बिजली विभाग की लापरवाही के कारण करंट हादसों में तीन किसानों की मौत और दो के हाथ कटने के विरोध में किसानों ने भोपाल में विद्युत मंडल का घेराव किया।
भोपाल, भारत 17 जुल॰ 2026 ALN: नईदुनिया प्रतिनिधि, सीहोर। मध्य प्रदेश के सीहोर जिले में हाल ही में करंट लगने से तीन किसानों की मौत हो गई, जबकि दो अन्य गंभीर रूप से घायल हो गए हैं। यह घटना जिले के बड़वेली, चंदेरी, बिलकिसगंज, ढाबला, मंगरखेड़ा, खालसा खुर्द, रामाखेड़ी, अमरूद, पचामा, जामुनिया, पाली, कमलिया, अवंतीपुरा, महोदिया, बलकृष्ण, पिपलिया मीरा, रातीखेड़ा जैसे दर्जनों गांवों में हुई। इस घटना के बाद, सैकड़ों किसानों और समाजसेवी एमएस मेवाड़ा के नेतृत्व में एकत्र हुए लोगों ने भोपाल स्थित मध्य प्रदेश विद्युत मंडल के गोविंदपुरा मुख्यालय का घेराव किया।
किसानों ने विद्युत वितरण कंपनी की लापरवाही का आरोप लगाते हुए एमडी कार्यालय का घेराव कर करीब तीन घंटे तक धरना-प्रदर्शन किया। इस दौरान उन्होंने अधिकारियों के खिलाफ जमकर नारेबाजी की। किसानों का कहना है कि विद्युत वितरण कंपनी की लापरवाही के कारण यह हादसा हुआ है और उन्होंने मांग की है कि इस मामले की जांच की जाए, दोषियों के खिलाफ कार्रवाई की जाए और पीड़ितों के परिवारों को राहत राशि दी जाए।
किसानों ने प्रबंध निदेशक ऋषि गर्ग को ज्ञापन सौंपते हुए आरोप लगाया कि ग्राम बड़वेली निवासी किसान सतीश मेवाड़ा खेत पर कृषि कार्य के दौरान झूल रही 11 केवी विद्युत लाइन की चपेट में आ गए। इस हादसे में सतीश का एक हाथ काटना पड़ा। किसानों का कहना है कि बड़वेली में जर्जर 11 केवी एवं एलटी लाइनों के कारण अब तक पांच किसान करंट की चपेट में आ चुके हैं, जिनमें तीन किसानों की मौत हो चुकी है, जबकि दो गंभीर रूप से घायल पीड़ितों के हाथ कट चुके हैं।
प्रदर्शनकारियों ने यह भी आरोप लगाया कि गांवों और खेतों में झूल रहे बिजली के तारों और खंभों की शिकायतें बार-बार करने के बावजूद विद्युत मंडल के अधिकारी कार्रवाई नहीं कर रहे हैं। ग्राम बड़वेली के किसान प्रेम सिंह मेवाड़ा ने बताया कि वे पहले भी मुख्यमंत्री निवास, ऊर्जा मंत्री, कलेक्टर कार्यालय और संबंधित अधिकारियों को कई बार ज्ञापन दे चुके हैं, लेकिन अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई।
इस घटना ने किसानों के बीच बिजली की सुरक्षा और वितरण प्रणाली की गुणवत्ता को लेकर गहरी चिंता पैदा कर दी है। किसानों ने बताया कि वे कई बार विद्युत विभाग को अवगत करा चुके हैं कि जर्जर बिजली लाइनों के कारण हादसे हो सकते हैं, लेकिन कोई सुनवाई नहीं हुई।
ऊर्जा मंत्री प्रद्युमन सिंह तोमर ने किसानों के समक्ष दूरभाष पर व लिखित रूप से एमडी ऋषि गर्ग विद्युत महाप्रबंधक को दोषी अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई और पीड़ित किसानों को आर्थिक सहायता के लिए निर्देशित किया है। सीहोर जिले की प्रभारी मंत्री कृषणा गौर द्वारा भी लिखित निर्देश विद्युत मंडल को दिए जा चुके हैं, लेकिन अभी तक मुख्यमंत्री, ऊर्जा मंत्री और प्रभारी मंत्री के आदेशों का कोई पालन नहीं किया गया है।
किसानों के धरने के बाद, अंततः एमडी ऋषि गर्ग ने किसानों से ज्ञापन लेकर दोषी अधिकारियों के खिलाफ जांच एवं कार्रवाई तथा पीड़ित किसान को नियमानुसार राहत दिलाने का आश्वासन दिया। यह आश्वासन किसानों के लिए थोड़ी राहत का कारण बना, लेकिन उनका गुस्सा और चिंता अभी भी बनी हुई है।
इसके पश्चात, किसान और समाजसेवी एमएस मेवाड़ा के नेतृत्व में प्रतिनिधिमंडल ने मानव अधिकार आयोग के अध्यक्ष एपी सिंह और महिला आयोग में भी ज्ञापन सौंपा। महिला आयोग के सचिव ने किसानों की समस्याओं को गंभीरता से सुनते हुए प्रतिनिधिमंडल को बैठक कक्ष में बुलाकर चर्चा की और मामले की उच्च स्तरीय जांच कराने का भरोसा दिया। इस प्रकार की उच्च स्तरीय जांच की मांग ने किसानों की चिंताओं को और अधिक महत्व दिया है।
