खंडवा में एक नर्स की हत्या के मामले में बच्ची के बयान ने जांच को नया मोड़ दिया। प्रेम, धोखा और पैसों के लालच ने एक नर्स को मौत के मुंह तक पहुंचा दिया।
भोपाल, भारत 14 जुल॰ 2026 ALN: मध्य प्रदेश क्राइम फाइल्स में आज कहानी खंडवा के उस सनसनीखेज हत्याकांड की, जिसने पूरे प्रदेश को झकझोर दिया था। एक नर्स की हत्या को सड़क हादसा साबित करने की साजिश रची गई।
शुरुआती जांच में पुलिस भी इसे एक्सीडेंट मान रही थी। लेकिन एक आठ साल की बच्ची ने वह सब देखा था, जिसे हत्यारे हमेशा के लिए दफन समझ बैठे थे। जांच आगे बढ़ी तो एक-एक कर नए किरदार सामने आते गए।
सवाल सिर्फ यह नहीं था कि हत्या किसने की, बल्कि यह भी था कि इसके पीछे असली मास्टरमाइंड कौन था?
आखिर क्या हुआ था उस नर्स के साथ आगे पढ़िए… 28 सितंबर 2013 को सुबह के 3:58 बजे थे। खंडवा में सबकुछ सामान्य था। तभी अभिनव के मोबाइल पर एक अनजान नंबर से कॉल आया। इतनी सुबह फोन बजना असामान्य था। जैसे ही उसने कॉल उठाई, दूसरी तरफ से एक बच्ची की डर से कांपती हुई आवाज सुनाई दी।
"अंकल... मुझे बचा लो। उन्होंने मेरी मां को मार दिया है... मुझे भी मार डालेंगे।" अभिनव समझ गया कि मामला गंभीर है। उसने पूछा, "कहां हो?"
जंगल की लोकेशन साफ नहीं थी
8 साल की बच्ची ने अपनी मां का नाम ट्रेजा पारे और पता अस्पताल परिसर बताया। अभिनव पड़ोसी था और उन्हें पहचानता था। उसने बच्ची को भरोसा दिलाया, तुरंत पुलिस कंट्रोल रूम को सूचना दी।
उसने दूसरे फोन से बच्ची से बात जारी रखकर उसकी लोकेशन पता करने की कोशिश की। बच्ची बार-बार एक ही नाम दोहरा रही थी-किशोर अंकल। वह कह रही थी कि उन्होंने उसकी मां को मार दिया और कार चढ़ा दी।
हालांकि वह यह नहीं बता पा रही थी कि वह किस जंगल में है। उधर, मोघट पुलिस ने बीएसएनएल कार्यालय खुलवाकर मोबाइल लोकेशन ट्रेस करना शुरू कर दिया।
सड़क किनारे मिला भयावह मंजर
करीब डेढ़ घंटे बाद, खंडवा से लगभग 35 किलोमीटर दूर जमानिया गांव में लखन और बलीराम खेत की ओर जा रहे थे। सुबह करीब साढ़े पांच बजे उन्हें किसी बच्ची के रोने की आवाज सुनाई दी।
पास पहुंचकर देखा तो सड़क किनारे खून से लथपथ एक बच्ची पड़ी थी। उससे कुछ दूरी पर एक महिला औंधे मुंह पड़ी थी। महिला की मौत हो चुकी थी। गांव के सरपंच हनीफ खान ने भी बच्ची से बात की। उसने वही कहानी दोहराई, जो उसने फोन पर अभिनव को बताई थी।
पहला सवाल... हादसा या हत्या?
पुलिस के सामने कई सवाल थे। महिला कौन थी? क्या यह सड़क दुर्घटना थी या सुनियोजित हत्या? बच्ची जिस किशोर का नाम ले रही थी, वह कौन था और उसका इस महिला से क्या संबंध था?
