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रतलाम-इंदौर फोरलेन पर कार दुर्घटना में बाल रोग विशेषज्ञ और ससुर की मौत

ALN NEWS DESK
एएलएन न्यूज डेस्क
अपडेटेड : Jul 13, 2026, 11:52 AM IST
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रतलाम-इंदौर फोरलेन पर एक भीषण सड़क हादसे में बाल रोग विशेषज्ञ डॉ. मनीष सिंह और उनके 80 वर्षीय ससुर की मौत हो गई।

नईदुनिया प्रतिनिधि, रतलाम। भोपाल से परिवार के साथ रतलाम लौट रहे शासकीय बाल चिकित्सालय के बाल रोग विशेषज्ञ डॉ. मनीष सिंह की रविवार देर रात रतलाम-इंदौर फोरलेन पर हुए भीषण सड़क हादसे में मौत हो गई। इस हादसे में गंभीर रूप से घायल उनके 80 वर्षीय ससुर शिवनारायण राजौरिया ने सोमवार सुबह उपचार के दौरान दम तोड़ दिया।

यह दुर्घटना न केवल डॉ. मनीष सिंह के परिवार के लिए एक गहरा आघात है बल्कि पूरे चिकित्सा समुदाय के लिए भी एक बड़ा सदमा है। डॉ. सिंह की विशेषज्ञता और उनके योगदान को याद किया जा रहा है। उनके निधन के बाद, उनके सहयोगियों और मरीजों ने उनके प्रति श्रद्धांजलि अर्पित की है। डॉ. सिंह का करियर बाल चिकित्सा में समर्पित रहा, जहां उन्होंने अनेक बच्चों की जान बचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। उनके काम ने कई परिवारों को प्रभावित किया और उनके योगदान को हमेशा याद किया जाएगा।

कार में सवार अन्य पांच स्वजन घायल हैं, जिनका मेडिकल कॉलेज अस्पताल में उपचार चल रहा है। पुलिस की प्रारंभिक जांच में ड्राइवर को नींद की झपकी आने के कारण हादसा होना सामने आया है। यह जानकारी महत्वपूर्ण है क्योंकि यह दर्शाता है कि सड़क पर सावधानी बरतना कितना आवश्यक है। नींद की कमी या थकान के कारण होने वाली सड़क दुर्घटनाएं अक्सर गंभीर परिणाम पैदा कर सकती हैं।

पुलिस के अनुसार हादसा रविवार रात करीब 3.30 बजे धराड़ के आगे टोल प्लाजा से पहले एक छोटी पुलिया के डिवाइडर पर हुआ। यह समय रात का था, जब सड़क पर यातायात कम होता है, लेकिन यह भी एक खतरा है क्योंकि ड्राइवर की नींद में कमी के कारण सड़क पर ध्यान देने में कमी आ सकती है।

एमजी हेक्टर कार (एमपी-04-सीजेड-5519), जिसे अजय गुप्ता चला रहे थे, अचानक अनियंत्रित होकर डिवाइडर से टकरा गई। टक्कर इतनी जबरदस्त थी कि कार का अगला हिस्सा पूरी तरह क्षतिग्रस्त हो गया और उसमें सवार लोग अंदर ही फंस गए।

स्थानीय लोगों ने कार से बाहर निकाला

सूचना मिलते ही टोल प्लाजा की एंबुलेंस और बिलपांक थाना पुलिस मौके पर पहुंची। सहायक उपनिरीक्षक समसु अग्रवाल व पुलिस टीम ने स्थानीय लोगों की मदद से घायलों को बाहर निकालकर शासकीय मेडिकल कॉलेज अस्पताल पहुंचाया। यहां चिकित्सकों ने डॉ. मनीष सिंह को मृत घोषित कर दिया, जबकि गंभीर रूप से घायल शिवनारायण राजौरिया ने सोमवार सुबह उपचार के दौरान दम तोड़ दिया।

इस दुर्घटना के बाद, स्थानीय लोगों ने आपातकालीन सेवाओं की तत्परता की सराहना की है। यह घटना यह भी दर्शाती है कि कैसे समुदाय के लोग एकजुट होकर आपदा के समय सहायता प्रदान करने के लिए तत्पर रहते हैं। कई बार, जब आपातकालीन सेवाएं पहुंचने में समय लेती हैं, तब स्थानीय लोगों की तत्परता और सहायता से घायलों को जल्दी उपचार मिल सकता है।

कार में डॉ. मनीष सिंह के साथ उनकी पत्नी स्टेफनी गुप्ता, दो बेटियां रैना और सयाना (7), ड्राइवर अजय गुप्ता, उनकी पत्नी लवलीना गुप्ता तथा शिवनारायण राजौरिया सवार थे। सभी भोपाल से रतलाम लौट रहे थे। यह परिवार एक सामान्य यात्रा पर था, जिसमें अचानक हुई इस दुर्घटना ने सभी को स्तब्ध कर दिया। यह घटना न केवल परिवार के लिए बल्कि पूरे समाज के लिए एक गंभीर चेतावनी है।