किसानों ने चेतावनी दी है कि यदि पीड़ित किसान को न्याय नहीं मिला, परिवार के एक सदस्य को सरकारी नौकरी नहीं दी गई, और 25 लाख रुपये का मुआवजा नहीं मिला, और विद्युत मंडल सीहोर के दोषी अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई नहीं हुई, तो वे समस्त सीहोर जिला, भोपाल, शाजापुर एवं उज्जैन जिले के किसानों को एकत्रित कर गांव-गांव चौपाल करेंगे और सभी किसान राजधानी में डेरा डालेंगे। यह चेतावनी दर्शाती है कि किसानों के बीच अब गुस्सा और असंतोष बढ़ता जा रहा है, और यदि उनकी मांगों को नजरअंदाज किया गया, तो यह आंदोलन और भी व्यापक रूप ले सकता है।
इस घटना ने न केवल सीहोर जिले के किसानों की सुरक्षा को लेकर सवाल उठाए हैं, बल्कि यह भी दर्शाता है कि किस प्रकार से विद्युत वितरण प्रणाली की अव्यवस्था और लापरवाही किसानों के जीवन को खतरे में डाल सकती है। किसानों की मांगों का उचित समाधान न होने पर यह समस्या और बढ़ सकती है, और इससे न केवल स्थानीय स्तर पर, बल्कि राज्य स्तर पर भी राजनीतिक और सामाजिक तनाव उत्पन्न हो सकता है।
किसानों की यह स्थिति इस बात का संकेत है कि उन्हें अपनी आवाज उठाने के लिए मजबूर होना पड़ रहा है, और यदि उनकी समस्याओं का समाधान नहीं किया गया, तो वे और भी अधिक संगठित होकर अपने अधिकारों के लिए संघर्ष करेंगे। यह घटना स्थानीय प्रशासन और विद्युत विभाग के लिए एक गंभीर चेतावनी है कि उन्हें किसानों की सुरक्षा और उनकी समस्याओं को गंभीरता से लेना चाहिए।
किसानों की सुरक्षा को लेकर यह घटना एक व्यापक मुद्दा है, जो केवल सीहोर जिले तक ही सीमित नहीं है, बल्कि पूरे मध्य प्रदेश में विद्युत वितरण प्रणाली की गुणवत्ता और सुरक्षा मानकों की समीक्षा की आवश्यकता को उजागर करती है। ग्रामीण क्षेत्रों में, जहां किसान अपनी आजीविका के लिए कृषि पर निर्भर हैं, बिजली की असुरक्षा उनके जीवन को गंभीर रूप से प्रभावित कर सकती है।
किसानों की स्थिति को देखते हुए, यह स्पष्ट है कि उन्हें न केवल आर्थिक सहायता की आवश्यकता है, बल्कि उन्हें यह भी सुनिश्चित करने की आवश्यकता है कि भविष्य में ऐसी घटनाएँ न हों। इसके लिए, विद्युत वितरण कंपनी को अपनी प्रणाली में सुधार करने की आवश्यकता है, जिसमें जर्जर बिजली लाइनों की मरम्मत, सुरक्षित तारों की स्थापना, और नियमित निरीक्षण शामिल हैं।
किसानों की यह समस्या केवल एक स्थानीय मुद्दा नहीं है, बल्कि यह एक सामाजिक समस्या भी है, जो किसानों के अधिकारों, उनकी सुरक्षा और उनके जीवन स्तर को प्रभावित करती है। किसानों के आंदोलन और उनकी मांगों को नजरअंदाज करने से न केवल उनकी स्थिति में सुधार नहीं होगा, बल्कि इससे सामाजिक असंतोष और राजनीतिक अस्थिरता भी बढ़ सकती है।
इस संदर्भ में, सरकार और संबंधित अधिकारियों को यह सुनिश्चित करना चाहिए कि किसानों की समस्याओं का समाधान किया जाए, ताकि वे अपनी आजीविका को सुरक्षित रख सकें और भविष्य में ऐसी घटनाओं से बचा जा सके। इसके लिए, एक समग्र दृष्टिकोण की आवश्यकता है, जिसमें न केवल बिजली वितरण प्रणाली की गुणवत्ता को सुधारना, बल्कि किसानों के लिए सुरक्षित और स्थायी कृषि प्रथाओं को बढ़ावा देना भी शामिल है।
किसान समुदाय की आवाज को सुनना और उनकी समस्याओं का समाधान करना न केवल उनकी भलाई के लिए आवश्यक है, बल्कि यह सामाजिक न्याय और समानता की दिशा में भी एक महत्वपूर्ण कदम है। यदि प्रशासन और विद्युत विभाग इस दिशा में ठोस कदम उठाते हैं, तो इससे न केवल किसानों का विश्वास बढ़ेगा, बल्कि इससे समाज में एक सकारात्मक बदलाव भी आएगा।
इस घटना ने यह भी स्पष्ट किया है कि किसानों को अपनी आवाज उठाने का अधिकार है, और यदि उनकी समस्याओं का समाधान नहीं किया जाता है, तो वे अपने अधिकारों के लिए लड़ने के लिए तैयार हैं। यह स्थिति न केवल सीहोर जिले के किसानों के लिए, बल्कि पूरे मध्य प्रदेश के लिए एक चेतावनी है कि उन्हें अपनी समस्याओं को गंभीरता से लेना चाहिए और किसानों की सुरक्षा को प्राथमिकता देनी चाहिए।
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