ईरान ने अमेरिकी सैन्य ठिकानों पर मिसाइलों और ड्रोन से हमला किया, जिससे खाड़ी देशों में तनाव बढ़ गया है। ईरान ने इस हमले का वीडियो भी जारी किया है।
नई दिल्ली, भारत 15 जुल॰ 2026 ALN: US Iran War: ईरानी सरकारी मीडिया 'प्रेस टीवी' की रिपोर्ट के अनुसार, तेहरान ने अमेरिकी बेस पर दागी गईं मिसाइलों और ड्रोन हमलों का वीडियो जारी किया है. इस वीडियो में मिसाइलों के गरजने और अमेरिकी ठिकानों पर ड्रोनों के सटीक हमलों को साफ देखा जा सकता है. यह घटना अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते तनाव का एक नया अध्याय है, जो पिछले कुछ वर्षों से जारी है।
ईरानी सेना और IRGC के अनुसार, इस जवाबी सैन्य कार्रवाई को 'ऑपरेशन नस्र 2' (Operation Nasr 2) नाम दिया गया है. प्रेस टीवी द्वारा जारी वीडियो में ईरान की सैन्य शक्ति को दिखाया गया है. ईरान का दावा है कि उसने इस हमले में अमेरिका के कई आधुनिक हथियारों और कमांड सेंटरों को मटियामेट कर दिया है. ईरान के इस हमले के पीछे एक लंबा इतिहास है, जिसमें अमेरिका और ईरान के बीच विभिन्न प्रकार के संघर्ष और टकराव शामिल हैं, जैसे कि 1979 का ईरानी क्रांति, इराक-ईरान युद्ध, और हाल के वर्षों में परमाणु कार्यक्रम को लेकर तनाव।
ईरानी बयानों और जारी किए गए वीडियो के आधार पर, खाड़ी देशों में मौजूद अमेरिकी सेना के इन ठिकानों को भारी नुकसान पहुंचा है. यह हमले केवल ईरान की सैन्य क्षमताओं को नहीं दर्शाते, बल्कि यह भी दिखाते हैं कि ईरान ने अपनी रणनीति में महत्वपूर्ण बदलाव किया है।
कुवैत में तबाही: अमेरिकी सेना के अत्याधुनिक पैट्रियट एयर डिफेंस कॉम्प्लेक्स, सैटेलाइट संचार केंद्र और HIMARS रॉकेट लॉन्च प्लेटफॉर्म को निशाना बनाया गया. अली अल-सालेम एयरबेस पर अमेरिकी MQ-9 रीपर ड्रोन के प्लेटफॉर्म को तबाह किया गया. मीना अब्दुल्ला में अमेरिकी सेना के मुख्य रसद और सहायता केंद्र (KJL) को आग के हवाले कर दिया गया. यह हमले ईरान के लिए एक महत्वपूर्ण सैन्य उपलब्धि माने जा रहे हैं, क्योंकि इससे अमेरिका की सैन्य उपस्थिति को चुनौती दी गई है।
बहरीन में अमेरिकी 5वां बेड़ा ढेर: बहरीन में स्थित अमेरिकी नौसेना के पांचवें बेड़े के NSA प्रबंधन केंद्र, कमांड एंड कंट्रोल सेंटर और ईंधन टैंकों को मटियामेट कर दिया गया. बहरीन के शेख ईसा बेस पर स्थित हथियारों और जहाजों के कलपुर्जों के गोदामों को नष्ट किया गया. जॉर्डन का अल-अजरक बेस: जॉर्डन के अल-अजरक एयरबेस पर अमेरिकी F-15, F-16 और F-35 लड़ाकू विमानों के हैंगर और रणनीतिक ड्रोनों को निशाना बनाया गया. इन हमलों ने अमेरिका की सैन्य क्षमताओं को गंभीर रूप से प्रभावित किया है और खाड़ी क्षेत्र में सुरक्षा के लिए एक नई चुनौती खड़ी की है।
IRGC के साथ-साथ ईरान की राष्ट्रीय सेना ने भी अमेरिकी सेना के खिलाफ अपने 'सायका' (Saegheh - Lightning) ऑपरेशन के आठवें चरण की शुरुआत की है. सेना ने दावा किया कि जॉर्डन के अल-अजरक बेस पर दोबारा घातक ड्रोनों से हमला कर अमेरिकी सेना के F-18 लड़ाकू विमानों और बड़े सैन्य गोदामों को निशाना बनाया गया है. यह कदम ईरान की आक्रामक सैन्य नीति का हिस्सा है, जो अमेरिका की सैन्य गतिविधियों के प्रति उसकी प्रतिक्रिया को दर्शाता है।
