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जयपुर के नीरजा मोदी स्कूल में छात्रा की मौत पर उठे सवाल

ALN NEWS DESK
एएलएन न्यूज डेस्क
अपडेटेड : Jul 15, 2026, 09:16 PM IST
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जयपुर के नीरजा मोदी स्कूल में नौ साल की अमायरा मीणा की मौत के बाद परिजनों के सवालों का सिलसिला जारी है। आठ महीने बाद भी मामले में विवाद कायम है।

राजस्थान की राजधानी जयपुर के नामी गिरामी स्कूलों में से एक नीरजा मोदी स्कूल में नौ साल की अमायरा मीणा की मौत को आठ महीने से अधिक का समय बीत चुका है. लेकिन, यह मामला अब भी शांत नहीं हुआ है. परिजन पुलिस जांच पर सवाल खड़े कर रहे हैं.

पुलिस के अदालत में चार्जशीट दाख़िल किए जाने और परिवार की ओर से घटना से पहले क्लास का एक सीसीटीवी फुटेज सार्वजनिक करने के बाद इस मामले को लेकर विवाद फिर तेज़ हो गया है.

मामले की जांच अधिकारी एडिशनल एसपी जिज्ञासा पूनिया ने कहा है कि स्कूल के चेयरमैन, प्रिंसिपल समेत चार लोगों को अभियुक्त बनाया गया है.

पुलिस के मुताबिक़ सबूतों के आधार पर जांच पूरी कर चार्जशीट पेश कर दी है.

वहीं अमायरा के माता-पिता का आरोप है कि जांच अधूरी है और कई अहम तथ्यों की अनदेखी कर दबाव में जांच को प्रभावित किया जा रहा है.

वे अपनी इकलौती बेटी की मौत के लिए स्कूल प्रशासन को ज़िम्मेदार मानते हैं.

दूसरी तरफ़ राज्य के शिक्षा मंत्री मदन दिलावर ने कहा है, "हमने स्कूल को दोषी मानते हुए कार्रवाई के आदेश दिए थे, लेकिन स्कूल कोर्ट से स्टे ले आया है. अब मामला कोर्ट में है."

(आत्महत्या एक गंभीर मनोवैज्ञानिक और सामाजिक समस्या है. अगर आप भी तनाव से गुज़र रहे हैं तो भारत सरकार की 'जीवन आस्था' हेल्पलाइन 18002333330 से मदद ले सकते हैं. आपको अपने दोस्तों और रिश्तेदारों से भी बात करनी चाहिए.)

क्या हुआ था?

नीरजा मोदी स्कूल, जयपुर के मानसरोवर इलाके में है. एक नवंबर 2025 को इस स्कूल में पढ़ने वाली चौथी क्लास की स्टूडेंट अमायरा स्कूल परिसर में आत्महत्या कर ली थी.

घायल स्टूडेंट को क़रीब छह सौ मीटर दूरी पर एक निजी अस्पताल ले जाया गया. वहां डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया.

अमायरा के पिता विजय मीणा का आरोप है, "स्कूल प्रशासन ने क़रीब एक घंटे बाद घटना की सूचना दी." उन्होंने घटना से जुड़े सारे सबूत भी मिटाने के आरोप स्कूल प्रशासन पर लगाए हैं.

मृतक अमायरा के पिता विजय मीणा का आरोप है कि, "जब हम अस्पताल पहुंचे तो वहां से सभी शिक्षक भाग गए." उनका कहना है, "घटना के बाद स्कूल पहुंची पुलिस और शिक्षा विभाग की टीमों तक को कई घंटों तक स्कूल प्रशासन ने अंदर प्रवेश नहीं दिया था."

इस मामले की जांच को प्रभावित करने और सबूत मिटाने के गंभीर आरोप स्कूल पर हैं.

