मौसम की मार: मानसून की बारिश में हीराकुंड डैम लबालब; उत्तर से ओडिशा तक हाहाकार; असम समेत कहां-कितनी जनहानि?

ALN NEWS DESK
एएलएन न्यूज डेस्क
अपडेटेड : Jul 22, 2026, 11:39 AM IST
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देश के कई राज्यों में मानसून ने भारी तबाही मचाई है। असम में बाढ़ से 21 और लोगों की मौत के साथ 5.64 लाख से अधिक लोग प्रभावित हुए हैं।

देश के कई राज्यों में मानसून ने भारी तबाही मचाई है। असम में बाढ़ से 21 और लोगों की मौत के साथ 5.64 लाख से अधिक लोग प्रभावित हुए हैं। जम्मू-कश्मीर, नागालैंड, अरुणाचल प्रदेश, हिमाचल और उत्तराखंड में भी बारिश, बाढ़ और भूस्खलन से जनजीवन बुरी तरह प्रभावित हुआ है। इस वर्ष की मानसून की बारिश ने कई राज्यों में आम जनजीवन को अस्त-व्यस्त कर दिया है, जिससे राहत और बचाव कार्यों की आवश्यकता बढ़ गई है। मानसून का मौसम भारत के लिए एक महत्वपूर्ण समय है, जब कृषि और जलाशयों में पानी की भरपूर उपलब्धता होती है, लेकिन अत्यधिक बारिश के कारण बाढ़ और अन्य प्राकृतिक आपदाएं भी उत्पन्न हो सकती हैं।

बाढ़ में ये जिले सबसे ज्यादा प्रभावित

बाढ़ से प्रभावित जिलों में गोलाघाट, कामरूप, होजाई, डिब्रूगढ़, विश्वनाथ, धेमाजी, शोणितपुर, उदलगुड़ी, नगांव, चराईदेव, कामरूप (मेट्रो), जोरहाट, तिनसुकिया, कार्बी आंगलोंग, लखीमपुर और शिवसागर शामिल हैं। इन जिलों में बाढ़ के पानी ने 44 राजस्व सर्किलों के तहत आने वाले 872 गांवों को डुबो दिया है। इसके अलावा 24,210.35 हेक्टेयर फसल क्षेत्र पूरी तरह जलमग्न हो गया है, जिससे खेती को भारी नुकसान हुआ है। फसलों के नुकसान के कारण किसानों की आर्थिक स्थिति पर भी गहरा असर पड़ा है, जिससे कई परिवारों की आजीविका संकट में पड़ गई है। कई परिवारों ने अपनी सम्पत्ति और आजीविका दोनों को खो दिया है, और उनकी पुनर्वास प्रक्रिया में समय लगेगा।

राहत बचाव कार्य जारी

असम में भारतीय सेना, एनडीआरएफ, एसडीआरएफ और दमकल विभाग सहित कई एजेंसियां राहत और बचाव कार्य चला रही हैं। ऊपरी असम के कुछ हिस्सों में रेल पटरियों पर पानी भरने के कारण दूसरे दिन भी ट्रेन सेवाएं प्रभावित रहीं। पूर्वोत्तर सीमांत रेलवे (NFR) ने कई ट्रेनों को रद्द कर दिया, कुछ को बीच में ही समाप्त कर दिया और कई के मार्ग बदल दिए। रेलवे ने फंसे हुए यात्रियों के लिए विशेष ट्रेनें चलाने की भी घोषणा की है। राहत कार्यों के दौरान, प्रभावित क्षेत्रों में चिकित्सा सुविधाएं और भोजन पहुंचाने के लिए विशेष प्रयास किए जा रहे हैं। इसके अलावा, स्थानीय प्रशासन ने सुरक्षित स्थानों पर जाने के लिए प्रभावित लोगों को सलाह दी है।

जम्मू-कश्मीर में नदियां उफान पर, कई दुकानें बहीं और 23 लोगों की मौत

वहीं जम्मू-कश्मीर के बड़े हिस्सों में मंगलवार को मूसलाधार बारिश हुई, जिससे नदियां और नाले उफान पर आ गए। पानी लोगों के घरों में घुस गया और कई दुकानें तथा वाहन पानी के तेज बहाव में बह गए। कठुआ जिले में एक नदी से दो लोगों को सुरक्षित निकाला गया। पूरे जम्मू क्षेत्र में व्यापक जलभराव दर्ज किया गया है। स्थानीय प्रशासन ने लोगों को सुरक्षित स्थानों पर जाने की सलाह दी है और राहत कार्यों में तेजी लाने के लिए सभी आवश्यक संसाधनों का उपयोग किया जा रहा है। प्रशासन ने प्रभावित क्षेत्रों में चिकित्सा और खाद्य सामग्री की उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिए विशेष टीमों का गठन किया है।

