ISRO के 100 वैज्ञानिकों ने नौकरी छोड़ी या रिटायरमेंट लिया: गगनयान और अन्य मिशनों से जुड़े वैज्ञानिक भी शामिल

ALN NEWS DESK
एएलएन न्यूज डेस्क
अपडेटेड : Jul 16, 2026, 03:01 PM IST
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इंडियन स्पेस रिसर्च ऑर्गनाइजेशन (ISRO) के गगनयान और अन्य महत्वपूर्ण मिशनों से जुड़े वैज्ञानिकों के इस्तीफे और स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति पर अब सख्त नियम लागू होंगे।

इंडियन स्पेस रिसर्च ऑर्गनाइजेशन (ISRO) ने हाल ही में एक महत्वपूर्ण कदम उठाया है, जिसमें गगनयान और अन्य महत्वपूर्ण अंतरिक्ष मिशनों से जुड़े वैज्ञानिकों और तकनीकी कर्मचारियों के इस्तीफे और स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति (VRS) के मामलों पर नई प्रक्रिया लागू की गई है। इस नए आदेश के अनुसार, अब ग्रुप ए वैज्ञानिक एवं तकनीकी कर्मचारियों के इस्तीफे या VRS के आवेदन नियमित प्रक्रिया के तहत स्वीकार नहीं किए जाएंगे। यह निर्णय ऐसे समय में आया है जब पिछले 10 महीनों में ISRO से 100 से अधिक कर्मचारी इस्तीफा दे चुके हैं। इनमें से अधिकांश इस्तीफे बेंगलुरु के यूआर राव सैटेलाइट सेंटर (URSC) और तिरुवनंतपुरम के विक्रम साराभाई स्पेस सेंटर (VSSC) से आए हैं।

इस बदलाव का मुख्य कारण यह बताया गया है कि तेजी से बढ़ते इस्तीफों और VRS के मामलों ने गगनयान और अन्य राष्ट्रीय महत्व के प्रोजेक्ट्स पर नकारात्मक असर डालना शुरू कर दिया था। सरकार ने यह निर्णय लिया है कि अब ऐसे मामलों पर अंतिम फैसला अंतरिक्ष विभाग करेगा। यह कदम ISRO के विभिन्न केंद्रों जैसे URSC, VSSC, सतीश धवन स्पेस सेंटर (SDSC), लिक्विड प्रोपल्शन सिस्टम्स सेंटर (LPSC), स्पेस एप्लिकेशंस सेंटर (SAC), नेशनल रिमोट सेंसिंग सेंटर (NRSC), ISTRAC और मास्टर कंट्रोल फैसिलिटी (MCF) तक पहुंचाया गया है।

नए आदेश के अनुसार, वैज्ञानिक और तकनीकी कर्मचारियों के इस्तीफे या VRS के आवेदन अब केंद्र निदेशक की स्पष्ट सिफारिश के साथ अंतरिक्ष विभाग को भेजे जाएंगे। इससे पहले, 2020 में किए गए प्रशासनिक बदलावों के तहत ISRO केंद्रों के निदेशकों और प्रमुखों को इस्तीफे और VRS स्वीकार करने का अधिकार दिया गया था। यह नया निर्देश इस बात का संकेत है कि ISRO में कार्यबल के स्थायित्व को बनाए रखने के लिए सरकार की प्राथमिकता बढ़ गई है।

हालांकि, इस्तीफे देने वालों में वरिष्ठ वैज्ञानिक विक्टर जोसेफ टी भी शामिल हैं, जो VSSC में जियोसिंक्रोनस सैटेलाइट लॉन्च व्हीकल Mk III प्रोजेक्ट के प्रोजेक्ट डायरेक्टर थे। उन्होंने फरवरी में इस्तीफा दिया, और इससे पहले वे करीब 13 महीने तक LVM3 प्रोजेक्ट की जिम्मेदारी संभाल रहे थे, जिसका उपयोग गगनयान मिशन में किया जाएगा। यह इस्तीफा न केवल उनके व्यक्तिगत करियर के लिए महत्वपूर्ण है, बल्कि यह ISRO के लिए भी एक बड़ा झटका है, क्योंकि ऐसे वरिष्ठ वैज्ञानिकों का जाना मिशनों की प्रगति पर प्रभाव डाल सकता है।

रिपोर्टों के अनुसार, ISRO छोड़ने वाले कुछ वैज्ञानिक निजी अंतरिक्ष स्टार्टअप्स से जुड़ गए हैं। 2020 में केंद्र सरकार द्वारा अंतरिक्ष क्षेत्र को निजी कंपनियों के लिए खोलने और 2023 में भारतीय अंतरिक्ष नीति लागू होने के बाद इस क्षेत्र में तेजी से स्टार्टअप्स की संख्या बढ़ी है। वर्तमान में, भारत में 400 से ज्यादा पंजीकृत स्पेस स्टार्टअप हैं, जिनमें लगभग 500 मिलियन डॉलर का निवेश आया है। 2025 में अकेले लगभग 150 मिलियन डॉलर का निवेश किया गया है। पिक्सेल, ध्रुवा स्पेस, स्काईरूट एयरोस्पेस, अग्निकुल कॉसमॉस और बेलाट्रिक्स एयरोस्पेस जैसी कंपनियां इस क्षेत्र में अग्रणी हैं, जो ISRO के लिए एक प्रतिस्पर्धा का माहौल पैदा कर रही हैं।

