मुंबई में नीट विरोध के बाद पुलिस ने सैकड़ों प्रदर्शनकारियों को व्हाट्सएप पर भेजे नोटिस

ALN NEWS DESK
एएलएन न्यूज डेस्क
अपडेटेड : Jul 22, 2026, 07:35 AM IST
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नीट प्रोटेस्टरों को भेजे गए मुंबई पुलिस के नोटिस में उन्हें जांच अधिकारियों के सामने पेश होने का निर्देश दिया गया है। छात्र संगठनों ने दावा किया कि शहर भर में सैकड़ों प्रदर्शनकारियों को नोटिस जारी किए गए हैं और इसे युवाओं को डराने-धमकाने की कोशिश बताया।

मुंबई में हाल ही में हुए नीट परीक्षा लीक और शिक्षा व्यवस्था में जवाबदेही की मांग को लेकर हुए विरोध प्रदर्शनों के बाद, मुंबई पुलिस ने सैकड़ों प्रदर्शनकारियों को व्हाट्सएप के माध्यम से नोटिस भेजे हैं। यह नोटिस उन छात्रों को भेजे गए हैं जो प्रदर्शन में शामिल थे और उन्हें जाँच अधिकारी के सामने पेश होने के लिए कहा गया है। छात्र संगठनों ने इसे छात्रों की आवाज़ को दबाने और डर का माहौल बनाने की कोशिश बताया है। प्रदर्शन के दौरान, पुलिस ने सैकड़ों लोगों को हिरासत में लिया था लेकिन बाद में उन्हें छोड़ दिया गया था। इसके बाद कई प्रदर्शनकारियों को पुलिस के नोटिस प्राप्त हुए।

रिपोर्टों के अनुसार, मुंबई पुलिस ने बताया कि ये नोटिस भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता की धारा 35(3) के तहत जारी किए गए हैं। इस प्रावधान के अनुसार, यदि किसी मामले में अपराध की अधिकतम सजा सात वर्ष से कम है, तो आरोपी को सीधे गिरफ्तार करने के बजाय पहले जांच अधिकारी के सामने पेश होने का नोटिस दिया जा सकता है। पुलिस ने इसे कानूनी प्रक्रिया का हिस्सा बताया है और कहा है कि यह कदम उचित है।

करीब 900 लोगों के नाम FIR में

सोमवार को मुंबई पुलिस ने दिल्ली में कॉकरोच जनता पार्टी और पर्यावरण कार्यकर्ता सोनम वांगचुक के समर्थन में हुए प्रदर्शनों के संबंध में कम से कम सात एफआईआर दर्ज कीं। इन मामलों में 300 से अधिक लोगों के खिलाफ केस दर्ज किया गया। इसके अलावा, शिवाजी पार्क में हुए प्रदर्शन में शामिल लगभग 600 लोगों के नाम भी एफआईआर में जोड़े गए हैं। इस प्रकार, कुल मिलाकर लगभग 900 प्रदर्शनकारियों का नाम पुलिस रिकॉर्ड में शामिल किया गया है। द इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के अनुसार, पुलिस अधिकारियों ने पुष्टि की है कि इनमें से कई लोगों को नोटिस भेजे जा चुके हैं और उन्हें पूछताछ के लिए बुलाया गया है।

कानून की छात्रा को रात ढाई बजे मिला नोटिस

मुंबई की कानून की छात्रा श्रेय्या सुब्रमण्यम भी उन लोगों में शामिल हैं जिन्हें मंगलवार सुबह करीब 2:45 बजे व्हाट्सएप पर नोटिस मिला। श्रेय्या ने बताया कि वह सोमवार को प्रदर्शन के दौरान हिरासत में ली गई थीं, जब उन्होंने देखा कि पुलिस प्रदर्शनकारियों को गाड़ियों में ले जा रही थी और उन्होंने हस्तक्षेप किया।


