स्कूली बसों में विशेषकर VLTD, प्राथमिक चिकित्सा बॉक्स, अग्निशमन यंत्र, खिड़कियों में ग्रिल, बसों पर स्कूल बस का विवरण, फिटनेस, चालक का लाइसेंस, बैठने की क्षमता के मानक, कैमरे से लेकर सभी बिंदुओं पर जांच की जाएगी।
भोपाल, भारत 22 जुल॰ 2026 ALN: नईदुनिया प्रतिनिधि, ग्वालियर। स्कूली बच्चों की सुरक्षा को लेकर प्रदेश भर में परिवहन विभाग 30 जुलाई से चेकिंग अभियान शुरू करेगा। इस अभियान का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि स्कूल बसें और अन्य स्कूली वाहन सभी सुरक्षा मानकों का पालन कर रहे हैं। उपायुक्त किरण शर्मा ने बताया कि इस अभियान में सुप्रीम कोर्ट की गाइडलाइन के तहत स्कूली बसों में विशेषकर व्हीकल लोकेशन ट्रैकिंग डिवाइस (वीएलटीडी), प्राथमिक चिकित्सा बॉक्स, अग्निशमन यंत्र, खिड़कियों में ग्रिल, बसों पर स्कूल बस का विवरण, फिटनेस, चालक का लाइसेंस, बैठने की क्षमता के मानक, कैमरे से लेकर सभी बिंदुओं पर जांच की जाएगी। यह अभियान उन सभी वाहनों पर केंद्रित होगा जो बच्चों को स्कूल ले जाते हैं, ताकि उनकी सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके।
सभी महानगरों व जिलों में इसको लेकर प्रभावी कार्रवाई का दावा किया गया है, जिसमें बड़े महानगर इंदौर, ग्वालियर, भोपाल व जबलपुर में पुलिस के साथ मिलकर कार्रवाई की जाएगी।
हाल ही में हाई कोर्ट की ग्वालियर पीठ ने स्कूली वाहनों को लेकर प्रमुख बिंदुओं के पालन न होने पर याचिका की सुनवाई में परिवहन आयुक्त, ग्वालियर कलेक्टर, एसपी व आरटीओ को अवमानना के नोटिस जारी किए हैं। यह याचिका स्कूली वाहनों की सुरक्षा को लेकर उठाए गए कदमों की कमी को उजागर करती है। याचिका में बताया गया कि 2012 में कोर्ट ने स्कूली वाहनों में बच्चों के सुरक्षित सफर को लेकर आदेश जारी किए थे, लेकिन इसका पालन नहीं किया गया। हाई कोर्ट ने पूर्व की कार्रवाइयों का पूरा विवरण भी तलब किया है। यह कदम यह दर्शाता है कि न्यायालय बच्चों की सुरक्षा को लेकर कितनी गंभीर है और यह सुनिश्चित करना चाहता है कि सभी संबंधित अधिकारी अपनी जिम्मेदारियों को निभा रहे हैं।
इन गाइडलाइनों का पालन न करने की स्थिति में स्कूलों और परिवहन कंपनियों पर कानूनी कार्रवाई की जा सकती है। यह निर्देश केवल एक कागजी कार्रवाई नहीं हैं, बल्कि बच्चों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए आवश्यक कदम हैं। स्कूलों और परिवहन कंपनियों को यह सुनिश्चित करना होगा कि उनके वाहनों में ये सभी सुरक्षा उपाय लागू हों।
स्कूल बसों की सुरक्षा को लेकर यह अभियान न केवल ग्वालियर, बल्कि पूरे मध्य प्रदेश में लागू होगा। यह सुनिश्चित करने के लिए कि सभी स्कूल बसें सुरक्षित हैं, परिवहन विभाग ने एक व्यापक योजना बनाई है। यह योजना न केवल बच्चों की सुरक्षा को ध्यान में रखती है, बल्कि समाज में जागरूकता फैलाने का भी कार्य करती है।