मानसरोवर पुलिस थाने में एफआईआर दर्ज होने के बाद पुलिस ने जांच शुरू करते हुए स्कूल के सीसीटीवी फुटेज, शिक्षकों, कर्मचारियों और अमायरा के क्लास स्टूडेंट्स के बयान भी लिए. एफएसएल ने भी मौक़े से सबूत जुटाए थे.

परिजनों ने न्याय की मांग करते हुए कई बार धरना प्रदर्शन भी किया है. बीती दस जुलाई को परिजनों ने फिर एक बार प्रेस वार्ता कर एक सीसीटीवी फुटेज जारी कर अमायरा की मौत पर सवाल उठाए हैं.

नए सीसीटीवी फुटेज के बाद उठे सवाल

अमायरा के पिता विजय मीणा ने कहा, "उनकी बेटी लंबे समय से स्कूल में बुलिंग का सामना कर रही थी. क्लास के स्टूडेंट्स अमायरा को अपमानजनक बातें कहते थे." विजय का दावा है कि अमायरा ने इसकी शिकायत कई बार अपनी क्लास टीचर पुनीता शर्मा से की, लेकिन कोई सुनवाई नहीं हुई.

अमायरा की माता शिवानी का आरोप है कि, "बच्ची को करीब एक घंटे तक क्लास में परेशान किया गया." मृतक स्टूडेंट अमायरा की क्लास टीचर पुनीता शर्मा पर लगे आरोप पर जब उनका पक्ष लेने के लिए बीबीसी ने फोन से संपर्क किया, तो उन्होंने इस मामले में कुछ भी कहने से इनकार कर दिया है.

अमायरा के माता-पिता ने घटना से पहले क्लास का एक वीडियो फुटेज जारी करते हुए कई गंभीर सवाल उठाए हैं. बीबीसी ने इस फुटेज को स्वतंत्र रूप से वेरिफाई नहीं किया है.

उन्होंने क्लास सीसीटीवी फुटेज के आधार पर क्लास टीचर पुनीता शर्मा पर आरोप लगाते हुए कहा है कि, "लगातार बुलिंग झेलने के बाद वह पांच बार अपनी क्लास टीचर के पास गई और हाथ जोड़ कर अपनी बात समझाने का प्रयास किया, लेकिन उसकी बात नहीं सुनी गई."

अमायरा के माता-पिता ने कहा है, "बेटी संकेत दे रही थी जिससे साफ़ नज़र आ रहा था कि वह तनाव में है. अमायरा बार-बार अपना हाथ माथे पर रख रही थी."

पिता विजय का कहना है कि, "घटना वाले दिन अमायरा बिल्कुल सामान्य और खुश थी, लेकिन सीसीटीवी फुटेज में नजर आ रहा है कि बुलिंग की शिकायत करने पर टीचर बच्ची को ही धमका रही थीं."

वो दावा करते हैं, "कई बार क्लास में भी अमायरा से उसका पूरा नाम पूछ कर भी शर्मिंदा करने के प्रयास किए गए थे. अमायरा को उस दिन बेहद परेशान किया गया, जिसके बाद उसने वो कदम उठाया था."

उनका कहना है, "यह फुटेज पुलिस की चार्जशीट में पेश किए गए घटनाक्रम से अलग तस्वीर पेश करती है. जांच एजेंसी ने वीडियो के कई महत्वपूर्ण पहलुओं पर पर्याप्त ध्यान नहीं दिया."

परिजनों के आरोप पर स्कूल प्रशासन से उनका पक्ष जानने के लिए बीबीसी ने प्रिंसिपल इंदू दुबे से कई बार संपर्क करने की कोशिश की, लेकिन उन्होंने फोन और मैसेज का जवाब नहीं दिया.

पुलिस ने क्या कार्रवाई की?

जयपुर के मानसरोवर पुलिस थाने में इस मामले की दर्ज एफआईआर में पुलिस ने कई महीनों तक जांच करने के बाद बीते दिनों कोर्ट में चार्जशीट दाखिल की है.