घायल बच्ची को अस्पताल ले जाया गया। इलाज के बाद उसने बताया ट्रेजा पारे उसकी मां थीं। ट्रेजा जिला अस्पताल में नर्स थीं। वो तलाकशुदा और नि:संतान नहीं थी। उन्होंने बचपन में अस्पताल में लावारिस मिली काजल को गोद लिया था।
बच्ची ने सुनाई पूरी वारदात
काजल ने पुलिस को बताया कि 27 सितंबर की रात किशोर उनके घर आया। उसने कहा कि किसी बाबा के पास चलना है। उसके साथ एक और व्यक्ति भी था, लेकिन अंधेरा होने और एक आंख से कम दिखाई देने के कारण वह उसे पहचान नहीं सकी।
तीनों कार में बैठकर शहर से बाहर जंगल की ओर गए। रास्ते में किशोर ने रस्सी से उसकी मां का गला दबा दिया। शोर मचाने पर उसका भी गला दबाया, फिर उसे कार से बाहर फेंककर उसके ऊपर कार चढ़ा दी। आरोपियों को लगा कि वह मर चुकी है।
पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट ने साफ कर दी तस्वीर
पहली नजर में ये सड़क हादसा लग रहा था। बच्ची के बयान के अलावा पुलिस के पास और कोई ठोस सबूत नहीं थे। अब पुलिस को पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट का इंतजार था। ट्रेजा का शव बुरी तरह कुचला हुआ था, लेकिन पोस्टमाॅर्टम रिपोर्ट ने पूरी कहानी बदल दी। रिपोर्ट में साफ हुआ कि मौत कार से कुचलने से नहीं, बल्कि गला दबाने से हुई।
पूछताछ में सामने आया नया नाम
काजल के बयान के आधार पर पुलिस ने जिला अस्पताल के सुरक्षा गार्ड किशोर को गिरफ्तार कर लिया। पहले किशोर अनजान बनने का नाटक करता रहा।
जब पुलिस ने सख्ती से पूछताछ की तो किशोर ने बताया किया कि उसने यह हत्या अकेले नहीं की। पैसों के बदले हत्या की साजिश हेमंत कुमार के कहने पर रची गई थी।
प्रेम संबंध ने बढ़ाया संदेह
जांच में सामने आया कि हेमंत कुमार और ट्रेजा पारे के बीच प्रेम संबंध थे। काजल ने बताया कि हेमंत कुमार का उसके घर आना-जाना था और कई बार रात भी वहीं रुकता था। जब वह अपनी मां से पूछती, तो ट्रेजा कहतीं, “जैसे मैं तुमसे प्यार करती हूं, वैसे ही अंकल से भी।”
ट्रेजा के भाई और पड़ोसीों ने भी पुलिस को दोनों के रिश्ते की जानकारी दी। पड़ोसी अनवर खान ने भी हेमंत पर हत्या में शामिल होने का संदेह जताया।
फिर कहानी ने लिया नया मोड़
पुलिस ने हेमंत को भी हिरासत में लेकर पूछताछ की, लेकिन उसने खुद को बेगुनाह बताया। उसका दावा था कि ट्रेजा के पड़ोसी अनवर खान और उसकी पत्नी ने ट्रेजा से दो लाख रुपए उधार लिए थे।
पैसे लौटाने के बजाय वे उसकी संपत्ति पर कब्जा करना चाहते थे। हेमंत के मुताबिक, उसी मकसद से हत्या की साजिश रची गई और अब उसे फंसाने की कोशिश की जा रही है.
अब पुलिस के सामने ये सवाल खड़े थे… आखिर ट्रेजा पारे की हत्या की साजिश किसने रची? प्रेम, संपत्ति या पैसों का लालच-क्या था असली कारण? पुलिस कैसे सच्चाई तक पहुंची? क्या इस केस में किसी को सजा हो सकी?
कल पूरा खुलासा पढ़िए मध्य प्रदेश क्राइम फाइल्स के पार्ट-2 में।
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