स्कूली बच्चों की सुरक्षा एक संवेदनशील मुद्दा है। पिछले कुछ वर्षों में, स्कूल बसों से संबंधित कई दुर्घटनाएँ हुई हैं, जिनमें बच्चों की जान चली गई है। ऐसे मामलों ने समाज में चिंता पैदा की है और इसके परिणामस्वरूप सरकार को इस दिशा में ठोस कदम उठाने के लिए प्रेरित किया है। इसलिए, यह चेकिंग अभियान एक महत्वपूर्ण पहल है जो न केवल बच्चों की सुरक्षा को सुनिश्चित करेगा, बल्कि अभिभावकों के मन में भी विश्वास पैदा करेगा।
अभिभावकों को भी चाहिए कि वे इस अभियान का समर्थन करें और अपने बच्चों के स्कूल से यह सुनिश्चित करें कि स्कूल बसें सभी सुरक्षा मानकों का पालन कर रही हैं। इसके अलावा, अभिभावकों को अपने बच्चों को स्कूल जाने और लौटने के समय की जानकारी रखनी चाहिए और किसी भी असामान्य स्थिति की रिपोर्ट स्कूल प्रशासन को करनी चाहिए।
इस अभियान का एक और महत्वपूर्ण पहलू यह है कि यह बच्चों को सुरक्षित परिवहन के प्रति जागरूक करेगा। जब बच्चे खुद अपनी सुरक्षा के बारे में जागरूक होंगे, तो वे भी अपनी सुरक्षा के प्रति सजग रहेंगे। यह शिक्षा उन्हें भविष्य में भी सुरक्षा के महत्व को समझने में मदद करेगी।
संक्षेप में, यह चेकिंग अभियान न केवल एक प्रशासनिक कार्रवाई है, बल्कि यह समाज के सभी हिस्सों को एकजुट करने का एक प्रयास भी है। बच्चों की सुरक्षा सभी की जिम्मेदारी है, और जब हम सभी मिलकर काम करेंगे, तो हम एक सुरक्षित और सुरक्षित परिवहन व्यवस्था स्थापित कर सकते हैं। यह अभियान एक सकारात्मक दिशा में एक कदम है, जो न केवल बच्चों की सुरक्षा को सुनिश्चित करेगा, बल्कि समाज में एक सुरक्षित परिवहन संस्कृति को भी बढ़ावा देगा।
इसके अलावा, यह अभियान विभिन्न सामाजिक संगठनों और अभिभावक समूहों के साथ मिलकर चलाया जाएगा। इन संगठनों की भागीदारी से अभियान की प्रभावशीलता बढ़ेगी और सुरक्षा मानकों के प्रति जागरूकता फैलाने में मदद मिलेगी। यह आवश्यक है कि सभी संबंधित पक्ष, जैसे कि स्कूल प्रबंधन, परिवहन सेवा प्रदाता, और अभिभावक, एक साथ मिलकर बच्चों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए काम करें।
अभियान के दौरान, अधिकारियों द्वारा स्कूली वाहनों की नियमित जांच की जाएगी और किसी भी प्रकार की कमी पाए जाने पर तुरंत कार्रवाई की जाएगी। यह सुनिश्चित किया जाएगा कि सभी स्कूल बसें और अन्य स्कूली वाहन निर्धारित मानकों के अनुसार काम कर रहे हैं। इसके अलावा, यह भी सुनिश्चित किया जाएगा कि सभी वाहन समय पर और सुरक्षित तरीके से बच्चों को स्कूल पहुंचाएं।
इस अभियान का एक दीर्घकालिक उद्देश्य भी है। केवल चेकिंग अभियान चलाना ही पर्याप्त नहीं है; इसके साथ-साथ शिक्षा और जागरूकता कार्यक्रमों का आयोजन भी आवश्यक है। इससे न केवल बच्चों को बल्कि उनके अभिभावकों को भी सुरक्षित परिवहन के महत्व के बारे में समझाया जाएगा।
कुल मिलाकर, यह चेकिंग अभियान एक सकारात्मक कदम है जो न केवल बच्चों की सुरक्षा को सुनिश्चित करेगा, बल्कि समाज में एक सुरक्षित परिवहन संस्कृति को भी बढ़ावा देगा। यह आवश्यक है कि सभी संबंधित पक्ष इस अभियान में सक्रिय रूप से भाग लें और बच्चों की सुरक्षा को प्राथमिकता दें।
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