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भारतीय रेलवे में 1.27 करोड़ बेडशीट और कंबल चोरी, रांची भी शामिल

ALN NEWS DESK
एएलएन न्यूज डेस्क
अपडेटेड : Jul 13, 2026, 11:09 AM IST
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भारतीय रेलवे में एसी कोचों से बेडरोल की चोरी की घटनाएं बढ़ रही हैं, जिसमें रांची प्रमुख शहरों में शामिल है।

भारतीय रेलवे, जो देश के सबसे बड़े परिवहन नेटवर्क में से एक है, न केवल यात्रियों को परिवहन सेवाएं प्रदान करता है, बल्कि यात्रा के दौरान उनकी सुविधा के लिए विभिन्न सुविधाएं भी उपलब्ध कराता है। इनमें से एक प्रमुख सुविधा है बेडरोल, जिसमें बेडशीट, कंबल, तकिए और तौलिए शामिल होते हैं। हाल के समय में इस सुविधा का दुरुपयोग होने की खबरें सामने आई हैं, जिससे रेलवे को आर्थिक नुकसान हो रहा है।

एक हालिया रिपोर्ट के अनुसार, भारतीय रेलवे में बेडरोल के सामान की चोरी की घटनाएं बढ़ती जा रही हैं। द इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक, हर 1,000 यात्रियों में से लगभग एक यात्री सफर खत्म होने पर बेडरोल का कोई न कोई सामान अपने साथ ले जाता है। इस रिपोर्ट में यह भी उल्लेख किया गया है कि रेलवे के 69 मंडलों से सूचना का अधिकार (आरटीआई) के माध्यम से जानकारी मांगी गई थी, जिसमें से 54 मंडलों ने जवाब दिया। हालांकि, कुछ मंडलों ने पूरी जानकारी साझा नहीं की, जिससे स्थिति की गंभीरता को समझने में बाधा आई।

आंकड़ों के अनुसार, जनवरी 2022 से मई 2026 के बीच कम से कम 1.27 करोड़ बेडरोल का सामान चोरी हुआ। रेलवे अधिकारियों का कहना है कि ज्यादातर सामान यात्री ही अपने साथ ले गए हैं। यह आंकड़े इस बात को उजागर करते हैं कि 2022 से 2025 के बीच बेडशीट, कंबल, तकिए और तौलियों जैसी चीजों की चोरी के मामलों में लगभग 56 प्रतिशत की वृद्धि हुई है। यह वृद्धि न केवल रेलवे के लिए आर्थिक चुनौती प्रस्तुत करती है, बल्कि यह यात्रियों की नैतिकता पर भी सवाल उठाती है।

लाखों यात्रियों को रोज बेडरोल देता है रेलवे

भारतीय रेलवे हर दिन लाखों यात्रियों को बेडरोल प्रदान करता है। हालांकि, चोरी की संख्या अपेक्षाकृत कम है, लेकिन यह आंकड़े यात्रियों की आदतों की एक अलग तस्वीर भी प्रस्तुत करते हैं। यह केवल रेलवे के सामान के गायब होने का मामला नहीं है, बल्कि यह भी दर्शाता है कि कुछ यात्री यात्रा के बाद सामान अपने साथ ले जाने से नहीं चूकते। आरटीआई से प्राप्त आंकड़ों के अनुसार, पिछले साढ़े चार वर्षों में बेडरोल की चोरी से ठेकेदारों को लगभग 104.51 करोड़ रुपये का नुकसान हुआ है।

कोच अटेंडेंट्स ने इस समस्या पर चिंता व्यक्त की है, यह बताते हुए कि चोरी हुए सामान का बड़ा हिस्सा उनके वेतन से वसूला जाता है, जिससे उन्हें आर्थिक नुकसान होता है। यह स्थिति न केवल रेलवे के लिए बल्कि कर्मचारियों के लिए भी चिंता का विषय बन गई है।

इस संदर्भ में, रेलवे के कर्मचारियों की जिम्मेदारी भी बढ़ जाती है। उन्हें यह सुनिश्चित करना होता है कि यात्रियों को बेडरोल की सुविधा का सही उपयोग किया जाए। इसके लिए रेलवे ने कुछ उपाय भी किए हैं, जैसे कि यात्रियों को सामान वापस करने के लिए प्रोत्साहित करना और चोरी की घटनाओं को रोकने के लिए निगरानी बढ़ाना।

रेल मंत्रालय ने चोरी के मामलों पर क्या कहा?

