सोनम वांगचुक ने 20 जुलाई के लिए की सरकार से अपील

ALN NEWS DESK
एएलएन न्यूज डेस्क
अपडेटेड : Jul 16, 2026, 07:43 AM IST
6 min read
  • linkedin
  • twitter
  • facebook
  • instagram
  • whatsapp

सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक ने अनशन के 19वें दिन 20 जुलाई को संसद मार्च में शामिल होने की अपील की है।

सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक 28 जून से दिल्ली के जंतर-मंतर पर अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल (अनशन) पर बैठे हैं।

आज उनके अनशन का 19वां दिन है। इस बीच बुधवार देर रात को उन्होंने एक संदेश जारी किया है।

सोनम वांगचुक ने कहा है कि अब अनशन को खत्म करने पर सरकार में जवाबदेही तय नहीं होगी। उन्होंने कहा कि उनकी हालत ऐसी भी नहीं है कि दो-चार दिन में उनकी मौत हो जाए।

वांगचुक ने सोशल मीडिया पर एक वीडियो संदेश में कहा, "आप लोगों के हज़ारों संदेश आए कि मैं अनशन तोड़ दूं। बड़े-बुज़ुर्ग और कई नेताओं ने मुझसे अनशन समाप्त करने के लिए कहा। कुछ ने तो अदालत से अपील की है कि सरकार मुझे ज़बरदस्ती खाना खिलाए।"

उन्होंने कहा, "दो बातें हैं, पहला तो अगर मैं खा भी लूं, तो उससे क्या बदलेगा और क्या संदेश जाएगा। सरकार को तो यही संदेश जाएगा कि जवाबदेही की ज़रूरत नहीं है, वो बैठ जाते हैं, वो चले जाते हैं।"

"दूसरी बात, मेरी हालत कुछ ऐसी भी नहीं है कि मैं दो चार दिन में मर जाऊं। बहुत सारे मेडिकल टेस्ट होते रहे हैं, 18 दिन के अनशन के हिसाब से रिज़ल्ट्स काफ़ी नॉर्मल हैं।"

सोनम वांगचुक ने कहा, "मैं अभी कई दिन चल सकता हूं। कमज़ोरी है, मेरे मसल्स ख़त्म हो रहे हैं, मगर मेरा दिल अभी भी ठीक चल रहा है। इसलिए सिर्फ अनशन तोड़ने को कहने के बजाय मैं आप लोगों से विनती करूंगा कि आप भी एक छोटा कदम उठाएं, 20 जुलाई को इतनी बड़ी संख्या में आएं कि एक संदेश सरकार को जाए।"

उन्होंने जनता से अपील करते हुए कहा, "20 जुलाई को बहुत से सांसदों के साथ आप सब आइए। हज़ारों की संख्या में हम सब मिलकर इस मुद्दे को संसद के हवाले करेंगे, तो मुझे भी भरोसा होगा कि अब ये सही हाथों में गया है।"

गौरतलब है कि 20 जुलाई को कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) ने संसद के मॉनसून सत्र के पहले दिन 'चलो संसद' अभियान के तहत संसद भवन तक शांतिपूर्ण मार्च निकालने का आह्वान किया है।

यह पार्टी केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफ़े की मांग को लेकर और परीक्षाओं में हुई गड़बड़ियों के विरोध में जंतर-मंतर पर प्रदर्शन कर रही है।

सोनम वांगचुक, जो कि एक प्रमुख सामाजिक कार्यकर्ता और शिक्षाविद् हैं, ने अपने अनशन के दौरान शिक्षा प्रणाली में सुधार की मांग की है। उनका कहना है कि आज की शिक्षा प्रणाली छात्रों की वास्तविक जरूरतों को पूरा नहीं कर रही है। वे इस बात पर जोर देते हैं कि शिक्षा का उद्देश्य केवल परीक्षा पास करना नहीं, बल्कि छात्रों को जीवन में सफल बनाने के लिए आवश्यक कौशल और ज्ञान प्रदान करना होना चाहिए।

वांगचुक का यह अनशन न केवल व्यक्तिगत स्वास्थ्य के लिए बल्कि एक व्यापक सामाजिक मुद्दे के रूप में भी महत्वपूर्ण है। भारत में शिक्षा प्रणाली में सुधार की आवश्यकता लंबे समय से महसूस की जा रही है। कई विशेषज्ञ और शिक्षाविद् इस बात की ओर इशारा करते हैं कि वर्तमान शिक्षा प्रणाली छात्रों को रटने और परीक्षा पास करने पर केंद्रित है, जबकि उन्हें व्यावहारिक ज्ञान और कौशल की आवश्यकता है।

वांगचुक के अनशन के दौरान, कई छात्रों और युवा कार्यकर्ताओं ने उनके समर्थन में आवाज उठाई है। यह आंदोलन न केवल शिक्षा के मुद्दों पर ध्यान केंद्रित कर रहा है, बल्कि यह भी दर्शाता है कि युवा पीढ़ी अब अपने अधिकारों और जरूरतों के लिए खड़ी हो रही है।

