दमोह में 7 दिवसीय सिविल डिफेंस वॉलेंटियर्स प्रशिक्षण का आयोजन किया गया, जिसमें 150 वालेंटियर्स को आपदा प्रबंधन के विभिन्न विषयों पर प्रशिक्षण दिया गया।
भोपाल, भारत 22 जुल॰ 2026 ALN: दमोह। होमगार्ड नागरिक सुरक्षा व आपदा प्रबंधन, मध्य प्रदेश, भोपाल के निर्देशानुसार जिला दमोह में 7 दिवसीय सिविल डिफेंस वॉलेंटियर्स प्रशिक्षण का आयोजन किया गया। यह प्रशिक्षण 16 जुलाई 2026 से 22 जुलाई 2026 तक स्थानीय पी.जी. कॉलेज दमोह में चला। इस प्रशिक्षण का उद्देश्य स्थानीय समुदाय के सदस्यों को आपदा प्रबंधन, नागरिक सुरक्षा और विभिन्न आपात स्थितियों से निपटने के लिए तैयार करना था। ऐसे कार्यक्रमों का आयोजन समय-समय पर किया जाता है ताकि नागरिकों को आवश्यक ज्ञान और कौशल प्रदान किया जा सके, जिससे वे प्राकृतिक आपदाओं और मानव निर्मित संकटों के दौरान प्रभावी रूप से मदद कर सकें।
प्रशिक्षण में जिले के 150 सिविल डिफेंस वॉलेंटियर्स को आपदा प्रबंधन और सुरक्षा के विभिन्न विषयों की जानकारी दी गई। इस प्रशिक्षण को होमगार्ड और एसडीईआरएफ (राज्य आपदा मोचन बल) की टीम द्वारा संचालित किया गया। वालेंटियर्स को नागरिक सुरक्षा, हवाई हमला, कॉर्पोरेट सामाजिक जिम्मेदारी (सीएसआर), कार्डियोपल्मोनरी रिससिटेशन (सीपीआर), राहत व बचाव कार्यों का व्यावहारिक प्रशिक्षण दिया गया। यह प्रशिक्षण उन्हें आपातकालीन स्थितियों में त्वरित और प्रभावी प्रतिक्रिया देने के लिए आवश्यक कौशल प्रदान करता है।
प्रशिक्षण कार्यक्रम का संचालन जिला कमांडेंट श्रीमती रजनी खटीक के मार्गदर्शन में संपन्न हुआ। उन्होंने प्रशिक्षण के दौरान वालेंटियर्स को प्रेरित किया और उन्हें आपदा प्रबंधन के महत्व के बारे में बताया। उनके साथ कम्पनी कमांडर सुश्री प्राची दुबे, सैनिक चैन सिंह तथा एसडीईआरएफ टीम ने भी प्रशिक्षण दिया। यह सभी प्रशिक्षक अपनी विशेषज्ञता और अनुभव के साथ वालेंटियर्स को महत्वपूर्ण जानकारी और कौशल प्रदान करने में सहायक रहे।
22 जुलाई 2026 को पीजी कॉलेज के ऑडिटोरियम में प्रशिक्षण का समापन समारोह आयोजित किया गया। इस समारोह में मुख्य अतिथि के रूप में पीजी कॉलेज के प्राचार्य डॉ. आलोक जैन उपस्थित रहे। उन्होंने वालेंटियर्स को उनके प्रयासों के लिए सराहा और उन्हें प्रोत्साहित किया कि वे अपने समुदाय में सुरक्षा और आपदा प्रबंधन के प्रति जागरूकता फैलाएं। समारोह के दौरान, वालेंटियर्स ने प्रशिक्षण के दौरान सीखे गए अनुभव साझा किए, जिससे यह स्पष्ट हुआ कि उन्होंने कितनी गंभीरता से प्रशिक्षण लिया और वे अपने ज्ञान को किस प्रकार अपने समुदाय में लागू करने का इरादा रखते हैं।
कार्यक्रम के अंत में मुख्य अतिथि द्वारा सभी 150 सिविल डिफेंस वॉलेंटियर्स को प्रमाण पत्र प्रदान किए गए। यह प्रमाण पत्र न केवल उनके प्रशिक्षण की मान्यता है, बल्कि यह उन्हें यह भी दर्शाता है कि वे आपात स्थितियों में सहायता करने के लिए तैयार हैं। प्रमाण पत्र प्राप्त करने के बाद, वालेंटियर्स ने अपने समुदाय में सक्रिय रूप से भाग लेने और आपदा प्रबंधन में योगदान देने का संकल्प लिया।
इस प्रकार के प्रशिक्षण कार्यक्रमों का आयोजन न केवल स्थानीय सरकार के लिए महत्वपूर्ण है, बल्कि यह नागरिकों के लिए भी आवश्यक है। आपदा प्रबंधन की तैयारी और नागरिक सुरक्षा की जानकारी से समुदाय को संकट के समय में बेहतर तरीके से सामना करने में मदद मिलती है। ऐसे कार्यक्रमों के माध्यम से, सरकार और संबंधित संगठनों का प्रयास होता है कि वे नागरिकों को सशक्त बनाएं और उन्हें आपात स्थितियों के प्रति जागरूक करें।