श्रेय्या ने कहा, 'हमें लगा था कि हिरासत के बाद मामला वहीं खत्म हो जाएगा, लेकिन अगले दिन व्हाट्सएप पर नोटिस आ गया।' उन्होंने यह भी कहा कि वह केवल उन छात्रों के समर्थन में प्रदर्शन में शामिल हुई थीं, जो प्रतियोगी परीक्षाओं में कथित गड़बड़ियों से प्रभावित हुए हैं। श्रेय्या ने कहा, 'डॉक्टर बनने जैसे पेशे में योग्यता से कोई समझौता नहीं होना चाहिए। अगर आज सवाल नहीं उठाए गए तो कल दूसरी प्रतियोगी परीक्षाओं में भी यही दोहराया जाएगा।'

छात्र संगठनों ने जताई आपत्ति

छात्र संगठनों का कहना है कि इतनी बड़ी संख्या में प्रदर्शनकारियों को व्यक्तिगत रूप से नोटिस भेजना असामान्य है। रिपोर्ट के अनुसार, ऑल इंडिया स्टूडेंट्स फेडरेशन (एआईएसएफ़) के नेता आमिर काज़ी ने दावा किया कि केवल माहिम पुलिस स्टेशन से ही 100 से अधिक नोटिस जारी किए गए हैं।

उन्होंने कहा, 'आमतौर पर कार्रवाई आयोजकों या प्रमुख कार्यकर्ताओं पर होती है, लेकिन इस बार आम छात्रों को निशाना बनाया जा रहा है। इससे साफ़ है कि युवाओं में डर पैदा करने की कोशिश की जा रही है।' श्रेय्या ने द इंडियन एक्सप्रेस से कहा कि वह कानून की छात्रा हैं, इसलिए उन्हें प्रक्रिया की जानकारी है, लेकिन इसके बावजूद पुलिस का नोटिस मिलना डराने वाला अनुभव है। उन्होंने कहा, 'जो छात्र सिर्फ लोकतांत्रिक तरीके से अपनी बात रखने गए थे, उनके लिए पुलिस का नोटिस मानसिक दबाव पैदा करता है।'

यूथ संगठनों ने की पुलिस कार्रवाई की आलोचना

युवा संगठनों के समूह मुंबई एगेंस्ट सप्रेशन ऑफ़ स्टूडेंट्स (MASS) ने भी पुलिस की कार्रवाई की आलोचना की है। संगठन ने बयान जारी कर कहा कि छात्रों के विरोध को दबाने के लिए कानून का दुरुपयोग किया जा रहा है और यह लोकतांत्रिक अधिकारों पर हमला है। इस प्रकार की कार्रवाई से यह संदेश जाता है कि सरकार और पुलिस उन छात्रों को नियंत्रित करने की कोशिश कर रही है जो अपनी आवाज उठाने की कोशिश कर रहे हैं।

दिल्ली के जंतर मंतर प्रोटेस्ट का समर्थन

देशभर में नीट पेपर लीक और परीक्षा प्रणाली में गड़बड़ियों को लेकर छात्र लगातार प्रदर्शन कर रहे हैं। हाल के दिनों में दिल्ली के जंतर-मंतर पर भी बड़े पैमाने पर आंदोलन हुआ, जिसके समर्थन में मुंबई समेत कई शहरों में प्रदर्शन आयोजित किए गए। इस आंदोलन में छात्रों ने नीट परीक्षा प्रणाली में सुधार की मांग की और इसे पारदर्शी बनाने की आवश्यकता पर जोर दिया।

मुंबई में हुए इन्हीं प्रदर्शनों के बाद पुलिस ने कई एफआईआर दर्ज कीं और अब बड़ी संख्या में प्रदर्शनकारियों को व्हाट्सएप के जरिए नोटिस भेजकर जांच में शामिल होने के लिए कहा है। यह कदम पुलिस द्वारा उठाए गए कानूनी उपायों का हिस्सा है, लेकिन इसके पीछे की मंशा पर सवाल उठाए जा रहे हैं। छात्र संगठनों और विपक्षी दलों ने सरकार और पुलिस की भूमिका पर सवाल उठाए हैं, जबकि पुलिस का कहना है कि सभी कदम कानून के अनुसार उठाए जा रहे हैं।

