीसीटीवी कैमरों और मौके पर मौजूद पत्रकारों के वीडियो फुटेज से वास्तविक स्थिति स्पष्ट हो सकती है।

विधायक ने भी दर्ज कराया मामला

जयराम महतो ने भी बरवाअड्डा थाने में आवेदन देकर कई लोगों पर हमला, मारपीट और लूटपाट का आरोप लगाया है। उनके अनुसार, थाने में मौजूद प्रदीप रजक, तारकेश्वर रजक, दिनेश रजक समेत अन्य लोगों ने उनके साथ मारपीट की और गला दबाने का प्रयास किया। विधायक ने अपने समर्थक सुशील मंडल के साथ मारपीट और सोने की चेन और नकदी छीनने का भी आरोप लगाया है।

इस मामले के बाद दोनों पक्षों की शिकायतों को ध्यान में रखते हुए, अब मामला पुलिस जांच के दायरे में है। यह स्थिति न केवल स्थानीय राजनीति में बल्कि समाज में भी गहरी छाप छोड़ सकती है। पुलिस की कार्रवाई और राजनीतिक नेताओं के बीच बढ़ते तनाव से यह स्पष्ट होता है कि कैसे राजनीतिक दबाव और कानून व्यवस्था के बीच संतुलन बनाए रखना चुनौतीपूर्ण हो सकता है।

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