इस अनशन का एक महत्वपूर्ण पहलू यह है कि यह सरकार को जवाबदेही के लिए मजबूर करने का प्रयास है। वांगचुक का कहना है कि अगर सरकार इस मुद्दे पर ध्यान नहीं देती है, तो यह दर्शाता है कि वे अपनी जिम्मेदारियों से भाग रही हैं। वे चाहते हैं कि सरकार शिक्षा के क्षेत्र में सुधार लाए और छात्रों की आवाज को सुने।

20 जुलाई को होने वाले मार्च में शामिल होने के लिए वांगचुक ने लोगों से अपील की है, ताकि एकजुटता का प्रदर्शन किया जा सके। उनका मानना है कि अगर बड़ी संख्या में लोग संसद के बाहर एकत्र होते हैं, तो सरकार को इस मुद्दे पर गंभीरता से विचार करना पड़ेगा। यह एक सामूहिक प्रयास होगा, जिसमें सभी वर्गों के लोग शामिल हो सकते हैं, जो शिक्षा के मुद्दों को लेकर चिंतित हैं।

इस प्रकार, वांगचुक का अनशन और 20 जुलाई का मार्च न केवल शिक्षा प्रणाली में सुधार की मांग कर रहा है, बल्कि यह एक सामाजिक आंदोलन का हिस्सा भी बनता जा रहा है। यह दर्शाता है कि लोग अब अपने अधिकारों के लिए खड़े हो रहे हैं और बदलाव की मांग कर रहे हैं।

इस आंदोलन के पीछे एक गहरा संदेश है कि शिक्षा केवल एक प्रणाली नहीं है, बल्कि यह समाज के विकास का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है। अगर शिक्षा प्रणाली मजबूत और प्रभावी नहीं होगी, तो यह न केवल छात्रों के भविष्य को प्रभावित करेगा, बल्कि पूरे देश के विकास को भी बाधित करेगा।

वांगचुक का यह अनशन और मार्च, समाज के सभी वर्गों के लिए एक महत्वपूर्ण संदेश है कि हमें अपनी आवाज उठानी चाहिए और अपने अधिकारों के लिए लड़ना चाहिए। यह समय है कि हम सभी मिलकर एक बेहतर शिक्षा प्रणाली की दिशा में कदम बढ़ाएं और अपने भविष्य को सुरक्षित करें।

शिक्षा का यह मुद्दा केवल छात्रों तक सीमित नहीं है, बल्कि यह पूरे समाज के लिए महत्वपूर्ण है। शिक्षा के माध्यम से ही हम अपने भविष्य का निर्माण करते हैं। एक सशक्त शिक्षा प्रणाली न केवल छात्रों को सशक्त बनाती है, बल्कि यह समाज में समग्र विकास को भी सुनिश्चित करती है।

सोनम वांगचुक का अनशन इस बात का प्रतीक है कि जब लोग एकजुट होते हैं, तो वे अपने अधिकारों के लिए लड़ सकते हैं। यह आंदोलन एक नई सोच और दृष्टिकोण को जन्म दे रहा है, जिसमें शिक्षा को एक ऐसा उपकरण माना जा रहा है, जो समाज के हर वर्ग के लिए समान अवसर प्रदान करता है।

इसलिए, वांगचुक का यह प्रयास न केवल एक व्यक्तिगत संघर्ष है, बल्कि यह सभी लोगों के लिए एक प्रेरणा है कि वे अपने अधिकारों के लिए खड़े हों और समाज में सकारात्मक बदलाव लाने के लिए प्रयासरत रहें। हम सभी को यह समझना होगा कि शिक्षा का उद्देश्य केवल ज्ञान प्रदान करना नहीं है, बल्कि यह हमें एक बेहतर इंसान बनाना भी है।

वांगचुक का अनशन और 20 जुलाई का मार्च, शिक्षा के क्षेत्र में सुधार की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम हो सकता है। यह समय है कि हम सभी मिलकर इस दिशा में काम करें और एक ऐसा समाज बनाएं, जहाँ शिक्षा सभी के लिए सुलभ और प्रभावी हो।

अंत में, यह आंदोलन केवल शिक्षा के मुद्दों तक सीमित नहीं है, बल्कि यह सामाजिक न्याय और समानता की ओर भी एक कदम है। शिक्षा के माध्यम से हम न केवल व्यक्तिगत विकास कर सकते हैं, बल्कि समाज में सकारात्मक बदलाव भी ला सकते हैं। इसलिए हमें इस आंदोलन का समर्थन करना चाहिए और एकजुट होकर एक बेहतर भविष्य की दिशा में कदम बढ़ाना चाहिए।

Get More Updates

To learn more about the latest developments in Politics, stay updated with our exclusive reports and analyses on AiLensNews.

Related News