इस घटनाक्रम ने छात्रों के बीच एक नई बहस को जन्म दिया है। कई छात्र इस बात पर विचार कर रहे हैं कि क्या उन्हें अपने अधिकारों के लिए आवाज उठाने के लिए डरना चाहिए या फिर उन्हें अपने विचारों को व्यक्त करने का हक है। शिक्षा प्रणाली में सुधार की मांग करने वाले छात्रों ने यह स्पष्ट किया है कि वे अपने हक के लिए लड़ते रहेंगे, भले ही इसके लिए उन्हें कानूनी नोटिस का सामना करना पड़े।

इस पूरे मामले में, यह स्पष्ट है कि छात्र आंदोलन केवल एक तात्कालिक घटना नहीं है, बल्कि यह एक बड़े सामाजिक और राजनीतिक संदर्भ में हो रहा है। छात्रों द्वारा उठाए गए मुद्दे केवल नीट परीक्षा तक सीमित नहीं हैं, बल्कि यह शिक्षा प्रणाली की व्यापक संरचना और उसके भीतर की गड़बड़ियों को भी उजागर करते हैं। इस प्रकार के विरोध प्रदर्शनों के परिणामस्वरूप, यह संभव है कि सरकार को शिक्षा प्रणाली में सुधार की दिशा में कदम उठाने के लिए मजबूर होना पड़े।

इस तरह के घटनाक्रम यह भी दर्शाते हैं कि कैसे युवा पीढ़ी अपनी आवाज़ उठाने के लिए तैयार है और वे अपने अधिकारों के लिए लड़ने में संकोच नहीं कर रहे हैं। पुलिस और सरकार की प्रतिक्रिया इस बात को भी दर्शाती है कि सत्ता में बैठे लोग इस आवाज़ को दबाने के लिए किस हद तक जा सकते हैं। यह स्थिति न केवल छात्रों के लिए, बल्कि समाज के लिए भी एक महत्वपूर्ण मोड़ साबित हो सकती है।

शिक्षा प्रणाली में सुधार की आवश्यकता पर ध्यान केंद्रित करने वाले ये आंदोलन केवल छात्रों के अधिकारों की रक्षा करने का प्रयास नहीं कर रहे हैं, बल्कि वे एक व्यापक सामाजिक बदलाव की दिशा में भी एक कदम हैं। जब युवा पीढ़ी अपने अधिकारों के प्रति जागरूक होती है और उन्हें अपने विचार व्यक्त करने का अवसर मिलता है, तो यह न केवल उनके लिए, बल्कि समग्र समाज के लिए भी फायदेमंद होता है। ऐसे आंदोलनों से न केवल शिक्षा प्रणाली में सुधार की संभावना बढ़ती है, बल्कि यह भी सुनिश्चित होता है कि आने वाली पीढ़ियों के लिए एक बेहतर और अधिक न्यायपूर्ण प्रणाली स्थापित की जा सके।

इस प्रकार, यह घटना एक महत्वपूर्ण संकेत है कि छात्रों की आवाज़ को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। यदि सरकार और संबंधित प्राधिकरण इस आवाज़ को दबाने का प्रयास करते हैं, तो यह केवल असंतोष को बढ़ाएगा और छात्रों के बीच एकजुटता को मजबूत करेगा। अंततः, यह घटनाक्रम एक ऐसी दिशा में बढ़ सकता है जहां छात्रों की आवाज़ को सुनने की आवश्यकता और उनकी मांगों को मान्यता देने की आवश्यकता को समझा जाएगा।

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