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पद्मश्री कैलाशचंद्र पंत का निधन, महू में जन्मे साहित्यकार और संपादक ने 90 वर्ष की उम्र में भोपाल में ली अंतिम सांस

ALN NEWS DESK
एएलएन न्यूज डेस्क
अपडेटेड : Aug 1, 2026, 06:23 AM IST
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कैलाशचंद्र पंत का निधन 90 वर्ष की आयु में हुआ। उन्होंने हिंदी साहित्य और पत्रकारिता में महत्वपूर्ण योगदान दिया।

नईदुनिया प्रतिनिधि, भोपाल। लेखक एवं समाजसेवी पद्मश्री कैलाशचंद्र पंत का निधन शुक्रवार को हो गया। उनके निधन पर साहित्य एवं कला जगत में शोक व्याप्त हो गया है। पद्मश्री व राष्ट्रीय शरद जोशी सम्मान से अलंकृत पंत ने अपने दीर्घ सार्वजनिक जीवन में निष्पक्ष पत्रकारिता, उत्कृष्ट लेखन व समाजसेवा के माध्यम से जो अमूल्य योगदान दिया, वह सदैव स्मरणीय रहेगा।

उनका जन्म 26 अप्रैल 1936 को महू (इंदौर) में हुआ था। इन्होंने एमए साहित्याचार्य एवं साहित्य रत्न की उपाधि प्राप्त की। उन्होंने अपना संपूर्ण जीवन लेखन, संपादन एवं सामाजिक कार्यों को समर्पित किया। पंत जी का साहित्यिक सफर न केवल उनकी लेखनी तक सीमित था, बल्कि उन्होंने अपने विचारों और कार्यों के माध्यम से समाज में सकारात्मक बदलाव लाने का प्रयास किया।

पत्रकारिता एवं साहित्य को समृद्ध करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई

कैलाशचंद्र पंत ने हिंदी पत्रकारिता एवं साहित्य को समृद्ध करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। उनकी कौन किसका आदमी, धुंध के आर-पार, शब्द का विचार पक्ष, संस्कार, संस्कृति और समाज, संकल्प की प्रतीक्षा में जैसी कृतियां विशेष रूप से चर्चित रही हैं। इन कृतियों ने न केवल साहित्यिक जगत में बल्कि समाज के विभिन्न वर्गों में भी गहरी छाप छोड़ी। पंत जी ने भारतीय ज्ञान परंपरा पर दो पुस्तकों का संपादन भी किया है, जिनमें भारतीय ज्ञान परंपरा : समय, समस्या और समाज (प्रथम खंड) व भारतीय ज्ञान परंपरा : अपनी अस्मिता तलाशने की आकांक्षा (द्वितीय खंड) शामिल हैं।

पत्रकारिता, साहित्य और संस्थागत योगदान

पत्रकारिता के क्षेत्र में भी इनका सफर एक व्याख्याता के रूप में प्रारंभ हुआ, जिसके बाद आपने विभिन्न प्रतिष्ठित समाचार-पत्रों और पत्रिकाओं में बतौर संपादक कार्य किया। वह साप्ताहिक जनधर्म (1977-1998) के संपादक रहे। इस पत्रिका ने न केवल राजनीतिक मुद्दों को उठाया, बल्कि समाज के विभिन्न पहलुओं पर भी गहन विचार किया। साथ ही वर्ष 2006 से 2021 तक मासिक पत्रिका अक्षरा का संपादन भी किया। अक्षरा ने साहित्यिक और सांस्कृतिक विमर्श को आगे बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।

यह हम सबका सौभाग्य था कि मध्य प्रदेश राष्ट्रभाषा प्रचार समिति और हिंदी भवन न्यास को अनेक वर्षों से पद्मश्री कैलाशचंद्र पंत का सानिध्य प्राप्त होता रहा। उनके द्वारा लिखे गए आलेखों के अनेक संग्रह पुस्तक आकार में प्रकाशित होकर हिंदी भवन न्यास की धरोहर बन चुके हैं। पंत जी का योगदान न केवल साहित्यिक था, बल्कि उन्होंने हिंदी भाषा को बढ़ावा देने के लिए भी कई महत्वपूर्ण कार्य किए।

पद्मश्री कैलाशचंद्र पंत के निधन पर भोपाल में शोक

अक्षरा के संपादक एवं मप्र राष्ट्रभाषा प्रचार समिति के मंत्री संचालक डॉ. विकास दवे कहते हैं कि दादा ने देश, समाज, भाषा और साहित्य को इतना कुछ दिया है कि उनके इस ऋण से हम सब कभी भी उऋण नहीं हो सकते। उनके विचार और कार्य सभी के लिए प्रेरणा स्रोत रहेंगे। वरिष्ठ साहित्यकार एवं महासचिव लघुकथा शोध केंद्र समिति भोपाल घनश्याम मैथिल अमृत ने कहा कि पद्मश्री कैलाशचंद्र पंत की उपस्थिति में सकारात्मकता थी, अपनेपन का अहसास था। उनके निधन से साहित्यिक जगत में एक अपूरणीय क्षति हुई है।

साहित्यिक योगदान और प्रभाव

कैलाशचंद्र पंत का साहित्यिक योगदान न केवल उनकी लिखी गई पुस्तकों और संपादित पत्रिकाओं तक सीमित है, बल्कि उनके विचारों ने भी कई पीढ़ियों को प्रभावित किया। उन्होंने हमेशा समाज में व्याप्त असमानताओं और अन्याय के खिलाफ आवाज उठाई। उनके लेखन में सामाजिक मुद्दों की गहरी समझ और संवेदनशीलता थी, जिसने पाठकों को सोचने पर मजबूर किया। पंत जी ने साहित्य को केवल मनोरंजन का माध्यम नहीं माना, बल्कि इसे समाज में बदलाव लाने का एक सशक्त उपकरण माना।