ग्वालियर के रहने वाले थे

डॉ. मनीष सिंह करीब एक वर्ष पहले रतलाम में पदस्थ हुए थे। इससे पहले वे भोपाल में राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन (एनएचएम) में डिप्टी डायरेक्टर के पद पर कार्यरत थे। जून माह में तत्कालीन सीएमएचओ डॉ. संध्या बेलसेरे के अवकाश पर रहने के दौरान उन्होंने एक माह से अधिक समय तक प्रभारी सीएमएचओ का दायित्व भी संभाला था। वे मूल रूप से ग्वालियर के निवासी थे, जहां से उन्होंने अपनी शिक्षा प्राप्त की और चिकित्सा के क्षेत्र में अपनी पहचान बनाई।

डॉ. सिंह की शैक्षणिक पृष्ठभूमि और पेशेवर अनुभव ने उन्हें बाल चिकित्सा के क्षेत्र में एक प्रतिष्ठित विशेषज्ञ बना दिया था। उनके मरीजों और उनके परिवारों के साथ उनके संबंध हमेशा गर्मजोशी भरे रहे हैं। उनके निधन से न केवल उनके परिवार को बल्कि उनके मरीजों को भी गहरा नुकसान हुआ है। उनके कार्यों ने कई बच्चों के जीवन को बेहतर बनाने में मदद की थी।

बिलपांक थाना प्रभारी अयुब खान ने बताया कि प्रारंभिक जांच में ड्राइवर को नींद की झपकी आने से वाहन अनियंत्रित होकर पुलिया के डिवाइडर से टकराना सामने आया है। पुलिस ने मर्ग कायम कर दुर्घटना के सभी पहलुओं की जांच शुरू कर दी है। यह जांच न केवल दुर्घटना के कारणों को स्पष्ट करने के लिए आवश्यक है, बल्कि यह भी सुनिश्चित करने के लिए है कि भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए उचित कदम उठाए जा सकें।

विशेषज्ञों का मानना है कि सड़क सुरक्षा के लिए जागरूकता बढ़ाने की आवश्यकता है। यह घटना इस बात का एक उदाहरण है कि कैसे छोटी-छोटी लापरवाहियों के कारण बड़ी दुर्घटनाएं हो सकती हैं। खासकर रात के समय यात्रा करते समय, ड्राइवरों को अधिक सतर्क रहना चाहिए। नींद की कमी के प्रभावों को समझना और इसके प्रति जागरूक रहना आवश्यक है।

इस दुर्घटना ने यह भी सवाल उठाया है कि क्या पर्याप्त सड़क सुरक्षा उपाय और चेतावनी संकेत हैं, जो रात के समय यात्रा करने वाले लोगों को सुरक्षित रख सकते हैं। इसके अलावा, यह सड़क पर थकान और नींद की कमी के प्रभावों को लेकर भी एक महत्वपूर्ण चर्चा का विषय बन गया है।

अंत में, यह घटना न केवल एक परिवार के लिए एक दुखद क्षण है, बल्कि यह समाज के लिए एक चेतावनी भी है कि सड़क पर सुरक्षा को प्राथमिकता दी जानी चाहिए। डॉ. मनीष सिंह और उनके ससुर की याद में, हम सभी को सड़क सुरक्षा के प्रति जागरूक रहना चाहिए और दूसरों के जीवन की सुरक्षा के लिए कदम उठाने चाहिए।

सड़क दुर्घटनाओं की बढ़ती संख्या ने सरकार और संबंधित अधिकारियों को सड़क सुरक्षा उपायों को सख्ती से लागू करने की आवश्यकता पर जोर दिया है। यह सुनिश्चित करना आवश्यक है कि सभी सड़क उपयोगकर्ता, विशेषकर ड्राइवर, सड़क पर सुरक्षित रहने के लिए सभी नियमों का पालन करें।

इस घटना ने हम सभी को यह सोचने पर मजबूर किया है कि क्या हम सड़क पर सुरक्षित रहने के लिए पर्याप्त प्रयास कर रहे हैं। क्या हम अपनी यात्रा से पहले अपनी नींद और स्वास्थ्य की स्थिति का ध्यान रखते हैं? क्या हम अपने परिवार के सदस्यों और दोस्तों को सुरक्षित यात्रा करने के लिए प्रेरित कर रहे हैं? ये सभी सवाल हमें सड़क पर सुरक्षा को प्राथमिकता देने के लिए प्रेरित करते हैं।

डॉ. मनीष सिंह और उनके ससुर की याद में, यह आवश्यक है कि हम सभी सड़क सुरक्षा के प्रति जागरूकता बढ़ाएं और सुनिश्चित करें कि ऐसी दुखद घटनाएं भविष्य में न हों।

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