इस बीच, ISRO के पूर्व चेयरमैन डॉ. सोमनाथ एस, जो जनवरी 2025 तक ISRO चेयरमैन रहे, अब चेन्नई की स्पेस स्टार्टअप कंपनी 'अग्निकुल कॉसमॉस' के बोर्ड ऑफ डायरेक्टर्स में ऑब्जर्वर के तौर पर शामिल हुए हैं। डॉ. सोमनाथ ने कई महत्वपूर्ण मिशनों की देखरेख की है, जिनमें चंद्रमा पर चंद्रयान-3 की सफल लैंडिंग और भारत की पहली सोलर ऑब्ज़र्वेटरी 'आदित्य-L1' का लॉन्च शामिल है। उनके अनुभव और ज्ञान का उपयोग अब निजी क्षेत्र में किया जा रहा है, जो दर्शाता है कि ISRO के वैज्ञानिकों का कौशल अब अन्य क्षेत्रों में भी महत्वपूर्ण हो गया है।

ISRO के लिए यह समय चुनौतियों से भरा रहा है, क्योंकि हाल के कुछ मिशनों में असफलताओं का सामना करना पड़ा है। ISRO का "वर्कहॉर्स" माना जाने वाला PSLV एक साल के भीतर लगातार दो मिशनों में असफल रहा। जनवरी में EOS-N1 पृथ्वी अवलोकन उपग्रह और व्यावसायिक पेलोड लेकर उड़ान भरने वाला PSLV-C62 तीसरे चरण के अंत में आई गड़बड़ी के कारण तय रास्ते से भटक गया था। इसके बाद, मई 2024 में PSLV-C61/EOS-09 (RISAT-1B) मिशन भी असफल रहा, जब उड़ान के करीब 203 सेकेंड बाद तीसरे चरण में चेंबर प्रेशर अचानक गिर गया, जिससे रॉकेट 529 किलोमीटर की सन-सिंक्रोनस कक्षा तक नहीं पहुंच सका और मिशन समाप्त करना पड़ा। यह न केवल ISRO के लिए एक चुनौती है, बल्कि यह देश की अंतरिक्ष अनुसंधान क्षमताओं पर भी सवाल उठाता है।

इन चुनौतियों के बावजूद, ISRO गगनयान मिशन, चंद्रयान-4, भारतीय अंतरिक्ष स्टेशन (BAS) और मंगलयान-2 जैसे बड़े प्रोजेक्ट्स पर काम जारी रखे हुए है। गगनयान का लक्ष्य भारत को अपने दम पर इंसानों को अंतरिक्ष भेजने वाला दुनिया का चौथा देश बनाना है, जो न केवल तकनीकी उपलब्धि होगी, बल्कि यह भारतीय विज्ञान और इंजीनियरिंग के क्षेत्र में भी एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर साबित होगा।

इस तरह के मिशनों की सफलता न केवल भारत की अंतरिक्ष अनुसंधान क्षमताओं को बढ़ाएगी, बल्कि यह वैश्विक स्तर पर भारत की स्थिति को भी मजबूत करेगी। अंतरिक्ष क्षेत्र में आत्मनिर्भरता और विकास को बढ़ावा देने के लिए यह आवश्यक है कि ISRO अपने कार्यबल को बनाए रखे और अपने महत्वपूर्ण मिशनों को सफलतापूर्वक पूरा करे।

इस प्रकार, ISRO के वैज्ञानिकों के इस्तीफे और VRS के मामलों पर नए निर्देशों का उद्देश्य संगठन के भीतर स्थिरता बनाए रखना है, ताकि भविष्य के महत्वपूर्ण मिशनों की सफलता सुनिश्चित की जा सके। यह देखना होगा कि क्या ये कदम वास्तव में ISRO की कार्यप्रणाली को सुधारने में मदद करेंगे या नहीं, और क्या यह संगठन के भीतर वैज्ञानिकों की संतुष्टि और प्रेरणा को बनाए रख पाएंगे।

आखिरकार, ISRO की सफलता केवल तकनीकी उपलब्धियों में नहीं, बल्कि इसके मानव संसाधनों की गुणवत्ता और स्थिरता में भी निहित है। इसलिए, यह महत्वपूर्ण है कि संगठन अपने वैज्ञानिकों और तकनीकी कर्मचारियों के लिए एक सकारात्मक और प्रेरणादायक कार्य वातावरण बनाए रखे, ताकि वे अपने कौशल और ज्ञान का सर्वोत्तम उपयोग कर सकें।

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