संदेह होने पर संपर्क किया तो अधिकांश नंबर बंद मिले। पीड़िता ने ई-एफआईआर के साथ बैंक स्टेटमेंट, चैट, स्क्रीनशॉट और काल रिकार्डिंग पुलिस को सौंप दी है। पुलिस ने मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।
भोपाल, भारत 1 अग॰ 2026 ALN: भोपाल: फर्जी ट्रेडिंग ऐप में निवेश का झांसा, दंपती से 26.84 लाख की साइबर ठगी
भोपाल के बागसेवनिया थाना क्षेत्र में एक दंपती के साथ एक गंभीर साइबर ठगी का मामला सामने आया है, जिसमें उन्हें फर्जी ट्रेडिंग प्लेटफॉर्म के माध्यम से 26.84 लाख रुपये की ठगी का शिकार होना पड़ा। यह घटना न केवल इस दंपती के लिए आर्थिक संकट का कारण बनी, बल्कि यह साइबर अपराध के बढ़ते मामलों की एक और मिसाल भी है।
रिंचू राय, जो अहमदपुर के निवासी हैं, ने अपनी शिकायत में बताया कि उन्हें कुशल मालवीय नामक व्यक्ति ने वाट्सएप के एक ट्रेडिंग ग्रुप से जोड़ा। इस ग्रुप का एडमिन खुद को मोहित भारती बताता था। ऐसे ग्रुप्स में निवेश के लिए लोगों को आकर्षित करने के लिए आमतौर पर लुभावने ऑफर्स और उच्च रिटर्न का वादा किया जाता है। इस प्रकार के ठग अक्सर अपने पीड़ितों को ऐसे समूहों में जोड़ते हैं जहाँ वे अन्य निवेशकों के साथ बातचीत कर सकते हैं, जिससे यह विश्वास बढ़ता है कि यह एक वैध प्लेटफॉर्म है।
इस मामले में, मोहित भारती ने रिंचू और उनके पति पवन मेहरा को रिटेल और इंस्टीट्यूशनल ट्रेडिंग के नाम पर निवेश करने के लिए प्रेरित किया। इसके बाद उन्होंने एक फर्जी ट्रेडिंग प्लेटफार्म पर खाता खुलवाया और उन्हें शेयर व आईपीओ में निवेश करने के लिए कहा। यह समझना महत्वपूर्ण है कि ऐसे फर्जी प्लेटफार्म अक्सर वास्तविकता से बहुत दूर होते हैं और निवेशकों को धोखा देने के लिए बनाए जाते हैं।
दंपती ने बताया कि बाद में उन्हें यह बताया गया कि उनका आईपीओ आवंटन हो गया है और रकम फ्रीज होने का डर दिखाकर उन्हें अलग-अलग बैंक खातों में रुपये ट्रांसफर करने के लिए मजबूर किया गया। इस प्रकार, रिंचू ने अपने कोटक महिंद्रा बैंक खाते से 21.84 लाख रुपये और उनके पति ने एसबीआई समेत अन्य खातों से 5 लाख रुपये भेजे। कुल मिलाकर, उन्होंने 26.84 लाख रुपये जमा कराए। यह राशि उनके लिए जीवनभर की बचत थी, और अब यह ठगी ने उन्हें आर्थिक रूप से बर्बाद कर दिया है।
जब उन्होंने अपनी जमा की गई रकम को निकालने की कोशिश की, तो उन्हें पता चला कि ऐप पर जबरन शेयर आवंटित होने लगे और निकासी की प्रक्रिया बंद हो गई। यह स्थिति देखकर दंपती ने संदेह किया और जब उन्होंने संपर्क करने की कोशिश की, तो अधिकांश फोन नंबर बंद मिले। इस प्रकार की धोखाधड़ी में आमतौर पर ठग अपने संपर्क नंबरों को बदलते रहते हैं ताकि पीड़ितों को ट्रैक करना मुश्किल हो जाए।
रिंचू ने ई-एफआईआर के साथ अपने बैंक स्टेटमेंट, चैट, स्क्रीनशॉट और कॉल रिकॉर्डिंग पुलिस को सौंप दी है। पुलिस ने मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। यह घटना इस बात का संकेत है कि साइबर अपराधियों के खिलाफ जागरूकता और सुरक्षा उपायों की आवश्यकता है।
एक अन्य घटना में, 79 वर्षीय रिटायर्ड बैंककर्मी अशिमा मुखर्जी ने ब्लिंकिट के फर्जी कस्टमर केयर के झांसे में आकर 95 हजार रुपये की साइबर ठगी का शिकार हो गईं। अशिमा ने ब्लिंकिट से मंगाए गए कांच के कटोरों में एक टूटे होने पर गूगल से कस्टमर केयर नंबर खोजकर कॉल किया।
कॉल रिसीव करने वाले ने खुद को ब्लिंकिट का मैनेजर बताते हुए उनसे फोटो मंगवाए और फिर प्रक्रिया पूरी करने के नाम पर 10 रुपये ट्रांसफर करने के लिए कहा। इस प्रकार की ठगी में आमतौर पर ठग छोटी राशि का ट्रांसफर करने के लिए कहते हैं ताकि पीड़ित को संदेह न हो। इसके तुरंत बाद उनका मोबाइल हैंग हो गया और एसबीआई खाते से तीन ट्रांजेक्शन में 40-40 हजार और 15 हजार रुपये, कुल 95 हजार रुपये निकाल लिए गए।
इस मामले में भी शिकायत मिलने पर पुलिस ने साइबर ठगी का मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। यह घटना दिखाती है कि कैसे साइबर ठग तकनीकी ज्ञान का उपयोग करके साधारण लोगों को निशाना बना रहे हैं।
