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यमन में सऊदी हमले के खिलाफ प्रदर्शन, सना हवाई अड्डे पर हमले की ईरान ने की निंदा

ALN NEWS DESK
एएलएन न्यूज डेस्क
अपडेटेड : Jul 14, 2026, 06:02 PM IST
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यमन के सना अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे पर सऊदी हमले के विरोध में देशभर में प्रदर्शन हुए हैं। ईरान ने इस हमले की कड़ी निंदा की है।

सना/तेहरान, 14 जुलाई - यमन के सना अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे पर हुए सऊदी हमले के खिलाफ देशभर में व्यापक विरोध प्रदर्शन हो रहे हैं। इन प्रदर्शनों में सशस्त्र जनजातीय सभाएं और रैलियां शामिल हैं, जो यमन की सशस्त्र सेनाओं के प्रति समर्थन व्यक्त कर रही हैं और हमले का जवाब देने की मांग कर रही हैं। यमनी मीडिया के अनुसार, अल-मसीरा नेटवर्क ने इस बात की जानकारी दी है कि हज्जाह, रायमा, अल-महवित और इब्ब प्रांतों में सऊदी हवाई हमले के खिलाफ रैलियां और मार्च आयोजित किए गए हैं।

यमन के सामाजिक और राजनीतिक संदर्भ में यह विरोध प्रदर्शन महत्वपूर्ण हैं। यमन में पिछले कई वर्षों से चल रहे गृह युद्ध ने देश को गंभीर मानवीय संकट में डाल दिया है। सऊदी अरब और उसके सहयोगियों ने 2015 में यमन में हस्तक्षेप किया था, जिसका उद्देश्य यमन की सरकार को पुनर्स्थापित करना था, जो हूती विद्रोहियों द्वारा अपदस्थ कर दी गई थी। इस संघर्ष ने लाखों लोगों को प्रभावित किया है, जिनमें से कई को खाद्य सुरक्षा की गंभीर समस्या का सामना करना पड़ रहा है।

रिपोर्ट के अनुसार, हज्जाह प्रांत के अल-महाबशाह जिले की जनजातियों ने सशस्त्र सभा आयोजित कर सना हवाई अड्डे पर हुए हमले की निंदा की और यमनी सशस्त्र बलों की कार्रवाई का समर्थन किया। सभा में शामिल लोगों ने यमन की नाकेबंदी समाप्त करने के मुद्दे पर ईरान के रुख का समर्थन किया और सैन्य प्रशिक्षण और लामबंदी में शामिल होने की तत्परता व्यक्त की। उन्होंने अंसारुल्लाह आंदोलन के नेता को हमले के जवाब और नाकेबंदी हटाने के संबंध में निर्णय लेने के लिए पूर्ण अधिकार देने की भी घोषणा की।

यहां यह उल्लेखनीय है कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मान्यता प्राप्त यमन सरकार ने सोमवार को सना अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे पर हमला कर वहां एक ईरानी विमान के उतरने को रोक दिया था। यह घटना यमन की राजनीतिक स्थिति में एक नया मोड़ है, खासकर तब जब यमनी संघर्ष में ईरान की भूमिका को लेकर अंतरराष्ट्रीय समुदाय में चिंताएं बढ़ रही हैं।

यमन के रक्षा मंत्रालय के अनुसार, ईरान में दिवंगत नेता अली खामेनेई के अंतिम संस्कार में शामिल होने गए हूसी प्रतिनिधिमंडल ने यमनिया एयरलाइंस की उड़ान से लौटने से इनकार कर दिया था और ईरानी विमान से लौटने पर अड़ा हुआ था, जिसके बाद यह कार्रवाई की गई। इस स्थिति ने यमन के अंदरूनी राजनीतिक तनाव को और बढ़ा दिया है, जिससे यह स्पष्ट होता है कि हूती विद्रोहियों और सऊदी नेतृत्व वाले गठबंधन के बीच संबंध कितने तनावपूर्ण हैं।

इस बीच, ईरान ने सना हवाई अड्डे पर सऊदी समर्थित सरकार के हमले की कड़ी निंदा करते हुए इसे अंतरराष्ट्रीय कानून तथा यमन की संप्रभुता का उल्लंघन बताया है। ईरान के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता इस्माईल बघाई ने सोमवार को कहा कि यह हमला संयुक्त राष्ट्र चार्टर, अंतरराष्ट्रीय कानून और यमन की राष्ट्रीय संप्रभुता एवं क्षेत्रीय अखंडता का खुला उल्लंघन है।

ईरान का यह बयान यमन में चल रहे संघर्ष में उसके समर्थन की पुष्टि करता है, जो कि क्षेत्रीय राजनीति में ईरान और सऊदी अरब के बीच बढ़ते तनाव का एक हिस्सा है। ईरान का समर्थन हूती विद्रोहियों को सैन्य और राजनीतिक रूप से मजबूत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है, जिससे सऊदी अरब की चिंताएं और बढ़ गई हैं।