दमोह जिले में इस प्रकार के प्रशिक्षण कार्यक्रमों का आयोजन नियमित रूप से किया जाता है। इससे न केवल वालेंटियर्स को प्रशिक्षित किया जाता है, बल्कि यह स्थानीय समुदाय में सुरक्षा और आपदा प्रबंधन के प्रति जागरूकता भी बढ़ाता है। इसके अलावा, यह कार्यक्रम समाज में एकजुटता और सहयोग की भावना को भी बढ़ावा देता है। जब लोग मिलकर किसी संकट का सामना करने के लिए तैयार होते हैं, तो यह न केवल व्यक्तिगत सुरक्षा को बढ़ाता है, बल्कि पूरे समुदाय की सुरक्षा में भी सुधार लाता है।
प्रशिक्षण के दौरान, वालेंटियर्स ने सीपीआर और प्राथमिक चिकित्सा जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर व्यावहारिक अनुभव प्राप्त किया। यह कौशल उन्हें आपातकालीन स्थितियों में तुरंत मदद करने में सक्षम बनाता है। सीपीआर, विशेष रूप से, जीवन रक्षक तकनीक है जिसे समय पर लागू करने से किसी व्यक्ति की जान बचाई जा सकती है। इसके अलावा, वालेंटियर्स को राहत और बचाव कार्यों के दौरान किस प्रकार की सावधानियों का पालन करना चाहिए, इसके बारे में भी जानकारी दी गई।
इस प्रकार के प्रशिक्षण कार्यक्रमों का एक और महत्वपूर्ण पहलू यह है कि वे समुदाय में नेतृत्व की भावना को भी विकसित करते हैं। जब वालेंटियर्स आपदा प्रबंधन की प्रक्रिया में सक्रिय रूप से भाग लेते हैं, तो वे अपने साथियों और समुदाय के अन्य सदस्यों के लिए एक उदाहरण स्थापित करते हैं। यह नेतृत्व की भावना न केवल उनके व्यक्तिगत विकास में सहायक होती है, बल्कि यह पूरे समुदाय को भी प्रेरित करती है कि वे आपदा प्रबंधन के प्रति अधिक जिम्मेदार बनें।
समापन समारोह के दौरान, डॉ. आलोक जैन ने यह भी कहा कि शिक्षा और प्रशिक्षण के माध्यम से ही हम एक सुरक्षित और सशक्त समाज का निर्माण कर सकते हैं। उन्होंने सभी वालेंटियर्स को उनके समर्पण और मेहनत के लिए बधाई दी और उन्हें आगे बढ़ने के लिए प्रेरित किया। उन्होंने यह भी कहा कि वे अपने ज्ञान को साझा करें और अपने समुदाय में सुरक्षा और आपदा प्रबंधन के प्रति जागरूकता फैलाएं।
इस कार्यक्रम के सफल आयोजन से यह स्पष्ट होता है कि दमोह जिले में नागरिक सुरक्षा और आपदा प्रबंधन के प्रति गंभीरता बढ़ रही है। ऐसे कार्यक्रमों के माध्यम से, न केवल वालेंटियर्स को प्रशिक्षित किया जा रहा है, बल्कि सम्पूर्ण समुदाय को भी सशक्त बनाया जा रहा है। भविष्य में, इस प्रकार के कार्यक्रमों की निरंतरता से, दमोह जिले को एक सुरक्षित और सशक्त समुदाय बनाने में मदद मिलेगी।
आपदा प्रबंधन के क्षेत्र में प्रशिक्षण प्राप्त करने वाले वालेंटियर्स का योगदान केवल आपात स्थितियों में ही नहीं, बल्कि सामान्य जीवन में भी महत्वपूर्ण होता है। जब ये वालेंटियर्स अपने समुदाय में सुरक्षा और आपदा प्रबंधन के प्रति जागरूकता फैलाते हैं, तो वे न केवल अपने लिए, बल्कि अपने परिवार और पड़ोसियों के लिए भी सुरक्षा सुनिश्चित करते हैं।
इस प्रशिक्षण कार्यक्रम का एक अन्य महत्वपूर्ण पहलू यह है कि यह स्थानीय सरकार और प्रशासन के साथ-साथ गैर सरकारी संगठनों (एनजीओ) के साथ सहयोग को भी बढ़ावा देता है। जब विभिन्न संगठन मिलकर काम करते हैं, तो उनके पास संसाधनों और विशेषज्ञता का साझा लाभ होता है, जिससे कार्यक्रमों की प्रभावशीलता में वृद्धि होती है।
अंत में, यह कहा जा सकता है कि दमोह जिले में सिविल डिफेंस वॉलेंटियर्स का प्रशिक्षण न केवल व्यक्तिगत विकास के लिए महत्वपूर्ण है, बल्कि यह समाज की सुरक्षा और सामूहिक जिम्मेदारी को भी मजबूत करता है। ऐसे कार्यक्रमों के माध्यम से, हम एक ऐसा समुदाय बना सकते हैं जो आपात स्थितियों का सामना करने के लिए सक्षम और तैयार हो। यह प्रयास न केवल आज के लिए, बल्कि भविष्य के लिए भी महत्वपूर्ण है, ताकि हम सभी एक सुरक्षित और सशक्त समाज का निर्माण कर सकें।
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