उनके लेखन में भारतीय संस्कृति और परंपरा की गहरी समझ थी। उन्होंने भारतीय ज्ञान परंपरा को एक नई दृष्टि से देखने का प्रयास किया और इसे आधुनिक संदर्भ में प्रस्तुत किया। पंत जी की दृष्टि थी कि साहित्य केवल एक कला नहीं है, बल्कि यह समाज का दर्पण है। उन्होंने अपनी रचनाओं के माध्यम से समाज में सकारात्मक बदलाव लाने का प्रयास किया।

शिक्षा और सामाजिक कार्य

कैलाशचंद्र पंत ने शिक्षा के क्षेत्र में भी महत्वपूर्ण योगदान दिया। उन्होंने कई शैक्षणिक संस्थानों में व्याख्याता के रूप में कार्य किया और छात्रों को साहित्य और पत्रकारिता के प्रति जागरूक किया। पंत जी का मानना था कि शिक्षा ही समाज में बदलाव लाने का सबसे प्रभावी साधन है। उन्होंने हमेशा छात्रों को प्रेरित किया कि वे अपने विचारों को व्यक्त करें और समाज में सक्रिय भूमिका निभाएं।

सामाजिक कार्यों में भी पंत जी का योगदान उल्लेखनीय रहा। उन्होंने कई सामाजिक संगठनों के साथ मिलकर विभिन्न सामाजिक मुद्दों पर काम किया। उनका ध्यान हमेशा समाज के कमजोर वर्गों की ओर रहा। उन्होंने समाज में व्याप्त भेदभाव और असमानता के खिलाफ आवाज उठाई और लोगों को जागरूक किया।

विरासत और यादें

पद्मश्री कैलाशचंद्र पंत का निधन केवल एक व्यक्ति की नहीं, बल्कि एक विचारधारा की समाप्ति है। उनकी विरासत उनके लेखन, उनके विचार और उनके कार्यों के माध्यम से जीवित रहेगी। पंत जी की रचनाएं आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणा का स्रोत बनेंगी। उनके द्वारा स्थापित विचार और सिद्धांत न केवल साहित्यिक जगत में, बल्कि समाज में भी महत्वपूर्ण रहेंगे।

कैलाशचंद्र पंत के योगदान को याद करते हुए, हम सभी को यह समझना होगा कि साहित्य और पत्रकारिता का असली उद्देश्य केवल सूचना देना नहीं, बल्कि समाज में बदलाव लाना है। पंत जी ने इस उद्देश्य को अपने जीवन में साकार किया और हमें सिखाया कि एक लेखक और पत्रकार के रूप में हमारी जिम्मेदारी केवल लिखने तक सीमित नहीं है, बल्कि हमें समाज के प्रति भी अपनी जिम्मेदारी समझनी होगी।

उनका जीवन और कार्य हमें यह प्रेरणा देते हैं कि हम भी अपने क्षेत्र में उत्कृष्टता की ओर अग्रसर हों और समाज के प्रति अपनी जिम्मेदारियों को निभाएं। उनके योगदान को कभी भुलाया नहीं जा सकेगा और वे सदैव हमारे दिलों में जीवित रहेंगे।

कैलाशचंद्र पंत का निधन साहित्यिक जगत के लिए एक गहरा आघात है। उनके विचार, उनके लेखन और उनके कार्यों का प्रभाव आने वाली पीढ़ियों पर बना रहेगा। उनकी रचनाओं में न केवल साहित्यिक मूल्य हैं, बल्कि वे समाज के प्रति एक गहरी संवेदनशीलता और सामाजिक न्याय की भावना को भी व्यक्त करती हैं।

पंत जी के निधन के बाद, यह आवश्यक है कि हम उनके विचारों और सिद्धांतों को आगे बढ़ाएं। समाज में सकारात्मक बदलाव लाने के लिए हमें उनके द्वारा स्थापित मार्ग का अनुसरण करना होगा। उनका जीवन हमें यह सिखाता है कि साहित्य और पत्रकारिता का उद्देश्य केवल सूचना देना नहीं है, बल्कि यह समाज में एक सशक्त आवाज बनना है।

कैलाशचंद्र पंत के योगदान को याद करते हुए, हमें यह भी समझना होगा कि एक लेखक और पत्रकार के रूप में हमारी जिम्मेदारी केवल लिखने तक सीमित नहीं है। हमें समाज में सक्रिय भूमिका निभानी होगी और समाज के प्रति अपनी जिम्मेदारियों को समझना होगा।

कैलाशचंद्र पंत का जीवन और कार्य हमें प्रेरित करता है कि हम अपने विचारों को व्यक्त करें और समाज में सकारात्मक बदलाव लाने का प्रयास करें। उनके योगदान को भुलाया नहीं जा सकेगा और वे सदैव हमारे दिलों में जीवित रहेंगे।

उनकी रचनाओं में जो गहराई और संवेदनशीलता है, वह हमें यह सिखाती है कि साहित्य का असली उद्देश्य क्या होना चाहिए। पंत जी ने हमें यह दिखाया कि साहित्य केवल मनोरंजन का माध्यम नहीं है, बल्कि यह समाज का दर्पण है और हमें इसे एक सशक्त उपकरण के रूप में उपयोग करना चाहिए।

कैलाशचंद्र पंत का जीवन और कार्य हमें यह प्रेरणा देते हैं कि हम भी अपने क्षेत्र में उत्कृष्टता की ओर अग्रसर हों और समाज के प्रति अपनी जिम्मेदारियों को निभाएं। उनके योगदान को कभी भुलाया नहीं जा सकेगा और वे सदैव हमारे दिलों में जीवित रहेंगे।

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