रेल मंत्रालय के प्रवक्ता ने इस मुद्दे पर अपनी चिंता व्यक्त की है। उन्होंने कहा कि एसी कोचों से लिनेन की चोरी एक गंभीर चिंता का विषय है। मंत्रालय ने यह भी स्पष्ट किया है कि चोरी की घटनाओं को रोकने और दोषियों के खिलाफ कार्रवाई के लिए लगातार प्रयास किए जा रहे हैं। हालांकि, उन्होंने यह भी बताया कि अब तक रेलवे को चोरी में कर्मचारियों की मिलीभगत का कोई सबूत नहीं मिला है। यह जानकारी इस बात को और स्पष्ट करती है कि यह समस्या मुख्य रूप से यात्रियों के व्यवहार से संबंधित है।

रांची का भी नाम चोरी के मामलों में

आरटीआई के आंकड़ों के मुताबिक, सात रेलवे जोन के केवल 10 मंडलों में कुल लिनेन चोरी के लगभग 67 प्रतिशत मामले दर्ज किए गए हैं। इनमें बीकानेर, जोधपुर, जयपुर, रांची, दिल्ली, मुंबई, अहमदाबाद, सोनपुर, दानापुर और बिलासपुर मंडल शामिल हैं। इन क्षेत्रों में बेडशीट, कंबल, तकिए और तौलियों की चोरी की घटनाएं सबसे अधिक सामने आई हैं।

रांची का नाम इस सूची में शामिल होना इस बात का संकेत है कि चोरी की समस्या केवल बड़े शहरों तक सीमित नहीं है, बल्कि यह छोटे शहरों और मंडलों में भी फैली हुई है। यह स्थिति रेलवे प्रशासन के लिए एक चुनौती प्रस्तुत करती है, क्योंकि उन्हें यह सुनिश्चित करना होता है कि सभी यात्रियों को सुरक्षित और सुविधाजनक यात्रा का अनुभव मिले।

इस समस्या का समाधान करने के लिए रेलवे को एक समग्र दृष्टिकोण अपनाने की आवश्यकता है। इसमें यात्रियों को जागरूक करना, निगरानी बढ़ाना और चोरी की घटनाओं को रोकने के लिए ठोस उपाय करना शामिल है। इसके अलावा, रेलवे को कर्मचारियों के लिए भी प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित करने चाहिए, ताकि वे यात्रियों को सही तरीके से मार्गदर्शन कर सकें और चोरी की घटनाओं को रोकने में मदद कर सकें।

इस प्रकार, भारतीय रेलवे को न केवल अपनी सेवाओं को बेहतर बनाने की आवश्यकता है, बल्कि उसे यात्रियों के व्यवहार को भी सुधारने के लिए प्रयास करने होंगे। यह केवल रेलवे के लिए ही नहीं, बल्कि पूरे समाज के लिए एक महत्वपूर्ण मुद्दा है।

भारतीय रेलवे की बेडरोल सेवा का उद्देश्य यात्रियों को यात्रा के दौरान अधिकतम सुविधा प्रदान करना है। परंतु, जब इस सुविधा का दुरुपयोग होता है, तो यह न केवल रेलवे के लिए आर्थिक नुकसान का कारण बनता है, बल्कि यात्रियों के लिए भी परेशानी का सबब बनता है। इसलिए, यह आवश्यक है कि रेलवे प्रशासन इस मुद्दे को गंभीरता से ले और इसे हल करने के लिए ठोस कदम उठाए।

अंततः, भारतीय रेलवे को यह समझने की आवश्यकता है कि चोरी की समस्या केवल एक आर्थिक समस्या नहीं है, बल्कि यह सामाजिक और नैतिक पहलुओं से भी जुड़ी हुई है। यात्रियों को यह समझाना होगा कि सार्वजनिक संसाधनों का दुरुपयोग करना उचित नहीं है और इसके परिणामस्वरूप सभी को नुकसान होता है।

इस संदर्भ में, यात्रियों को भी अपनी जिम्मेदारी समझनी होगी और रेलवे द्वारा प्रदान की जाने वाली सुविधाओं का सही उपयोग करना चाहिए। यदि सभी यात्री इस दिशा में सकारात्मक कदम उठाते हैं, तो रेलवे को इस समस्या का सामना करने में अधिक आसानी होगी।

अंत में, यह कहना उचित होगा कि भारतीय रेलवे को अपनी सेवाओं को सुरक्षित और प्रभावी बनाने के लिए निरंतर प्रयास करने की आवश्यकता है। इसके लिए सभी संबंधित पक्षों को एक साथ मिलकर काम करना होगा ताकि यात्रियों को एक सुरक्षित, सुविधाजनक और सुखद यात्रा का अनुभव मिल सके।

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