पुलिस का दावा है कि उन्होंने इस दौरान स्कूल प्रबंधन और शिक्षकों से पूछताछ की और उपलब्ध इलेक्ट्रॉनिक और दस्तावेज़ी सबूतों की जांच की है.

जांच अधिकारी एडिशनल एसपी जिज्ञासा पूनिया ने कहा है, "स्कूल मैनेजमेंट के चेयरमैन सौरभ मोदी, स्कूल प्रिंसिपल इंदू दुबे, क्लास टीचर पुनीता शर्मा और एक चपरासी पर अलग-अलग बीएनएस की धाराएं लगाई हैं."

वो बताती हैं, "चेयरमैन सौरभ मोदी और प्रिंसिपल इंदू दुबे पर तथ्यों से छेड़छाड़ और लापरवाही में बीएनएस की धारा 238 (सी), 106 (1), क्लास टीचर पुनीता शर्मा पर 238 (सी), 106 (1), सेक्शन 75 जेजे एक्ट लगाया है."

अमायरा के पिता ने क्लास टीचर पर सीसीटीवी फुटेज के आधार पर कई गंभीर आरोप लगाए हैं. पूछताछ में क्लास टीचर ने क्या बताया है? बीबीसी के इस सवाल पर जांच अधिकारी जिज्ञासा पूनिया बताती हैं, "हमने पुलिस के सभी तरीक़ों से पूछताछ की है, लेकिन वह कोई भी संतुष्टि पूर्ण जवाब नहीं दे सकीं."

जांच पर परिवार के सवाल

अमायरा के माता-पिता का कहना है, "जांच के दौरान इन आठ महीनों में तीन जांच अधिकारी बदले गए हैं. इससे जांच प्रभावित हुई और कई महत्वपूर्ण पहलुओं की जांच नहीं की जा सकी."

परिजनों के आरोपों को ख़ारिज करते हुए जांच अधिकारी जिज्ञासा पूनिया कहती हैं, "हमने पूरी निष्पक्ष और गंभीर रूप से जांच की है."

वह कहती हैं कि इस मामले में डीजीपी लेवल पर जांच हुई है.

परिवार का आरोप है कि "चार्जशीट में बुलिंग से जुड़े कई फैक्ट को पर्याप्त महत्व नहीं दिया गया है. स्कूल में बच्ची की शिकायतों का रिकॉर्ड, शिक्षकों की भूमिका और स्कूल प्रशासन की जवाबदेही की पूरी तरह जांच नहीं की गई."

परिवार का कहना है, "नए सीसीटीवी फुटेज से कई ऐसे सवाल उठते हैं जिनका जवाब चार्जशीट में नहीं मिलता."

जबकि, जांच अधिकारी कहती हैं, "हमने क्लास टीचर पर 75 सेक्शन जेजे एक्ट लगाया है."

अमायरा केस में परिजनों के एडवोकेट अमित सिंह बीबीसी से कहते हैं, "पुलिस की चार्जशीट में सिर्फ क्लास टीचर पर 75 सेक्शन जेजे एक्ट लगाया है. जबकि यह सभी के ऊपर लगाया जाना चाहिए."

किशोर न्याय (जुवेनाइल जस्टिस) अधिनियम, 2015 की धारा 75 बच्चों के ख़िलाफ़ होने वाले अपराध (क्रूरता और दुर्व्यवहार) से जुड़ी हुई है. यह क़ानून उन लोगों को दंडित करता है जो बच्चों की देखभाल या नियंत्रण में होते हुए उनके साथ दुर्व्यवहार करते हैं या जानबूझकर उनकी उपेक्षा करते हैं.

वो कहते हैं, "इसके साथ ही आत्महत्या के लिए उकसाने की धारा 108 बीएनएस भी सभी पर लगानी चाहिए. हम इसके लिए कोर्ट गए हैं जिसकी सुनवाई पंद्रह जुलाई को होनी है."

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