कजलीखेड़ा निवासी 29 वर्षीय सुनील सोनार को भी साइबर ठगों ने निशाना बनाया। उन्हें क्रेडिट कार्ड अपडेट करने के नाम पर 1.38 लाख रुपये की ठगी का सामना करना पड़ा। पुलिस के अनुसार, 24 जुलाई को एक व्यक्ति ने खुद को एक्सिस बैंक का कर्मचारी बताकर फोन किया और कहा कि उनका क्रेडिट कार्ड बंद होने वाला है।
इस प्रकार के ठग अक्सर लोगों के डर का फायदा उठाते हैं। सुनील के फॉर्म भरते ही उनके दो खातों से क्रोमा के जरिए 1.38 लाख रुपये की ऑनलाइन शॉपिंग कर ली गई। इस प्रकार की ठगी में आमतौर पर ठग पीड़ित को यह विश्वास दिलाते हैं कि वे उनकी मदद कर रहे हैं, जबकि वास्तव में उनका उद्देश्य केवल धन की चोरी करना होता है।
शिकायत पर पुलिस ने मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। यह घटना इस बात को उजागर करती है कि कैसे साइबर ठगों के द्वारा लोगों की जानकारी का दुरुपयोग किया जा रहा है।
शाहपुरा क्षेत्र में रहने वाले 57 वर्षीय राकेश मेहरोत्रा भी साइबर ठगों के झांसे में आकर 45 हजार रुपये गंवा बैठे। राकेश के पास 27 जुलाई को एक कॉल आया, जिसमें कॉलर ने खुद को ICICI बैंक का कर्मचारी बताते हुए एटीएम कार्ड अपडेट करने की बात कही।
इसके बाद वाट्सएप पर एपीके फाइल भेजी गई, जो मोबाइल में नहीं खुली। ठग ने स्क्रीन शेयर करने को कहा, जो एक सामान्य धोखाधड़ी तकनीक है। जैसे ही राकेश ने स्क्रीन शेयर की, उनके बैंक खाते से 45 हजार रुपये कट गए।
इस घटना के बाद पुलिस ने साइबर ठगी का मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। यह घटना इस बात का प्रमाण है कि कैसे ठग अपने शिकार को धोखा देने के लिए विभिन्न तकनीकों का इस्तेमाल कर रहे हैं।
इन सभी घटनाओं ने यह स्पष्ट कर दिया है कि साइबर ठगों का नेटवर्क तेजी से बढ़ रहा है और लोग आसानी से उनके जाल में फंस रहे हैं। ऐसे मामलों में जागरूकता और सतर्कता अत्यंत आवश्यक है। लोगों को यह समझने की जरूरत है कि किसी भी वित्तीय लेन-देन के लिए हमेशा आधिकारिक और प्रमाणित चैनलों का ही उपयोग करना चाहिए।
साइबर सुरक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि इस प्रकार की ठगियों से बचने के लिए लोगों को सुरक्षा के कुछ बुनियादी उपायों का पालन करना चाहिए। जैसे कि किसी भी अनजान कॉल का जवाब न देना, व्यक्तिगत जानकारी को किसी भी अनजान व्यक्ति के साथ साझा न करना, और अपने बैंक खातों की नियमित जांच करना। इसके अलावा, सरकार और संबंधित एजेंसियों को भी साइबर सुरक्षा के प्रति जागरूकता बढ़ाने के लिए कदम उठाने की आवश्यकता है ताकि लोग इन ठगियों से बच सकें।
साइबर ठगी के मामलों की बढ़ती संख्या ने भारत में साइबर सुरक्षा को एक गंभीर मुद्दा बना दिया है। सरकार और विभिन्न संगठनों को मिलकर इस समस्या से निपटने के लिए ठोस कदम उठाने की आवश्यकता है। इसके साथ ही, समाज में जागरूकता फैलाने के लिए विभिन्न माध्यमों का उपयोग किया जाना चाहिए, ताकि लोग इन धोखाधड़ी के तरीकों के प्रति सतर्क रह सकें।
इस संदर्भ में, यह भी आवश्यक है कि लोग अपने वित्तीय लेन-देन के लिए तकनीकी ज्ञान को बढ़ाएं। उन्हें यह समझने की जरूरत है कि ऑनलाइन प्लेटफॉर्म पर निवेश करने से पहले किसी भी प्रकार की जांच करना कितना महत्वपूर्ण है। निवेशकों को हमेशा यह सुनिश्चित करना चाहिए कि वे जिस प्लेटफॉर्म का उपयोग कर रहे हैं, वह वैध और सुरक्षित है।
इस प्रकार की ठगियों से बचने के लिए, वित्तीय संस्थानों को भी अपने ग्राहकों को सुरक्षा उपायों के बारे में जागरूक करना चाहिए। इसके अलावा, साइबर सुरक्षा के क्षेत्र में प्रशिक्षित पेशेवरों की संख्या बढ़ाना भी आवश्यक है, ताकि वे ऐसे मामलों में त्वरित और प्रभावी कार्रवाई कर सकें।
अंततः, यह स्पष्ट है कि साइबर ठगी एक गंभीर समस्या है, जो न केवल व्यक्तिगत वित्त को प्रभावित करती है, बल्कि समाज के आर्थिक ढांचे को भी कमजोर करती है। इसलिए, सभी को मिलकर इस समस्या का समाधान करने के लिए प्रयास करना चाहिए।
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