नागालैंड और अरुणाचल प्रदेश में तबाही और नए बाढ़ प्रभावित क्षेत्र

नागालैंड के मोन जिले में लगातार बारिश के कारण आई अचानक बाढ़ और भूस्खलन में मरने वालों की संख्या बढ़कर नौ हो गई है। मंगलवार को पांच और शव बरामद किए गए, जबकि चार लोग अभी भी लापता हैं और उनके लिए खोज तथा बचाव अभियान जारी है। राज्य सरकार की रिपोर्ट के अनुसार, लगातार हो रही बारिश ने सामान्य जनजीवन को अस्त-व्यस्त कर दिया है। इससे बुनियादी ढांचे, कृषि भूमि और सार्वजनिक सुविधाओं को नुकसान पहुंचा है। अधिकारियों ने चेतावनी दी है कि नुकसान का दायरा और बढ़ सकता है। नागालैंड राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण की रिपोर्ट के अनुसार, राज्यभर में करीब 7,460 लोग प्रभावित हुए हैं और 10 जिलों के 93 गांवों में 64 आवासीय मकान क्षतिग्रस्त हुए हैं।

मानसून की स्थिति और भविष्य की आशंकाएं

इस वर्ष मानसून की स्थिति ने कई राज्यों में गंभीर समस्याएं उत्पन्न की हैं। मौसम विभाग ने भविष्यवाणी की है कि अगले कुछ दिनों में और बारिश होने की संभावना है, जिससे बाढ़ की स्थिति और बिगड़ सकती है। इससे प्रभावित क्षेत्रों में जनजीवन और अधिक प्रभावित हो सकता है। विशेषज्ञों का मानना है कि जलवायु परिवर्तन के कारण इस तरह की चरम मौसम की घटनाएं बढ़ रही हैं, जिससे बाढ़ और भूस्खलन की घटनाएं भी बढ़ रही हैं। जलवायु परिवर्तन के प्रभावों को देखते हुए, भविष्य में इस प्रकार की आपदाओं की आवृत्ति और तीव्रता बढ़ने की संभावना है।

सरकारी प्रतिक्रिया और राहत प्रयास

सरकार ने आपातकालीन स्थिति से निपटने के लिए राहत कार्यों में तेजी लाने का आश्वासन दिया है। प्रभावित क्षेत्रों में त्वरित राहत सामग्री पहुंचाई जा रही है, जिसमें खाद्य सामग्री, दवाएं और अन्य आवश्यक वस्तुएं शामिल हैं। इसके अलावा, स्थानीय प्रशासन ने प्रभावित लोगों के लिए अस्थायी शिविरों की व्यवस्था की है, जहां उन्हें भोजन और चिकित्सा सहायता मिल रही है। राहत कार्यों के दौरान, स्थानीय प्रशासन ने यह भी सुनिश्चित किया है कि प्रभावित क्षेत्रों में आवश्यक सेवाएं जैसे कि बिजली, पानी और संचार प्रणाली बहाल की जाएं।

स्थानीय समुदायों की भूमिका

स्थानीय समुदायों ने भी राहत कार्यों में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। कई स्वयंसेवी संगठन और स्थानीय लोग अपनी ओर से राहत सामग्री एकत्र कर रहे हैं और प्रभावित लोगों की सहायता कर रहे हैं। इस प्रकार के सामुदायिक प्रयासों ने आपदा के समय में एकजुटता का उदाहरण प्रस्तुत किया है। स्थानीय लोगों ने एक-दूसरे की मदद करने के लिए अपने संसाधनों का उपयोग किया है, जिससे राहत कार्यों में तेजी आई है। यह सामुदायिक सहयोग न केवल राहत कार्यों को आसान बनाता है, बल्कि आपदा के समय में सामाजिक एकजुटता को भी बढ़ावा देता है।

निष्कर्ष

इस वर्ष के मानसून ने देश के कई हिस्सों में तबाही मचाई है, जिससे जनजीवन बुरी तरह प्रभावित हुआ है। बाढ़, भूस्खलन और अन्य प्राकृतिक आपदाओं के कारण लोगों की जानें गई हैं और लाखों लोग प्रभावित हुए हैं। सरकार और स्थानीय प्रशासन राहत कार्यों में जुटे हुए हैं, लेकिन स्थिति की गंभीरता को देखते हुए आगे की चुनौतियां बनी हुई हैं। भविष्य में ऐसे आपदाओं से निपटने के लिए अधिक मजबूत और प्रभावी उपायों की आवश्यकता है, ताकि जनहानि को कम किया जा सके और प्रभावित समुदायों को जल्दी से पुनर्वासित किया जा सके। जलवायु परिवर्तन के प्रभावों को देखते हुए, दीर्घकालिक योजनाएं और नीतियां बनाना आवश्यक है, ताकि इस प्रकार के प्राकृतिक आपदाओं से निपटने के लिए एक समग्र दृष्टिकोण अपनाया जा सके।

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