अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट ने राष्ट्रपति ट्रंप के डाक मतपत्रों पर प्रतिबंध लगाने संबंधी कार्यकारी आदेश के कुछ हिस्सों को आगे बढ़ाने की अनुमति दी है।
भोपाल, भारत 25 अग॰ 2026 ALN: न्यूयॉर्क, 25 अगस्त अमेरिका के सुप्रीम कोर्ट ने राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के डाक से मतदान पर प्रतिबंध लगाने संबंधी कार्यकारी आदेश के कुछ हिस्सों को आगे बढ़ाने की अनुमति दे दी है। अदालत ने आदेश की वैधता पर कोई अंतिम फैसला नहीं दिया है और आगे की कानूनी चुनौती के कारण नवंबर में होने वाले मध्यावधि चुनाव से पहले इसके लागू होने पर अनिश्चितता बनी हुई है।
इस निर्णय ने अमेरिका के चुनावी प्रक्रिया में एक महत्वपूर्ण मोड़ को दर्शाया है, जहां डाक मतदान के मुद्दे पर राजनीतिक विभाजन और कानूनी विवाद बढ़ते जा रहे हैं। सुप्रीम कोर्ट के 10 पृष्ठ के बिना हस्ताक्षर वाले आदेश में ट्रंप प्रशासन को उस प्रस्ताव पर आगे बढ़ने की अनुमति दी गयी है, जिसके तहत होमलैंड सिक्योरिटी विभाग (डीएचएस) उन डेमोक्रेट-शासित राज्यों में मतदाताओं की राज्यवार सूची तैयार कर सकेगा, जिन्होंने इस योजना को अदालत में चुनौती दी है। आदेश पर अदालत के तीन उदारवादी न्यायाधीशों ने असहमति जतायी।
श्री ट्रंप के मार्च में जारी कार्यकारी आदेश में अमेरिकी डाक सेवा और डीएचएस को चुनाव प्रक्रिया में पहले से कहीं अधिक भूमिका देने का प्रस्ताव रखा गया था। इस आदेश के तहत, डाक सेवा से जुड़ी एक अन्य व्यवस्था के तहत डाक मतपत्र भेजने वाले राज्यों को पात्र मतदाताओं की सूची उपलब्ध कराने और मतपत्र के लिफाफों पर ऐसी जानकारी दर्ज करने की आवश्यकता हो सकती है, जिससे उनकी निगरानी की जा सके। यह कदम ट्रंप प्रशासन के चुनावी सुरक्षा के दृष्टिकोण का हिस्सा है, जिसमें उन्हें व्यापक चुनावी धोखाधड़ी के खिलाफ ठोस कदम उठाने की आवश्यकता महसूस होती है।
सुप्रीम कोर्ट ने डाक सेवा को इस प्रावधान पर आगे बढ़ने की अनुमति दी है, लेकिन निचली अदालत ने देशभर में इसके क्रियान्वयन पर अलग से रोक लगा रखी है। ऐसे में डाक सेवा के कदम को लागू करने से पहले आगे कानूनी कार्यवाही की संभावना है और मामला दोबारा सुप्रीम कोर्ट तक भी पहुंच सकता है। यह स्थिति चुनावी प्रक्रिया में अस्थिरता को बढ़ा सकती है, खासकर उन राज्यों में जहां डाक मतपत्रों का उपयोग व्यापक रूप से किया जाता है।
अदालत ने स्पष्ट किया कि उसका फैसला ट्रंप के कार्यकारी आदेश की वैधता पर नहीं है, बल्कि राज्यों की कानूनी चुनौती के समय से संबंधित है। अदालत ने कहा कि सरकार की ओर से आदेश को लागू करने के लिए उठाया गया कोई भी कदम जरूरी नहीं कि कानूनी हो। इस मामले में एक महत्वपूर्ण पहलू यह है कि सुप्रीम कोर्ट का यह निर्णय उन चिंताओं को भी उजागर करता है जो चुनावी प्रक्रिया की पारदर्शिता और सुरक्षा को लेकर उठाई जा रही हैं।
श्री ट्रंप लंबे समय से व्यापक चुनावी धोखाधड़ी के निराधार दावे करते रहे हैं और डाक मतदान को लेकर संदेह पैदा करते रहे हैं। उनके समर्थक इस विचार को बढ़ावा देते हैं कि डाक मतदान से चुनावी धोखाधड़ी का जोखिम बढ़ जाता है, जबकि आलोचक इसे लोकतंत्र के लिए खतरा मानते हैं। डेमोक्रेटिक नेतृत्व वाले राज्यों ने सुप्रीम कोर्ट में दलील दी थी कि नई व्यवस्था से उन्हें चुनाव की तैयारियों के बीच अतिरिक्त समय और संसाधन खर्च करने पड़ेंगे, जो कि एक बड़ी चुनौती हो सकती है।
व्हाइट हाउस ने फैसले का स्वागत करते हुए इसे अमेरिकी चुनावों की सुरक्षा के लिए "बड़ी जीत" बताया। व्हाइट हाउस की प्रवक्ता लॉरेन बिस ने कहा कि ये उपाय डाक मतपत्रों की सुरक्षा सुनिश्चित करने और केवल अमेरिकी नागरिकों के जरिए अमेरिकी नेताओं के चुनाव को सुनिश्चित करने के लिए हैं। यह बयान इस बात को दर्शाता है कि ट्रंप प्रशासन चुनावी प्रक्रिया को सुरक्षित और पारदर्शी बनाने के प्रति गंभीर है, हालांकि इसके साथ ही यह भी स्पष्ट है कि यह निर्णय राजनीतिक रूप से संवेदनशील है।
सुप्रीम कोर्ट के तीन उदारवादी न्यायाधीशों ने फैसले का विरोध किया। न्यायमूर्ति सोनिया सोतोमयोर ने न्यायमूर्ति एलेना कागन के साथ असहमति जताते हुए कहा कि निचली अदालतों के पास डेमोक्रेटिक नेतृत्व वाले राज्यों के पक्ष में फैसला देने का अधिकार था। उन्होंने यह भी रेखांकित किया कि सुप्रीम कोर्ट के बहुमत ने ट्रंप के निर्देशों की वैधता पर फैसला नहीं दिया है। यह असहमति इस बात को दर्शाती है कि अमेरिका की न्यायिक प्रणाली में चुनावी मुद्दों पर विचार करते समय विभिन्न दृष्टिकोणों के बीच कितना बड़ा अंतर है।
इस निर्णय का व्यापक प्रभाव हो सकता है, विशेष रूप से उन राज्यों में जहां डाक मतपत्रों का उपयोग अधिक होता है। यदि ट्रंप प्रशासन इस कार्यकारी आदेश के माध्यम से अपनी योजनाओं को लागू करने में सफल होता है, तो यह चुनावी प्रक्रिया में महत्वपूर्ण बदलाव ला सकता है। इसके अलावा, यह चुनावी धोखाधड़ी के आरोपों को और भी बढ़ा सकता है, जिससे मतदाता विश्वास में कमी आ सकती है।
अंततः, यह मामला अमेरिका के चुनावी प्रणाली की स्थिरता और उसकी लोकतांत्रिक प्रक्रियाओं पर एक महत्वपूर्ण प्रश्न खड़ा करता है। इस फैसले के संभावित परिणामों को देखते हुए, यह स्पष्ट है कि आगामी मध्यावधि चुनावों में डाक मतदान और चुनावी सुरक्षा के मुद्दे पर चर्चा जारी रहेगी।
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