हमलों के बीच IRGC ने कुवैत और जॉर्डन की जनता के नाम भावुक और चेतावनी भरा संदेश जारी किया है. ईरान ने कुवैत के लोगों से कहा, "हमारा आपसे कोई बैर नहीं है, हम आपसे स्नेह करते हैं. लेकिन अपनी धरती से इन अमेरिकी कब्जाधारियों को बाहर निकालें." ईरान ने कहा कि अमेरिका ने हाल ही में ईरान के खुजेस्तान में एक गेहूं भंडारण केंद्र और ईलाम प्रांत में एक पानी की फैक्ट्री पर बमबारी की थी, जिसका बदला लेना जरूरी था. यह संदेश ईरान के लिए एक रणनीतिक पहलू है, जहां वह स्थानीय जनता को अपने पक्ष में लाने की कोशिश कर रहा है।
मिसाइल हमलों के बाद ईरान ने होर्मुज को बंद करने की भी चेतावनी दी है. IRGC ने कहा है कि जब तक अमेरिका अपनी सैन्य 'शरारतें' बंद नहीं करता, तब तक इस समुद्री मार्ग से तेल और गैस का निर्यात पूरी तरह ठप रहेगा. IRGC ने कहा- "तेल और गैस का निर्यात या तो सबके लिए होगा या फिर किसी के लिए नहीं." यह बयान वैश्विक ऊर्जा बाजार पर गंभीर प्रभाव डाल सकता है, क्योंकि होर्मुज जलडमरूमध्य विश्व के तेल परिवहन का एक महत्वपूर्ण मार्ग है। यदि ईरान इस मार्ग को बंद करता है, तो यह वैश्विक ऊर्जा कीमतों को प्रभावित कर सकता है और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर तनाव बढ़ा सकता है।
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अमेरिका और ईरान के बीच के संबंध ऐतिहासिक रूप से तनावपूर्ण रहे हैं। 1979 में ईरानी क्रांति के बाद, दोनों देशों के बीच राजनयिक संबंध समाप्त हो गए थे। इसके बाद से कई बार दोनों देशों के बीच सैन्य संघर्ष और आर्थिक प्रतिबंधों का दौर चला है। ईरान का परमाणु कार्यक्रम भी इस तनाव का एक बड़ा कारण रहा है, जिससे अमेरिका और उसके सहयोगियों ने ईरान पर कई प्रतिबंध लगाए हैं।
हाल के वर्षों में, ईरान ने अपनी सैन्य क्षमताओं को बढ़ाने के लिए कई प्रयास किए हैं, जिसमें बैलिस्टिक मिसाइलों और ड्रोन तकनीक का विकास शामिल है। ईरान का यह प्रयास उसकी क्षेत्रीय शक्ति को बढ़ाने और अमेरिका के खिलाफ अपनी स्थिति को मजबूत करने के लिए है।
इस नए हमले के परिणामस्वरूप, अमेरिका और ईरान के बीच सैन्य टकराव की संभावना बढ़ गई है। अमेरिका ने पहले ही ईरान के खिलाफ जवाबी कार्रवाई की चेतावनी दी है, और इस स्थिति का विस्तार से विश्लेषण करने की आवश्यकता है। यदि अमेरिका ने सैन्य कार्रवाई की, तो यह क्षेत्र में और अधिक अस्थिरता का कारण बन सकता है, और इससे अन्य देशों की भागीदारी भी हो सकती है।
इस संदर्भ में, वैश्विक ऊर्जा बाजार पर भी ध्यान देने की आवश्यकता है। होर्मुज जलडमरूमध्य से गुजरने वाले तेल का एक बड़ा हिस्सा वैश्विक बाजार में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। यदि ईरान ने इस मार्ग को बंद करने का निर्णय लिया, तो यह वैश्विक ऊर्जा कीमतों को बढ़ा सकता है, जिससे दुनिया भर में आर्थिक संकट उत्पन्न हो सकता है।
इस स्थिति में, अंतरराष्ट्रीय समुदाय को भी अपनी भूमिका निभाने की आवश्यकता है। अमेरिका और ईरान के बीच संवाद और बातचीत के माध्यम से स्थिति को शांत करने का प्रयास किया जाना चाहिए। यदि दोनों पक्षों के बीच कोई समझौता नहीं होता है, तो यह संघर्ष और बढ़ सकता है, जो न केवल क्षेत्र के लिए, बल्कि वैश्विक स्तर पर भी गंभीर परिणाम ला सकता है।
इस प्रकार, ईरान का अमेरिका पर किया गया यह हमला सिर्फ एक सैन्य कार्रवाई नहीं है, बल्कि यह एक जटिल राजनीतिक परिदृश्य का हिस्सा है, जिसमें क्षेत्रीय और वैश्विक स्तर पर कई कारक शामिल हैं। दोनों देशों के बीच के संबंधों की भविष्यवाणी करना कठिन है, लेकिन यह स्पष्ट है कि स्थिति गंभीर है और इसे ध्यान से देखने की आवश्यकता है।
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