इससे पहले, हूती आंदोलन ने सऊदी अरब पर सना हवाई अड्डे पर बमबारी का आरोप लगाते हुए जवाबी कार्रवाई में मिसाइलें दागीं। सऊदी नेतृत्व वाले सैन्य गठबंधन ने दावा किया कि दक्षिणी क्षेत्र की ओर दागी गई हूसी मिसाइलों को हवा में ही मार गिराया गया। हूती सैन्य प्रवक्ता याह्या सरी ने कहा कि उनकी सेना ने यमन सीमा से लगे सऊदी अरब के अबहा अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे को निशाना बनाया। मार्च 2022 में अनौपचारिक युद्धविराम लागू होने के बाद सऊदी अरब के खिलाफ हूसियों द्वारा किए गए ये पहले हमले बताये जा रहे हैं।

यह घटनाक्रम न केवल यमन के भीतर बल्कि पूरे मध्य पूर्व में सुरक्षा और स्थिरता पर गंभीर प्रभाव डाल सकता है। यमन में संघर्ष के बढ़ने से न केवल मानवीय संकट और गहरा हो सकता है, बल्कि यह क्षेत्र में अन्य देशों के लिए भी एक खतरा बन सकता है। सऊदी अरब और ईरान के बीच तनावपूर्ण संबंधों को देखते हुए, यह संभावना है कि यह संघर्ष क्षेत्रीय स्तर पर और अधिक जटिल हो सकता है।

अंतरराष्ट्रीय समुदाय की प्रतिक्रिया इस पर निर्भर करेगी कि यमन में स्थिति कैसे विकसित होती है। यदि संघर्ष बढ़ता है, तो यह संभव है कि विभिन्न देशों को हस्तक्षेप करने के लिए मजबूर होना पड़े। इसके अलावा, यह भी महत्वपूर्ण है कि यमन में मानवीय सहायता को बढ़ावा देने के लिए अंतरराष्ट्रीय प्रयासों को तेज किया जाए, ताकि वहां के नागरिकों को आवश्यक सहायता मिल सके।

इस प्रकार, यमन में सऊदी हमले के खिलाफ चल रहे प्रदर्शन और ईरान की निंदा, दोनों ही इस बात का संकेत हैं कि यमन का संकट न केवल एक देश का मामला है, बल्कि यह क्षेत्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी महत्वपूर्ण है। यमन के लोग, जो वर्षों से संघर्ष और संकट का सामना कर रहे हैं, उनकी आवाजें अब और भी अधिक महत्वपूर्ण हो गई हैं।

यमन का संघर्ष, जो कि 2014 में शुरू हुआ, एक जटिल स्थिति को दर्शाता है जिसमें कई पक्ष शामिल हैं। हूती विद्रोही, जो कि ज़ैदी शिया मुसलमानों के एक समूह द्वारा संचालित हैं, ने यमन की राजधानी सना पर नियंत्रण कर लिया था। इसके बाद, सऊदी अरब ने एक गठबंधन बनाकर 2015 में यमन में हस्तक्षेप किया, जिसका उद्देश्य हूती विद्रोहियों को हटाना और यमनी सरकार को पुनर्स्थापित करना था। यह संघर्ष न केवल यमन के भीतर बल्कि पूरे मध्य पूर्व में एक शक्ति संतुलन को प्रभावित कर रहा है।

यमन में स्थिति को और जटिल बनाने वाले कई कारक हैं। क्षेत्र में ईरान का बढ़ता प्रभाव, जो हूती विद्रोहियों को समर्थन प्रदान करता है, सऊदी अरब के लिए चिंता का विषय है। सऊदी अरब और ईरान के बीच की प्रतिद्वंद्विता ने यमन के संघर्ष को एक क्षेत्रीय युद्ध में बदल दिया है, जिसमें अन्य देशों का भी हस्तक्षेप हो रहा है।

यमन में मानवीय संकट की स्थिति भी गंभीर है। संयुक्त राष्ट्र के अनुसार, यमन दुनिया के सबसे बड़े मानवीय संकटों में से एक का सामना कर रहा है, जहां लाखों लोग बुनियादी आवश्यकताओं से वंचित हैं। खाद्य सुरक्षा, स्वास्थ्य सेवाएं, और स्वच्छ पानी की कमी के कारण देश की आबादी बहुत ही कठिन परिस्थितियों का सामना कर रही है।

इस संघर्ष के परिणामस्वरूप, यमन में एक नई पीढ़ी का निर्माण हो रहा है जो युद्ध और संकट के बीच पली-बढ़ी है। यह युवा पीढ़ी न केवल अपने भविष्य के प्रति चिंतित है, बल्कि वे अपने अधिकारों और स्वतंत्रता के लिए भी आवाज उठा रहे हैं। प्रदर्शनों में शामिल लोग इस बात का प्रतीक हैं कि यमन का समाज अब और अधिक जागरूक और सक्रिय हो रहा है।

यमन के नागरिकों की आवाज़ें, जो वर्षों से संघर्ष का सामना कर रहे हैं, अब और भी अधिक महत्वपूर्ण हो गई हैं। यह समय है कि अंतरराष्ट्रीय समुदाय यमन की स्थिति को गंभीरता से ले और वहां मानवीय सहायता को बढ़ावा देने के लिए ठोस कदम उठाए। यमन का संकट केवल एक क्षेत्रीय मुद्दा नहीं है, बल्कि यह वैश्विक स्तर पर भी स्थिरता और सुरक्षा को प्रभावित कर सकता है।

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