हिमाचल विधानसभा सत्र: सीएम सुक्खू बोले- आउटसोर्स कम करने के लिए बनेगी नीति, कौशल विकास स्टाइपंड में हुआ घोटाला

ALN NEWS DESK
एएलएन न्यूज डेस्क
अपडेटेड : Aug 26, 2026, 05:34 AM IST
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हिमाचल प्रदेश विधानसभा का सत्र रोजगार के मुद्दे पर गरमाया। मुख्यमंत्री सुखविंद्र सिंह सुक्खू ने आउटसोर्सिंग कम करने के लिए नई नीति बनाने की घोषणा की।

हिमाचल प्रदेश की विधानसभा का हालिया सत्र मंगलवार को रोजगार के मुद्दे पर गरमाया। इस दौरान कांग्रेस की चार साल में चार लाख युवाओं को रोजगार देने की चुनावी गारंटी को लेकर विपक्ष ने सरकार को घेरा। विपक्ष ने आरोप लगाया कि प्रदेश के विभिन्न विभागों में हजारों पद खाली हैं, लेकिन युवाओं को रोजगार मिलता नजर नहीं आ रहा। इस मुद्दे पर प्रश्नकाल के दौरान सत्तापक्ष और विपक्ष के बीच तीखी नोकझोंक हुई। भाजपा ने सरकार पर सदन को गुमराह करने और वास्तविक स्थिति छिपाने का आरोप लगाते हुए वाकआउट कर दिया।

मुख्यमंत्री सुखविंद्र सिंह सुक्खू की घोषणा

मुख्यमंत्री सुखविंद्र सिंह सुक्खू ने सदन में एक महत्वपूर्ण घोषणा करते हुए कहा कि आउटसोर्स व्यवस्था को कम करने के लिए सरकार नई नीति तैयार करेगी। यह नीति न केवल आउटसोर्स कर्मचारियों के हितों का ध्यान रखेगी, बल्कि उनके भविष्य को भी सुनिश्चित करेगी। मुख्यमंत्री ने बताया कि भर्ती में पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए आरक्षित वर्ग के अभ्यर्थियों के लिए 40 प्रतिशत और सामान्य वर्ग के लिए 45 प्रतिशत अंक अनिवार्य किए गए हैं। यह कदम यह सुनिश्चित करेगा कि भर्ती प्रक्रिया में किसी भी प्रकार की भेदभाव या अनियमितता न हो।

कौशल विकास स्टाइपंड में घोटाला

मुख्यमंत्री ने यह भी कहा कि पूर्व सरकार के कार्यकाल में कौशल विकास स्टाइपंड में घोटाले का मामला सामने आया है। उन्होंने बताया कि जहां 15 विद्यार्थियों ने प्रशिक्षण लिया, वहीं 50 के नाम पर स्टाइपंड जारी किया गया। यह गंभीर आरोप दर्शाता है कि किस प्रकार से सरकारी धन का दुरुपयोग हुआ। मुख्यमंत्री ने यह भी कहा कि यदि सरकार इस मामले की जांच शुरू करती है, तो विपक्ष हल्ला करेगा, जो कि राजनीतिक विवाद को और बढ़ा सकता है।

युवाओं के लिए नए अवसर

राज्य सरकार ने स्वरोजगार, उद्यमिता, निजी क्षेत्र और कौशल विकास के माध्यम से युवाओं को नए अवसर उपलब्ध कराने का प्रयास किया है। मुख्यमंत्री ने बताया कि अग्निवीर योजना में जब युवक नहीं गए, तो प्रदेश में 1,350 कांस्टेबल की भर्ती की गई, जबकि एक हजार और पदों पर पुलिस भर्ती प्रक्रिया चल रही है। यह संकेत करता है कि सरकार युवाओं के लिए रोजगार के नए अवसरों को सृजित करने के लिए गंभीर है। जरूरत पड़ने पर भर्तियां भी की जाएंगी, जिससे युवाओं को रोजगार के और अवसर मिल सकें।

इसके अतिरिक्त, राजीव गांधी स्वरोजगार स्टार्टअप योजना के तहत ई-टैक्सी, ई-रिक्शा और इलेक्ट्रिक बसों की खरीद पर सब्सिडी भी दी जा रही है। इस योजना के अंतर्गत अब तक 96 युवाओं को करीब सात करोड़ रुपये की सब्सिडी मिल चुकी है। यह पहल न केवल युवाओं को स्वरोजगार में मदद करती है, बल्कि पर्यावरण के प्रति जागरूकता बढ़ाने में भी सहायक है।

सरकार ने 28 रोजगार मेले और 1,587 कैंपस साक्षात्कार आयोजित किए हैं, जिनके माध्यम से 23 हजार से अधिक युवाओं को निजी क्षेत्र में रोजगार के अवसर उपलब्ध कराए गए हैं। इसके साथ ही, एक लाख से अधिक युवाओं को आजीविका परामर्श व मार्गदर्शन दिया गया है, जबकि 90 हजार से अधिक युवाओं को कौशल विकास भत्ता प्रदान किया गया है। यह आंकड़े दर्शाते हैं कि राज्य सरकार युवाओं के लिए रोजगार सृजन में कितनी सक्रिय है।

राजनीतिक परिप्रेक्ष्य

हालांकि, इस सत्र के दौरान कांग्रेस की चार लाख युवाओं को रोजगार देने की चुनावी गारंटी को लेकर विपक्ष का दबाव लगातार बना रहा। प्रदेश में बेरोजगारी की समस्या एक गंभीर मुद्दा है और इसके लिए सरकार पर लगातार सवाल उठाए जा रहे हैं। विपक्ष का यह आरोप कि सरकार ने रोजगार के अवसरों को बढ़ाने में विफलता दिखाई है, एक राजनीतिक रणनीति का हिस्सा हो सकता है, जिसका उद्देश्य आगामी चुनाव में मतदाताओं को प्रभावित करना है।

इस प्रकार, हिमाचल प्रदेश विधानसभा का यह सत्र न केवल रोजगार के मुद्दे पर चर्चा का केंद्र बना, बल्कि यह भी दर्शाता है कि कैसे राजनीतिक दल एक-दूसरे पर आरोप-प्रत्यारोप करते हैं। यह स्थिति सरकार के लिए एक चुनौती है, क्योंकि उसे न केवल युवा मतदाताओं की आकांक्षाओं को पूरा करना है, बल्कि विपक्ष के आरोपों का भी सामना करना है।

आने वाले समय में, यदि सरकार अपनी योजनाओं को प्रभावी ढंग से लागू करने में सफल रहती है, तो यह न केवल युवाओं के लिए रोजगार के नए अवसर सृजित कर सकती है, बल्कि राजनीतिक स्थिरता भी सुनिश्चित कर सकती है। इसके विपरीत, यदि सरकार अपनी योजनाओं में विफल होती है, तो इससे न केवल युवा मतदाता असंतुष्ट हो सकते हैं, बल्कि यह आगामी चुनावों में सरकार के लिए एक बड़ा राजनीतिक संकट भी उत्पन्न कर सकता है।

हिमाचल प्रदेश की राजनीति में बेरोजगारी एक संवेदनशील मुद्दा है, और सरकार के लिए यह आवश्यक है कि वह न केवल रोजगार के अवसरों को बढ़ाने के लिए ठोस कदम उठाए, बल्कि युवाओं के लिए शिक्षा, कौशल विकास और व्यवसाय के अवसर भी प्रदान करे। विपक्ष द्वारा उठाए गए सवालों का जवाब देने के लिए सरकार को अपनी योजनाओं को स्पष्ट और प्रभावी तरीके से जनता के सामने पेश करना होगा।

राज्य में बेरोजगारी की समस्या का समाधान करने के लिए सरकार को विभिन्न क्षेत्रों में निवेश को बढ़ावा देना होगा। इससे न केवल रोजगार के नए अवसर उत्पन्न होंगे, बल्कि आर्थिक विकास भी होगा। इसके लिए उद्योगों को आकर्षित करने के लिए उपयुक्त नीतियों का निर्माण करना और रोजगार सृजन के लिए आवश्यक बुनियादी ढांचे का विकास करना महत्वपूर्ण है।

इसके अलावा, कौशल विकास पर ध्यान केंद्रित करना भी आवश्यक है, ताकि युवा रोजगार के लिए आवश्यक कौशल प्राप्त कर सकें। यह न केवल युवाओं को रोजगार दिलाने में मदद करेगा, बल्कि राज्य की अर्थव्यवस्था को भी मजबूत करेगा। यदि सरकार इन पहलुओं को ध्यान में रखकर कार्य करती है, तो यह न केवल राजनीतिक स्थिरता को सुनिश्चित करेगा, बल्कि राज्य के विकास में भी सहायक होगा।

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